रांची। झारखंड की राजधानी रांची में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित महिला आक्रोश मार्च ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। मोराबादी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा, जिसमें हजारों महिला कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने भाग लिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए महिलाएं ‘नारी सुरक्षा’ और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई’ जैसे नारों के साथ सड़कों पर उतरीं। इस दौरान शहर में कई मार्गों को डायवर्ट करना पड़ा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल मार्च का मुख्य उद्देश्य राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ते अपराध और कथित रूप से बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना था। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनता खासकर महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना रैली में कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और राज्य सरकार को जमकर घेरा। नेताओं ने कहा कि यह मार्च सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब मौजूदा सरकार से नाराज है और आने वाले समय में इसका असर राजनीतिक परिदृश्य पर भी देखने को मिलेगा। राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन यह आक्रोश मार्च भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच भी साबित हुआ। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने पार्टी के जनाधार को दर्शाया। रैली के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह महिलाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर है और सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
गिरिडीह। गिरिडीह में एक निजी स्कूल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक प्रिंसिपल पर नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह घटना पिछले करीब छह महीनों से लगातार हो रही थी। छात्रा ने विरोध किया तो उसे स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती थी। मार्कशीट लेने के दौरान हुई कथित घटना परिजनों के अनुसार, 22 अप्रैल को छात्रा स्कूल में अपनी मार्कशीट लेने गई थी। आरोप है कि प्रिंसिपल ने उसे अपने कक्ष में बुलाकर अनुचित व्यवहार किया और किसी को न बताने की चेतावनी दी। घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। परिवार की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला जब परिजनों ने छात्रा से पूछताछ की, तब उसने पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजन और स्थानीय लोग छात्रा को लेकर Pachamba Police Station पहुंचे, जहां लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी राजीव कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। स्थानीय लोगों में रोष घटना के सामने आने के बाद इलाके में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाता है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और सख्त निगरानी हो।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने अपनी नई फिल्म "Khalnayak Returns" का ऐलान कर दिया है। 1993 की सुपरहिट फिल्म Khalnayak के इस सीक्वल का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। करीब 33 साल बाद संजय दत्त एक बार फिर ‘बल्लू’ के किरदार में नजर आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और खूंखार दिख रहा है। टीजर में दिखा हिंसा और बदले का जुनून टीजर की शुरुआत आग और तबाही के दृश्य से होती है, जहां चारों ओर विनाश का माहौल दिखाई देता है। बेड़ियों में जकड़ा बल्लू का किरदार खून से सना हुआ नजर आता है। एक घायल शख्स उससे जान की भीख मांगता है, लेकिन बल्लू के चेहरे पर कोई रहम नहीं दिखता। टीजर में उनका डायलॉग और ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने की झलक पुराने दौर की याद दिलाती है। फैंस में जबरदस्त क्रेज टीजर सामने आते ही फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर लोग संजय दत्त के इस अवतार की तारीफ कर रहे हैं और फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, कई फैंस की मांग है कि इस फिल्म को Aditya Dhar डायरेक्ट करें, ताकि कहानी और भी दमदार बन सके। 1993 की हिट फिल्म का सीक्वल मूल फिल्म ‘खलनायक’, जिसे सुभाष घई ने निर्देशित किया था, उस समय की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। इसमें Madhuri Dixit और Jackie Shroff भी अहम भूमिकाओं में थे।अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘खलनायक रिटर्न्स’ बॉक्स ऑफिस पर क्या कमाल दिखाती है और क्या यह पुरानी फिल्म की सफलता को दोहरा पाएगी।
मुंबई, एजेंसियां। मई में रिलीज होने जा रही फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। लगभग 100 करोड़ रुपये के बड़े बजट में बनी यह फिल्म ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें कई बड़े सितारे अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की खास बात इसकी मल्टी-स्टार कास्ट और कलाकारों को दी गई भारी फीस है। मुख्य कलाकार और उनकी फीस फिल्म में रितेश देशमुख लीड रोल में हैं, जो छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ अभिनय किया है, बल्कि निर्देशन और सह-लेखन भी संभाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए उन्हें 15 से 18 करोड़ रुपये की फीस मिली है। संजय दत्त फिल्म में अफजल खान की भूमिका में नजर आएंगे और उन्हें 8 से 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं अभिषेक बच्चन संभाजी शाहजी भोसले के किरदार में दिखेंगे, जिनकी फीस 6 से 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अन्य कलाकारों की कमाई और भूमिकाएं जिनिलिया देशमुख साईबाई के किरदार में नजर आएंगी और उन्हें 1 से 2 करोड़ रुपये मिले हैं। वह फिल्म की निर्माता भी हैं। महेश मांजरेकर लखूजी जाधव की भूमिका निभा रहे हैं और उनकी फीस 2 से 3 करोड़ रुपये बताई गई है। फरदीन खान शाहजहां के किरदार में नजर आएंगे और उन्हें भी लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं विद्या बालन को ताजुल मुखिदारत के रोल के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। रिलीज और विवाद फिल्म 1 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। हालांकि ट्रेलर रिलीज के बाद इसे कुछ आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। कुछ दर्शकों ने ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है, खासकर शिवाजी और अफजल खान के बीच दिखाए गए दृश्यों को लेकर। इसके बावजूद फिल्म को लेकर उत्साह बरकरार है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में आज अहम दिन है, जहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा पहुंचते ही आत्मविश्वास से भरा अंदाज दिखाया। सदन में प्रवेश करने से पहले उन्होंने कैमरे के सामने विक्ट्री साइन दिखाया, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। विशेष सत्र में शुरू हुई बहस शुक्रवार सुबह 11 बजे से विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हुआ, जिसमें विश्वास मत पर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर करीब 90 मिनट