सायोनी घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मेरी पहली मुलाकात। एक यादगार पल!” इसके साथ साझा किए गए वीडियो में वह प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करती हुई नजर आ रही हैं।
यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सायोनी घोष का राजनीतिक रुख हाल के दिनों में बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 20 सांसदों वाले एक नए राजनीतिक गुट का हिस्सा बनी हैं, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का ऐलान किया है।
प्रधानमंत्री मोदी और सायोनी घोष की यह पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
सायोनी घोष पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ सक्रिय राजनीति में रही हैं। अब उनके नए राजनीतिक गुट के NDA के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
हालांकि, सिर्फ मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी नए राजनीतिक फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सायोनी ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से मुलाकात को यादगार बताया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, सायोनी घोष उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ जाने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी थी।
इस समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी और जून मालिया जैसे नामों की भी चर्चा है।
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।
इस नए गुट की ओर से NDA के साथ काम करने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुट के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग की बात कही है।
NCPI के सांसदों के NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने की खबरों ने भी इस राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया है।
ऐसे में सायोनी घोष की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति से अलग होकर नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
सायोनी घोष को पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक सफर के बाद अब नए गुट में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है।
जून में सामने आई रिपोर्टों में उन्हें इस बागी गुट के प्रमुख चेहरों में गिना गया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली मुलाकात और उसके बाद सार्वजनिक की गई तस्वीरें राजनीतिक तौर पर स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गई हैं।
मुलाकात के बाद सायोनी घोष का छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के रूप में पेश करने के बजाय ‘यादगार पल’ बताया।
अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट थी या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसके आगे भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस गुट की भूमिका और सायोनी घोष की राजनीतिक दिशा पर नजर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में 3,217.44 करोड़ रुपये के 7,181 टेंडरों में बोली लगाने वाले ठेकेदारों और उनकी जांच व मंजूरी करने वाले अधिकारियों का एक ही इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेस पाया गया। सीएजी ने इस मामले को गंभीर मानते हुए विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। 2,519 टेंडरों में 8,654 बोलियां एक ही IP से ऑडिट में सबसे गंभीर मामला 2,114.87 करोड़ रुपये के 2,519 टेंडरों का सामने आया। इन टेंडरों में कुल 8,654 बोलियां उसी IP एड्रेस से अपलोड की गईं, जिसका इस्तेमाल संबंधित सरकारी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा था। सामान्य तौर पर ठेकेदार और सरकारी अधिकारी अलग-अलग नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में एक ही IP एड्रेस से बोली जमा होने और उसके बाद उसी नेटवर्क से प्रक्रिया आगे बढ़ने पर सीएजी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। एक ईमेल से कई ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन सीएजी ऑडिट में ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के रजिस्ट्रेशन सिस्टम में भी कई खामियां सामने आईं। 