मुंबई, एजेंसियां। 20 से 26 जुलाई के बीच OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर डोज़ तैयार है। इस सप्ताह कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ रिलीज़ होने जा रही हैं, जिनमें 'Musafir Cafe', 'Adarsh Baal Vidyalaya' जैसे कई अन्य चर्चित टाइटल शामिल हैं। अलग-अलग जॉनर की इन रिलीज़ का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है।
इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज़ 'Musafir Cafe' मानी जा रही है। फिल्म दोस्ती, रिश्तों और जीवन के नए अनुभवों की कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करती है। ट्रेलर को सोशल मीडिया पर शानदार प्रतिक्रिया मिली है और दर्शकों के बीच इसे लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिल रहा है।
स्कूल जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित 'Adarsh Baal Vidyalaya' भी इस सप्ताह की प्रमुख रिलीज़ में शामिल है। फिल्म की कहानी और विषय को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। रिलीज़ से पहले ही इसका ट्रेलर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
इस सप्ताह कॉमेडी, ड्रामा, फैमिली और थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज़ विभिन्न OTT प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ होंगी। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के अनुसार कई नए विकल्प मिलने वाले हैं।
लगातार नई रिलीज़ के साथ यह सप्ताह OTT प्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। दर्शक घर बैठे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर नई फिल्मों और वेब सीरीज़ का आनंद ले सकेंगे, जिससे वीकेंड का मनोरंजन और भी शानदार होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री करिश्मा तन्ना इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को खास अंदाज में एंजॉय कर रही हैं। 42 साल की उम्र में मां बनने जा रहीं करिश्मा ने सोशल मीडिया पर अपनी नई तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें वह बेबी बंप फ्लॉन्ट करने के साथ-साथ वर्कआउट करती भी नजर आ रही हैं। उनकी तस्वीरों को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। प्रेग्नेंसी में भी जारी है फिटनेस रूटीन करिश्मा ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें वह जिम में वर्कआउट करती, परिवार के साथ समय बिताती और अपनी पसंदीदा चीजों का आनंद लेती दिखाई दे रही हैं। इससे पहले भी वह प्रेग्नेंसी के दौरान डांस और फिटनेस से जुड़े वीडियो साझा कर चुकी हैं। 'लाइफ लेटली' कैप्शन के साथ साझा कीं तस्वीरें अपनी पोस्ट के साथ करिश्मा ने "Life Lately" कैप्शन लिखा। तस्वीरों में उनका बेबी बंप साफ नजर आ रहा है और वह बेहद खुश व रिलैक्स दिखाई दे रही हैं। फैंस और सेलेब्स उनकी पोस्ट पर शुभकामनाएं और प्यार भरे कमेंट कर रहे हैं। केसर आम और पसंदीदा खाने का लिया स्वाद शेयर की गई तस्वीरों में करिश्मा केसर आम का आनंद लेते हुए भी नजर आईं। उन्होंने बताया कि ये आम उन्हें नीता अंबानी की ओर से मिले हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने पसंदीदा चाइनीज फूड की झलक भी फैंस के साथ साझा की। मातृत्व के सफर को कर रहीं खुलकर एंजॉय करिश्मा तन्ना लगातार सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रेग्नेंसी जर्नी की झलकियां साझा कर रही हैं। फिटनेस, संतुलित जीवनशैली और परिवार के साथ बिताए खास पलों को साझा करते हुए वह अपने इस नए सफर का भरपूर आनंद लेती नजर आ रही हैं।
TV Stars on Student Protest: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित लाठीचार्ज और झड़प की घटना पर अब टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। Karan Kundrra, Asha Negi, Arjun Bijlani और Kishwer Merchant समेत कई सितारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की बात सुने जाने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कई कलाकारों ने हिंसा और टकराव पर चिंता भी जताई। आशा नेगी ने जताई चिंता अभिनेत्री आशा नेगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि परीक्षा से जुड़े विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करने के बाद उन्हें धमकियों और आपत्तिजनक संदेशों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपील की कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। करण कुंद्रा ने क्या कहा? अभिनेता करण कुंद्रा ने कहा कि किसी भी मुद्दे के कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्रों की मांग जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है, तो उस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने युवाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए गुमराह किया है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा हर युवा का अधिकार है और इसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। अर्जुन बिजलानी ने पारदर्शिता की मांग की अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें दुखद हैं। उनके मुताबिक ऐसे मामलों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकलना चाहिए। किश्वर मर्चेंट ने भी रखा पक्ष अभिनेत्री किश्वर मर्चेंट ने कहा कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के मुद्दे के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर छात्र और परिवार के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसमें जवाबदेही तथा पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के बाद उन्हें भी आलोचना और धमकियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जारी है बहस छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है। जहां कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं, वहीं अलग-अलग पक्षों की ओर से भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता और विरोध प्रदर्शन के तरीकों को लेकर चर्चा तेज बनी हुई है।
Kaylee Hottle Death News: हॉलीवुड फिल्म 'Godzilla vs Kong' और 'Godzilla x Kong: The New Empire' में जिया (Jia) का यादगार किरदार निभाने वाली युवा अभिनेत्री Kaylee Hottle का 18 वर्ष की उम्र में एक सड़क हादसे में निधन हो गया। इस दुखद खबर की पुष्टि उनके पिता Joshua Hottle ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) के माध्यम से की। उनके निधन से फिल्म जगत और प्रशंसकों में शोक की लहर है। कार हादसे में हुई मौत मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Kaylee Hottle की मौत मैरीलैंड में हुए एक कार हादसे में हुई। उनके पिता ने बताया कि हादसे के समय वह टेक्सास में थे। उन्हें पहले अधिकारियों का फोन आया और बाद में अस्पताल से सूचना मिली कि इलाज के दौरान Kaylee का दिल धड़कना बंद हो गया। मूक-बधिर परिवार में हुआ था जन्म Kaylee Hottle जॉर्जिया के अटलांटा की रहने वाली थीं और एक बधिर (Deaf) परिवार में पली-बढ़ीं। वह स्वयं भी सुन नहीं सकती थीं और उनकी मुख्य भाषा American Sign Language (ASL) थी। उन्होंने Texas School for the Deaf में शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही अभिनय के प्रति उनका गहरा लगाव था और उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर हॉलीवुड में खास पहचान बनाई। परिवार की विरासत Kaylee के पिता Joshua Hottle ऐसे परिवार से आते हैं, जहां चार पीढ़ियों से कई सदस्य बधिर रहे हैं। Kaylee की एक बड़ी बहन भी सुन नहीं सकती थीं, जबकि उनके तीन छोटे भाई सुन सकते हैं। परिवार ने अलग-अलग राज्यों में रहने के बाद जॉर्जिया को अपना स्थायी घर बनाया। 'Godzilla vs Kong' से मिली पहचान Kaylee Hottle को वैश्विक पहचान वर्ष 2021 में रिलीज हुई 'Godzilla vs Kong' से मिली। उन्होंने फिल्म में जिया (Jia) नाम की एक मूक-बधिर बच्ची का किरदार निभाया, जिसका कॉन्ग के साथ बेहद भावनात्मक रिश्ता दिखाया गया था। इसके बाद वह 2024 में रिलीज हुई 'Godzilla x Kong: The New Empire' में भी इसी भूमिका में नजर आईं। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। मिला था प्रतिष्ठित अवॉर्ड नॉमिनेशन 'Godzilla x Kong: The New Empire' में दमदार अभिनय के लिए Kaylee Hottle को Saturn Awards में Best Performance by a Younger Actor श्रेणी में नामांकन भी मिला था। कम उम्र में ही उन्होंने हॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना ली थी। फिल्म इंडस्ट्री में शोक Kaylee Hottle के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत के लोगों ने सोशल Media पर शोक व्यक्त किया। उन्हें एक प्रेरणादायक युवा कलाकार के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से यह साबित किया कि किसी भी चुनौती के बावजूद सपनों को हासिल किया जा सकता है।