तक बहस चलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बहुमत साबित करने के लिए सदन में 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। एनडीए को बहुमत का भरोसा एनडीए गठबंधन के नेताओं और विधायकों ने विश्वास जताया है कि सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। जेडीयू विधायक श्याम रजक ने इसे मात्र औपचारिकता बताया, जबकि पंकज मिश्रा ने दावा किया कि महागठबंधन के कुछ विधायक भी एनडीए के संपर्क में हैं। अन्य विधायकों ने भी सरकार को मजबूत समर्थन मिलने की बात कही। विपक्ष पर निशाना, समर्थन का दावा एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि कुछ विपक्षी विधायक सरकार के पक्ष में आ सकते हैं। इससे सदन में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। सरकार के लिए अहम परीक्षा यह विश्वास मत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। हालांकि, सदन में एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण सरकार के बहुमत साबित करने में किसी बड़ी चुनौती की संभावना कम बताई जा रही है। राजनीतिक नजरें परिणाम पर टिकीं अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में मतदान के दौरान क्या परिणाम सामने आता है। यह सत्र बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार की सियासत में एक बार फिर महिलाओं की भागीदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। नीतीश कुमार की अगुवाई में बनी जनता दल (यू) की नई राष्ट्रीय टीम में 24 सदस्यों में से सिर्फ 3 महिलाओं को जगह मिली है। यह कुल मिलाकर करीब 12.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है, जो ‘आधी आबादी’ के अनुपात और 33 प्रतिशत हिस्सेदारी की अपेक्षा से काफी कम है। महिलाओं को सीमित जिम्मेदारी नई टीम में कहकशां परवीन को महासचिव, जबकि रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बाकी अधिकांश पद पुरुष नेताओं को दिए गए हैं। इस स्थिति ने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब जदयू महिला सशक्तिकरण और नारी वंदन जैसे मुद्दों का समर्थन करती रही है। भरोसेमंद नेताओं को अहम जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व ने अपने भरोसेमंद नेताओं को अहम पद सौंपे हैं। संजय झा को एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर संगठन में अति पिछड़े वर्ग की भागीदारी को मजबूत करने की कोशिश की गई है। नई टीम में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण जदयू की इस टीम में कई अनुभवी नेताओं के साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया गया है। महासचिव पद पर रमेश सिंह कुशवाहा और सचिव पद पर दयानंद राय, रूही तागुंग और निवेदिता कुमारी जैसे नाम शामिल हैं। प्रतिनिधित्व पर जारी बहस हालांकि, टीम के गठन के बाद महिलाओं की कम भागीदारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक दल महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देंगे, तो ‘आधी आबादी’ की भागीदारी का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सरकारी दफ्तरों में कामकाज को लेकर नया ऑफिस शेड्यूल लागू कर दिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की ओर से जारी निर्देश में सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए तय समय पर दफ्तर आना अनिवार्य कर दिया गया है। अब कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज होगी और लापरवाही पर कार्रवाई भी की जाएगी। तय समय पर आना जरूरी, लेट होने पर होगी कार्रवाई नए आदेश के अनुसार सभी कर्मचारियों को सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में उपस्थित रहना होगा। दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा। महिला कर्मचारियों के लिए ऑफिस समय शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। वहीं, कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। सर्दियों (नवंबर से फरवरी) के दौरान समय में आंशिक बदलाव का भी प्रावधान किया गया है। बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, आदेश जारी सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी होगा। बिना सूचना अनुपस्थित रहने या समय पर नहीं आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश सभी विभागों, जिला अधिकारियों (DM) और पुलिस मुख्यालय को भेज दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।
पटना,एजेंसियां। बिहार सरकार राज्य में सुनियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 11 नई आधुनिक टाउनशिप विकसित करने जा रही है। इन शहरों को नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रत्येक टाउनशिप 800 से 1200 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसे भविष्य में और विस्तार दिया जा सकता है। दो समूहों में बांटे गए शहर सरकार ने इन शहरों को दो समूहों में विभाजित किया है। पहले समूह में पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा और मुंगेर शामिल हैं, जबकि दूसरे समूह में सीतामढ़ी, छपरा, मुजफ्फरपुर और भागलपुर को रखा गया है। इन सभी शहरों में ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जिससे आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार हो सके। लैंड पुलिंग मॉडल से होगा विकास इस परियोजना में जमीन अधिग्रहण के लिए ‘लैंड पुलिंग’ मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें जमीन मालिकों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाएगा। इससे विवाद कम होंगे और परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी। जमीन खरीद-बिक्री पर रोक सरकार ने मास्टर प्लान तैयार होने तक इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और नए निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अनियोजित कॉलोनियों और अवैध निर्माण को रोकने के लिए जरूरी है। मास्टर प्लान की तय समयसीमा पहले समूह के शहरों के लिए मास्टर प्लान 31 मार्च 2027 तक तैयार किया जाएगा, जबकि दूसरे समूह के शहरों के लिए 30 जून 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है। शहरीकरण को मिलेगी नई गति बिहार में वर्तमान शहरी आबादी लगभग 16% है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। इस परियोजना से न केवल शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह योजना राज्य को आधुनिक और व्यवस्थित विकास की दिशा में आगे ले जाने का बड़ा कदम मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में फॉरेस्ट गार्ड और वन्य जीव रक्षक (वाइल्ड लाइफ गार्ड) के 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इस भर्ती के लिए एग्जाम फीस 30 जून से 20 जुलाई 2026 तक जमा की जा सकेगी। फॉर्म में करेक्शन के लिए 27 जुलाई तक का समय दिया जाएगा। पदों का विवरण : फॉरेस्ट गार्ड : पद का नाम पदों की संख्या सामान्य 128 अन्य पिछड़ा वर्ग 279 अनुसूचित जाति 199 अनुसूचित जनजाति 10 ईडब्ल्यूएस 31 वाइल्ड लाइफ गार्ड : पद का नाम पदों की संख्या सामान्य 4 अन्य पिछड़ा वर्ग 36 अनुसूचित जाति 19 अनुसूचित जनजाति 1 ईडब्ल्यूएस 1 शैक्षणिक योग्यता : 12वीं पास। पीईटी 2025 का स्कोर कार्ड होना चाहिए। शारीरिक योग्यता : जेंडर कैटेगरी न्यूनतम हाइट चेस्ट (फुलाए बिना / फुलाने के बाद ) वजन पुरुष जनरल,ओबीसी, एससी 168 सेमी 84 cm / 89 cm (min. 5 cm expansion) – पुरुष ST 160 सेमी 82 cm / 87 cm (min. 5 cm expansion) – महिला General / OBC / SC 152 सेमी – 45 to 58 kg महिला एसटी 147 सेमी – 45 to 58 kg उम्र सीमाः न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में छूट दी जाएगी। फीस : सभी वर्ग के लिए 25 रुपए सैलरी : 19,900 - 63,200 रुपए प्रतिमाह परीक्षा प्रणाली : परीक्षा की अवधि : ढाई घंटे टोटल मार्क्स : 200 टोटल क्वेश्चन : 200 पार्ट सब्जेक्ट क्वेश्चन नंबर टोटल मार्क्स पार्ट - 1 सब्जेक्ट रिलेटेड नॉलेज (फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट) 50 50 पार्ट - 2 एलिमेंट्री मैथमेटिक्स एंड बायोलॉजी 15 15 पार्ट - 3 नॉलेज ऑफ कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड कंटेम्परेरी टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट एंड इन्नोवेशन 15 15 पार्ट - 4 जनरल इंफॉर्मेशन रिलेटेड टू द स्टेट ऑफ उत्तरप्रदेश 20 20 टोटल 100 100