12,283 ठेकेदारों का पंजीकरण केवल 5,658 ईमेल आईडी से किया गया था। वहीं, 2.52 करोड़ रुपये मूल्य के 38 टेंडरों में सभी बोलीदाता एक ही ईमेल आईडी से पंजीकृत पाए गए। सीएजी ने इसे फर्जी प्रतिस्पर्धा यानी कवर बिडिंग की आशंका से जोड़ते हुए गंभीरता से लिया है। इसी तरह 16,582 ठेकेदार केवल 6,957 मोबाइल नंबरों से जुड़े मिले। 4.99 करोड़ रुपये के 411 टेंडरों में शामिल सभी बोलीदाता एक ही मोबाइल नंबर से पंजीकृत पाए गए। बिना PAN के ठेकेदार भी सिस्टम में सक्रिय ऑडिट के दौरान 66 ठेकेदार ऐसे मिले, जो अनिवार्य PAN नंबर के बिना पंजीकृत थे। इनमें से 12 ठेकेदारों को टेंडर भी दिए गए। इसके अलावा 146 ठेकेदारों के PAN नंबर आयकर विभाग के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। रिटायरमेंट के बाद भी पोर्टल पर सक्रिय मिले अधिकारी सीएजी ने ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम के एक्सेस कंट्रोल पर भी सवाल उठाए हैं। ऑडिट में सात सेवानिवृत्त अधिकारी ऐसे पाए गए, जो रिटायर होने के बाद भी पोर्टल पर सक्रिय थे। इन अधिकारियों ने तकनीकी और वित्तीय बोलियां खोलीं और उनका मूल्यांकन भी किया। इसे सीएजी ने सिस्टम के एक्सेस कंट्रोल में गंभीर खामी माना है। 1.01 लाख करोड़ के टेंडरों में रिकॉर्ड अधूरा 2017 से 2023 के बीच ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर कुल 1,54,586 टेंडर प्रकाशित किए गए। इनकी अनुमानित लागत 1,01,098.67 करोड़ रुपये थी। लेकिन इनमें केवल 5,363 टेंडरों यानी 3.47 प्रतिशत में ही ठेका पाने वाले का अंतिम विवरण दर्ज मिला। वित्तीय मूल्यांकन का रिकॉर्ड भी केवल 34 प्रतिशत टेंडरों में उपलब्ध था। इससे पूरी टेंडर प्रक्रिया के डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। टेंडर फीस वसूली पर भी सवाल सीएजी ने यह भी पाया कि 1 जनवरी 2019 से टेंडर फीस समाप्त करने के निर्देश के बावजूद 188 निविदा अधिकारियों ने 3,408.03 करोड़ रुपये मूल्य के टेंडरों की 1,63,411 बोलियों से शुल्क वसूला। सीएजी की रिपोर्ट में सामने आई इन अनियमितताओं के बाद संबंधित मामलों की जांच और ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर के बयान ने पार्टी की रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है। थरूर ने स्वीकार किया कि जंतर-मंतर पर CJP की ओर से किया गया विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान ‘छात्रों की गूंज’ की तुलना में ज्यादा प्रभावी रहा। थरूर के इस बयान को कांग्रेस के लिए आत्ममंथन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने माना कि जिन मुद्दों को CJP ने अपने आंदोलन में प्रमुखता से उठाया, कांग्रेस भी उन्हें पहले से उठा रही थी। इसके बावजूद पार्टी का अभियान युवाओं और छात्रों के बीच वैसा प्रभाव नहीं बना सका, जैसा CJP के आंदोलन ने बनाया। ‘हमने पहले ही उठाए थे ये मुद्दे’ शशि थरूर के मुताबिक, जंतर-मंतर पर CJP ने जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई, वे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान का भी हिस्सा थे। उन्होंने बताया कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से पेपर लीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी। थरूर ने यह सवाल भी उठाया कि जब कांग्रेस पहले से इन मुद्दों को उठा रही थी, तो आखिर CJP का आंदोलन ज्यादा प्रभावशाली क्यों साबित हुआ। उनके अनुसार, पार्टी को इस अंतर को समझने और अपनी रणनीति की समीक्षा करने की जरूरत है। कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल: युवाओं तक क्यों नहीं पहुंचा संदेश? थरूर का बयान कांग्रेस के सामने एक अहम राजनीतिक चुनौती को रेखांकित करता है। युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी भर्ती जैसे मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं। कांग्रेस ने इन मुद्दों को राजनीतिक मंचों पर उठाया है, लेकिन थरूर के मुताबिक पार्टी को यह समझना होगा कि उसका संदेश जमीनी स्तर पर युवाओं तक उतनी मजबूती से क्यों नहीं पहुंच पाया। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या वह छात्रों की वास्तविक चिंताओं को पर्याप्त प्रभावी ढंग से सुन और समझ पा रही है या नहीं। साथ ही, Gen Z की राजनीतिक सोच और विरोध के नए तरीकों को समझना भी पार्टी के लिए जरूरी हो सकता है। 20 जून से CJP का आंदोलन CJP ने NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 20 जून से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलन में छात्रों की मांगों के साथ जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक छात्र विरोध के रूप में सामने आया और इसे ‘Gen Z Protest’ के तौर पर भी चर्चा मिली। आंदोलन को शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिला। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद कई छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस अभियान से जुड़े। संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया था। आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इसी दौरान पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच छात्रों की मांगों को लेकर देशभर में चर्चा बढ़ी। थरूर का बयान कांग्रेस के लिए क्यों अहम? शशि थरूर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अपनी ही पार्टी के अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है। आम तौर पर राजनीतिक दल अपने अभियानों को सफल बताने की कोशिश करते हैं, लेकिन थरूर ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि एक छात्र आंदोलन उसी मुद्दे पर कांग्रेस से ज्यादा असर पैदा करने में सफल रहा। इससे कांग्रेस के सामने दो बड़े सवाल खड़े होते हैं। पहला, युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए पार्टी की रणनीति कितनी प्रभावी है? दूसरा, क्या कांग्रेस बदलती युवा राजनीति और सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों की भाषा को पर्याप्त तेजी से समझ पा रही है? आंदोलन से आगे की राजनीति पर नजर पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा देश के लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों से जुड़ा है। ऐसे में यह सिर्फ एक राजनीतिक दल या संगठन का मुद्दा नहीं रह जाता। CJP के आंदोलन की प्रभावशीलता को लेकर थरूर की स्वीकारोक्ति कांग्रेस के लिए रणनीति बदलने का संकेत भी हो सकती है। अगर पार्टी युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है, तो केवल मुद्दे उठाना पर्याप्त नहीं होगा। उसे छात्रों के साथ लगातार संवाद, जमीनी संगठन और उनकी समस्याओं पर स्पष्ट राजनीतिक अभियान की जरूरत होगी। फिलहाल थरूर का बयान कांग्रेस के भीतर इस बहस को तेज कर सकता है कि पार्टी युवाओं की आवाज उठाने में पीछे क्यों रह गई और आने वाले समय में उसे अपनी रणनीति में क्या बदलाव करना चाहिए।
1509 – विजय नगर सम्राज्य के सम्राट के रूप में महाराज कृष्णदेव राय की ताजपोशी हुई। 1549 – फ्रांस ने इंग्लैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1605 – फीनलैंड के शहर ओलू की स्थापना स्वीडन के राजा चार्ल्स नवम ने की। 1609 – वेनिस की सीनेट ने गैलिलियो द्वारा तैयार दूरबीन का निरीक्षण किया। 1700 – डेनमार्क और स्वीडन में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। 1763 – वर्षों के संघर्ष के बाद अंतत: कैनेडा, पेरिस समझौते के आधार पर फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्र हुआ। 1771 - इंग्लैंड में हॉर्शम में पहला रिकॉर्ड शहर क्रिकेट मैच खेला गया। 1786 – अमेरिकी कांग्रेस ने चांदी के डॉलर और मुद्रा के लिए दसमलव प्रणाली को स्वीकार किया। 1788 - पहली बार 1614 के बाद से, फ्रांस के राजा लुई XVI मई 1789 में पहली बार सम्पदा-सामान्य बैठक बुलाई जाने के लिए सहमत हुए। 