नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर जोरदार चर्चा हुई। इस बहस में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से विधेयक के समर्थन की अपील की। राहुल गांधी का सरकार पर हमला लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना के मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है और इसे प्रतिनिधित्व से अलग करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि “संविधान से ऊपर मनुवाद” की सोच अपनाई जा रही है और यह कदम सामाजिक न्याय के खिलाफ है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पेश किए गए विधेयक एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के हितों के खिलाफ हैं और सरकार सत्ता पर कब्जा बनाए रखने की रणनीति अपना रही है। महिला आरक्षण बिल पर उठे सवाल राहुल गांधी ने सरकार से 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा लाने की मांग की और कहा कि विपक्ष इसे तुरंत लागू कराने में सहयोग करेगा। उनका कहना था कि वर्तमान प्रस्ताव में कई अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है, खासकर पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर। पीएम मोदी ने मांगा सर्वदलीय समर्थन वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण देश के लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। आगे भी जारी रहेगी बहस संसद में इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नेताओं के विचार सामने आने की उम्मीद है। यह बहस न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक ढांचे के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।
पटना/नई दिल्ली, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद Nitish Kumar के संभावित दिल्ली दौरे को लेकर राजधानी में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उनके लिए नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है और साथ ही उच्च स्तरीय Z+ सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस कदम को उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। सुनहरी बाग में मिला हाई-प्रोफाइल आवास दिल्ली के प्रतिष्ठित सुनहरी बाग इलाके में उन्हें बंगला नंबर 9 आवंटित किया गया है। यह ‘टाइप-8’ श्रेणी का आलीशान सरकारी आवास है, जिसमें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। आमतौर पर ऐसे आवास वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को ही दिए जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि उनकी स्थिति राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत बनी हुई है। संसद सत्र में भागीदारी की संभावना नीतीश कुमार का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे संसद के विशेष सत्र में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे में उनके लिए पहले से किए गए ये इंतजाम कई राजनीतिक संकेत भी दे रहे हैं। Z+ सुरक्षा का कड़ा घेरा दिल्ली में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF को सौंपी गई है। Z+ सुरक्षा के तहत करीब 58 सुरक्षाकर्मी उनके चारों ओर तैनात रहेंगे। • 10 सशस्त्र गार्ड आवास पर • 6 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) हर समय साथ • 24 जवान एस्कॉर्ट वाहनों में इसके अलावा एक वरिष्ठ अधिकारी पूरी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेगा। हर गतिविधि पर कड़ी नजर आवास पर आने-जाने वालों की जांच के लिए विशेष टीम तैनात की गई है। निगरानी के लिए वॉचर्स और वाहनों के लिए प्रशिक्षित ड्राइवर भी मौजूद रहेंगे। कुल मिलाकर उनके दिल्ली प्रवास को लेकर हर स्तर पर सुरक्षा और सुविधाओं की पुख्ता तैयारी की गई है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के विफल होने के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम पर भी खतरा मंडराने लगा है। युद्धविराम पर संकट, सैन्य गतिविधियां तेज अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी और संभावित नाकेबंदी के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच किसी भी समय हालात बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। आम लोगों में डर और अनिश्चितता ईरान के शहर करज और राजधानी तेहरान में रहने वाले लोगों के बीच गहरी चिंता देखी जा रही है। एक स्थानीय युवक ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि बातचीत से हल निकलेगा, लेकिन अब उसे लगता है कि युद्ध कभी भी दोबारा शुरू हो सकता है। वहीं, एक युवती ने उम्मीद जताई कि हालात जल्द सामान्य होंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा। इंटरनेट बंदी से बढ़ी मुश्किलें ईरान में पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिससे लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर हमलों से बचाव के लिए उठाया गया है, लेकिन आम नागरिकों और व्यवसायों को इससे भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कंटेंट क्रिएटर और छोटे कारोबारी खासतौर पर प्रभावित हुए हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “कोई भी इस संघर्ष में नहीं जीत रहा है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी जरूर मुश्किल हो गई है।” आर्थिक संकट और भविष्य की चिंता युद्ध और प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। लोगों का कहना है कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते जीवन आसान नहीं होगा। कुछ नागरिकों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू राजनीतिक कारणों से सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिससे समझौते की संभावना और कम हो गई है। शांति वार्ता के अगले दौर की कोई तारीख तय नहीं हुई है। ऐसे में ईरान के लोग अनिश्चितता, डर और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
रांची। झारखंड के ट्रेजरी घोटाले ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से पुलिस वेतन मद में करोड़ों की अवैध निकासी मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आईएएस कमेटी और सीआईडी जांच के आदेश दिये हैं। राज्य के सभी 33 ट्रेजरी की जांच शुरू हो गई है। वित्त मंत्री के प्रस्ताव पर बनी आइएएस कमेटी तकनीकी और आपराधिक दोनों पहलुओं की जांच कर रही है, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप है। झारखंड के बोकारो और हजारीबाग जिले में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घोटाले में पुलिस अधिकारियों के वेतन के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में वित्त विभाग की एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। वहीं, इस पूरे मामले में रची गई आपराधिक साजिश की परतें सीआईडी की तफ्तीश में खुलने लगी हैं। सीआइडी ने सभी एफआइआर की कॉपी ली वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, अब तक दर्ज सभी प्राथमिकियों को सीआईडी को ट्रांसफर किया जा रहा है। जहां आईएएस कमेटी वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय खामियों की जांच करेगी। वहीं, सीआईडी ये पता लगाएगी कि इस सुनियोजित चोरी के पीछे कौन से माफिया या अपराधी सक्रिय थे। जांच का दायरा केवल दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी जिलों में भी संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल की जाएगी। तकनीकी जांच में एजी की मदद झारखंड ट्रेजरी घोटाले की गहराई और तकनीकी बारीकियों को देखते हुए, वित्त विभाग ने प्रधान महालेखाकार (AG Office) से संपर्क किया है। सरकार चाहती है कि एजी ऑफिस के किसी अनुभवी अधिकारी को इस उच्चस्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया जाए। इससे ट्रेजरी सॉफ्टवेयर और बिलिंग प्रक्रिया में हुई हेराफेरी को पकड़ने में आसानी होगी और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकेंगे। 25 महीने में निकाली 63 बार सैलरी बोकारो ट्रेजरी से एक रिटायर पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी हुई। आशंका है कि ये पूरा घोटाला 50 करोड़ रुपये या उससे भी अधिक का हो सकता है। जुलाई 2016 में रिटायर हो चुके उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा नौकरी में दिखाया गया। नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पिछले 25 महीनों में कुल 63 बार फर्जी तरीके से वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया। उस पर बिल मैनेजमेंट सिस्टम (DDO Level) में छेड़छाड़ कर फर्जी वेतन बिल बनाने का गंभीर आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अकाउंटेंट ने घोटाले की रकम पहले अपने बैंक खाते में और बाद में अपनी पत्नी (अनु पांडेय) के खाते में ट्रांसफर की। पुलिस ने दोनों के खातों में जमा भारी राशि को फ्रीज कर दिया है। झारखंड में इस बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है। रडार पर सार्जेंट मेजर और डीएसपी स्तर के अधिकारी सरकारी विभाग में वेतन निकासी की प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें पुलिस लाइन से मास्टर रोल पर सार्जेंट मेजर के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद लेखापाल, बड़ा बाबू और अंत में डीएसपी (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) के हस्ताक्षर से ट्रेजरी से भुगतान होता है। ऐसे में जांच की आंच डीएसपी, सार्जेंट मेजर और लेखा शाखा के क्लर्कों तक पहुंचना तय माना जा रहा है। इसी तर्ज पर कभी बिहार-झारखंड में चारा घोटाला हुआ था। सिपाही से इंस्पेक्टर तक के वेतन में खेल शुरुआती जांच में पता चला है कि सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के कर्मचारियों के वेतन बिलों में छेड़छाड़ कर ये अवैध निकासी की गई है। मास्टर रोल से लेकर ट्रेजरी तक की चेन में शामिल हर अधिकारी अब जांच के दायरे में है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई है कि उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
