राजनीति

Sonia Gandhi Slams Centre Over Student Protest Crackdown

सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, बोलीं- छात्रों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही सरकार

kalpana जुलाई 24, 2026 0
Sonia Gandhi criticizes the central government over its handling of student protests and education reforms
Sonia Gandhi Targets Centre Over Student Protest Response

कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वे देश के दुश्मन हों। सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

'शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा' शीर्षक से लिखा लेख

अंग्रेजी दैनिक द हिंदू में प्रकाशित अपने लेख "An Education System's Collapse, Young India's Trauma" (शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा) में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र केवल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनके शांतिपूर्ण विरोध का जवाब "कायरता और अकारण क्रूरता" से दिया है।

सोनिया गांधी ने लिखा कि छात्रों ने सरकार के शिक्षा सुधार संबंधी दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ कठोर रवैया अपना रही है।

'शिक्षा व्यवस्था युवाओं को उम्मीद नहीं, निराशा दे रही'

अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था युवाओं को अवसर देने के बजाय निराशा और असुरक्षा की ओर धकेल रही है। उनके अनुसार, देश में चल रहा छात्र आंदोलन दो बड़ी वजहों का परिणाम है। पहली, ऐसी शिक्षा व्यवस्था जिसने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है और दूसरी, केंद्र सरकार का रवैया, जो जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कदम उठाने से लगातार बचता रहा है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के प्रति नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व भी है।

पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर ऐसी कार्रवाई हुई हो। अपने लेख में उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा उन्होंने महिला पहलवानों के आंदोलन का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश उन घटनाओं को भी नहीं भूला है।

सरकार पर शिक्षा व्यवस्था कमजोर करने का आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और छात्रों में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं।

सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर केवल छात्रों के भविष्य पर ही नहीं, बल्कि देश के विकास और भविष्य पर भी पड़ेगा।

छात्रों के समर्थन की अपील

अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने सभी राजनीतिक दलों और समाज से छात्रों के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उनके मुताबिक, छात्रों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सुनना और उन पर कार्रवाई करना किसी भी जिम्मेदार सरकार का दायित्व होना चाहिए।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, विधायक श्वेता सिंह ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

धनबाद। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बोकारो की कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह ने धनबाद में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।   NEET मामले की निष्पक्ष जांच की मांग   श्वेता सिंह ने कहा कि NEET पेपर लीक मामले में छात्र लंबे समय से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की।   पुलिस कार्रवाई की आलोचना   कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ दिल्ली पुलिस ने सख्ती बरती और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और बल प्रयोग के जरिए छात्रों की आवाज को दबाना उचित नहीं है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग   श्वेता सिंह ने केंद्र सरकार से मामले की जिम्मेदारी तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है।   छात्रों के साथ खड़ी रहेगी कांग्रेस   कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनकी पार्टी छात्रों के अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भविष्य में भी छात्रों की आवाज को और बुलंद करने का काम करेगी।

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तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म
तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर बिहार की राजनीति गर्म, सत्ता पक्ष ने साधा निशाना

पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सत्र की शुरुआत में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका पर निशाना साधा।   BJP और JDU नेताओं ने साधा निशाना   सत्ता पक्ष के नेताओं ने तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े सवाल उठाने का महत्वपूर्ण मंच है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहकर जनता के मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए।   विपक्ष की रणनीति पर उठे सवाल   मानसून सत्र में विपक्ष NEET विवाद, पेपर लीक, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं।   RJD ने मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी की   वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने साफ किया है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। पार्टी की ओर से सरकार पर शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक मामलों को लेकर हमला जारी है।   सत्र में बढ़ सकती है राजनीतिक टकराव   बिहार विधानसभा का यह मानसून सत्र छोटे कार्यकाल का है, ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। तेजस्वी यादव की मौजूदगी और विपक्ष की आगे की रणनीति पर अब राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

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