नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन कर सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग उठाई है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की मांग भी की जा रही है।
छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि युवाओं के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और नए कानून की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। सरकार ने फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात भी कही है।
प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि परीक्षा सुधार, छात्रों की शिकायतों और आंदोलन को लेकर कोई समाधान निकल सकता है। हालांकि छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे" अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है। सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी। CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।
NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का आंदोलन शुक्रवार (24 जुलाई) को भी जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इस बीच आज सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने की संभावना है। दिल्ली में 17 मेट्रो स्टेशन बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार सुबह 17 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। इससे पहले गुरुवार को 16 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। आज सरकार और CJP के बीच हो सकती है बैठक एएनआई के मुताबिक, CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि आज दोपहर 12:30 बजे सरकार के प्रतिनिधिमंडल और CJP के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके पहले कह चुके हैं कि बातचीत केवल जंतर-मंतर पर ही होगी। बैठक का स्थान अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ अनशन सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार पहले भी आश्वासन दे रही थी, लेकिन इस बार उन्हें लिखित आश्वासन मिला है। इसके बाद उन्होंने 26 दिन से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। 25 से अधिक छात्र हिरासत में गुरुवार को जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे 25 से अधिक छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, छात्रों के पास प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर थे और उन्हें एहतियात के तौर पर हिरासत में लेकर दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।
संसद के मानसून सत्र का आज (शुक्रवार, 24 जुलाई) पांचवां दिन है। पिछले चार दिनों तक विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। आज सरकार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ा एक अहम विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक प्रस्तावित बिल का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद सदन में चर्चा में हिस्सा ले सकती है। ऐसे में आज का दिन संसद की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पेपर लीक पर घमासान जारी नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन और संसद के भीतर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्तापक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे चुके हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। खरगे का पीएम मोदी पर निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, "जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना होता है, देर रात वीडियो बनाकर संसद के बाहर एकतरफा 'मन की बात' नहीं करनी होती। पीएम मोदी, आज संसद में आने से पहले धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके आइए।" खरगे का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामलों पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की थी। निर्मला सीतारमण बोलीं- चर्चा के लिए सरकार तैयार गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला देश के छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहती है। सीतारमण ने कहा, "पेपर लीक के बाद तुरंत दोबारा परीक्षा कराई गई और परिणाम भी घोषित किए गए। अब छात्र आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।" विपक्ष पर लगाया शर्तें बदलने का आरोप वित्त मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पहले उसने संसद में चर्चा की मांग की और जब सरकार ने सहमति दे दी, तब विपक्ष ने नई-नई शर्तें रखनी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा चाहती है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करने से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। आज के सत्र पर सबकी नजर मानसून सत्र के पांचवें दिन सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार पेपर लीक से जुड़ा प्रस्तावित विधेयक पेश करती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष चर्चा में शामिल होता है या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखता है। पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर आज संसद में तीखी बहस होने के आसार हैं।