Bihar में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और राज्य इस समय दो अलग-अलग मौसमीय परिस्थितियों का सामना कर रहा है। अगले 48 घंटे लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आएंगे, जबकि 19 अप्रैल से भीषण गर्मी का दौर शुरू होने की चेतावनी दी गई है। सीमांचल में बारिश और आंधी से राहत मौसम विभाग के अनुसार सीमांचल क्षेत्र–अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया–में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में बादल और बारिश की वजह से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। दक्षिण बिहार में बढ़ता तापमान दूसरी ओर दक्षिणी जिलों–रोहतास, भभुआ (कैमूर) और औरंगाबाद–में पछुआ हवाओं के कारण तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। शुष्क हवाओं ने गर्मी को और तीखा बना दिया है, जिससे दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। 19 अप्रैल से लू का कहर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 18 अप्रैल से ही कई जिलों में लू की शुरुआत हो सकती है, जो 19 अप्रैल से और तेज हो जाएगी। रेड अलर्ट वाले प्रमुख जिले: बक्सर रोहतास कैमूर भोजपुर औरंगाबाद गया पटना इन क्षेत्रों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है। पूरवा बनाम पछुआ हवा का असर इस समय बिहार में पूरवा (पूर्वी) और पछुआ (पश्चिमी) हवाओं के बीच खींचतान जारी है। जहां पूरवा हवा चल रही है, वहां तापमान अपेक्षाकृत कम है, जबकि पछुआ हवा वाले इलाकों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मौसम देखने को मिल रहा है। क्या रखें सावधानियां आने वाले दिनों में तापमान तेजी से बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है– दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें धूप में निकलते समय सिर और शरीर को ढककर रखें
पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। इससे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार, अभी भाजपा के कई बड़े नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी, बिहार में कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है। फिलहाल सरकार का कामकाज मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav संभाल रहे हैं। 36 मंत्रियों की सीमा संवैधानिक नियमों के तहत बिहार में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में: जातीय संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व राजनीतिक समीकरण इन सभी को साधना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है नए चेहरों को मौका देकर सरकार संदेश देना चाहती है जवाबदेही और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा का बढ़ सकता है दबदबा इस बार कैबिनेट में एक बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि भाजपा की हिस्सेदारी बढ़े। कई अहम विभाग अभी मुख्यमंत्री के पास हैं विस्तार के बाद इनका बंटवारा सहयोगी दलों में होगा इससे सत्ता संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। सहयोगी दलों की भी अहम भूमिका मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले कुछ नाम सहयोगी दलों पर निर्भर करेंगे: Upendra Kushwaha अपने खेमे से नाम तय करेंगे Chirag Paswan के पास LJP (रामविलास) कोटे का फैसला रहेगा बिहार कैबिनेट विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा। इससे यह तय होगा कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी और किन चेहरों पर सरकार भरोसा जताती है।
पटना: 17 अप्रैल 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने आज के रेट अपडेट किए हैं। इस बार कीमतों में मिला-जुला असर देखने को मिला है, लेकिन बिहार के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतों ने बढ़त दर्ज की है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। बिहार में बढ़ी कीमतें, आम आदमी पर असर राज्य के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल के दाम बढ़े हुए नजर आए: Patna: ₹105.54 (+0.31) Bhagalpur: ₹106.66 (+0.64) Muzaffarpur: ₹106.10 (+0.32) हालांकि, Gaya में हल्की राहत मिली है, जहां कीमत ₹106.25 (-0.03) रही। देश के बड़े शहरों में क्या है हाल? देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतों पर नजर डालें: Mumbai: ₹103.54 (+0.04) Delhi: ₹94.77 (कोई बदलाव नहीं) Kolkata: ₹105.41 (स्थिर) Chennai: ₹100.80 (-0.10) Bengaluru: ₹102.92 (-0.07) डीजल की कीमतों में मिली राहत डीजल के मोर्चे पर आज थोड़ी राहत देखने को मिली है: Mumbai: ₹90.03 (स्थिर) Delhi: ₹87.67 (स्थिर) Patna: ₹91.78 (+0.29) Bhagalpur: ₹92.81 (+0.60) Chennai: ₹92.39 (-0.09) क्यों बदलते रहते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? भारत में ईंधन की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाए गए वैट (VAT) का भी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। घर बैठे ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट आप SMS के जरिए भी अपने शहर का ताजा फ्यूल रेट जान सकते हैं: Indian Oil: “RSP” लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें
पटना, एजेंसियां। पटना में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक्शन मोड में नजर आए। शपथ लेने के अगले ही दिन गुरुवार सुबह वे सचिवालय पहुंचे और सभी विभागों के प्रधान सचिवों के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक को सरकार की प्राथमिकताओं और कार्यशैली तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक तेजी और तालमेल पर जोर सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने, विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और प्राथमिकता वाले मुद्दों पर फोकस करने को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब फैसले केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका असर जमीन पर भी दिखना चाहिए। नई सरकार का पहला बड़ा संदेश बुधवार को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से ही इस बात पर नजर थी कि नई सरकार किस दिशा में काम करेगी। सचिवालय में हुई यह बैठक उसी का पहला बड़ा संकेत मानी जा रही है। इससे साफ हो गया है कि सरकार शुरुआत से ही प्रशासनिक मोर्चे पर सक्रिय रहना चाहती है। सीमित मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी फिलहाल राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है, जिससे सरकार का पूरा कामकाज सीमित नेताओं के हाथ में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह समेत 29 विभागों की जिम्मेदारी है। वहीं जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary को 10 और Bijendra Yadav को 8 विभाग सौंपे गए हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद होगा बदलाव सरकार ने संकेत दिया है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का पुनर्वितरण किया जाएगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री ही सभी विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे। शुरुआती दिनों में बढ़ी गतिविधि नई सरकार के शुरुआती दिन प्रशासनिक बैठकों, विभागीय समीक्षा और जिम्मेदारियों के बंटवारे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट है कि सरकार कामकाज में तेजी लाने और नतीजे दिखाने के लिए दबाव में है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सहकारी संस्था सेवा बोर्ड (UPCISB) ने 2026 में 2085 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग और तकनीकी सेवाओं के विभिन्न पदों पर होगी। 25 अप्रैल से उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.upcisb.upsdc.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता : मैनेजर : बी.कॉम में 55% अंक या इकोनॉमिक्स/मैथ्स/स्टैटिक्स में न्यूनतम 55% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। कंप्यूटर साइंस में ओ लेवल डिग्री। जूनियर मैनेजर : बी.कॉम में 55% अंक या बी.टेक (सीएस/आईटी), बीसीए, एमसीए या बैंकिंग/फायनेंस/एचआर में बीबीए/एमबीए की डिग्री। असिस्टेंट/कैशियर : न्यूनतम 55% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। सीसीसी कंप्यूटर सर्टिफिकेट प्राप्त होना चाहिए। असिस्टेंट इंजीनियर : सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री। जूनियर इंजीनियर (सिविल) : सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या ग्रेजुएशन की डिग्री। स्टेनोग्राफर : ग्रेजुएशन की डिग्री। हिंदी/अंग्रेजी शॉर्टहैंड (80 शब्द प्रति मिनट), टाइपिंग (30/40 शब्द प्रति मिनट) सीसीसी सर्टिफिकेट जरूरी। असिस्टेंट अकाउंटेंट : 50% अंकों के साथ बीएससी, सीसीसी या ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर कोर्स किया होना जरूरी है। उम्र सीमा : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 40 साल फीस : सामान्य/ओबीसी : 500 रुपए एससी/एसटी : 250 रुपए चयन प्रक्रिया : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम इंटरव्यू परीक्षा पैटर्न : प्रीलिम्स एग्जाम : सब्जेक्ट क्वेश्चन मार्क्स क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड 35 35 रीजनिंग एबिलिटी 35 35 हिंदी एंड इंग्लिश 20 20 कोऑपरेटिव 10 10 टोटल 100 100 मेन्स एग्जाम : पोस्ट टाइप क्वेश्चन मार्क्स आल पोस्ट 120 120 सैलरी : मैनेजर : 34,000 - 88,000 रुपए प्रतिमाह जूनियर मैनेजर : 29,600 - 82,100 रुपए प्रतिमाह असिस्टेंट/कैशियर : 25,620 - 64,670 रुपए प्रतिमाह इंजीनियर : 35,400 - 1,77,500 रुपए प्रतिमाह ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.upcisb.upsdc.gov.in पर जाएं। UPCISB Recruitment 2026 पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करें। पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स दर्ज करें। एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स सहित फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। आवेदन फीस भरें। अब सब्मिट बटन पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर लें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। Central Reserve Police Force (CRPF) ने कांस्टेबल (टेक्निकल एंड ट्रेड्समैन) और Pioneer Wing के तहत 9,175 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर है, जो 10वीं पास हैं और देश सेवा का सपना देखते हैं। आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखें आवेदन शुरू: 20 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि: 19 मई 2026 आवेदन माध्यम: ऑनलाइन इच्छुक उम्मीदवार CRPF की आधिकारिक वेबसाइट rect.crpf.