अमरावती: सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए Andhra Pradesh High Court में भर्ती का सुनहरा अवसर सामने आया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 300 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिसमें 7वीं पास से लेकर ग्रेजुएट तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अहम तारीखें इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 30 मार्च 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 19 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट aphc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है: लॉ ग्रेजुएट पोस्ट: मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से लॉ में डिग्री (3 या 5 वर्ष) टेक्निकल पोस्ट: BTech (CSC/ECE/EEE/IT) या MSc (Computer Science) अन्य ग्रेजुएट पोस्ट: आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स या लॉ में डिग्री अन्य पद: 7वीं या 10वीं पास उम्मीदवार भी पात्र पदों का विवरण और सैलरी इस भर्ती में सेक्शन ऑफिसर, कंप्यूटर ऑपरेटर, असिस्टेंट, टाइपिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर और ऑफिस सबऑर्डिनेट जैसे कई पद शामिल हैं। सेक्शन ऑफिसर: ₹57,100 – ₹1,47,760 कंप्यूटर ऑपरेटर/असिस्टेंट: ₹25,220 – ₹1,24,380 डेटा एंट्री ऑपरेटर: ₹25,220 – ₹80,910 ऑफिस सबऑर्डिनेट: ₹20,000 – ₹61,960 आवेदन कैसे करें? आधिकारिक वेबसाइट aphc.gov.in पर जाएं Recruitment सेक्शन में “Apply Online for 300 Vacancies 2026” लिंक पर क्लिक करें नया रजिस्ट्रेशन करें आवेदन फॉर्म भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें ऑनलाइन फीस जमा करें फॉर्म सबमिट कर प्रिंट आउट निकाल लें
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने करेंसी नोट प्रेस की 3 यूनिट में 534 वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती का विज्ञापन 6 अप्रैल को जारी किया गया है। फीस जमा करने और फॉर्म में करेक्शन की आखिरी तारीख 1 जुलाई तय की गई है। कोटिवार पदों का ब्योरा: सामान्य 292 ओबीसी 215 एससी 142 ईडब्ल्यूएस 61 एसटी 12 टोटल 722 शैक्षणिक योग्यता : माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की 12वीं या सरकार द्वारा उसके समकक्ष अन्य परीक्षा पास की हो। वे ही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने पीईटी - 2025 एग्जाम पास की हो। उम्मीदवारों को नॉर्मलाइज्ड स्कोर के बेसिस पर मेन एग्जाम में भाग लेने के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। उम्र सीमा : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम उम्र में नियमानुसार छूट दी जाएगी। शारीरिक योग्यता : पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई : 167.6 सेमी सामान्य वर्ग की महिलाओं की न्यूनतम ऊंचाई : 152 सेमी पुरुषों का सीना : न्यूनतम 80 सेमी (बिना फुलाए) और 85 सेंटीमीटर फुलाने पर हो। महिलाओं का वजन 45 किलो तक होना चाहिए। चयन प्रक्रिया : मेन्स रिटन एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन परीक्षा प्रणाली : अवधि : 2 घंटा प्रश्नों का प्रकार : एमसीक्यू निगेटिव मार्किंग : एक चौथाई अंक पार्ट्स सब्जेक्ट क्वेश्चन नंबर पार्ट - 1 हिस्ट्री ऑफ इंडिया एंड इंडियन नेशनल मूवमेंट जियोग्राफी ऑफ इंडिया एंड द वर्ल्ड इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलपमेंट ऑफ इंडिया इंडियन पॉलिटी एंड इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन जनरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी एनवायरोमेंटल इकोलॉजी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट करेंट इवेंट्स ऑफ नेशनल एंड इंटरनेशनल इम्पॉर्टेंस डाटा इंटरप्रिटेशन इम्पोर्टेंट लीगल प्रोविजन्स एंड पॉलिसिज रिलेटेड टू एक्ससाइज इन यूपी टोटल मार्क्स 65 पार्ट - 2 कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी - कॉन्सेप्ट्स, डेवलपमेंट एंड इन्नोवेशन्स 15 पार्ट - 3 जनरल इंफॉर्मेशन रिलेटेड टू द स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश 20 टोटल 100 फीस : सभी कैटेगरी के लिए : 25 रुपए ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं। होमपेज पर “Live Advertisement” सेक्शन में संबंधित विज्ञापन पर क्लिक करें। PET-2025 रजिस्ट्रेशन नंबर से लॉगिन करें। आवेदन फॉर्म में जरूरी जानकारी भरें। फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म सब्मिट करके इसका प्रिंटआउट निकाल लें।
एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में यह सामने आया है कि डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता मिलकर बुजुर्गों में कई गंभीर बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी–जिसमें डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियां शामिल हैं–का जोखिम काफी बढ़ जाता है। 9 साल की स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े चीन में की गई इस लॉन्ग-टर्म स्टडी में 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 2,661 लोगों को करीब 9 साल तक फॉलो किया गया। शुरुआत में सभी प्रतिभागी इन बीमारियों से मुक्त थे, लेकिन अध्ययन के दौरान 797 लोगों में कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी विकसित हो गई। डिप्रेशन और एक्सरसाइज की कमी का डबल असर स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों को डिप्रेशन था और जो बिल्कुल भी तीव्र शारीरिक गतिविधि (VPA) नहीं करते थे, उनमें इस तरह की बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा पाया गया। यह भी सामने आया कि: डिप्रेशन वाले लेकिन एक्टिव लोग भी जोखिम में रहे बिना डिप्रेशन लेकिन निष्क्रिय लोग भी खतरे से बाहर नहीं थे यानी मानसिक स्वास्थ्य और फिजिकल एक्टिविटी–दोनों ही अलग-अलग तरीके से जोखिम बढ़ाते हैं। एक्सरसाइज से मिल सकती है आंशिक राहत अध्ययन में यह भी पाया गया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, खासकर तेज एक्सरसाइज, इस जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकती है। हालांकि यह पूरी तरह से खतरे को खत्म नहीं करती, लेकिन निष्क्रिय लोगों की तुलना में एक्टिव लोगों की स्थिति बेहतर पाई गई। क्यों है यह चिंता का विषय? विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी एक बार हो जाए तो इसे मैनेज करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर ही डिप्रेशन और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। रोकथाम के लिए क्या करें? स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए उम्र बढ़ने के साथ हेल्थ चेकअप और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है
