राष्ट्रीय

CJP Stands Firm, Says Protest Will Continue Until Dharmendra Pradhan Resigns

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

kalpana जुलाई 24, 2026 0
CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar
CJP Vows to Continue Jantar Mantar Protest Over NEET Row

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन का अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा।

NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में छात्र पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने साहस और त्याग से देश का ध्यान छात्रों के मुद्दों की ओर आकर्षित किया।

उन्होंने लिखा कि देश के लिए सोनम वांगचुक का जीवन बेहद महत्वपूर्ण है और उनके अनशन खत्म होने से राहत मिली है।

हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया,

"CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।"

'Charging up...' पोस्ट से बढ़ी चर्चा

अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में "Charging up..." लिखते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में ड्रिप लगी हुई दिखाई दे रही है। इस पोस्ट को आंदोलन जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन

सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद यह फैसला लिया गया।

सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है।

CJP अपनी मांगों पर कायम

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद CJP का कहना है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

kalpana

राष्ट्रीय

View more
Jantar Mantar internet shutdown
जंतर-मंतर इंटरनेट बंदी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई आज, याचिका पर कोर्ट की नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई प्रस्तावित है। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत जंतर-मंतर के आसपास करीब 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद की गई थी।   याचिका में इंटरनेट बंदी को बताया गया अधिकारों का मुद्दा   याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इंटरनेट बंद करना नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना तक पहुंच और डिजिटल अधिकारों को प्रभावित करता है। उन्होंने कोर्ट से इस कार्रवाई की वैधता और जरूरत की समीक्षा करने की मांग की है।   सरकार का पक्ष- सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला   प्रशासन का कहना है कि जंतर-मंतर पर बढ़ते तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इंटरनेट सेवा पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम अफवाहों और संभावित अशांति को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया।   प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंदी पर उठे सवाल   इंटरनेट बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी को लेकर अदालत में चुनौती दी गई है।   अब सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर   इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या कानून-व्यवस्था के लिए इंटरनेट बंद करना अनुपातिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप था या नहीं। हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
DRDO Kusha Missile

DRDO ने ‘कुशा’ एयर डिफेंस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया

Bikramjit Singh Arrest

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ी कार्रवाई, 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े वांछित आरोपी समेत अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार

Uttarakhand High Court

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 7 हजार पेड़ों की कटाई पर मांगा जवाब, सड़क परियोजना को लेकर पर्यावरण चिंता बढ़ी

Narendra Modi
पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी, पीएम मोदी बोले- अगले सप्ताह संसद में लाया जाएगा नया विधेयक

नई दिल्ली, एजेंसियां। परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर बढ़ते विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए और कड़ा कानून लाने जा रही है, जिसके लिए प्रस्तावित विधेयक को जल्द संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा होगी और मंजूरी के बाद अगले सप्ताह संसद में विधेयक लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।   फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा का प्रावधान   प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था करने की बात कही। प्रस्तावित कानून में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सख्त दंड के प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना है।   छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा कदम   पेपर लीक मुद्दे को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी चल रही है। सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Delhi Police

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, छात्र आंदोलन के बीच पाकिस्तान से जुड़े 480 सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने के बाद छात्रों का आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया

अभिजीत दीपके का नया संदेश, बोले- सोनम वांगचुक का अनशन खत्म हुआ लेकिन छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी

Sonam Wangchuk addresses supporters after ending his 26-day hunger strike over NEET reforms

अनशन खत्म करने के बाद बोले सोनम वांगचुक- 'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, अब जवाबदेही की बारी'

CJP founder Abhijeet Deepke addresses supporters during the ongoing protest at Jantar Mantar
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, अभिजीत दीपके बोले- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रहेगा जारी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन का अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। NEET प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में छात्र पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अभिजीत दीपके ने क्या कहा? CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने अपने साहस और त्याग से देश का ध्यान छात्रों के मुद्दों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि देश के लिए सोनम वांगचुक का जीवन बेहद महत्वपूर्ण है और उनके अनशन खत्म होने से राहत मिली है। हालांकि दीपके ने स्पष्ट किया, "CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन अभी खत्म नहीं होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।" 'Charging up...' पोस्ट से बढ़ी चर्चा अभिजीत दीपके ने एक अन्य पोस्ट में "Charging up..." लिखते हुए एक तस्वीर साझा की, जिसमें एक व्यक्ति के हाथ में ड्रिप लगी हुई दिखाई दे रही है। इस पोस्ट को आंदोलन जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) देर रात 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद यह फैसला लिया गया। सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा करने और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को राहत देने जैसे मुद्दों पर विचार करने का भरोसा दिया है। CJP अपनी मांगों पर कायम सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद CJP का कहना है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Rahul Gandhi reacts to Prime Minister Narendra Modi's video message on the NEET paper leak controversy

पीएम मोदी के वीडियो संदेश से नहीं बदला राहुल गांधी का रुख, बोले- धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करो

Security tightened near Jantar Mantar as CJP protest continues and several Delhi Metro stations remain closed

CJP Protest Live: 17 मेट्रो स्टेशन बंद, आज सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हो सकती है बातचीत

Prime Minister Narendra Modi addresses students through a video message on paper leak reforms and stricter laws

छात्रों के नाम PM मोदी का वीडियो संदेश, बोले- पेपर लीक पर कैबिनेट में होंगे और सख्त फैसले

0 Comments

Top week

Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?