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Maharashtra TET Paper Leak Mastermind Arrested

महाराष्ट्र TET पेपर लीक का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, बिहार से दबोचा गया बिजेंद्र गुप्ता

kalpana जुलाई 25, 2026 0
Maharashtra TET paper leak mastermind Bijendra Gupta arrested by police in Bihar
Maharashtra TET Paper Leak Mastermind Bijendra Gupta Arrested

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, उसने अपने साथी सोनू सिंह के साथ मिलकर प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को लालच देकर प्रश्नपत्र हासिल किया था।

जांच में सामने आया है कि लीक हुआ प्रश्नपत्र जूते में छिपाकर प्रिंटिंग हाउस से बाहर निकाला गया। आरोप है कि इसे करीब ₹8 हजार में हासिल किया गया और बाद में भिवंडी व पुणे समेत कई जगहों पर ऊंची कीमत पर बेचा गया। पुलिस के अनुसार, पूरे रैकेट से करीब ₹1.5 करोड़ की कमाई होने की आशंका है।

भिवंडी पुलिस ने ग्राहक बनकर जाल बिछाया और कोंगांव के एक होटल से आरोपियों को पेपर बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया। मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

बिहार से गिरफ्तारी, जल्द भिवंडी लाया जाएगा आरोपी

भिवंडी पुलिस ने बिजेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर पुणे एयरपोर्ट पहुंचाया है। वहां से उसे भिवंडी लाकर अदालत में पेश किया जाएगा।

कपिल दहिया समेत अन्य आरोपी भी गिरफ्तार

एसआईटी ने इस मामले में वांछित आरोपी कपिल दहिया को पंजाब के पठानकोट से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसके अलावा सोनू सिंह और मिथुन सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, सोनू ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए और अपनी फोटोकॉपी दुकान से लीक प्रश्नपत्रों की प्रतियां निकालीं, जबकि मिथुन सिंह कथित तौर पर संभावित खरीदारों की तलाश में शामिल था।

पत्नी पर भी जांच की आंच

पुलिस ने बिजेंद्र गुप्ता की पत्नी सुमन कुमारी को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने फरार आरोपी के संपर्क में रहते हुए जांच में सहयोग नहीं किया और मैसेजिंग ऐप के जरिए उससे लगातार संपर्क बनाए रखा।

कैसे हुआ खुलासा?

भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि TET का प्रश्नपत्र बेचा जा रहा है। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी खरीदार बनकर आरोपियों के संपर्क में पहुंचा। जैसे ही सौदा तय हुआ, पुलिस ने कोंगांव के होटल में छापा मारकर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने

जांच में पता चला है कि बिजेंद्र कुमार गुप्ता पहले भी कई राज्यों के पेपर लीक मामलों में शामिल रह चुका है। उसके खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज है। पुलिस का दावा है कि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन जमानत मिलने के बाद फर्जी पहचान के साथ दूसरे राज्यों में सक्रिय हो जाता था।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कोलकाता में NGT ईस्टर्न जोन बेंच को फिर से सक्रिय करने के लिए प्रधानमंत्री से अपील करते पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता
कोलकाता में NGT ईस्टर्न बेंच को लेकर मांग तेज, पर्यावरण कार्यकर्ता ने PM से हस्तक्षेप की अपील

कोलकाता, एजेंसियां। पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोलकाता स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ईस्टर्न जोन बेंच को फिर से नियमित रूप से सक्रिय करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि नियमित बेंच के अभाव में पूर्वी भारत के कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है।   पूर्वी भारत के पर्यावरण मामलों पर पड़ रहा असर   सुभाष दत्ता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कोलकाता की NGT ईस्टर्न जोन बेंच पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण है। नियमित व्यवस्था नहीं होने से कई मामलों में सुनवाई प्रभावित हो रही है।   पर्यावरण विवादों के जल्द समाधान की मांग   पर्यावरण कार्यकर्ता का कहना है कि प्रदूषण, नदियों की सुरक्षा, औद्योगिक गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में समय पर न्याय जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील की है।   NGT की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण   नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाला विशेष न्यायिक निकाय है। इसकी क्षेत्रीय बेंचों का उद्देश्य स्थानीय पर्यावरण विवादों का तेजी से निपटारा करना है। कोलकाता की ईस्टर्न जोन बेंच पूर्वी राज्यों के लिए अहम मानी जाती है।   कोलकाता बेंच को लेकर पहले भी उठ चुकी हैं मांगें   NGT की क्षेत्रीय बेंचों में लंबित मामलों और पर्याप्त न्यायिक सदस्यों की उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पर्यावरण संगठनों का कहना है कि मजबूत व्यवस्था के बिना पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में देरी हो सकती है।   अब केंद्र के फैसले पर नजर   सुभाष दत्ता की अपील के बाद अब नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित बेंच के संचालन से पूर्वी भारत के पर्यावरण संबंधी मामलों की सुनवाई को गति मिल सकती है।  

