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Naseeruddin Shah Backs NEET Protest

नसीरुद्दीन शाह का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन, बोले- 'जो खुद अनपढ़ हैं, वे पढ़ाई की अहमियत नहीं जानते'

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Veteran actor Naseeruddin Shah speaks on the NEET-UG 2026 protest, criticizing the government and supporting student demonstrations.
Naseeruddin Shah on NEET Protest

Naseeruddin Shah on NEET Protest: बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार की कार्यशैली की तीखी आलोचना की है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा व्यवस्था, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कई विवादित बयान दिए। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का खुलकर समर्थन भी किया।

छात्रों के आंदोलन पर क्या बोले नसीरुद्दीन शाह?

नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं और उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं। उनके अनुसार यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय की मांग को लेकर है।

उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का गुस्सा वास्तविक है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी पर साधा निशाना

इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री के बयानों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि उनके मुताबिक शिक्षा और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार का रवैया संवेदनशील नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचती है और छात्रों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।

शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

अभिनेता ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। उनका दावा है कि छात्रों को बेहतर और वैज्ञानिक सोच पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार देश के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर क्या कहा?

शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि छात्र जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनके अनुसार सरकार को आंदोलन को नजरअंदाज करने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

विवाद बढ़ने की संभावना

नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे राजनीतिक टिप्पणी मानकर आलोचना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Ramayana Trailer
'रामायण' के ट्रेलर लॉन्च के लिए अमेरिका रवाना हुए रणबीर कपूर और यश, जानिए भारत में कब होगा रिलीज

मुंबई, एजेंसियां। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। फिल्म का ट्रेलर भव्य स्तर पर लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अभिनेता रणबीर कपूर और यश अमेरिका रवाना हो चुके हैं।   फिल्म का ट्रेलर सबसे पहले अमेरिका के प्रतिष्ठित सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में लॉन्च किया जाएगा। रणबीर कपूर और यश को बुधवार को मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया, जहां से वे ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शामिल होने के लिए रवाना हुए।   रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में फिल्म का स्पेशल पैनल गुरुवार, 23 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर करीब 3:15 बजे 4,800 सीटों वाले बॉलरूम 20 में होगा, जहां फिल्म से जुड़ी खास झलकियां दर्शकों के सामने पेश की जाएंगी।   भारत में इस दिन रिलीज होगा ट्रेलर   अमेरिका में लॉन्च के बाद 'रामायण' का ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज किया जाएगा। भारतीय दर्शक भी इसी दिन फिल्म का ट्रेलर देख सकेंगे। हालांकि, ट्रेलर रिलीज का सटीक समय आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगा।   फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि साई पल्लवी माता सीता और यश रावण के किरदार में दिखाई देंगे। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।   फिल्म के भव्य सेट, स्टारकास्ट और बड़े स्तर पर किए जा रहे प्रमोशन को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। अब सभी की नजरें 'रामायण' के ट्रेलर लॉन्च पर टिकी हुई हैं।

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Shefali Jariwala Pet Dog Simba Dies: शेफाली जरीवाला के बाद अब उनके प्यारे डॉगी सिम्बा का भी निधन, पराग त्यागी बोले- 'अब मम्मा अकेली नहीं'