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। किन पदों पर होगी भर्ती? इस भर्ती में विभिन्न ट्रेड और टेक्निकल पद शामिल हैं: Tradesman: कुक वॉशरमैन नाई मोची Technical: मोटर मैकेनिक ड्राइवर Pioneer Wing: मेसन प्लंबर इलेक्ट्रिशियन हर पद के लिए अलग-अलग स्किल और योग्यता निर्धारित की गई है। योग्यता और आयु सीमा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता: 10वीं पास कुछ तकनीकी पदों के लिए ITI या संबंधित ट्रेड सर्टिफिकेट जरूरी ड्राइवर पद के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य आयु सीमा: 18 से 23 वर्ष आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट मिलेगी ऐसे करें आवेदन आधिकारिक वेबसाइट rect.crpf.gov.in पर जाएं Recruitment सेक्शन में जाएं “Constable (Tradesman, Technical, Pioneer) 2026” लिंक पर क्लिक करें रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें आवेदन फॉर्म भरें जरूरी दस्तावेज अपलोड करें फीस जमा करें फॉर्म सबमिट कर प्रिंटआउट निकाल लें सैलरी और सुविधाएं चयनित उम्मीदवारों को पे लेवल-3 के तहत सैलरी मिलेगी: ₹21,700 से ₹69,100 प्रति माह साथ में मेडिकल सुविधा, भत्ते और जॉब सिक्योरिटी क्यों है यह मौका खास? यह भर्ती न केवल 10वीं पास युवाओं को सरकारी नौकरी का अवसर देती है, बल्कि देश सेवा का गर्व भी प्रदान करती है। बड़ी संख्या में पद होने के कारण चयन की संभावना भी अधिक मानी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारतीय रेलवे में अप्रेंटिसशिप के तहत 2801 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह मौका खासतौर पर उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने 10वीं पास करने के साथ ITI भी किया है। इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा नहीं होती, बल्कि उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों के 10वीं और ITI में अच्छे अंक हैं, उनके लिए यह शानदार अवसर साबित हो सकता है। इच्छुक उम्मीदवार 11 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। क्या है आयु सीमा? इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 11 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, SC, ST, OBC और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए? आवेदन के लिए उम्मीदवार का कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ITI प्रमाणपत्र होना चाहिए। खास बात यह है कि ITI उसी ट्रेड में होना चाहिए, जिस ट्रेड के लिए उम्मीदवार आवेदन करना चाहता है। आवेदन शुल्क कितना है? इस भर्ती के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं SC, ST और सभी महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। कैसे होगा चयन? चयन प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। इसमें कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के 10वीं और ITI के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। मेरिट में शामिल अभ्यर्थियों को आगे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद उनका मेडिकल टेस्ट होगा। सभी चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों का अंतिम चयन किया जाएगा। कैसे करें आवेदन? उम्मीदवार आवेदन के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट rrc.scr.indianrailways.gov.in पर जाएं। वहां “Apprentice Recruitment 2026” या “Notification” लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद New Registration करके लॉगिन करें। मांगी गई जानकारी भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट कर दें।
नई दिल्ली: युवाओं में तेजी से बढ़ते ई-सिगरेट (E-Cigarette) के इस्तेमाल को लेकर एक नया शोध सामने आया है, जिसने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष के युवाओं में ई-सिगरेट का उपयोग शुरुआती संज्ञानात्मक गिरावट (Cognitive Decline) और डिमेंशिया के बढ़ते जोखिम से जुड़ा पाया गया है। यह शोध ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में किशोरों और युवाओं के बीच ई-सिगरेट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मस्तिष्क के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में निकोटिन का प्रभाव सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। कैसे किया गया अध्ययन? इस क्रॉस-सेक्शनल स्टडी में थाईलैंड के 232 युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें दो समूहों में बांटा गया–ई-सिगरेट उपयोग करने वाले और नॉन-स्मोकर्स। शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क की कार्यक्षमता को मापने के लिए Montreal Cognitive Assessment जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया, साथ ही ADHD (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) और इमोशनल इंटेलिजेंस से जुड़े पहलुओं का भी आकलन किया गया। क्या निकला निष्कर्ष? अध्ययन में पाया गया कि: ई-सिगरेट उपयोग करने वालों में डिमेंशिया के जोखिम वाले व्यक्तियों की संख्या काफी अधिक थी। जो युवा एक महीने के भीतर ई-सिगरेट छोड़ने की योजना नहीं बना रहे थे, उनमें जोखिम 6 गुना तक बढ़ा पाया गया। वहीं, छह महीने तक छोड़ने की कोई योजना न रखने वालों में यह जोखिम 4 गुना अधिक था। हालांकि, ADHD के लक्षण और इमोशनल इंटेलिजेंस के स्तर में दोनों समूहों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया। शुरुआती संकेत, लेकिन खतरे की घंटी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन डिमेंशिया की पुष्टि नहीं करता, बल्कि इसके शुरुआती संकेतों की ओर इशारा करता है। यानी यह जोखिम भविष्य में गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। कारण और सीमाएं शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी है, इसलिए यह तय नहीं किया जा सकता कि ई-सिगरेट सीधे तौर पर डिमेंशिया का कारण बनती है। इसके पीछे अन्य सामाजिक या व्यवहारिक कारण भी हो सकते हैं। क्यों जरूरी है सतर्कता? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर युवाओं में इस तरह के शुरुआती संज्ञानात्मक बदलाव बढ़ते हैं, तो भविष्य में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि: युवाओं में ई-सिगरेट के नुकसान को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए निकोटिन की लत से बचने के लिए काउंसलिंग और रोकथाम कार्यक्रम चलाए जाएं आगे और लंबे समय तक चलने वाले शोध किए जाएं
ब्रेन कैंसर के सबसे खतरनाक प्रकार Glioblastoma (GBM) के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एक नई रिसर्च में ऐसी थेरेपी विकसित की गई है, जिसने प्रीक्लिनिकल मॉडल में अधिकांश मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह खत्म कर दिया—वह भी बिना किसी विषाक्त प्रभाव (toxicity) या दोबारा लौटने (recurrence) के। कैसे काम करती है नई थेरेपी? इस अभिनव उपचार में Synthetic Super-Enhancers (SSEs) नामक तकनीक का उपयोग किया गया। यह तकनीक कैंसर स्टेम सेल्स के अपने जीन कंट्रोल सिस्टम को टारगेट करती है, जिससे केवल ट्यूमर कोशिकाओं पर असर होता है और स्वस्थ कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं। शोध के दौरान: सिर्फ एक बार थेरेपी देने पर 83% मामलों में ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया 11 महीनों तक कोई साइड इफेक्ट या ट्यूमर की वापसी नहीं देखी गई दोबारा कैंसर सेल डालने पर भी नया ट्यूमर नहीं बना, जो लंबे समय तक सुरक्षा का संकेत देता है डबल एक्शन: ट्यूमर खत्म और इम्यून सिस्टम एक्टिव इस उपचार की खासियत इसका ड्यूल मैकेनिज्म है। इसमें: एक हिस्सा सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है दूसरा हिस्सा शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है यह प्रक्रिया एक तरह के इन-सिटू वैक्सीन की तरह काम कर सकती है, जो शरीर को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और भविष्य में उनसे लड़ने के लिए तैयार करती है। मरीजों के टिश्यू पर भी सफल परीक्षण शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को GBM मरीजों के असली टिश्यू सैंपल्स पर भी परखा। नतीजों में पाया गया कि: थेरेपी ने केवल ट्यूमर कोशिकाओं को निशाना बनाया स्वस्थ ब्रेन सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा यह पहलू बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रेन कैंसर के इलाज में आसपास के स्वस्थ टिश्यू को बचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। आगे क्या? वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज ब्रेन कैंसर के इलाज में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अब टीम जल्द ही मानव परीक्षण (clinical trials) शुरू करने की योजना बना रही है, जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता को और बेहतर तरीके से समझा जा सके।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बादाम को सुपरफूड माना जाता है और यह सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि बादाम को छीलकर खाना चाहिए या बिना छीले। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, दोनों तरीकों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सही तरीका जानना जरूरी है ताकि शरीर को अधिकतम पोषण मिल सके। छिलके में छिपे हैं जरूरी पोषक तत्व विशेषज्ञों के मुताबिक बादाम के छिलके में पॉलीफेनॉल्स, विटामिन E और डाइटरी फाइबर जैसे अहम पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर को एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा देते हैं और त्वचा व दिमाग के लिए फायदेमंद होते हैं। बताया जाता है कि छिलका हटाने से करीब 70 प्रतिशत पॉलीफेनॉल्स कम हो जाते हैं, जिससे इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे घट सकते हैं। भिगोकर छीलकर खाने के फायदे वहीं, बादाम को भिगोकर छीलकर खाने से पाचन आसान हो जाता है। छिलके में मौजूद टैनिन एंजाइम की क्रिया को बाधित करता है, जिससे पाचन धीमा हो सकता है। भिगोने से बादाम नरम हो जाता है और शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। इसके अलावा, फाइटिक एसिड की मात्रा भी कम हो जाती है, जिससे कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे मिनरल्स का अवशोषण बेहतर होता है। क्या है सही तरीका? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपका पाचन मजबूत है तो आप बादाम छिलके सहित खा सकते हैं। वहीं, जिन लोगों को पाचन संबंधी दिक्कत होती है, उनके लिए भिगोकर छीलकर खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। कुल मिलाकर, दोनों तरीकों से बादाम खाने के फायदे मिलते हैं, लेकिन जरूरत और शरीर के अनुसार तरीका चुनना बेहतर होता है। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है। किसी भी तरह का डाइट बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