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देश में 3 समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने के लिए ₹3,030 करोड़ की भव्य रसायन योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी

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Union Education Minister Dharmendra Pradhan announcing his resignation amid the NEET-UG 2026 controversy and nationwide student protests.
NEET-UG विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के भविष्य और देश की एकता का दिया हवाला

Breaking News: NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि उनका यह फैसला देश की एकता, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में बने हालात का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत न उठा सके, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। 'युवाओं का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे' धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वे बेहद व्यथित थे। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि देश की युवाशक्ति को भ्रमित होने से बचाना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि छात्र आंदोलन का लाभ राष्ट्रविरोधी तत्वों को नहीं मिलना चाहिए और विद्यार्थियों को विरोध-प्रदर्शन के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए। NEET-UG परीक्षा पर दी सफाई इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। 3 मई 2026: परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंपी। परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया। भविष्य में NEET-UG को Computer-Based Test (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई। 21 जून 2026: देशभर में 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। 16 जुलाई 2026: संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की। 'कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह किया' धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और स्थिति को और जटिल बनाने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पद छोड़ने के बावजूद राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वे भविष्य में भी देश, ओडिशा की जनता तथा युवाओं के हित में कार्य करते रहेंगे।    

kalpana जुलाई 25, 2026 0
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वाराणसी में बनेगा यूपी का नया क्रिकेट हब, राजीव शुक्ला ने बताया- जल्द शुरू होंगे अंतरराष्ट्रीय मुकाबले

आगरा, एजेंसियां। बीसीसीआई उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को आगरा में आयोजित यूपी टी-20 लीग सीजन-4 के मिनी ऑक्शन के दौरान वाराणसी क्रिकेट स्टेडियम को लेकर बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि वाराणसी के गंजारी में बन रहा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम अब अंतिम चरण में है और जल्द ही यह उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्रिकेट केंद्रों में शामिल होगा।   अगस्त तक पूरा हो सकता है स्टेडियम का निर्माण   राजीव शुक्ला ने जानकारी दी कि वाराणसी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसके अगस्त 2026 तक तैयार होने की संभावना है। स्टेडियम तैयार होने के बाद यहां सबसे पहले घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाएगा।   रणजी ट्रॉफी मुकाबले की भी तैयारी   उन्होंने बताया कि स्टेडियम के उद्घाटन के बाद यहां घरेलू क्रिकेट की शुरुआत की जाएगी। संभावना है कि इस मैदान पर रणजी ट्रॉफी का मुकाबला भी आयोजित किया जा सकता है। इससे वाराणसी को उत्तर प्रदेश के क्रिकेट मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।   इस साल के अंत तक हो सकता है पहला अंतरराष्ट्रीय मैच   राजीव शुक्ला ने कहा कि UPCA की प्राथमिकता वाराणसी स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी करना है। अगर सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं तो 2026 के अंत तक या 2027 की शुरुआत में यहां पहला अंतरराष्ट्रीय मैच कराया जा सकता है।   आईपीएल मुकाबले कराने की भी योजना   राजीव शुक्ला ने बताया कि भविष्य में वाराणसी स्टेडियम में आईपीएल मुकाबले आयोजित कराने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके अलावा यूपी टी-20 लीग के आगामी सीजन के कुछ मुकाबले भी वाराणसी में कराने पर विचार किया जा रहा है।   काशी को मिलेगा नया क्रिकेट केंद्र   वाराणसी में बनने वाला यह स्टेडियम पूर्वांचल के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाले इस मैदान से स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच मिलेगा और क्षेत्र में क्रिकेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।   काशी की संस्कृति की झलक दिखेगी स्टेडियम में   गंजारी में बन रहा यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं के साथ काशी की संस्कृति को भी दर्शाएगा। इसके डिजाइन में काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को शामिल किया गया है, जिससे यह देश के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग नजर आएगा।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
Central Delhi Liquor Shop Timings

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Draupadi Murmu

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UP CM Yogi Adityanath

कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिए निर्देश

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kalpana जुलाई 21, 2026 0

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