1839 - बीटा थिता पिई ऑक्सफ़ोर्ड, ओहियो में स्थापित की गई। 1864 – जेनेवा में रेड क्रॉस की स्थापना हुई। 1876 – थॉमस अल्वा एडिशन ने मिमियोग्राफ का पेटेंट कराया। 1887 - अंतोनियो गज़मैन ब्लैंको वेनेजुएला ने फ्रांस के राष्ट्रपति के रूप में अपनी अवधि पूरा किया। 1899 – ए.टी. मार्शल ने रेफ्रीजरेटर का पेटेंट कराया। 1900 – बोस्टन में पहले डेविस कप श्रृंखला की शरूआत हुई। 1919 – रावलपिंडी की संधि में ब्रिटेन ने अफगानिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। 1941 – नाज़ी जर्मनी के सैनिकों ने सोवियत संघ पर आक्रमण के तीन महीने बाद लेनिन्ग्राड का परिवेष्टन कर लिया। 1942 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बम्बई (अब मुंबई) सत्र में ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ पारित किया। 1945 – सोवियत संघ ने द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1945 – अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी टूमैन ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए। 1947 – पाकिस्तान ने अपने राष्ट्रीय ध्वज को मंजूरी दी। 1950 - फ्लोरेंस चाडविक ने 13 घंटे, 22 मिनट इंग्लिश चैनल में तैरने का रिकॉर्ड बनाया। 1954 – फ़िलीपीन की राजधानी मनीला में दक्षिण पूर्वी एशिया के संयुक्त सुरक्षा समझौते सीटो पर हस्ताक्षर हुए। 1956 – बेल्जियम के मेरीसिनेल्ले की खदान में आग लगने और विस्फोट से 26 श्रमिकों की मौत हुई। 1963 - इंग्लैंड के बकिंघमशायर शहर में ट्रेन डकैती हुई। 1967 – दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समूह की स्थापना के लिए इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड की बैठक आयोजित की गई। 1967 – आजादी के बाद पहली बार केंद्र सरकार को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 1973 - दक्षिण कोरियाई राजनीतिज्ञ किम डेए-जुंग को केसीआईए ने टोक्यो में अपहरण किया गया। 1988 – अफगानिस्तान में 9 साल के युद्ध के बाद रूसी सेना की वापसी शुरू हुई। 1988 – ईरान और इराक के बीच आठ वर्षों तक चले संघर्ष के बाद युद्ध विराम की घोषणा की गई। 1990 – इराक़ के तत्कालीन तानाशाह सददाम ने घोषणा की कि उसने कुवैत को 19वें प्रांत के रुप में अपने देश का भाग बना लिया है। 1991 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तरी और दक्षिण कोरिया की सदस्यता को मंजूरी दी। 1994 – इजरायल और जॉर्डन को जोडने वाले (लिंक) रोड़ खुला। 2002 - ताइवान आज़ाद होने के लिए जनमत संग्रह योजना से पीछे हटा। 2003 - पन्द्रह छोटे देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में ताइवान की सदस्यता का समर्थन किया। 2007 - एक्सनाना गुसमाओ पूर्वी तिमोर के प्रधानमंत्री बने। 2004 - इटली ने बोफ़ोर्स दलाली मामले के मुख्य आरोपी ओट्टाविया क्वात्रोची को भारत को सौंपने से इन्कार किया। 2004 - जापान ने चीन को पराजित करके एशिया कप फ़ुटबाल जीता। 2013 – पाकिस्तान के क्वेटा में आत्मघाती हमले में 28 लोग मारे गए। 2019 - राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने श्री नानाजी देशमुख (मरणोपरांत), डॉ. भूपेन्द्र कुमार हजारिका (मरणोपरांत) और श्री प्रणब मुखर्जी को ‘भारत रत्न’ अलंकरण प्रदान किए। 2019 - विश्व तीरंदाजी ने भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआइ) को अपने दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए निलंबित कर दिया । 2019 - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2019 को मंजूरी दी। 2020 - श्री गिरीश चंद्र मुर्मू ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के रूप में पदभार संभाला। 2020 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति और दर्शन समिति में, राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र- स्वच्छ भारत मिशन पर एक संवाद एवं अनुभव केंद्र का उद्घाटन किया। 2021 - तोक्यो ओलंपिक खेलों का समापन हुआ। 