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Trump Signals Hope for Hormuz Deal

Iran-US Tension: ट्रंप का दावा- ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा ईरान, होर्मुज समझौते के भी दिए संकेत; तेहरान ने दी कड़े जवाब की चेतावनी

surbhi अगस्त 7, 2026 0
US President Donald Trump speaks on Iran tensions as Tehran warns of a strong response amid Strait of Hormuz negotiations.
Trump-Iran Tensions and Strait of Hormuz Talks

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि मौजूदा संघर्ष अधिक समय तक नहीं चलेगा और ईरान लंबे समय तक मौजूदा दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रही बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द किसी समझौते की उम्मीद की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा।

ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु शक्ति बनता है तो इसका खतरा केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका के पास कड़ा रुख अपनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि संघर्ष जल्द समाप्त होगा और क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की उम्मीद

ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही वार्ताओं पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है और उन्हें उम्मीद है कि निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और व्यापार पर असर डाल सकता है।

समुद्री सुरक्षा पर जताई चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है, लेकिन मिसाइल हमलों और समुद्री बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का खतरा अभी भी बना हुआ है। उनका कहना था कि यदि जहाजों को समुद्र में बारूदी सुरंगों का संदेह भी होगा तो वे इस मार्ग का उपयोग करने से बचेंगे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है।

ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल सैयद मजीद इब्न रजा ने कहा कि देश अपनी रक्षा क्षमता पर पूरी तरह भरोसा रखता है और अमेरिका या इजरायल सहित किसी भी संभावित खतरे का निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

अमेरिकी कूटनीति पर ईरान का हमला

ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने भी अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन पहले सैन्य कार्रवाई की धमकी देता है और फिर बातचीत की पेशकश करता है। उनके मुताबिक यह वास्तविक कूटनीति नहीं बल्कि दबाव बनाने की रणनीति है।

विफल समझौते के बाद बढ़ी अनिश्चितता

जून में संघर्ष रोकने के उद्देश्य से हुए 14-सूत्रीय समझौते के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे मुद्दे अब भी विवाद के केंद्र में हैं।

फिलहाल एक ओर अमेरिका बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहा है, जबकि दूसरी ओर ईरान किसी भी सैन्य दबाव का सख्त जवाब देने की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों देश कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या क्षेत्रीय तनाव और गहराता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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थाईलैंड के स्कूल में गोलीबारी की घटना
थाईलैंड के स्कूल में छात्र की अंधाधुंध फायरिंग, 6 की मौत; कई घायल, हमलावर ने खुद को भी मारी गोली

बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के पास नोनथाबुरी जिले के देबसिरिन स्कूल में शुक्रवार सुबह एक छात्र ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद हमलावर छात्र ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।   सुबह 10 बजे हुई वारदात   अधिकारियों के अनुसार, घटना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजे हुई। गोलीबारी शुरू होते ही स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। छात्र और शिक्षक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और आपातकालीन बचाव दल मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।   मौत के आंकड़े पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार   थाई अधिकारियों ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। हालांकि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में छह लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। पुलिस ने बताया कि हमलावर छात्र ने घटना के बाद खुद को गोली मार ली।   लाइव वीडियो शेयर नहीं करने की अपील   घटना के दौरान स्कूल परिसर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे घटना का लाइव प्रसारण या संवेदनशील वीडियो साझा न करें, ताकि बचाव अभियान और जांच प्रभावित न हो।   पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना   फरवरी 2026 में भी थाईलैंड के सोंगखला प्रांत के एक स्कूल में गोलीबारी हुई थी, जिसमें एक शिक्षक की मौत और एक छात्र घायल हुआ था। उस घटना में हमलावर ने छात्रों और शिक्षकों को बंधक भी बना लिया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने सुरक्षित छुड़ाया।   थाईलैंड में बंदूक हिंसा चिंता का विषय   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया के उन देशों में शामिल है जहां नागरिकों के पास बड़ी संख्या में आग्नेयास्त्र मौजूद हैं। बंदूक कानून सख्त करने के प्रयासों के बावजूद देश में समय-समय पर गोलीबारी की घटनाएं सामने आती रही हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
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ISS पर अनिल मेनन और जेसिका मीर की सफल स्पेसवॉक, नए सोलर सिस्टम की तैयारी पूरी

बच्चों की मानसिक सेहत मामले में Meta पर जुर्माना
बच्चों की मेंटल हेल्थ पर मेटा को बड़ा झटका, 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना

न्यू मैक्सिको। अमेरिका के न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) पर बड़ा जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कंपनी को 567 मिलियन डॉलर (करीब 4,700 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कारण बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और कंपनी को इस नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।   इलाज और जागरूकता कार्यक्रमों पर खर्च होगी राशि   जज ब्रायन बिडशेड ने अपने फैसले में कहा कि 567 मिलियन डॉलर में से 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए जाएंगे। शेष राशि अगले पांच वर्षों में जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग सेवाओं और अन्य रोकथाम कार्यक्रमों पर खर्च होगी। यह राशि मार्च 2026 में जूरी द्वारा लगाए गए 375 मिलियन डॉलर के सिविल जुर्माने से अलग है। इस तरह मेटा पर कुल वित्तीय दायित्व 942 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।   कोर्ट ने मेटा पर लगाए गंभीर आरोप   अदालत ने माना कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म के ऐसे फीचर्स विकसित किए, जो बच्चों और किशोरों में लत (Addiction) बढ़ाते हैं। साथ ही कंपनी पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी जानकारी छिपाने और संभावित खतरों को पर्याप्त तरीके से नियंत्रित नहीं करने के आरोप भी लगे। कोर्ट ने मेटा को प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा संबंधी फीचर्स, प्राइवेसी सेटिंग्स और आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्टिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।   एज वेरिफिकेशन और AI टूल्स होंगे मजबूत   फैसले के तहत मेटा को न्यू मैक्सिको में अपने एज एश्योरेंस सिस्टम को और मजबूत करना होगा। कंपनी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कम उम्र के संभावित यूजर्स की पहचान करने, 13 वर्ष से कम आयु के संदिग्ध खातों से उम्र का प्रमाण मांगने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों और बाल सुरक्षा संस्थाओं के सहयोग से एक विशेष रिपोर्टिंग पोर्टल विकसित करने को भी कहा गया है, ताकि कम उम्र के संभावित यूजर्स की पहचान कर उचित कार्रवाई की जा सके।   मेटा ने फैसले को बताया गलत, करेगा अपील   मेटा ने अदालत के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और हानिकारक कंटेंट हटाने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। कंपनी ने कहा कि उसे किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अपने प्रयासों पर भरोसा है और वह अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेगी।   अन्य राज्यों में भी बढ़ रही कानूनी चुनौती   मेटा को अमेरिका में सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान से जुड़े हजारों मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। इस महीने कैलिफोर्निया में भी कंपनी पर बहु-राज्यीय मुकदमे की सुनवाई शुरू होने वाली है, जिसमें आरोप है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के डिज़ाइन ने युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट और सोशल मीडिया की लत को बढ़ावा दिया। वहीं हाल ही में चार किशोरों के परिवारों ने भी मेटा, टिकटॉक, स्नैप और यूट्यूब के खिलाफ मुकदमा दायर कर आरोप लगाया है कि इन प्लेटफॉर्म के लंबे समय तक इस्तेमाल से उनके बच्चों को गंभीर मानसिक नुकसान पहुंचा।

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ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी
ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी, अमेरिकी हमले पर तेल ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी

ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी, अमेरिकी हमले पर तेल ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी तेहरान, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेहरान ने खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देशों से अमेरिका को ईरान पर आगे सैन्य कार्रवाई से रोकने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।   तेल और ऊर्जा ढांचे पर हमले की चेतावनी     ईरान की चेतावनी केवल तेल क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में तेल क्षेत्र, रिफाइनरी, बिजली ग्रिड, जल व्यवस्था और परिवहन नेटवर्क जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों का भी उल्लेख किया है।   ईरान का संदेश यह है कि अगर उसकी ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं पर हमला किया गया तो क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगी देशों को भी इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।   सऊदी अरब समेत कई देशों से संपर्क     रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी चेतावनी राजनयिक माध्यमों से खाड़ी देशों तक पहुंचाई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ संपर्क किया।   तेहरान ने इन देशों से अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाने को कहा है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय संघर्ष को और फैलने से रोकने के लिए कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया है।   वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ सकता है असर     ईरान की धमकी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ सकती है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है। यदि तेल क्षेत्र, रिफाइनरी या परिवहन बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।   इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से जारी तनाव के कारण समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में खाड़ी के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर ईरान की चेतावनी बाजार के लिए एक और जोखिम बढ़ाती है।   ईरान का संदेश—युद्ध का दायरा बढ़ सकता है     ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका द्वारा उसके खिलाफ नए हमले की स्थिति में जवाब केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। तेहरान ने खाड़ी देशों को संभावित क्षेत्रीय नुकसान से बचने के लिए अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई रोकने का दबाव बनाने को कहा है।   इस चेतावनी के बाद मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव फिर तेज होता है, तो इसका असर खाड़ी क्षेत्र, तेल बाजार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

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