यूरोप में किए गए एक बड़े अध्ययन ने Severe Asthma के मरीजों में मौजूद अन्य बीमारियों (comorbidities) के खास पैटर्न की पहचान की है। इस रिसर्च से पता चलता है कि गंभीर अस्थमा केवल एक फेफड़ों की बीमारी नहीं, बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जुड़ी एक जटिल स्थिति है। क्या है Severe Asthma और Multimorbidity? Severe asthma ऐसे मरीजों में देखा जाता है, जहां: लक्षण लगातार बने रहते हैं बार-बार अटैक (exacerbations) आते हैं हाई-डोज दवाओं के बावजूद फेफड़ों की क्षमता कम रहती है अक्सर इन मरीजों में कई दूसरी बीमारियां भी साथ होती हैं, जिसे “multimorbidity” कहा जाता है। क्या कहता है यूरोप का बड़ा अध्ययन? 11 यूरोपीय देशों के 2,690 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि: अलग-अलग बीमारियां रैंडम तरीके से नहीं जुड़तीं बल्कि कुछ तय पैटर्न (clusters) में एक साथ दिखाई देती हैं ये पैटर्न अलग-अलग क्षेत्रों में भी समान पाए गए तीन प्रमुख ‘क्लस्टर’ सामने आए रिसर्च में तीन स्थिर पैटर्न (clusters) की पहचान हुई: 1. स्टेरॉयड से जुड़ा क्लस्टर Osteoporosis (हड्डियों की कमजोरी) वजन बढ़ना (steroid-induced weight gain) यह लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के असर को दर्शाता है 2. एलर्जिक क्लस्टर Eczema Allergic Rhinitis यह एलर्जी से जुड़ी प्रोफाइल को दर्शाता है 3. अपर एयरवे क्लस्टर Chronic Sinusitis Nasal Polyps यह नाक और साइनस से जुड़ी समस्याओं को दिखाता है अन्य बीमारियों में दिखी विविधता कुछ अन्य स्थितियां जैसे: मोटापा (Obesity) Bronchiectasis Acid Reflux (GERD) मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं इनका पैटर्न स्थिर नहीं रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि severe asthma हर मरीज में अलग तरह से प्रकट हो सकता है। इलाज और परिणामों पर असर अध्ययन में पाया गया कि: स्टेरॉयड से जुड़ा पैटर्न सबसे खराब परिणामों से जुड़ा था ज्यादा दवाओं की जरूरत फेफड़ों की खराब कार्यक्षमता ज्यादा अटैक Maximal multimorbidity ग्रुप में: कई बीमारियां एक साथ Biologic therapies की ज्यादा जरूरत डॉक्टरों के लिए क्या संकेत? यह रिसर्च बताती है कि: मरीजों को सिर्फ अस्थमा के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर इलाज करना चाहिए स्टेरॉयड पर निर्भर मरीजों में जल्दी वैकल्पिक इलाज (steroid-sparing therapies) पर विचार करना जरूरी है हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट जरूरी है
हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, खासकर पितरों की शांति और मोक्ष के लिए। वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या आज यानी 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए पितृ कर्म सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। लेकिन कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे तर्पण का पूरा फल नहीं मिल पाता। ऐसे में जरूरी है कि तर्पण करते समय कुछ खास सावधानियों का पालन किया जाए। तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान 1. सही दिशा का चुनाव करें तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। अन्य दिशा में किया गया तर्पण निष्फल हो सकता है। 2. काले तिल का प्रयोग जरूरी तर्पण के जल में काले तिल डालना अनिवार्य माना गया है। बिना तिल के किया गया तर्पण पितरों तक नहीं पहुंचता। ध्यान रखें कि केवल काले तिल का ही उपयोग करें। 3. तांबे के पात्र का उपयोग करें पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है। स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से तर्पण करना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। 4. शुभ समय का रखें ध्यान तर्पण का सबसे उपयुक्त समय दोपहर (मध्याह्न) का होता है। सुबह स्नान के बाद मध्याह्न में तर्पण करना शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद तर्पण वर्जित है। 5. संयमित व्यवहार अपनाएं अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें। तर्पण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय पीपल की पूजा करें अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है। पंचबलि भोग लगाएं भोजन बनाने के बाद गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए अन्न का अंश निकालना शुभ माना जाता है। दान का विशेष महत्व इस दिन तिल, गुड़, अनाज और वस्त्र का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इससे वंश वृद्धि, सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैशाख अमावस्या का दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर होता है। इस दिन विधि-विधान से तर्पण और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है। ऐसे में शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन कर आप पितरों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बेहद शुभ और पुण्यदायी पर्व माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जिसका कभी क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि उसका फल कई जन्मों तक मिलता है। साल 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही दान-पुण्य का अत्यधिक महत्व बताया गया है। लेकिन आखिर इस दिन दान क्यों इतना खास माना जाता है? इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। पौराणिक कथा: धर्मदास की अटूट श्रद्धा प्राचीन समय में धर्मदास नाम का एक गरीब व्यापारी रहता था। उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन वह बेहद धार्मिक और श्रद्धालु था। एक बार उसे अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में पता चला। जब यह दिन आया, तो उसने प्रातः स्नान कर विधि-विधान से पूजा की और अपनी क्षमता के अनुसार दान किया। उसने जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को जल से भरे घड़े, जौ, सत्तू, चावल, नमक, गुड़, घी, पंखे और वस्त्र दान किए। परिवार का विरोध, लेकिन अडिग विश्वास धर्मदास की गरीबी को देखते हुए उसके परिवार ने उसे इतना दान करने से रोका। उन्हें चिंता थी कि घर का खर्च कैसे चलेगा। लेकिन धर्मदास ने विश्वास नहीं छोड़ा और हर साल अक्षय तृतीया पर दान करता रहा। भक्ति का मिला “अक्षय” फल धर्मदास की निस्वार्थ भक्ति और दान के प्रभाव से अगले जन्म में वह कुशावती नगर का एक समृद्ध और प्रतापी राजा बना। कहा जाता है कि उसके यज्ञ में स्वयं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) भी ब्राह्मण रूप में शामिल होते थे। दान का आध्यात्मिक महत्व अक्षय तृतीया पर दान करने के पीछे मुख्य मान्यता यह है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य “अक्षय” यानी कभी समाप्त न होने वाला पुण्य देता है। इसलिए लोग इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, जल, वस्त्र, सोना या अन्य जरूरी चीजें दान करते हैं। अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, त्याग और परोपकार का प्रतीक है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से किया गया छोटा सा दान भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है—और उसका फल कभी समाप्त नहीं होता।
आज, 14 अप्रैल 2026 को पूरे देश में मेष संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी तिथि को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि सूर्य की उच्च राशि मानी जाती है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य अपनी उच्च स्थिति में होते हैं, तो उनका प्रभाव पृथ्वी पर अत्यंत शुभ और शक्तिशाली होता है। यही कारण है कि मेष संक्रांति को कई क्षेत्रों में नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। यह दिन जीवन में नई योजनाओं, नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलावों का प्रतीक माना जाता है। क्या करें इस दिन? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ होता है। यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी लाभकारी माना गया है। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है, उनके लिए यह उपाय अत्यंत फलदायी माना गया है। दान-पुण्य का विशेष महत्व इस दिन दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से गेहूं, गुड़, अन्न, मसूर की दाल, लाल वस्त्र और तांबे का दान करना लाभकारी होता है। जरूरतमंदों को संतरे का दान भी शुभ फल देने वाला बताया गया है। मंत्र जाप से मिलेगा लाभ मेष संक्रांति के दिन सूर्य मंत्रों का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं: ॐ घृणि सूर्याय नमः – स्वास्थ्य लाभ के लिए ॐ सूर्याय नमः – सामान्य कल्याण के लिए ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् – जीवन में ऊर्जा और प्रेरणा के लिए आस्था और ज्योतिष का संगम ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि मेष संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी जीवन में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
हिंदू धर्म में भगवान परशुराम की जयंती अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। साल 2026 में यह पावन पर्व रविवार, 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। हालांकि तिथि को लेकर कुछ भ्रम बना रहता है, लेकिन पंचांग के अनुसार इस बार जयंती की सही तारीख 19 अप्रैल ही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जिसे अक्षय तृतीया के रूप में भी जाना जाता है। यही कारण है कि इस दिन का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। तिथि और शुभ समय द्रिक पंचांग के अनुसार: तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 7:27 बजे भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल (संध्या समय) में हुआ माना जाता है, इसलिए 19 अप्रैल को ही जयंती मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है। कौन हैं भगवान परशुराम? भगवान परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे धरती पर अधर्म और अत्याचार के अंत के लिए अवतरित हुए थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अन्यायी और अत्याचारी राजाओं का नाश कर धर्म की पुनः स्थापना की। पूजा विधि (पूजन कैसे करें) परशुराम जयंती के दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं: स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें स्थापना: भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पूजन सामग्री: चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें भोग: फल और मिठाई का भोग लगाएं आरती व पाठ: परशुराम स्तुति और मंत्रों का पाठ करें दान-पुण्य: इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है धार्मिक महत्व परशुराम जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ता है। चूंकि यह दिन अक्षय तृतीया भी होता है, इसलिए इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता।
टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा के बीच Vodafone Idea (Vi) ने अपने ग्राहकों के लिए एक किफायती और सुविधाजनक फैमिली प्लान लॉन्च किया है। ₹751 का यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो पूरे परिवार के मोबाइल कनेक्शन को एक ही बिल में मैनेज करना चाहते हैं। यह प्लान Vi Max Family लाइनअप का हिस्सा है और शुरुआत में ही दो कनेक्शनों–एक प्राइमरी और एक सेकेंडरी–को कवर करता है, जिससे छोटे परिवारों के लिए यह एक स्मार्ट और बजट-फ्रेंडली विकल्प बन जाता है। प्राइमरी यूजर को मिलते हैं प्रीमियम फायदे इस प्लान में प्राइमरी यूजर को सबसे ज्यादा बेनिफिट्स दिए गए हैं। हर महीने 70GB डेटा के साथ यूजर आसानी से वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे काम कर सकता है। इसके अलावा: रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक अनलिमिटेड नाइट डेटा 200GB तक डेटा रोलओवर अनलिमिटेड कॉलिंग हर महीने 3000 SMS साथ ही यूजर को Vi Movies & TV और Vi Games जैसे प्लेटफॉर्म का एक्सेस भी मिलता है, जिससे एंटरटेनमेंट का पूरा पैकेज मिलता है। सेकेंडरी यूजर को भी मजबूत पैकेज सेकेंडरी यूजर को भी इस प्लान में 40GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है। SMS दोनों यूजर्स के बीच शेयर होता है, जिससे यह प्लान कपल्स और छोटे परिवारों के लिए और ज्यादा उपयोगी बन जाता है। बड़े परिवार के लिए भी आसान विकल्प अगर परिवार में दो से ज्यादा लोग हैं, तो इस प्लान में ₹299 प्रति अतिरिक्त सदस्य के हिसाब से 7 और कनेक्शन जोड़े जा सकते हैं। हर सदस्य को अलग डेटा और कॉलिंग बेनिफिट मिलता है, जिससे पूरा परिवार एक ही प्लान में कवर हो सकता है। एक्स्ट्रा डेटा और स्मार्ट शेयरिंग डेटा खत्म होने की चिंता को कम करने के लिए Vi इस प्लान में 10GB अतिरिक्त शेयर डेटा भी देता है, जिसे सभी यूजर्स जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं। फ्री OTT और डिजिटल बेनिफिट्स इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका OTT ऑफर है। यूजर्स अपनी पसंद के दो प्लेटफॉर्म चुन सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: Amazon Prime Video (6 महीने) SonyLIV (360 दिन) JioHotstar (1 साल) इसके अलावा Norton Mobile Security जैसे प्रीमियम फीचर्स भी दिए गए हैं, जो इसे एक ‘वैल्यू फॉर मनी’ प्लान बनाते हैं।
वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म YouTube ने यूजर्स के लिए एक अहम फीचर रोलआउट किया है, जिसके जरिए अब Shorts फीड को पूरी तरह हटाया जा सकता है। कंपनी ने अपने “टाइम मैनेजमेंट” टूल में नया 0 मिनट (Zero Minute) ऑप्शन जोड़ा है, जिससे शॉर्ट वीडियो देखने की लिमिट तुरंत खत्म हो जाती है। कैसे काम करता है नया फीचर? YouTube के इस अपडेट के बाद यूजर्स: Shorts देखने की समय सीमा 0 मिनट सेट कर सकते हैं ऐसा करते ही Shorts फीड पूरी तरह बंद हो जाती है Shorts टैब पर वीडियो की जगह सिर्फ लिमिट पूरी होने का नोटिफिकेशन दिखता है रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फीचर पहले 15 मिनट की न्यूनतम सीमा के साथ आया था, जिसे अब बढ़ाकर जीरो कर दिया गया है। होम स्क्रीन से भी गायब होंगे Shorts नई सेटिंग लागू करने के बाद: होम स्क्रीन से Shorts के सुझाव हट जाएंगे ऐप कम डिस्ट्रैक्टिंग हो जाएगा यूजर सिर्फ जरूरी या लंबा कंटेंट देख पाएंगे यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो बिना सोचे-समझे लगातार स्क्रॉल (डूमस्क्रॉलिंग) करते रहते हैं। सभी यूजर्स के लिए रोलआउट पहले यह फीचर पैरेंटल कंट्रोल तक सीमित था अब इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स (एडल्ट अकाउंट्स) के लिए जारी किया जा रहा है बच्चों के अकाउंट में यह सेटिंग लॉक भी की जा सकती है क्यों जरूरी है यह फीचर? आज के समय में YouTube Shorts जैसे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर लत (addiction) को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस अपडेट के फायदे: स्क्रीन टाइम कंट्रोल फोकस और प्रोडक्टिविटी में सुधार बच्चों के लिए सुरक्षित कंटेंट मानसिक तनाव और नींद की समस्या में कमी ऐसे करें Shorts बंद (Step-by-Step) YouTube ऐप खोलें Settings में जाएं Time Management सेक्शन चुनें “Shorts Feed Limit” ऑन करें समय सीमा में 0 मिनट सेट करें YouTube का यह नया फीचर डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यूजर्स के पास यह विकल्प है कि वे चाहें तो शॉर्ट वीडियो की लत से पूरी तरह दूरी बना सकें और अपने समय का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।
भारत में AI तकनीक को नया आयाम देते हुए Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के लिए Personal Intelligence फीचर रोलआउट कर दिया है। यह फीचर यूजर्स को पहले से ज्यादा पर्सनल और कॉन्टेक्स्ट-बेस्ड जवाब देने में सक्षम बनाता है। पहले यह सुविधा केवल अमेरिका में पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब भारत में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया गया है। क्या है Personal Intelligence फीचर? Personal Intelligence एक ऐसा AI सिस्टम है, जो अलग-अलग ऐप्स से जानकारी लेकर उसे जोड़कर जवाब देता है। यह फीचर यूजर्स को इन ऐप्स से कनेक्ट करने की सुविधा देता है: Gmail Google Photos YouTube Search इससे Gemini यूजर के सवालों का जवाब देते समय कई सोर्स से डेटा लेकर ज्यादा सटीक और पर्सनल जानकारी देता है। कैसे काम करता है यह फीचर? मान लीजिए आप जयपुर ट्रिप प्लान कर रहे हैं– Gemini Gmail से आपकी बुकिंग डिटेल्स निकाल सकता है Photos से सेव किए गए स्क्रीनशॉट या नोट्स दिखा सकता है YouTube हिस्ट्री के आधार पर जगहों की सिफारिश कर सकता है यानि अब एक ही जवाब में पूरी जानकारी मिल सकती है, बिना अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत के। यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी पर जोर Google के अनुसार: यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा यूजर खुद तय करेगा कि कौन-से ऐप्स कनेक्ट करने हैं डेटा का उपयोग सिर्फ जवाब देने के लिए होगा, AI ट्रेनिंग के लिए नहीं यूजर कभी भी इस फीचर को बंद कर सकता है अभी भी डेवलपमेंट स्टेज में कंपनी ने यह भी माना है कि यह फीचर अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी गलत या जरूरत से ज्यादा पर्सनल जवाब मिल सकते हैं AI कॉन्टेक्स्ट को गलत समझ सकता है हालांकि यूजर्स फीडबैक देकर इसे सुधारने में मदद कर सकते हैं। क्यों है यह बड़ा अपडेट? यह फीचर AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां: AI सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि संदर्भ समझता है यूजर के डेटा को जोड़कर बेहतर सुझाव देता है डिजिटल असिस्टेंट ज्यादा “पर्सनल” बनता है Gemini का Personal Intelligence फीचर भारत में AI उपयोग के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर्स प्राइवेसी और सुविधा के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।
Android यूजर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Google जल्द ही एक नया NFC-आधारित फीचर Tap to Share लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone के AirDrop की तरह काम करेगा। हाल ही में लीक हुई जानकारी में इस फीचर का इंटरफेस और काम करने का तरीका सामने आया है। कैसे काम करेगा Tap to Share? लीक के मुताबिक, इस फीचर के जरिए यूजर्स सिर्फ दो Android स्मार्टफोन को पास लाकर या हल्का ओवरलैप करके डेटा शेयर कर सकेंगे। दोनों फोन अनलॉक होने चाहिए फोन के ऊपरी हिस्से को एक-दूसरे के करीब रखना होगा कनेक्शन बनने पर स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा अगर कनेक्शन नहीं बनता, तो फोन को बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई करने का सुझाव दिया गया है। क्या-क्या शेयर कर पाएंगे? Tap to Share के जरिए यूजर्स कई तरह का डेटा तुरंत शेयर कर सकेंगे: कॉन्टैक्ट्स फोटो और वीडियो लिंक लोकेशन अन्य फाइल्स यह फीचर Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम को और तेज और आसान बना सकता है। AirDrop से कितना अलग? हालांकि यह फीचर AirDrop जैसा है, लेकिन इसमें थोड़ा अलग तरीका अपनाया गया है। Android स्मार्टफोन्स में NFC एंटेना अलग-अलग जगहों पर होता है, इसलिए Google ने “ओवरलैप” करने का तरीका अपनाया है, ताकि कनेक्शन जल्दी बन सके। कब होगा लॉन्च? रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीचर Android 17 के साथ लॉन्च किया जा सकता है। यह पहले से कुछ डिवाइसेस जैसे Pixel और Samsung (One UI 8.5) में टेस्टिंग फेज में देखा गया है। आने वाले समय में Oppo समेत अन्य ब्रांड्स भी इसे अपने डिवाइसेस में शामिल कर सकते हैं। Android यूजर्स के लिए क्या है फायदा? Tap to Share फीचर Android यूजर्स के लिए फाइल शेयरिंग को बेहद आसान और इंस्टेंट बना देगा। बिना इंटरनेट, बिना ऐप–सिर्फ फोन टच करते ही डेटा ट्रांसफर हो सकेगा।
नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती के लिए आयोजित AIIMS Nursing Officer Recruitment Common Eligibility Test (NORCET) 2026 का रिजल्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। लंबे समय से परिणाम का इंतजार कर रहे उम्मीदवार अब संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.ac.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। AIIMS द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस परीक्षा के लिए कुल 97,149 उम्मीदवारों को सीट आवंटित की गई थी, जिनमें से 92,026 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 51,451 उम्मीदवारों को क्वालिफाई घोषित किया गया है। इसके अलावा, स्टेज-II परीक्षा के लिए 14,527 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह परीक्षा 11 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी और अब चयनित अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी स्टेज-II में शामिल होना होगा, जो 30 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी। कटऑफ भी जारी रिजल्ट के साथ AIIMS ने कैटेगरी वाइज कटऑफ पर्सेंटाइल भी जारी कर दी है। अनारक्षित (UR): 93.5887683 पर्सेंटाइल EWS: 78.9831134 पर्सेंटाइल OBC: 84.2077239 पर्सेंटाइल SC: 81.9605328 पर्सेंटाइल ST: 74.4746050 पर्सेंटाइल PwBD उम्मीदवारों के लिए अलग से कटऑफ निर्धारित की गई है। ऐसे चेक करें रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.ac.in पर जाएं होमपेज पर Recruitment सेक्शन में क्लिक करें “AIIMS NORCET Result 2026” लिंक खोलें रिजल्ट PDF में अपना रोल नंबर सर्च करें भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर लें इस बार बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के सफल होने से स्टेज-II में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
झारखंड का औद्योगिक शहर Jamshedpur अब केवल इंडस्ट्री के लिए ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के मजबूत केंद्र के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। यहां के कई प्रतिष्ठित संस्थान न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं, बल्कि छात्रों को इंटरनेशनल प्लेसमेंट तक के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए जमशेदपुर छात्रों की पहली पसंद बनता जा रहा है। मैनेजमेंट के लिए सबसे आगे XLRI मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए XLRI Xavier School of Management देश के शीर्ष संस्थानों में गिना जाता है। NIRF रैंकिंग 2025 में इसे टॉप मैनेजमेंट कॉलेजों में 10वां स्थान मिला है। प्लेसमेंट हाइलाइट्स: 576 छात्रों ने प्लेसमेंट में भाग लिया 145 कंपनियों ने भर्ती की 2 इंटरनेशनल ऑफर एवरेज पैकेज: ₹31.40 लाख इंटरनेशनल हाईएस्ट पैकेज: ₹1.10 करोड़ डोमेस्टिक हाईएस्ट पैकेज: ₹59 लाख यहां Amazon, Accenture, Deloitte जैसी बड़ी कंपनियां भर्ती के लिए आती हैं। इंजीनियरिंग के लिए NIT जमशेदपुर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में National Institute of Technology Jamshedpur प्रमुख विकल्प है। NIRF 2025 में इसे इंजीनियरिंग कैटेगरी में 82वीं रैंक मिली है। प्लेसमेंट रिकॉर्ड: हाईएस्ट पैकेज: ₹82 लाख टॉप रिक्रूटर्स: Microsoft, Samsung, Amazon यहां BTech के कई लोकप्रिय ब्रांच उपलब्ध हैं, जिनमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग शामिल हैं। विविध कोर्सेज के लिए नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी Netaji Subhas University Jamshedpur में UG, PG, डिप्लोमा और स्किल-बेस्ड कोर्सेज की विस्तृत रेंज उपलब्ध है। यह यूनिवर्सिटी UGC से मान्यता प्राप्त है और यहां टेक्निकल से लेकर मैनेजमेंट, साइंस और लॉ तक के कोर्स कराए जाते हैं। लड़कियों के लिए प्रमुख विकल्प: जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी Jamshedpur Women's University खासतौर पर छात्राओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह यूनिवर्सिटी UG, PG और PhD तक के कोर्स उपलब्ध कराती है। पारंपरिक शिक्षा के लिए JKS कॉलेज JKS College Jamshedpur, जो 1970 में स्थापित हुआ था, आज भी आर्ट्स और कॉमर्स के छात्रों के बीच लोकप्रिय है। यह कोल्हान यूनिवर्सिटी से संबद्ध है और BA, BCom जैसे कोर्स प्रदान करता है। मेडिकल और डेंटल शिक्षा में भी विकल्प Awadh Dental College and Hospital BDS और MDS कोर्स के लिए जाना जाता है। यहां एडमिशन NEET स्कोर के आधार पर होता है और हर साल सीमित सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। अन्य प्रमुख संस्थान इसके अलावा Karim City College, Tata Main Hospital Medical College जैसे कई संस्थान भी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी में लंबे समय से चली आ रही शैक्षणिक अव्यवस्थाओं को लेकर सोमवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। NSUI के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। सेशन लेट से परेशान छात्र छात्रों का कहना है कि लगातार सेशन लेट होने की वजह से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। समय पर डिग्री और अंकपत्र नहीं मिलने के कारण नौकरी और आगे की पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं। कई छात्रों ने बताया कि सालों की मेहनत के बावजूद उन्हें समय पर रिजल्ट और सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं। “शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई” प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा हजारों छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को राज्य स्तर पर ले जाया जाएगा। छात्र संगठनों ने कई अहम मांगें रखी हैं: लंबित सत्रों को नियमित किया जाए। सेमेस्टर परीक्षाओं का शेड्यूल जल्द जारी हो। पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी बने। अंक गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच हो। डिग्री और अंकपत्र समय पर दिए जाएं। कॉपियां गायब होने पर भी उठे सवाल छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के गायब होने की घटनाओं पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पद जल्द भरने और “एक व्यक्ति एक पद” नियम लागू करने की मांग भी उठाई गई। बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी कहा कि कई कॉलेजों में अभी तक बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। गर्ल्स कॉमन रूम, साफ पानी, शौचालय, लाइब्रेरी, लैब, वाई-फाई और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं की कमी छात्रों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। स्पेशल परीक्षा के रिजल्ट पर भी सवाल छात्रों ने सत्र 2017-20 और 2018-21 के स्पेशल एग्जाम के रिजल्ट जल्द जारी करने की मांग की। छात्र नेताओं ने साफ कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आज के दौर में Artificial Intelligence (AI) सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में से एक बन चुका है। खासकर Canada में AI प्रोफेशनल्स की भारी मांग है, जहां कंपनियां स्किल्ड उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी और बेहतरीन करियर अवसर दे रही हैं। लेबर मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, फाइनेंस और टेक सेक्टर में AI विशेषज्ञों की हजारों नौकरियों की जरूरत होगी। ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में AI की पढ़ाई करना एक शानदार अवसर साबित हो सकता है। QS Ranking के अनुसार कनाडा की टॉप AI यूनिवर्सिटीज QS World University Rankings 2026 के अनुसार, कनाडा में कई यूनिवर्सिटीज AI एजुकेशन के लिए दुनिया की टॉप संस्थानों में शामिल हैं: University of Toronto (टॉप-20 में शामिल) University of British Columbia University of Waterloo McGill University Université de Montréal Simon Fraser University University of Alberta ये सभी संस्थान वैश्विक टॉप-100 में शामिल हैं और AI रिसर्च व इनोवेशन के लिए जाने जाते हैं। क्यों है Canada AI स्टडी के लिए बेस्ट? AI और Machine Learning में मजबूत रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल टेक कंपनियों की मौजूदगी पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और जॉब के अवसर इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग AI में कौन-कौन से करियर ऑप्शन? AI की पढ़ाई करने के बाद आप इन हाई-डिमांड रोल्स में करियर बना सकते हैं: Machine Learning Engineer Data Scientist AI Ethics & Policy Consultant Robotics Specialist
अमेरिका और Iran के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump बातचीत और समझौते के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर भारी सैन्य घेराबंदी कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, इस मिशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, 12 से अधिक युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। समुद्र में अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन इस ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। CENTCOM का कहना है कि कोई भी जहाज अगर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाता है या वहां से निकलता है, तो उसे रोका जाएगा और जांच की जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन निगरानी कड़ी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह घेराबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और तटीय सीमा तक सीमित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्रिय है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ‘डार्क फ्लीट’ पर भी शिकंजा अमेरिका ने उन जहाजों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिन्हें ‘डार्क फ्लीट’ कहा जाता है। ये ऐसे जहाज होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर गुप्त रूप से ईरानी तेल की ढुलाई करते हैं। ट्रंप बोले- ईरान डील के लिए तैयार इसी बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। उन्होंने कहा, “ईरान आज उन शर्तों को मानने को तैयार है, जिनके लिए वह पहले राजी नहीं था।” ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। सीजफायर टूटा तो फिर जंग राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत असफल रही, तो युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
