पुराने वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स उनके पुराने और हालिया बयानों की तुलना कर रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो कब का है और किस संदर्भ में बनाया गया था, इसे समझना भी जरूरी है। पुराने बयान को वर्तमान राजनीतिक विचारों के साथ जोड़कर देखने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
वायरल वीडियो में एक पत्रकार कंगना से उनके लिए पाकिस्तान से लड़का तलाशने की बात करती नजर आती हैं। इसके जवाब में कंगना ने शादी के लिए 30 की उम्र के आसपास के व्यक्ति को पसंद करने की बात कही थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वह व्यक्ति उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता हो, तब भी उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी। कंगना ने उस बातचीत में सामान्य पारिवारिक जीवन जीने की इच्छा जताते हुए अपने खाना बनाने के शौक का भी जिक्र किया था।
उन्होंने बताया था कि वह चिकन कोरमा और चिकन मखनी जैसी डिश बना सकती हैं और भारतीय तथा मुगलई खाना बनाना उन्हें आता है।
इस वीडियो के दोबारा सामने आने की टाइमिंग ने इसे खास बना दिया है। कंगना ने हाल ही में एक वीडियो में खुद को ‘मॉडरेट हिंदू’ बताते हुए कहा था कि वह अब आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा को अपनाना चाहती हैं और एक ‘जागृत हिंदू’ बनना चाहती हैं।
इसी बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनका पुराना वीडियो सामने लाकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ लोगों ने उनके पुराने बयान और मौजूदा राजनीतिक रुख के बीच विरोधाभास बताया, जबकि कुछ का कहना है कि किसी व्यक्ति के पुराने निजी विचारों को वर्षों बाद उसके वर्तमान राजनीतिक विचारों के खिलाफ इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
कंगना का ताजा विवाद अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को लेकर दिए गए उनके बयान से भी जुड़ा है। कंगना ने बिना नाम लिए फिल्म इंडस्ट्री की कुछ महिलाओं के राजनीतिक और धार्मिक विचारों पर टिप्पणी की थी।
उन्होंने कहा था कि कुछ हिंदू महिलाएं धर्म और राजनीति के मामले में खुद को तटस्थ रखती हैं, लेकिन मुस्लिम व्यक्ति से संबंध या शादी के बाद उनकी राजनीतिक सोच बदल जाती है। इसी टिप्पणी को सोशल मीडिया यूजर्स ने सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल से जोड़कर देखा।
इसके बाद कंगना के पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर दोबारा साझा किया जाने लगा।
यह इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति के पुराने बयान को उसके वर्तमान विचारों के संदर्भ में देखना स्वाभाविक है, लेकिन किसी पुराने निजी या मजाकिया बातचीत को वर्तमान राजनीतिक विचारधारा का अंतिम प्रमाण मानना भी सावधानी की मांग करता है।
कंगना के पुराने वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना और सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनके पुराने बयान और वर्तमान राजनीतिक रुख के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष दर्शकों और मतदाताओं पर छोड़ना अधिक उचित होगा।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक विचारधारा, निजी जीवन और सार्वजनिक बयानों के बीच संबंध को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: असम में भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए देशभर से मदद के हाथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाबी गायक और गीतकार गुरु रंधावा ने भी राहत कार्य में योगदान दिया है। उन्होंने असम बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। गुरु रंधावा ने यह राशि असम के यूट्यूबर और डिजिटल इन्फ्लुएंसर डिंपू बरुआ के ‘हेलो लाइफ फाउंडेशन’ के जरिए उपलब्ध कराई है। इसका उद्देश्य राहत सामग्री और जरूरी मदद को प्रभावित लोगों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना है। डिंपू बरुआ के फाउंडेशन के जरिए पहुंचाई जाएगी मदद डिंपू बरुआ इन दिनों ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जमीनी स्तर पर राहत अभियान चला रहे हैं। उनका ‘हेलो लाइफ फाउंडेशन’ स्थानीय स्तर पर प्रभावित परिवारों तक भोजन, कपड़े, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, फाउंडेशन को लोगों से मिले सहयोग के जरिए 16.64 लाख रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है। संस्था अगस्त के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों को सीधे सहायता उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। असम