Shefali Jariwala Pet Dog Simba Dies: 'कांटा लगा' फेम अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के निधन के करीब एक साल बाद उनके सबसे प्यारे पालतू डॉग सिम्बा ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इस दुखद खबर की जानकारी उनके पति और अभिनेता पराग त्यागी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। पोस्ट सामने आते ही फैंस और सेलेब्रिटीज भी भावुक हो गए और पराग को हिम्मत बनाए रखने की सलाह देने लगे। पराग त्यागी ने शेयर किया भावुक वीडियो पराग त्यागी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेफाली जरीवाला और सिम्बा का एक पुराना वीडियो साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने बेहद भावुक संदेश लिखा कि अब शेफाली अकेली नहीं हैं, क्योंकि सिम्बा भी उनके पास पहुंच गया है। उन्होंने लिखा, "अब मम्मा अकेली नहीं है। सिम्बा मम्मा के साथ बहुत खुश है। मेरी दोनों लाइफ लाइन से दूसरी दुनिया में फिर मिलने का इंतजार रहेगा।" यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और हजारों लोग इस पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। फैंस और सेलेब्स ने जताया दुख पराग त्यागी की पोस्ट पर फैंस के साथ-साथ कई टीवी और फिल्मी सितारों ने भी प्रतिक्रिया दी। सभी ने सिम्बा के निधन पर दुख जताते हुए पराग को मजबूत रहने की सलाह दी। कई यूजर्स ने लिखा कि सिम्बा अब अपनी "मम्मा" शेफाली के साथ है। पहले भी फैली थीं सिम्बा की सेहत को लेकर अफवाहें कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर सिम्बा की तबीयत को लेकर कई झूठी खबरें वायरल हुई थीं। उस समय पराग त्यागी ने वीडियो जारी कर साफ किया था कि सिम्बा पूरी तरह स्वस्थ है और शेफाली की याद में परिवार के साथ सभी रस्में निभा रहा है। उन्होंने अफवाह फैलाने वालों की आलोचना करते हुए कहा था कि कुछ लोग केवल लाइक्स और व्यूज के लिए गलत खबरें फैला रहे हैं। जून 2025 में हुआ था शेफाली जरीवाला का निधन गौरतलब है कि शेफाली जरीवाला का 27 जून 2025 को मुंबई में 42 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें सामने आई थीं। पराग त्यागी ने उन सभी दावों का खंडन करते हुए कहा था कि शेफाली सामान्य जीवन जी रही थीं और उनकी मौत को लेकर गलत जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए। शेफाली के जाने के बाद सिम्बा अक्सर पराग के साथ नजर आता था और दोनों एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे। अब सिम्बा के निधन ने पराग त्यागी की जिंदगी में एक और बड़ा भावनात्मक खालीपन छोड़ दिया है।  

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'जन नायकन' की एडवांस बुकिंग में धमाल, रिलीज से पहले 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज से एक दिन पहले ही 20 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस बुकिंग दर्ज कर ली है। वहीं, ब्लॉक सीट्स को हटाने के बाद भी फिल्म की एडवांस टिकट बिक्री करीब 14 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। अब तक फिल्म के 7 लाख से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं, जिससे दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।   तमिलनाडु और कर्नाटक से मिला सबसे बड़ा रिस्पॉन्स   एडवांस बुकिंग में सबसे ज्यादा योगदान तमिलनाडु का रहा, जहां से फिल्म ने करीब 7.90 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री की। इसके बाद कर्नाटक से लगभग 6.03 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग हुई, जिसमें बेंगलुरु का सबसे बड़ा योगदान रहा। केरल से भी फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला और वहां से करीब 1.91 करोड़ रुपये की एडवांस बुकिंग दर्ज की गई।   बेंगलुरु बना एडवांस बुकिंग का सबसे बड़ा केंद्र   शहरों के हिसाब से बेंगलुरु एडवांस बुकिंग में सबसे आगे रहा, जहां से लगभग 5.99 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री हुई। इसके बाद चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद, मदुरै, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों से भी शानदार बुकिंग के आंकड़े सामने आए हैं।   तमिल वर्जन का दबदबा   भाषाई आधार पर फिल्म का तमिल वर्जन सबसे आगे है, जिसने 14 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस कमाई की है। तेलुगु संस्करण को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जबकि हिंदी वर्जन की बुकिंग फिलहाल अपेक्षाकृत सीमित रही है। फिल्म की अधिकांश टिकटें 2D स्क्रीनिंग के लिए बुक हुई हैं।   विजय की आखिरी फिल्म होने से बढ़ी उत्सुकता   ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि रिलीज के करीब आते-आते फिल्म की एडवांस बुकिंग में और तेजी आ सकती है। 'जन नायकन' को लेकर फैंस में खास उत्साह इसलिए भी है क्योंकि इसे अभिनेता विजय के 33 साल लंबे फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। फिल्मों से विदाई के बाद विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हैं, जिससे इस फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।

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छात्रों के समर्थन में बोले TV स्टार्स, Karan Kundrra, Asha Negi और Arjun Bijlani ने दी प्रतिक्रिया

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kalpana जुलाई 21, 2026 0

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