नई मेडिकल रिसर्च में यह सामने आया है कि Giant Cell Arteritis (GCA) के मरीजों में शुरुआती दौर में लो-डोज Aspirin शुरू करने से दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। हालांकि, इसके साथ एक अहम जोखिम भी जुड़ा है–गंभीर ब्लीडिंग। क्या है स्टडी का निष्कर्ष? 14,000 से अधिक मरीजों पर आधारित इस बड़े अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ने बीमारी की पहचान के दो हफ्तों के भीतर एस्पिरिन लेना शुरू किया: उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मौत जैसे मेजर कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स का खतरा कम हुआ 1 साल और 3 साल दोनों अवधि में यह लाभ देखा गया कुल मृत्यु दर (All-cause mortality) में भी कमी आई लेकिन बढ़ा ब्लीडिंग का खतरा जहां एक ओर दिल से जुड़े जोखिम कम हुए, वहीं दूसरी ओर: पहले साल में गंभीर रक्तस्राव (major haemorrhage) का खतरा बढ़ गया खासकर बुजुर्ग मरीजों में यह जोखिम ज्यादा चिंता का विषय बना हालांकि, 3 साल के बाद यह बढ़ा हुआ ब्लीडिंग रिस्क उतना स्पष्ट नहीं रहा। किन मरीजों को ज्यादा फायदा? स्टडी में यह भी पाया गया कि एस्पिरिन का फायदा सभी में समान नहीं था। महिलाओं में अधिक लाभ देखा गया डायबिटीज वाले मरीजों में भी बेहतर परिणाम मिले इससे साफ है कि इलाज सभी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। डॉक्टरों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि GCA के मरीजों में एस्पिरिन को “रूटीन दवा” की तरह नहीं दिया जाना चाहिए। हर मरीज के लिए अलग-अलग फैक्टर को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना जरूरी है: कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कितना है ब्लीडिंग का खतरा कितना है उम्र और अन्य बीमारियां
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, प्रदूषण और बाहर ज्यादा समय बिताने की वजह से त्वचा पर टैनिंग की समस्या आम हो जाती है। चेहरे, हाथ और पैरों की त्वचा का रंग काला पड़ने लगता है, जिससे न सिर्फ खूबसूरती प्रभावित होती है बल्कि आत्मविश्वास भी कम हो सकता है। ऐसे में लोग टैनिंग हटाने के लिए बाजार में मिलने वाले कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें मौजूद केमिकल्स कभी-कभी त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। प्राकृतिक नुस्खे हैं सुरक्षित और असरदार विकल्प विशेषज्ञों के अनुसार, टैनिंग हटाने के लिए घरेलू और प्राकृतिक उपाय ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी होते हैं। ये नुस्खे आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार होते हैं और त्वचा पर हल्का असर डालते हुए धीरे-धीरे नैचुरल ग्लो वापस लाने में मदद करते हैं। नींबू और शहद का उपयोग नींबू में मौजूद प्राकृतिक ब्लीचिंग गुण टैनिंग को हल्का करने में मदद करते हैं, जबकि शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करता है। इन दोनों का मिश्रण 10-15 मिनट तक लगाने से त्वचा साफ और मुलायम बनती है। दही-बेसन फेस पैक दही त्वचा को ठंडक देता है और बेसन डेड स्किन हटाने में मदद करता है। इस पैक को हफ्ते में 2-3 बार लगाने से धीरे-धीरे टैनिंग कम होने लगती है। एलोवेरा और खीरे का असर एलोवेरा जेल त्वचा को शांत करता है और उसे हेल्दी बनाता है। वहीं खीरा और गुलाब जल का मिश्रण त्वचा को ताजगी देता है और स्किन टोन सुधारता है। हल्दी और दूध का पैक हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जबकि दूध त्वचा को पोषण देता है। यह मिश्रण टैनिंग हटाने के साथ त्वचा में निखार भी लाता है। नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर परिणाम इन घरेलू उपायों का नियमित उपयोग करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगता है। साथ ही धूप में निकलते समय त्वचा की सुरक्षा करना भी जरूरी है, ताकि टैनिंग दोबारा न हो।
रोसेशिया एक आम लेकिन अक्सर गलत समझी जाने वाली स्किन कंडीशन है। आमतौर पर इसे लालिमा, फ्लशिंग और हल्की त्वचा पर दिखने वाले लक्षणों से जोड़ा जाता है, लेकिन मेलानिन-रिच यानी ब्राउन या डार्क स्किन पर इसकी पहचान काफी अलग और जटिल हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग महीनों तक इसका गलत इलाज करते रहते हैं। ब्राउन स्किन पर कैसे दिखता है रोसेशिया डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार, गहरे रंग की त्वचा में रोसेशिया की पहचान लाल रंग से नहीं, बल्कि जलन, गर्माहट, संवेदनशीलता और छोटे-छोटे बंप्स से होती है। कई बार यह हल्के पर्पल या ब्राउन डिसकलरेशन के रूप में भी दिख सकता है। इसी वजह से इसे अक्सर एक्ने (Acne) या “सेंसिटिव स्किन” समझ लिया जाता है, जिससे गलत ट्रीटमेंट शुरू हो जाता है। गलत ट्रीटमेंट कैसे बढ़ाता है समस्या जब त्वचा पर बंप्स और रिएक्शन दिखते हैं, तो लोग अक्सर: हार्श एक्सफोलिएटिंग एसिड्स स्ट्रॉन्ग फेसवॉश एक्ने ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे स्किन और ज्यादा इरिटेट हो जाती है और रोसेशिया की इंफ्लेमेशन बढ़ सकती है। रोसेशिया के कारण क्या हैं यह एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी कंडीशन है, जो कई कारणों से ट्रिगर होती है: जेनेटिक्स (सबसे बड़ा कारण) धूप (UV radiation) गर्मी और पसीना मसालेदार खाना और अल्कोहल स्ट्रेस हार्श स्किनकेयर प्रोडक्ट्स कुछ मामलों में Demodex mites (त्वचा में पाए जाने वाले सूक्ष्म कीट) भी इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकते हैं। सही पहचान क्यों जरूरी है रोसेशिया कई अन्य स्किन समस्याओं जैसे: सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस ऑटोइम्यून कंडीशंस के साथ ओवरलैप कर सकता है। इसलिए सही डायग्नोसिस के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच जरूरी है। डर्मेटोलॉजिस्ट क्या ट्रीटमेंट सुझाते हैं एक प्रभावी ट्रीटमेंट प्लान आमतौर पर सिंपल और स्किन-फ्रेंडली होता है: 1. बेसिक स्किनकेयर जेंटल क्लींजर फ्रेगरेंस-फ्री मॉइश्चराइज़र रोज़ाना सनस्क्रीन 2. मेडिकेशन Azelaic acid Metronidazole Ivermectin इनमें Azelaic acid खासतौर पर फायदेमंद है क्योंकि यह इंफ्लेमेशन के साथ-साथ पोस्ट-इंफ्लेमेटरी पिग्मेंटेशन को भी कम करने में मदद करता है। 3. लेजर थेरेपी कुछ मामलों में लेजर से रंगत में बदलाव और दाग कम किए जा सकते हैं, लेकिन डार्क स्किन पर यह ट्रीटमेंट केवल अनुभवी विशेषज्ञ से ही करवाना चाहिए। ट्रिगर्स को ट्रैक करना जरूरी रोसेशिया को कंट्रोल करने का सबसे बड़ा तरीका है: अपने ट्रिगर्स को पहचानना स्किन को ओवर-ट्रीट न करना सिंपल और कंसिस्टेंट रूटीन फॉलो करना
