राजनीति

JPSC-JSSC विवाद में बाबूलाल मरांडी ने कार्रवाई की मांग की

JPSC-JSSC विवाद: वार्ता से पहले बाबूलाल मरांडी के तीखे सवाल, नीरज सिन्हा-प्रशांत कुमार पर कार्रवाई की मांग

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
JPSC JSSC विवाद को लेकर बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया
JPSC-JSSC विवाद पर बाबूलाल मरांडी ने सरकार से पूछे सवाल

रांची। JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार दोपहर 2 बजे वार्ता प्रस्तावित है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल पूछते हुए कथित गड़बड़ियों से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

प्रशांत कुमार और नीरज सिन्हा पर कार्रवाई का सवाल

 

 

बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL विवाद का जिक्र करते हुए प्रभारी चेयरमैन IAS प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर सरकार परीक्षा रद्द करने को लेकर कोर्ट के आदेश की व्याख्या के कारण मजबूर है, तो अधिकारियों को पद से हटाने, FIR दर्ज कराने और जांच शुरू करने में क्या परेशानी है।

 

उन्होंने JSSC के पूर्व अध्यक्ष नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर भी सरकार से जवाब मांगा।

 

‘दो मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों?’

 

 

बाबूलाल मरांडी ने JPSC मामले में इस्तीफा देने वाले ख्यांगते की गिरफ्तारी और JSSC मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की तुलना की। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।

 

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अधिकारियों के IAS और IPS कैडर से होने के कारण कार्रवाई में अंतर किया जा रहा है।

 

वायरल नामों की जांच और FIR की मांग

 

 

नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा विवाद में कथित तौर पर घूस देकर नौकरी हासिल करने से जुड़े वायरल हो रहे 10-12 नामों की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर उन्हें पद से हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज की जाए।

 

 

CBI जांच की मांग दोहराई

 

 

बाबूलाल मरांडी ने JPSC और JSSC से जुड़े विवादित मामलों की जांच CBI से कराने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ आंदोलन खत्म कराने की कोशिश करने के बजाय छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

 

 

आज दोपहर 2 बजे सरकार-छात्र वार्ता

 

 

JPSC-JSSC विवाद को लेकर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच सोमवार दोपहर 2 बजे वार्ता होनी है। सरकार की ओर से मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल छात्रों से बातचीत करेगा। इस बैठक में छात्रों की मांगों और परीक्षा विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

 

इससे पहले रविवार को आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन कर विरोध जताया था। ऐसे में आज होने वाली वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में नया राजनीतिक विवाद, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के बाद बढ़ी तकरार

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने गीत के दौरान इसे रोकने के संकेत दिए, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ था और नेताओं की बातचीत का गीत रोकने से कोई संबंध नहीं था।   बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया अपमान का आरोप   बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से इशारे किए गए। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत के प्रति अनादर बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की।   बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वीडियो भी साझा किए गए, जिनमें कांग्रेस नेताओं के बीच बातचीत और इशारे दिखाई देने का दावा किया गया। इसी वीडियो को आधार बनाकर बीजेपी ने कांग्रेस पर सवाल उठाए।   कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत   कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए गए और किसी ने इसे रोकने का निर्देश नहीं दिया। कांग्रेस के अनुसार, वीडियो में सोनिया गांधी जिस समय इशारा करती दिखाई दे रही हैं, उस समय वह पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने की बात कर रही थीं, क्योंकि खरगे काफी देर से खड़े थे।   पूरे संस्करण के गायन पर भी शुरू हुई बहस   विवाद केवल नेताओं के इशारों तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया था। पार्टी ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद सार्वजनिक आयोजनों में गीत के शुरुआती दो अंतरे गाने की परंपरा बनी थी।   वहीं बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतीक है और इसके पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट होना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।   राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल   15 अगस्त के कार्यक्रम के बाद यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक पहुंच गया है। बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे बीजेपी द्वारा राजनीतिक मुद्दा बनाए जाने की कोशिश बता रही है। इस विवाद ने स्वतंत्रता दिवस के बाद दोनों प्रमुख दलों के बीच राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर एक और राजनीतिक टकराव को जन्म दिया है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक हुई बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।   जनकल्याण और ग्रामीण विकास पर बातचीत     बैठक में उत्तर प्रदेश में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। राज्य के विकास से जुड़े अन्य मुद्दों को भी केंद्रीय स्तर पर उठाया गया।     यूपी की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा     सूत्रों के मुताबिक, बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते सामाजिक समीकरणों पर भी विचार-विमर्श हुआ। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।     मुलाकात को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल     अमित शाह और केशव प्रसाद मौर्य की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से बैठक के बाद किसी बड़े राजनीतिक फैसले या संगठनात्मक बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

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Jharkhand students protesting over JPSC-JSSC exam issues and demanding Rahul Gandhi’s intervention
झारखंड

Jharkhand Student Protest: छात्रों का ऐलान- राहुल गांधी के झारखंड आने तक जारी रहेगा आंदोलन

kalpana अगस्त 11, 2026 0

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