म्यांमार में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। देश के नए राष्ट्रपति और सैन्य प्रमुख Min Aung Hlaing ने देशभर में फांसी की सजा पाए सभी कैदियों की सजा को उम्रकैद में बदलने का ऐलान किया है। यह फैसला उनके राष्ट्रपति बनने के महज एक हफ्ते के भीतर लिया गया, जिसे सरकार ‘मेल-मिलाप’ की दिशा में कदम बता रही है, जबकि आलोचक इसे छवि सुधारने की कोशिश मान रहे हैं। 2021 तख्तापलट के बाद पहली बड़ी राहत गौरतलब है कि फरवरी 2021 में सेना ने तख्तापलट कर लोकतांत्रिक सरकार को हटा दिया था। इसके बाद Myanmar में सैन्य शासन के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर सख्त कार्रवाई हुई और कई लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, सत्ता संभालने के बाद पहले ही साल में 130 से ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी गई थी, हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। पूर्व राष्ट्रपति को भी मिली रिहाई इस आम माफी के तहत म्यांमार के पूर्व राष्ट्रपति Win Myint को भी रिहा कर दिया गया है। उन्हें तख्तापलट के बाद गिरफ्तार किया गया था और अब वे पूरी तरह आजाद हैं। हजारों कैदियों को राहत सरकार ने इस फैसले के साथ बड़े पैमाने पर कैदियों को राहत देने की भी घोषणा की है। रिपोर्ट के मुताबिक: 4,300 से ज्यादा कैदियों को रिहा किया जाएगा 179 विदेशी नागरिक भी रिहाई सूची में शामिल हैं 40 साल से कम सजा पाने वालों की सजा में एक-छठा तक की कमी की जाएगी त्योहार के मौके पर लिया गया फैसला यह फैसला म्यांमार के पारंपरिक नए साल ‘थिंगयान’ के मौके पर लिया गया, जब आमतौर पर कैदियों को माफी देने की परंपरा रही है। लोकतंत्र समर्थक संगठनों का कहना है कि यह कदम केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करने और सैन्य शासन को “नागरिक चेहरा” देने की रणनीति हो सकती है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा समुद्री सैन्य कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, अरब सागर में ईरान के तटों और बंदरगाहों की घेराबंदी की गई है, जिसकी कमान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) संभाल रहा है। 100 से ज्यादा विमान और 10 हजार सैनिक तैनात CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत झोंकी है। 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 12 से ज्यादा जंगी जहाज 100+ लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और सर्विलांस सिस्टम तैनात हैं, जिनमें F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और E-2D कमांड कंट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) को भी संदिग्ध जहाजों पर नजर रखने और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। क्या है अमेरिका की रणनीति? CENTCOM के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जहाज ईरानी सीमा में प्रवेश न करे और न ही वहां से बाहर निकले। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर उठाया गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि यह नाकाबंदी केवल ईरान के तटों और बंदरगाहों तक सीमित है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है रोक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को ब्लॉक नहीं किया गया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग है, इसलिए इसे खुला रखा गया है। ट्रंप का बयान: ‘यह रूटीन ऑपरेशन’ Donald Trump ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘रूटीन ऑपरेशन’ बताया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना पूरी तरह नियंत्रण में है और कोई भी जहाज इस क्षेत्र में बिना अनुमति के आवाजाही नहीं कर पा रहा है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे अरब सागर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी बल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे हालात और संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे ‘रूटीन’ बता रहा है, लेकिन इतने बड़े सैन्य जमावड़े ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट देने का ऐलान किया है। यह रकम अगले सप्ताह तक मिलने की उम्मीद है और इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने की पुष्टि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मदद की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि: सऊदी अरब 3 अरब डॉलर का नया डिपॉजिट देगा पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की राशि को भी 2028 तक बढ़ाया जाएगा इससे देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी UAE के पैसे लौटाने के बाद आई राहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने अपने डिपॉजिट वापस ले लिए थे। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया लेकिन बाजार में चिंता बढ़ गई थी ऐसे में सऊदी अरब की मदद को “टाइमली सपोर्ट” माना जा रहा है। कूटनीतिक हलचल के बीच फैसला यह आर्थिक सहायता ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में: शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व से मुलाकात की शांति वार्ता से पहले दोनों देशों में बातचीत हुई इसके तुरंत बाद आर्थिक सहायता का ऐलान हुआ सैन्य सहयोग भी बढ़ा सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत होता दिख रहा है। पाकिस्तान का सैन्य दस्ता सऊदी अरब पहुंचा शाह अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनाती वायुसेना के लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित आयात पर दबाव कर्ज का बोझ ऐसे में 3 अरब डॉलर की यह मदद: रुपये को स्थिर करने में मदद करेगी बाजार में भरोसा बढ़ाएगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबिलिटी मजबूत करेगी आगे क्या? यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता के लिए उसे आर्थिक सुधारों पर भी जोर देना होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल World Liver Day के मौके पर लोगों को लिवर की सेहत के प्रति जागरूक किया जाता है। इस बार भी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लिवर से जुड़ी बीमारियों से ज्यादा खतरनाक उससे जुड़े मिथक और गलत धारणाएं हैं, जो लोगों को सही इलाज से दूर कर देती हैं। बढ़ रही हैं लिवर से जुड़ी बीमारियां खराब खानपान, शराब का सेवन, मोटापा और सुस्त जीवनशैली के कारण आजकल कम उम्र के लोग भी फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है। 1: डिटॉक्स ड्रिंक्स से लिवर साफ होता है विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर खुद ही शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सक्षम होता है। इसके लिए किसी विशेष डिटॉक्स डाइट या ड्रिंक की जरूरत नहीं होती। संतुलित आहार ही सबसे बेहतर उपाय है। 2: केवल शराब से ही लिवर खराब होता है यह पूरी तरह सही नहीं है। शराब के अलावा संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारियां और गलत खानपान भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 3: लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं लिवर की बीमारी अक्सर देर से सामने आती है। जब तक लक्षण जैसे पीलिया, थकान या पेट दर्द दिखते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। 4: सप्लीमेंट्स से बचाव संभव है डॉक्टरों का कहना है कि कोई भी सप्लीमेंट लिवर को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख सकता। कई सप्लीमेंट्स उल्टा नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। सही आदतें ही असली इलाज विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वस्थ लिवर के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। जागरूक रहना और मिथकों से दूर रहना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर जोरदार चर्चा हुई। इस बहस में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से विधेयक के समर्थन की अपील की। राहुल गांधी का सरकार पर हमला लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना के मुद्दे को नजरअंदाज कर रही है और इसे प्रतिनिधित्व से अलग करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि “संविधान से ऊपर मनुवाद” की सोच अपनाई जा रही है और यह कदम सामाजिक न्याय के खिलाफ है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पेश किए गए विधेयक एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के हितों के खिलाफ हैं और सरकार सत्ता पर कब्जा बनाए रखने की रणनीति अपना रही है। महिला आरक्षण बिल पर उठे सवाल राहुल गांधी ने सरकार से 2023 के महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा लाने की मांग की और कहा कि विपक्ष इसे तुरंत लागू कराने में सहयोग करेगा। उनका कहना था कि वर्तमान प्रस्ताव में कई अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है, खासकर पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर। पीएम मोदी ने मांगा सर्वदलीय समर्थन वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण देश के लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। आगे भी जारी रहेगी बहस संसद में इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नेताओं के विचार सामने आने की उम्मीद है। यह बहस न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक ढांचे के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है।