आज मनाई जा रही है सीता नवमी हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर आज, 25 अप्रैल 2026, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं। यह पर्व नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त इस वर्ष नवमी तिथि 24 अप्रैल की शाम 7:21 बजे शुरू होकर 25 अप्रैल की शाम 6:27 बजे तक रहेगी। माता सीता की पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 10:58 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसे करें माता सीता की पूजा सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर माता सीता और भगवान श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करें। जल से भरा कलश रखें। माता सीता को सिंदूर, अक्षत, फूल, माला और श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीराम को चंदन, पुष्प और प्रसाद चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। सीता चालीसा, व्रत कथा और मंत्रों का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें। सीता नवमी का धार्मिक महत्व माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। भक्त अपने घर की खुशहाली, संतान सुख और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हैं। नारी शक्ति की प्रेरणा हैं माता सीता माता सीता का जीवन साहस, आत्मसम्मान और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादा और सिद्धांतों का साथ नहीं छोड़ा। वनवास, रावण द्वारा अपहरण और कठिन परीक्षाओं के बावजूद उन्होंने अद्भुत संयम दिखाया। आत्मनिर्भरता का अद्भुत उदाहरण लव-कुश के पालन-पोषण में माता सीता ने एकल माता के रूप में जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन बताता है कि स्त्री हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। सीता नवमी का संदेश सीता नवमी हमें सिखाती है कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास से जीवन की हर चुनौती को पार किया जा सकता है। यही माता जानकी का अमर संदेश है।
बगलामुखी जयंती 2026: क्या है खास Baglamukhi Jayanti इस वर्ष 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। मां बगलामुखी, दस महाविद्याओं में आठवीं शक्ति मानी जाती हैं और उन्हें ‘पीतांबरा’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका स्वरूप बेहद अनोखा है–एक हाथ से वे शत्रु की जीभ पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं। पौराणिक कथा: जब दुनिया पर आया संकट पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में एक भयंकर तूफान ने पूरे ब्रह्मांड को विनाश के कगार पर ला खड़ा किया। देवता भी इस संकट को रोकने में असमर्थ थे। तब Vishnu ने समाधान के लिए तपस्या की। इसी दौरान मदन नाम का एक असुर था, जिसे ‘वाक्-सिद्धि’ का वरदान मिला हुआ था। उसकी वाणी इतनी प्रभावशाली थी कि जो भी वह बोलता, वह सच हो जाता। धीरे-धीरे उसने इस शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और अपने शब्दों से विनाश फैलाने लगा। मां बगलामुखी का प्राकट्य भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर हरिद्रा सरोवर से दिव्य शक्ति प्रकट हुई–वह थीं Baglamukhi। उनका स्वरूप पीले रंग से आभामय था, इसलिए उन्हें ‘पीतांबरा’ कहा जाता है। जीभ खींचने के पीछे का रहस्य जब मां बगलामुखी का सामना मदन असुर से हुआ, तो वह अपने अहंकार में अपशब्द और विनाशकारी मंत्र बोलने लगा। तभी मां ने अपनी ‘स्तंभन शक्ति’ का उपयोग किया और उसकी जीभ पकड़कर बाहर खींच ली। जैसे ही उसकी जीभ थमी, उसकी वाणी की शक्ति समाप्त हो गई। इस तरह उसकी सबसे बड़ी ताकत निष्क्रिय हो गई और उसका अंत संभव हो सका। क्या है इसका आध्यात्मिक संदेश? मां बगलामुखी द्वारा जीभ खींचने का अर्थ केवल शत्रु को हराना नहीं है, बल्कि यह एक गहरा आध्यात्मिक संकेत भी देता है– वाणी पर नियंत्रण: जीभ हमारे शब्दों और विचारों का प्रतीक है। झूठ और छल का अंत: मां शत्रु की नकारात्मक वाणी को रोकती हैं। आंतरिक शुद्धि: यह अहंकार, क्रोध और नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण का संदेश देता है। स्तंभन शक्ति: जीवन में बुरी शक्तियों को रोकने और संतुलन बनाए रखने का प्रतीक। मां बगलामुखी का यह स्वरूप केवल भयावह नहीं, बल्कि अत्यंत गूढ़ और अर्थपूर्ण है। यह हमें सिखाता है कि सही समय पर वाणी और विचारों को नियंत्रित करना ही सबसे बड़ी शक्ति है। उनकी पूजा से न सिर्फ बाहरी शत्रुओं पर विजय मिलती है, बल्कि व्यक्ति अपने अंदर के नकारात्मक भावों पर भी काबू पा सकता है।
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन वैशाख मास की स्कंद षष्ठी का महत्व अधिक माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व 22 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार: षष्ठी तिथि प्रारंभ: 22 अप्रैल 2026, सुबह 01:21 बजे षष्ठी तिथि समाप्त: 22 अप्रैल 2026, रात 10:47 बजे उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजा: 22 अप्रैल को ही पूजा विधि स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा इस प्रकार करें: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान पर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें साथ में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना भी शुभ माना जाता है जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें चंदन, अक्षत, लाल फूल और धूप-दीप अर्पित करें मोर पंख चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है ‘स्कंद षष्ठी कवच’ का पाठ करें और मंत्र जाप करें अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें स्कंद षष्ठी का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर नामक असुर का वध किया था। इसलिए यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से: जीवन के कष्ट दूर होते हैं शत्रुओं पर विजय मिलती है आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल को हिंदू धर्म में Ekadashi का विशेष महत्व माना गया है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है, इस साल 27 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। इस दिन व्रत, पूजा और दान-पुण्य करने से भगवान Vishnu की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक को अक्षय पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर किया गया दान तभी फलदायी होता है जब उसे सही नियमों और सच्ची श्रद्धा के साथ किया जाए। एकादशी पर दान करने के क्या हैं लाभ? एकादशी के दिन दान-पुण्य करने से व्यक्ति को कई आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। पापों से मुक्ति का मार्ग खुलता है जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। किन चीजों का दान माना गया है सबसे शुभ? एकादशी पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है: अन्न दान: गेहूं, दाल और अन्य अनाज का दान सर्वोत्तम माना जाता है चावल का दान: हालांकि इस दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता, लेकिन दान करना शुभ होता है फल और जल: फल, जल से भरा कलश और धार्मिक पुस्तकों का दान भी पुण्यदायी है पीली वस्तुएं: पीले कपड़े, चने की दाल और गुड़ का दान विशेष फल देता है धन और भोजन: जरूरतमंदों को भोजन कराना या आर्थिक मदद करना श्रेष्ठ माना गया है गौ सेवा: गायों को चारा खिलाना या उनकी सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी है दान-पुण्य के जरूरी नियम स्नान और पूजा के बाद ही दान करें दान हमेशा सात्विक और शुद्ध होना चाहिए तामसिक वस्तुओं का दान न करें दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा से दान करें निस्वार्थ भाव से बिना किसी अपेक्षा के दान करें द्वादशी पर करें व्रत का पारण एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करना चाहिए। इससे व्रत पूर्ण और सफल माना जाता है। एकादशी केवल व्रत या परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। इस दिन किए गए दान और अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और उसे धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। OpenAI ने सबसे एडवांस GPT-5.5 लांच किया है! इसके 'एजेंटिक AI' फीचर्स, 100 में से 93 टेस्ट स्कोर और पुराने GPT मॉडल्स की तुलना के बारे में विस्तार से। April 25, 2026 in टेक्नोलॉजी OpenAI Launches Its Smartest AI Model Yet, GPT-5.5: Now AI Will Create Project Plans on Its Own OpenAI Launches Its Smartest AI Model Yet, GPT-5.5: Now AI Will Create Project Plans on Its Own OpenAI ने लॉन्च किया सबसे शक्तिशाली GPT-5.5: प्रोजेक्ट प्लानिंग से लेकर निष्पादन तक सब खुद करेगा, टेस्ट में मिले 100 में से 93 अंक OpenAI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। OpenAI ने अपना अब तक का सबसे पावरफुल और एडवांस मॉडल GPT-5.5 (कोडनेSpud) लॉन्च कर दिया है। जहाँ पुराने मॉडल्स सिर्फ आपके सवालों के जवाब देते थे, वहीं GPT-5.5 एक ‘एजेंटिक AI’ के रूप में उभरा है, जो खुद प्रोजेक्ट की प्लानिंग करता है और उसे पूरा भी करता है। GPT-5.5 को 100 में से मिले 93 अंक विशेषज्ञों ने इस नए मॉडल को 10 अलग-अलग मापदंडों पर परखा, जिसमें इसका प्रदर्शन शानदार रह। 5 साल के बच्चे के समझने लायक आसान शिक्षा 10/10 कठिन विषयों को 5 साल के बच्चे के समझने लायक आसान बनाया। इसने गणित के 10/10 नंबर्स के जटिल पैटर्न को सटीकता से पहचाना। कोडिंग 10/10 सॉफ्टवेयर की सभी गलतियों (Bugs) को पूरी तरह ठीक किया। लेखन 10/10 4,000 से अधिक शब्दों की शानदार कल्पनाशील कहानी लिखी। साहित्य 10/10 ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ का अब तक का सबसे सटीक विश्लेषण। बहसः 10/10 सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर ठोस तर्क दिए। सपोर्टः 10/10 इंटरव्यू के लिए व्यावहारिक और काम आने वाली सलाह दी। अनुवाद 9/10 बेहतरीन अनुवाद, लेकिन ज्यादा विकल्प देने से थोड़ा भ्रम हुआ। यात्रा 9/10 प्लान बेहतरीन था, लेकिन बजट की जानकारी शामिल नहीं थी। 5/10 निर्देश के विपरीत एक के बजाय कई सोर्स का उपयोग किया। GPT मॉडल का विकास: GPT-1 से GPT-5.5 तक का सफर OpenAI ने पिछले 8 सालों में AI को पूरी तरह बदल दिया है। नीचे दी गई टेबल से समझें यह सफर Related Post RBI cancels Paytm Payments Bank licence in 2026 showing Paytm app, UPI working status and user concerns about money safety Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द! RBI ने लगाई मुहर करोड़ों Users के पैसों का क्या होगा? April 25, 2026 गिरने पर भी नहीं टूटेगा फोन! मोटोरोला का सबसे पावरफुल स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Pro लॉन्च गिरने पर भी नहीं टूटेगा फोन! मोटोरोला का सबसे पावरफुल स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Pro लॉन्चः
टिम कुक के बाद उत्तराधिकारी की चर्चा तेज टेक दिग्गज Apple में नेतृत्व बदलाव को लेकर लंबे समय से अटकलें लग रही थीं। मौजूदा CEO Tim Cook के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख John Ternus का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। करीब 25 साल से कंपनी से जुड़े टर्नस को शांत, संतुलित और भरोसेमंद लीडर के तौर पर देखा जाता है। ‘प्रोडक्ट गाइ’ की पहचान, हार्डवेयर पर रहेगा फोकस जॉन टर्नस को कंपनी के भीतर “प्रोडक्ट गाइ” कहा जाता है, यानी उनका झुकाव सीधे प्रोडक्ट डेवलपमेंट और डिजाइन पर रहता है। यह अप्रोच Steve Jobs की सोच से मिलती-जुलती मानी जा रही है, जहां इनोवेशन और यूज़र एक्सपीरियंस को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि, टर्नस का स्वभाव कुक की तरह ही संयमित और रणनीतिक माना जाता है। AI सबसे बड़ी चुनौती, धीमी रणनीति पर सवाल Apple के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। कंपनी ने अब तक आक्रामक निवेश की बजाय साझेदारी का रास्ता चुना है, जिसमें OpenAI और Google जैसे खिलाड़ियों के साथ काम शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि टर्नस भी इसी “संतुलित रणनीति” को आगे बढ़ा सकते हैं, ताकि जोखिम कम रहे और निवेश सोच-समझकर किया जाए। नए प्रोडक्ट और इनोवेशन की उम्मीद Apple की पहचान हमेशा अपने इनोवेटिव प्रोडक्ट्स से रही है। iPhone ने स्मार्टफोन इंडस्ट्री को बदल दिया था, लेकिन हाल ही में लॉन्च हुआ Apple Vision Pro अपेक्षित सफलता नहीं हासिल कर पाया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या टर्नस अगला बड़ा “गेम-चेंजर” प्रोडक्ट ला पाएंगे – चाहे वह AI आधारित डिवाइस हो या रोबोटिक्स की दिशा में कोई नई पहल। राजनीतिक और वैश्विक दबाव भी बड़ी परीक्षा नई लीडरशिप के सामने सिर्फ टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सप्लाई चेन की चुनौतियां भी होंगी। खासकर अमेरिका-चीन के रिश्तों और टैरिफ नीतियों का असर Apple के बिजनेस पर पड़ता रहा है। लीडरशिप स्टाइल: शांत या करिश्माई? जहां Steve Jobs अपने करिश्माई अंदाज के लिए जाने जाते थे, वहीं टिम कुक और जॉन टर्नस का स्टाइल ज्यादा शांत और प्रोफेशनल है। अब देखना दिलचस्प होगा कि टर्नस अपने नेतृत्व में कितना खुलापन और व्यक्तिगत पहचान दिखाते हैं, क्योंकि आज के दौर में लीडर्स से “मानवीय जुड़ाव” की भी अपेक्षा बढ़ गई है।
क्या होता है सिम नंबर (ICCID)? आपका सिम नंबर, जिसे ICCID (Integrated Circuit Card Identification) कहा जाता है, एक यूनिक पहचान संख्या होती है। यह आमतौर पर 19 या 20 अंकों का होता है और हर सिम कार्ड या eSIM के लिए अलग होता है। यह नंबर मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर को आपके सिम को पहचानने और नेटवर्क से जोड़ने में मदद करता है। सिम पोर्ट करने, नेटवर्क समस्या सुलझाने या नए फोन में eSIM एक्टिवेट करने के दौरान इसकी जरूरत पड़ती है। एंड्रॉइड फोन में ऐसे चेक करें सिम नंबर अगर आप अपने स्मार्टफोन में सिम नंबर देखना चाहते हैं, तो यह सबसे आसान तरीका है: सबसे पहले फोन की Settings में जाएं About Phone या About Device ऑप्शन चुनें अब Status या SIM Card Status पर क्लिक करें नीचे स्क्रॉल करने पर आपको ICCID (SIM Number) दिखाई देगा ध्यान दें कि अलग-अलग ब्रांड के फोन में ये ऑप्शन थोड़ा अलग नाम से हो सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है। सिम कार्ड निकालकर भी देख सकते हैं नंबर अगर सेटिंग्स में सिम नंबर नहीं दिख रहा है, तो आप मैनुअल तरीका अपना सकते हैं: फोन को पहले स्विच ऑफ करें सिम ट्रे को इजेक्टर टूल या पिन से बाहर निकालें सिम कार्ड पर छपा ICCID नंबर ध्यान से पढ़ें यह तरीका लगभग हर फोन में काम करता है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iPhone। डायल कोड से भी मिल सकती है जानकारी कुछ स्मार्टफोन्स में आप डायल पैड से एक खास कोड डालकर भी सिम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। कई बार ICCID नंबर IMEI के साथ दिखाई देता है। क्यों जरूरी है ICCID नंबर जानना? ICCID नंबर जानना कई स्थितियों में जरूरी हो सकता है– सिम पोर्ट (MNP) के दौरान eSIM एक्टिवेशन में नेटवर्क या कनेक्टिविटी समस्या सुलझाने में एक से ज्यादा सिम मैनेज करने में इसलिए बेहतर है कि आप अपने फोन में इसे एक बार जरूर चेक कर लें।