में बाढ़ से भारी नुकसान असम के ऊपरी इलाकों में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से अब तक 85 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 1.35 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है, जहां 55 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। इसके अलावा चराइदेव में लगभग 40 हजार और जोरहाट में 22 हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण कई परिवारों के सामने भोजन, सुरक्षित आवास, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हुआ है। ऐसे समय में सरकारी एजेंसियों के साथ सामाजिक संगठनों और आम लोगों की मदद भी राहत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। रंधावा ने लोगों से मदद की अपील की गुरु रंधावा ने असम के हालात को बेहद पीड़ादायक बताते हुए लोगों से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि बचाव दल और प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में समाज के हर वर्ग का सहयोग जरूरी है। रंधावा का यह योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। उन्होंने लोगों का ध्यान असम में जारी मानवीय संकट की ओर खींचते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील भी की है। पंजाब बाढ़ के दौरान भी कर चुके हैं मदद गुरु रंधावा इससे पहले भी प्राकृतिक आपदा के समय राहत कार्यों में योगदान दे चुके हैं। वर्ष 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने डेरा बाबा नानक और धारोवाली में राहत शिविरों के जरिए प्रभावित लोगों की मदद की थी। बताया गया था कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों में मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने, क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण में आर्थिक मदद देने और किसानों को खेती दोबारा शुरू करने के लिए गेहूं के बीज उपलब्ध कराने में सहयोग किया था। असम में उनकी ताजा पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास के लिए लगातार बाहरी सहयोग की जरूरत है। गुरु रंधावा की 5 लाख रुपये की सहायता इसी राहत अभियान में एक योगदान है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अगस्त के पहले सप्ताह में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मनोरंजन का भरपूर तड़का देखने को मिलेगा। इस सप्ताह दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म 'मैं वापस आऊंगा', युद्ध पर आधारित वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' और कई भारतीय व अंतरराष्ट्रीय फिल्में-सीरीज दर्शकों के लिए रिलीज होने जा रही हैं। 'मैं वापस आऊंगा' और 'ऑपरेशन सफेद सागर' पर रहेगी नजर इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी 'मैं वापस आऊंगा', जिसमें दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना मुख्य भूमिका में हैं, 7 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। वहीं, 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक अभियान पर आधारित वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' भी 7 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। इसमें जिमी शेरगिल, सिद्धार्थ, मिहिर आहूजा और अभय वर्मा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। 'उयिर' और विदेशी सीरीज भी होंगी स्ट्रीम तमिल क्राइम-ड्रामा फिल्म 'उयिर' 4 अगस्त से जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध होगी। यह एक ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर की सच्ची घटनाओं से प्रेरित जांच की कहानी है। वहीं, लोकप्रिय अमेरिकी टीन ड्रामा 'माय लाइफ विद द वाल्टर बॉयज' का तीसरा सीजन 6 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगा। इसके अलावा अमेरिकी ड्रामा सीरीज 'स्टर्लिंग पॉइंट' 5 अगस्त से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होगी। 'एमटीवी हसल 5' के साथ लौटेगा रैप का रोमांच रैप और हिप-हॉप रियलिटी शो 'एमटीवी हसल' भी नए सीजन के साथ वापसी कर रहा है। 'एमटीवी हसल 5' 8 अगस्त से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम होगा। इस बार शो में नए रैप टैलेंट की खोज के साथ सिंगर-रैपर बादशाह एक बार फिर 'रैप सुप्रीमो' की भूमिका में नजर आएंगे।
पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के लोकप्रिय सिंगर और रैपर करण औजला इन दिनों अपने म्यूजिक के अलावा एक खास वजह से भी चर्चा में हैं। 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के हालिया एपिसोड में उन्होंने एक कंटेस्टेंट और उसकी पत्नी की कहानी सुनने के बाद ऐसा कदम उठाया, जिसने शो में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया यूजर्स का भी ध्यान खींच लिया। करण औजला ने कंटेस्टेंट विजेंद्र रजक और उनकी पत्नी को मालदीव ट्रिप के टिकट स्पॉन्सर करने की पेशकश की। कपल की कहानी सुनने के बाद करण का यह जेस्चर फैंस को काफी पसंद आया और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ होने लगी। व्हील स्टंट से प्रभावित हुए जज 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के इस एपिसोड में करण औजला के साथ समय रैना, तन्मय भट, गुरलीन पन्नू और राहुल दुआ भी पैनल का हिस्सा थे। शो में विजेंद्र रजक ने व्हील स्टंट परफॉर्मेंस पेश किया, जिसने जजों को प्रभावित किया। परफॉर्मेंस के बाद बातचीत के दौरान विजेंद्र की पत्नी भी मंच पर आईं। इसी दौरान दोनों ने अपनी निजी जिंदगी और शादी से जुड़ी कहानी साझा की। परिवार के खिलाफ जाकर की शादी कपल ने बताया कि उनके रिश्ते से परिवार खुश नहीं था। ऐसे में दोनों ने घर से भागकर शादी करने का फैसला किया। विजेंद्र के मुताबिक, दोनों की मुलाकात के बाद करीब एक महीने तक डेटिंग हुई और इसके बाद उनकी पत्नी ने शादी करने की इच्छा जाहिर की। विजेंद्र ने बताया कि उस समय आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टनर का साथ दिया और दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद उन्हें पत्नी के परिवार की ओर से पुलिस शिकायत का सामना भी करना पड़ा। कपल की यह कहानी सुनकर शो में मौजूद पैनलिस्टों ने उनसे उनकी जिंदगी और भविष्य के सपनों के बारे में बात की। मालदीव जाने की इच्छा सुनकर करण ने किया बड़ा ऐलान बातचीत के दौरान जब समय रैना ने विजेंद्र से पूछा कि वह जीवन में क्या करना चाहते हैं, तो उन्होंने मालदीव घूमने की इच्छा जाहिर की। यह सुनते ही करण औजला ने कपल को मालदीव भेजने की पेशकश कर दी। उन्होंने कहा कि अगर मालदीव जाकर उन्हें खुशी मिलेगी, तो वह उनके टिकट स्पॉन्सर करेंगे। करण के इस ऐलान ने शो का माहौल बदल दिया। समय रैना ने भी उनके इस जेस्चर को प्यारा बताया। वहीं करण ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह सब उन्हें अपनी पत्नी की वजह से मिल रहा है। विजेंद्र ने सोशल मीडिया पर किया शुक्रिया शो के बाद विजेंद्र ने सोशल मीडिया पर एपिसोड का वीडियो शेयर करते हुए करण औजला का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में मिला प्लेटफॉर्म और अनुभव उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा। विजेंद्र ने करण को उनकी परफॉर्मेंस की तारीफ करने और मालदीव ट्रिप स्पॉन्सर करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने शो के अन्य पैनलिस्टों के प्रति भी प्यार और समर्थन के लिए आभार जताया। फैंस ने करण औजला की जमकर तारीफ की करण के इस जेस्चर को सोशल मीडिया यूजर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई फैंस ने कहा कि करण ने इस कदम से उनके दिल में अपनी जगह और मजबूत कर ली है। कुछ यूजर्स ने उन्हें नेकदिल इंसान बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि उनकी पहचान सिर्फ एक सफल पंजाबी कलाकार के तौर पर नहीं है, बल्कि ऐसे मौके उनकी मानवीय सोच को भी सामने लाते हैं। एक यूजर ने कहा कि करण औजला ने एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया। वहीं कुछ अन्य प्रशंसकों ने भी उनके इस फैसले की सराहना की। कौन हैं करण औजला? करण औजला पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित सिंगर, रैपर और सॉन्गराइटर हैं। 'Softly', 'Tauba Tauba', 'Admiring You', 'Winning Speech' और '52 Bars' जैसे गानों से उन्हें भारत के साथ-साथ दुनियाभर में लोकप्रियता मिली है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके गानों को भारत के अलावा विदेशों में भी बड़ी संख्या में सुना जाता है। ऐसे में 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में एक कपल की इच्छा पूरी करने का उनका फैसला अब उनकी फैन फॉलोइंग के बीच एक अलग वजह से चर्चा में है। करण का जेस्चर क्यों खास है? सेलिब्रिटी की ओर से किसी जरूरतमंद या आम व्यक्ति की मदद करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन करण औजला के इस मामले में खास बात यह रही कि उन्होंने कपल की कहानी सुनी, उनकी इच्छा जानी और उसी वक्त उनकी मदद करने की पेशकश कर दी। हालांकि, इस तरह के किसी भी वायरल घटनाक्रम को शो में सामने आई जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। फिलहाल इतना जरूर है कि करण का यह अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आया है।