2022 - राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर मेले में भगदड़ से 3 महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई , कई घायल। 2022 - राज्यसभा ने उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को विदाई दी। 2022 - इस्रायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। 2022 - भारतीय सेना ने हिम ड्रोन-ए-थॉन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 2022 - 22 गोल्ड, 16 सिल्वर और 23 ब्रान्ज मेडल* के साथ भारत ने किया कामनवेल्थ गेम्स 2022 का सुखद समापन। 2023 - न्यायमूर्ति तालापत्र ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के 33वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 2023 - संसद ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2023 को राज्यसभा की मंजूरी के साथ पारित कर दिया। 2023 - राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग विधेयक 2023 को संसद की मंजूरी मिली व विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ। 2023 - केरल समान नागरिक संहिता के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाला पहला राज्य बना। 2023 - भारत-वियतनाम संयुक्त व्यापार उप-आयोग (जेटीएससी) की पांचवीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। 8 अगस्त को जन्मे व्यक्ति 1904 - त्रिभुवन नारायण सिंह - भारतीय राजनेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 1908 - सिद्धेश्वरी देवी - शास्त्रीय संगीत गायिका। 1915 - भीष्म साहनी, भारतीय लेखक। 1921 - वुलिमिरि रामालिंगस्वामी, भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक। 1940 – अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित क्रिकेटर दिलीप नारायण सरदेसाई का गोवा के मडगांव में जन्म हुआ। 1941 - लता देसाई - गुजरात की एक डॉक्टर जिन्होंने 1980 में अपने पति डॉ. अनिल देसाई और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर सोसाइटी फॉर एजुकेशन वेलफेयर की स्थापना की। 1942 - पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह खुल्लर। 1948 - कपिल सिब्बल - प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ। 1949 - प्रसन्न आचार्य - बारहवीं और तेरहवीं लोकसभा के सदस्य। 1952 - रामचंद्र सुधाकर राव - एक पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी। 1955 - राजीव महर्षि भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा संयुक्त राष्ट्र में बॉर्ड ऑफ ऑडिटर के अध्यक्ष बने। 1975 - जन बार्ला - भारत के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (2019) बने। 1994 - साइखोम मीराबाई चानू एक भारतीय भारोत्तोलन खिलाड़ी (ओलंपिक एथलीट)। 8 अगस्त को हुए निधन 1948 – जर्मनी के संगीतकार रिचर्ड एश्ट्रोविस का निधन हुआ। 2000 - सिधवनहल्ली निजलिंगप्पा एक वरिष्ठ कांग्रेसी राजनेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री थे। 2017 - ग्लेन ट्रैविस कैंपबेल एक अमेरिकी गायक, गिटारवादक, गीतकार, टेलीविजन होस्ट औरु अभिनेता थे। 2020 - पूर्व कांग्रेस नेता और तेलंगाना से आठ बार सांसद रहे नंदी येलैया (85) का निधन हुआ। 2021 - बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अनुपम श्याम (63) का लंबी बीमारी के बाद मुम्बई में निधन हुआ। 2023 - स्पेनिश प्रोफ़ेशनल रोड रेसिंग साइकिल चालक फेडरिको मार्टिन बहामोंटेस (95) का निधन हुआ। 2023 - प्रसिद्ध कलाकार, क्यूरेटर और कला कार्यकर्ता लिब्बी न्यूमैन (100) का निधन हो गया हुआ। 2023 - अमेरिकी संगीतकार सिक्सटो रोड्रिग्ज़ (81) का निधन हुआ। 8 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव मुनि श्री निस्वार्थसागर जी मुनि दीक्षा ( जैन , श्रावण शुक्ल चतुर्थी )। मेला तीज (जयपुर का दूसरा दिन)। त्रिभुवन नारायण सिंह जयन्ती। श्री वुलिमिरि रामालिंग स्वामी जयन्ती। श्री दिलीप नारायण सरदेसाई जयन्ती। श्री सिधवनहल्ली निजलिंगप्पा पुण्य दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।