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US Announces Israel-Lebanon Peace Framework

इजरायल-लेबनान के बीच शांति की नई पहल, अमेरिका ने कराया समझौता; हिज्बुल्लाह ने दी गृहयुद्ध जैसी स्थिति की चेतावनी

Deepshikha जून 27, 2026 0
Israeli and Lebanese flags with diplomatic officials after the announcement of a US-mediated peace framework aimed at restoring security along the Israel-Lebanon border.
Israel-Lebanon Peace Framework Announced with US Mediation

 

यरुशलम/बेरूत: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच एक महत्वपूर्ण फ्रेमवर्क समझौता तैयार किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बहाल करना है। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि इसे लागू करने की कोशिश की गई तो लेबनान गृहयुद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।

अमेरिका ने किया समझौते का ऐलान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को इस फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह इजरायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति की दिशा में पहला बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने पूरे समझौते में मध्यस्थ और सहयोगी की भूमिका निभाई है।

इस समझौते पर लेबनान की राजदूत नादा हमादेह, इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।

क्या हैं समझौते की प्रमुख शर्तें?

समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू करने और हिज्बुल्लाह द्वारा सभी तरह की सैन्य गतिविधियां एवं रॉकेट हमले रोकने की शर्त रखी गई है। इसके साथ ही संगठन को दक्षिणी लेबनान से पीछे हटना होगा।

जिन इलाकों से इजरायली सेना और हिज्बुल्लाह पीछे हटेंगे, वहां लेबनानी सेना की तैनाती की जाएगी ताकि सीमा क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की जा सके।

अमेरिका करेगा निगरानी, लेबनान को मिलेगी आर्थिक सहायता

मार्को रुबियो ने बताया कि समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी अमेरिका की अगुवाई में बनाए गए त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह द्वारा की जाएगी।

इसके अलावा अमेरिका ने लेबनान के लिए तत्काल 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए 3 करोड़ डॉलर से अधिक की अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

दक्षिणी लेबनान में बनाए जाएंगे दो पायलट जोन

समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में दो पायलट सुरक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों से इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेगी और उनकी जगह लेबनानी सेना तैनात होगी।

इजरायल ने स्पष्ट किया है कि सेना की पूरी वापसी तभी होगी जब हिज्बुल्लाह अपने हथियार छोड़ेगा और उसका सैन्य ढांचा पूरी तरह समाप्त होगा।

लेबनान ने बताया संप्रभुता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम

अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे लेबनान की संप्रभुता मजबूत होगी, सीमा पर संघर्ष समाप्त होगा और विस्थापित नागरिक अपने घर लौट सकेंगे।

उन्होंने इस पहल का श्रेय लेबनान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के सहयोग को दिया।

नेतन्याहू बोले- हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर निर्भर करेगी आगे की कार्रवाई

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि लेबनानी सेना जल्द ही सीमावर्ती इलाकों का नियंत्रण संभालेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना की आगे की वापसी पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनानी सेना हिज्बुल्लाह को हथियार छोड़ने और उसके सैन्य ढांचे को खत्म करने में कितनी सफल रहती है।

इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर ने भी इस समझौते को "परफॉर्मेंस आधारित" बताते हुए कहा कि इसकी सफलता पूरी तरह जमीनी स्तर पर लागू होने वाले कदमों पर निर्भर करेगी।

हिज्बुल्लाह ने किया समझौते का विरोध

समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इसका कड़ा विरोध किया। संगठन के वरिष्ठ सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि यदि लेबनानी सरकार अमेरिकी समर्थन के साथ इस समझौते को लागू करने की कोशिश करती है तो देश गृहयुद्ध जैसी स्थिति में पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह किसी भी कीमत पर अपने हथियार नहीं छोड़ेगा और इस दिशा में किए जाने वाले हर प्रयास का विरोध करेगा।

हजारों लोगों की जान ले चुका है संघर्ष

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच मौजूदा संघर्ष में अब तक भारी जनहानि हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सैन्य कार्रवाई में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

वहीं संघर्ष के दौरान 37 इजरायली सैनिकों के भी मारे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, हालांकि हिज्बुल्लाह के विरोध के चलते इसके सफल क्रियान्वयन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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अमेरिका में भारतवंशी किशोर पर मां और भाई की हत्या का आरोप
AI से पूछकर परिवार की हत्या का आरोप: अमेरिका में भारतवंशी किशोर ने मां और भाई को मारा

वॉशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका के मैसाचुसेट्स में 17 वर्षीय भारतवंशी किशोर अर्जुन अरविंद पर अपनी मां सुधा वेंकटेशन और 14 वर्षीय छोटे भाई सिद्धार्थ अरविंद की हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने उसे वेलैंड के एक पार्किंग स्थल से गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उसकी इंटरनेट और चैटजीपीटी सर्च हिस्ट्री सामने आई, जिसमें परिवार को नुकसान पहुंचाने और हत्या से जुड़े विषयों की तलाश किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि चैटजीपीटी ने आरोपी को हत्या का तरीका, हथियार या पूरी योजना उपलब्ध कराई थी।   घर में मिले मां और भाई के शव     घटना का पता मंगलवार शाम चला। एक शिक्षिका पढ़ाने के लिए घर पहुंचीं, लेकिन काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद उन्होंने अर्जुन के पिता को सूचना दी। पिता ने भी पत्नी और बेटे से संपर्क नहीं होने पर पुलिस को जानकारी दी।   पुलिस जब घर पहुंची तो बेसमेंट में 45 वर्षीय सुधा वेंकटेशन का शव मिला, जबकि पहली मंजिल पर 14 वर्षीय सिद्धार्थ अरविंद मृत मिला। इसके बाद पुलिस ने अर्जुन की तलाश शुरू की और उसे वेलैंड के एक पार्किंग स्थल से गिरफ्तार कर लिया।   चैटजीपीटी और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री में क्या मिला?     जांच के दौरान सामने आया कि अर्जुन इंटरनेट और चैटजीपीटी पर परिवार को नुकसान पहुंचाने और हत्या जैसे विषयों से जुड़ी जानकारी तलाश रहा था। उसने एआई से डरावनी और रहस्यमयी कहानियां बनाने में भी मदद मांगी थी।   इन कहानियों में ऐसे किरदारों का जिक्र था जो अपने ही परिवार के सदस्यों की हत्या करते हैं। पुलिस के लिए यह ऑनलाइन गतिविधियां जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हैं। हालांकि, केवल सर्च हिस्ट्री से यह साबित नहीं होता कि एआई ने हत्या के लिए निर्देश दिए या आरोपी को घटना की योजना बनाने में मदद की।   किशोर पर कई आरोप     अर्जुन पर अपनी मां और भाई की हत्या के दो मामलों के अलावा परिवार पर हमला और मारपीट से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। उस पर अपनी मां की कार बिना अनुमति लेकर फरार होने का आरोप भी है।   पुलिस अब मामले में मिले भौतिक साक्ष्यों, ऑनलाइन गतिविधियों और अन्य परिस्थितियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।   AI की भूमिका पर अभी निष्कर्ष नहीं     इस मामले में चैटजीपीटी की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन जांच एजेंसियों ने अभी ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है कि एआई ने किशोर को हत्या करने का तरीका या योजना बताई थी।   फिलहाल इतना सामने आया है कि आरोपी की ऑनलाइन सर्च हिस्ट्री में परिवार को नुकसान पहुंचाने और हत्या से जुड़े विषय मौजूद थे। आगे की जांच और साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि इन ऑनलाइन गतिविधियों और कथित हत्याओं के बीच कितना सीधा संबंध था।

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तेहरान, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह दावा करने के बाद कि अमेरिका का इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर “पूर्ण नियंत्रण” है, ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि हॉर्मुज पर नियंत्रण अब भी ईरान के पास है।   ट्रंप के दावे पर ईरान का पलटवार     ईरान के नवनियुक्त बसीज प्रमुख हुसैन ताएब ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है। ईरानी सैन्य कमान ने भी अमेरिका के सामान्य समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के दावे को खारिज किया है।   ईरान का कहना है कि किसी भी जहाज को जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए उसकी अनुमति जरूरी है। दूसरी ओर, अमेरिका का कहना है कि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य मौजूदगी के कारण वह समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बनाए हुए है।   अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बढ़ाई     हॉर्मुज को लेकर दोनों देशों के दावों के बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना इस नाकेबंदी को लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम है।   वहीं, ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई को अपने खिलाफ दबाव बढ़ाने की कोशिश बताया है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए चल रही बातचीत में भी अभी तक कोई निर्णायक समाधान सामने नहीं आया है।   वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ी चिंता     हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय से जारी तनाव के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.7 प्रतिशत गिरकर 87.44 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, हालांकि बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम बना हुआ है।     अमेरिका-ईरान टकराव से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता     हॉर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे बिल्कुल विपरीत हैं। ट्रंप अमेरिका के नियंत्रण की बात कर रहे हैं, जबकि ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य उसके नियंत्रण में है। ऐसे में आने वाले दिनों में समुद्री यातायात, तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।  

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बांग्लादेश में नए राष्ट्रपति की दौड़ तेज, BNP ने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को बनाया उम्मीदवार

ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में नए राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने 13 अगस्त को उनका नामांकन पत्र चुनाव आयोग के समक्ष जमा कर दिया।   20 अगस्त को होगा राष्ट्रपति का चुनाव   बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव के लिए 20 अगस्त 2026 को संसद में मतदान प्रस्तावित है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 16 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच होगी। जरूरत पड़ने पर सांसद मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव करेंगे।   फखरुल का राष्ट्रपति बनना लगभग तय   BNP के पास संसद में मजबूत बहुमत है। ऐसे में 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के देश के 23वें राष्ट्रपति बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, चुनाव पूरा होने तक उन्हें निर्वाचित राष्ट्रपति कहना सही नहीं होगा।   नामांकन के बाद पार्टी पदों से दिया इस्तीफा   राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मिर्जा फखरुल ने BNP महासचिव और नेशनल स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति चुने जाने की स्थिति में उन्हें सांसद और मंत्री पद भी छोड़ना होगा।   पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद खाली हुआ पद   बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। फिलहाल संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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