नई दिल्ली: लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 पर चर्चा के दौरान बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। जम्मू-कश्मीर से सांसद Aga Syed Ruhullah Mehdi के एक बयान पर सदन का माहौल गरमा गया, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कड़ी आपत्ति जताई। क्या बोले रुहुल्ला मेहदी? बहस के दौरान आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने कहा कि परिसीमन के बाद देश में राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि बड़े राज्यों का दबदबा इतना बढ़ जाएगा कि छोटे राज्यों की आवाज दब जाएगी। अपने बयान में उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत, बंगाल और उत्तर-पूर्व को भी “कश्मीर जैसा अनुभव” होना चाहिए, ताकि उन्हें समझ आ सके कि वहां क्या हुआ है। उनके इस बयान पर तुरंत सदन में हंगामा शुरू हो गया। अमित शाह ने जताई कड़ी आपत्ति मेहदी के बयान पर गृह मंत्री अमित शाह अपनी सीट से खड़े हो गए और कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह का बयान देना उचित नहीं है। इसके बाद सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर चिंता मेहदी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बड़े राज्यों की सीटें इतनी बढ़ सकती हैं कि वे अकेले ही संसद में फैसले लेने की स्थिति में आ जाएंगे। उनका तर्क था कि इससे: छोटे राज्यों का राजनीतिक प्रभाव घटेगा संसद में संतुलन बिगड़ेगा क्षेत्रीय आवाज कमजोर होगी ‘जेरिमेंडरिंग’ का आरोप मेहदी ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन के नाम पर ‘जेरिमेंडरिंग’ हो सकती है, यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं इस तरह तय की जाएं कि किसी खास पार्टी या वर्ग को फायदा मिले। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले भी इस तरह के अनुभव सामने आ चुके हैं, जिससे अल्पसंख्यकों की राजनीतिक ताकत प्रभावित हुई। धारा 370 हटाने का भी उठाया मुद्दा बहस के दौरान मेहदी ने 2019 में Article 370 हटाए जाने का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी जम्मू-कश्मीर की सहमति नहीं ली गई थी और अब परिसीमन के जरिए उनकी आवाज और कमजोर हो सकती है। बढ़ती सियासी गर्मी परिसीमन बिल को लेकर संसद के भीतर और बाहर सियासत तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने वाला कदम बता रहा है। लोकसभा में हुई यह तीखी बहस साफ संकेत देती है कि परिसीमन बिल आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है। यह सिर्फ सीटों के पुनर्निर्धारण का मामला नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे और प्रतिनिधित्व के संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण को एक बार फिर निर्विरोध चुना गया है। यह उनका तीसरा कार्यकाल है, जो उच्च सदन में उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है। शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को उन्हें औपचारिक रूप से इस पद के लिए निर्वाचित किया गया। इससे पहले यह पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद उनकी नियुक्ति हुई। पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण की कार्यशैली और अनुभव की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि पूरे सदन को उन पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपने कार्यकाल में हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और करियर पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हरिवंश नारायण का पत्रकारिता में लंबा अनुभव रहा है और उन्होंने उच्च मानकों के साथ काम किया है। उनकी लेखनी तेज लेकिन संतुलित रही है। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। चंद्रशेखर और जेपी से जुड़ा रहा संबंध पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश का पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने उनके जीवन पर पुस्तकें भी लिखी हैं। साथ ही उनका जन्म जेपी (जयप्रकाश नारायण) के गांव में हुआ था, जिससे उनकी सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। काशी से शिक्षा और ग्रामीण पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री ने बताया कि हरिवंश की शिक्षा काशी में हुई है और उनकी जड़ें ग्रामीण समाज से जुड़ी हैं। इसी कारण वे आम लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं और समाज से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी रूप से रखते हैं। शपथ और निर्वाचन की प्रक्रिया हरिवंश नारायण को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा द्वारा उपसभापति पद के लिए प्रस्तावित किया गया, जिसका समर्थन एस. फांग्नोन कोन्यक ने किया। इसके बाद वे निर्विरोध चुने गए और 10 अप्रैल को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली थी। अब उनके नए कार्यकाल से सदन की कार्यवाही और सुचारू संचालन की उम्मीद जताई जा रही है
कोलकाता: Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों में दागी और करोड़पति प्रत्याशियों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले ADR और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच द्वारा 1,475 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया कि: कुल 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं 294 उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप (हत्या, हत्या का प्रयास, दुष्कर्म आदि) इनमें 19 पर हत्या और 98 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज दागी उम्मीदवारों में BJP सबसे आगे पार्टीवार आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले हैं: BJP: 70% (152 में से 106 उम्मीदवार दागी) TMC: 43% उम्मीदवारों पर केस CPI(M): 43% Congress: 26% 66 सीटें ‘रेड अलर्ट’ घोषित रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण की 152 सीटों में से 66 सीटों को ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है। इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। धनबल में TMC सबसे आगे सिर्फ बाहुबल ही नहीं, धनबल के मामले में भी चुनाव काफी भारी दिख रहा है: उम्मीदवारों की औसत संपत्ति: 1.34 करोड़ रुपये TMC उम्मीदवार सबसे अमीर, औसत संपत्ति 5.70 करोड़ रुपये कुल 309 उम्मीदवार (21%) करोड़पति महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम रिपोर्ट में महिला भागीदारी को लेकर निराशाजनक तस्वीर सामने आई है: कुल 1,478 उम्मीदवारों में सिर्फ 167 महिलाएं (11%) टिकट वितरण में महिलाओं को अब भी सीमित अवसर कब होगी वोटिंग? West Bengal की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में होगा: पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल नतीजे: 4 मई ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में “विनिंग एबिलिटी” को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस बार साफ छवि को प्राथमिकता देते हैं या फिर धनबल और बाहुबल का असर बरकरार रहता है।
नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “महिला-विरोधी सोच” रखने वाली पार्टियां ही इस बिल का विरोध कर रही हैं। ‘महिला-विरोधी मानसिकता वाले कर रहे विरोध’ आईएएनएस से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उनकी विचारधारा महिलाओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के आधार पर सीटों का निर्धारण पहले ही हो चुका है और दक्षिण भारतीय राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। विपक्षी नेताओं पर सीधा निशाना भाजपा सांसद ने कई बड़े नेताओं पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ममता बनर्जी डीएमके और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सोच महिलाओं के हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में वह इस बिल को पारित नहीं करा पाई। संसद सत्र में होगी अहम चर्चा संसद के विस्तारित सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव पर भी दिया बड़ा बयान अनुराग ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हार तय है 4 मई को सत्ता परिवर्तन होगा ममता बनर्जी अपनी उपलब्धियां गिनाने में असफल रही हैं उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य को “भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ” से मुक्त किया जाएगा। सियासी टकराव तेज महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव Abhishek Banerjee ने वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में वही लोग वोट देंगे जो पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में दिल्ली या Bihar में वोट डाल चुका है और फिर बंगाल में वोट देने आता है, तो TMC कार्यकर्ता उसे ऐसा करने से रोकेंगे। “बाहरी वोटरों से जीतना चाहती है भाजपा” Abhishek Banerjee ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party (भाजपा) बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में रहने वाले गैर-बंगाली लोगों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहर से आकर वोट डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वोटर लिस्ट पर विवाद गहराया राज्य में नई वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। करीब 1 करोड़ पुराने नाम हटाए जाने का दावा 27 लाख लोग SIR ट्रिब्यूनल में विचाराधीन, जिन्हें इस बार वोट का अधिकार नहीं मिलेगा Abhishek Banerjee ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि: सभी मतभेद भुलाकर चुनाव पर ध्यान दें गुटबाजी से दूर रहें पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ें उन्होंने इसे Mamata Banerjee के नेतृत्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि पार्टी को जीत दिलाए। “आत्मसंतुष्टि से बचें” Abhishek Banerjee ने कहा कि भले ही सर्वे में पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही हो, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाकर काम करने पर भी जोर दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद को दिशा दे सकता है।
कर्नाटक की कांग्रेस राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। करीब 30 विधायक New Delhi पहुंचकर पार्टी नेतृत्व से कैबिनेट में जगह की मांग करने वाले हैं। पहली बार चुने गए विधायकों की मांग पहली बार जीतकर आए विधायकों ने खुलकर अपनी दावेदारी पेश की है। उनका कहना है कि: कैबिनेट फेरबदल में कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाया जाए नए चेहरों को भी सरकार में मौका मिलना चाहिए सीनियर विधायकों का दबाव वहीं 3 से ज्यादा बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ विधायक भी पीछे नहीं हैं। करीब 40 सीनियर विधायकों में से 20 को मंत्री बनाने की मांग उनका तर्क है कि सरकार में अनुभव का उपयोग जरूरी है दिल्ली में बड़े नेताओं से मुलाकात 30 विधायक Delhi पहुंचकर वरिष्ठ विधायक Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, K C Venugopal और Randeep Singh Surjewala से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। “हर किसी की इच्छा मंत्री बनने की” मांड्या से विधायक Ravikumar Gowda ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर किसी की होती है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री पर निर्भर करेगा। अंदरूनी खींचतान बढ़ी 38 विधायकों ने पहले ही नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग रखी विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी अब जल्द ही फिर बैठक कर आगे की रणनीति तय होगी क्यों अहम है यह मुद्दा? यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार को लेकर अंदरूनी दबाव बढ़ता जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री इस संतुलन को कैसे साधते हैं।