नई दिल्ली: Vivo ने अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन Vivo T5 Pro 5G की भारत में पहली सेल शुरू कर दी है। कंपनी के T-सीरीज के इस नए डिवाइस को बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और पावरफुल परफॉर्मेंस के साथ पेश किया गया है। पहली सेल में ग्राहकों को ₹3000 तक का डिस्काउंट भी मिल रहा है। कीमत और ऑफर्स Vivo T5 Pro 5G तीन वेरिएंट में उपलब्ध है: 8GB + 128GB: ₹29,999 8GB + 256GB: ₹33,999 12GB + 256GB: ₹39,999 HDFC, SBI और Axis बैंक कार्ड्स के साथ: बेस वेरिएंट पर ₹2000 तक की छूट अन्य वेरिएंट्स पर ₹3000 तक का डिस्काउंट फोन की बिक्री Flipkart, Vivo की आधिकारिक वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू हो चुकी है। डिस्प्ले और डिजाइन 6.8-इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस स्लिम डिजाइन, वजन 213 ग्राम यह सेटअप गेमिंग और वीडियो देखने के अनुभव को स्मूद बनाता है। कैमरा फीचर्स 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट) 2MP पोर्ट्रेट सेंसर 32MP फ्रंट कैमरा फ्रंट और रियर दोनों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग परफॉर्मेंस Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर 12GB तक RAM और 256GB स्टोरेज वेपर कूलिंग सिस्टम यह फोन मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बैटरी और चार्जिंग इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9020mAh बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट बेहतर बैटरी हेल्थ मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर Android 16 पर आधारित सिस्टम लंबे समय तक सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT BHU ने एक बार फिर अपने शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड से सुर्खियां बटोरी हैं। 2025-26 के प्लेसमेंट सीजन की शुरुआत ही इतनी दमदार रही कि पहले ही दिन 17 छात्रों को 1 करोड़ रुपये से अधिक के पैकेज ऑफर किए गए। यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान के लिए बल्कि पूरे देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। प्लेसमेंट में रिकॉर्डतोड़ शुरुआत इस साल के प्लेसमेंट ड्राइव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। Amazon, Adobe, Oracle, Deloitte, Flipkart, DRDO और TCS जैसी दिग्गज कंपनियों ने छात्रों को आकर्षक ऑफर दिए। संस्थान के अनुसार, इस सत्र में अब तक का सबसे बड़ा पैकेज 1.67 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो IIT BHU की मजबूत इंडस्ट्री कनेक्टिविटी और अकादमिक गुणवत्ता को दर्शाता है। क्यों खास है IIT BHU Banaras Hindu University का हिस्सा रहा IIT BHU देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाता है। बेहतरीन फैकल्टी, रिसर्च सुविधाएं और कैंपस लाइफ इसे छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती हैं। NIRF रैंकिंग 2025 में इंजीनियरिंग कैटेगरी में IIT BHU को 10वां स्थान मिला है, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। एडमिशन प्रोसेस और कोर्स IIT BHU में विभिन्न कोर्सेस के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती हैं: BTech: JEE Advanced BArch: JEE Advanced + AAT MTech: GATE MSc: IIT JAM MBA: CAT PhD: GATE / NET / JRF योग्यता और कटऑफ BTech में एडमिशन के लिए छात्रों को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ कम से कम 75% अंक लाना जरूरी होता है। साथ ही JEE Advanced क्वालिफाई करना अनिवार्य है। कुछ प्रमुख ब्रांच की कटऑफ (जनरल कैटेगरी) इस प्रकार रही: CSE: 1350 ECE: 2500 Electrical: 3493 Mechanical: 6525 Chemical: 7435 Civil: 9145 Mining: 12572 क्या है इस सफलता का मतलब IIT BHU का यह प्रदर्शन बताता है कि भारत में तकनीकी शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। ग्लोबल कंपनियों का भरोसा बढ़ रहा है और भारतीय इंजीनियरिंग टैलेंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार UPSC Civil Services Examination को पास करना आसान नहीं होता। सालों की मेहनत, धैर्य और निरंतर संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है इंदौर की Deeksha Chourasiya की, जिन्होंने UPSC 2025 में ऑल इंडिया रैंक 44 हासिल कर यह साबित कर दिया कि लगन और अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन मध्य प्रदेश के Indore में पली-बढ़ी दीक्षा एक शिक्षित परिवार से आती हैं। उनके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट और मां होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। दीक्षा बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं। उन्होंने Delhi Public School Indore से पढ़ाई करते हुए लगातार सात वर्षों तक ऑल-राउंड परफॉर्मेंस के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद उन्होंने Miranda House से इतिहास में ग्रेजुएशन किया, जो University of Delhi का एक प्रतिष्ठित कॉलेज है। चार प्रयासों का संघर्ष और सफलता Deeksha Chourasiya को यह सफलता चौथे प्रयास में मिली। शुरुआती तीन असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने अध्ययन को व्यवस्थित रखने के लिए सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा और रोज़ाना, साप्ताहिक व मासिक लक्ष्य तय किए। यही रणनीति उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बनी। मां का सपना बना प्रेरणा दीक्षा की सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां हैं। उनकी मां कभी खुद सिविल सेवा में जाना चाहती थीं, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया। दीक्षा ने उसी सपने को अपना लक्ष्य बनाया और उसे पूरा कर दिखाया। यह कहानी न सिर्फ मेहनत की है, बल्कि परिवार के सपनों को साकार करने की भी मिसाल है। शानदार स्कोर के साथ हासिल की रैंक UPSC 2025 में Deeksha Chourasiya ने कुल 1014 अंक हासिल किए। लिखित परीक्षा: 816 अंक इंटरव्यू: 198 अंक उनका यह प्रदर्शन यह दिखाता है कि सही रणनीति और निरंतर मेहनत से बड़ी से बड़ी परीक्षा को भी जीता जा सकता है।
बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक के आरोपों पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने साफ तौर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी Economic Offences Unit (EOU) को सौंप दी गई है, जिसने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर जांच तेज कर दी है। क्या है पूरा मामला? राज्य में AEDO के कुल 935 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से शुरू होकर 15, 16 और 18 अप्रैल तक किया गया। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे थे, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई। मुंगेर से पुलिस ने परीक्षा से पहले 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 अभ्यर्थी और एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक भी शामिल थे। इसके अलावा नालंदा में एक महिला अभ्यर्थी को सॉल्व्ड आंसरशीट के साथ पकड़ा गया, साथ ही दो बायोमेट्रिक कर्मियों की भी गिरफ्तारी हुई। EOU की SIT कर रही गहन जांच EOU के ADG नैय्यर हसनैन के निर्देश पर एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में 8 सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम में एक DSP और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। BPSC का स्पष्ट बयान: ‘पेपर लीक नहीं हुआ’ Bihar Public Service Commission ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। आयोग के अनुसार, राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है। ब्लूटूथ कदाचार की खबर भी निकली गलत परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के कान में ब्लूटूथ डिवाइस मिलने की खबर सामने आई थी। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल कदाचार की कोशिश थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने विफल कर दिया। इसे पेपर लीक से जोड़ना गलत है। तीसरे चरण की परीक्षा तय समय पर BPSC ने यह भी साफ किया है कि AEDO भर्ती परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। आयोग और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है। साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक Grievance Portal का उपयोग करें।
इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 को लेकर इस बार बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेशन-2 की प्रोविजनल आंसर-की में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, जहां 300 से अधिक सवालों के जवाबों को छात्रों ने चुनौती दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Ministry of Education ने सख्त रुख अपनाया है और जांच के निर्देश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार, 5 अप्रैल को हुई शिफ्ट-2 के केमिस्ट्री पेपर की आंसर-की में कई गलतियां पाई गईं। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन उत्तरों को चुनौती दी, जिसके बाद National Testing Agency (NTA) हरकत में आया। कुल 9 शिफ्ट में परीक्षा आयोजित हुई हर शिफ्ट में 75 सवाल कुल मिलाकर 675 सवालों की आंसर-की जारी हुई इनमें से लगभग आधे सवालों पर आपत्ति दर्ज की गई एक्सपर्ट कमेटी करेगी समीक्षा NTA ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जो: सभी चैलेंज किए गए सवालों की समीक्षा करेगी सही जवाब तय करेगी और उसी आधार पर फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी शिक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि फाइनल आंसर-की में किसी भी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। हर साल क्यों उठता है विवाद? JEE Main में आंसर-की विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। हर साल: बड़ी संख्या में छात्र उत्तरों को चुनौती देते हैं कुछ सवाल ड्रॉप किए जाते हैं और कई बार आंसर-की में बदलाव भी होता है इस साल भी पहले सेशन में: मैथ्स के 2 सवाल फिजिक्स के 7 सवाल ड्रॉप किए गए थे, जबकि 5 उत्तरों में बदलाव किया गया था। रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया JEE Main 2026 सेशन-2 का रिजल्ट 20 अप्रैल तक जारी हो सकता है इसके बाद JEE Advanced के लिए आवेदन शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन: 23 अप्रैल से 2 मई तक परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 JEE Main के फाइनल रिजल्ट के आधार पर लगभग 2.5 लाख उम्मीदवार JEE Advanced के लिए क्वालिफाई करेंगे।
तेल प्रतिबंधों में ढील खत्म, वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर अमेरिका ने ईरान और रूस के तेल पर दी जा रही अस्थायी छूट को समाप्त करने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया कि अब इन दोनों देशों के तेल निर्यात पर किसी तरह की नई छूट नहीं दी जाएगी। रूसी और ईरानी तेल पर खत्म होगी राहत व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान स्कॉट बेसेंट ने कहा कि रूसी और ईरानी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। इससे पहले समुद्र में मौजूद कुछ तेल खेपों को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी गई थी। अब यह राहत पूरी तरह समाप्त हो रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण बना रखा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान से अब तेल बाहर नहीं निकल पाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ईरान के तेल उत्पादन पर पड़ सकता है असर अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि निर्यात रुकने से ईरान को अपने तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ने की संभावना है। गरीब देशों के लिए मिली थी अस्थायी राहत रूस के तेल पर छूट को कुछ समय के लिए बढ़ाया गया था। स्कॉट बेसेंट ने बताया कि विश्व बैंक और IMF की बैठकों में कई गरीब देशों ने ऊर्जा संकट को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह सिर्फ एक बार की राहत थी। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ सकती है हलचल विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में फिर उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है। भारत समेत कई देशों पर नजर ईरान और रूस से तेल खरीदने वाले देशों, खासकर भारत और चीन, पर अब वैश्विक नजरें टिकी रहेंगी। आने वाले दिनों में ऊर्जा आयात रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद दी स्वास्थ्य की जानकारी इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने खुलासा किया है कि उन्हें शुरुआती चरण का प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। हालांकि, समय रहते इलाज कराने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि यह जानकारी सार्वजनिक करने में देरी इसलिए की गई ताकि मौजूदा युद्ध के दौरान ईरान इसे इजरायल के खिलाफ प्रचार के तौर पर इस्तेमाल न कर सके। नियमित जांच में सामने आई बीमारी नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि एक साल पहले बढ़े हुए लेकिन गैर-कैंसरयुक्त प्रोस्टेट की सफल सर्जरी के बाद वह लगातार मेडिकल निगरानी में थे। हाल ही में हुई जांच में प्रोस्टेट में एक सेंटीमीटर से भी छोटा धब्बा पाया गया। डॉक्टरों ने आगे की जांच में इसे शुरुआती चरण का कैंसर बताया। राहत की बात यह रही कि कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में नहीं फैला था। डॉक्टरों ने दिए थे दो विकल्प नेतन्याहू के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें दो विकल्प सुझाए थे। पहला, नियमित निगरानी के जरिए स्थिति पर नजर रखना। दूसरा, लक्षित उपचार के माध्यम से कैंसर को पूरी तरह खत्म करना। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। नेतन्याहू ने बताया कि कुछ छोटी उपचार प्रक्रियाओं के बाद कैंसर का निशान पूरी तरह समाप्त हो गया। इलाज के दौरान भी जारी रखा काम इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि इलाज के दौरान उन्होंने अपना काम नहीं रोका। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उपचार के दौरान उन्होंने एक किताब भी पढ़ डाली और अपने सरकारी कार्यों को भी जारी रखा। उन्होंने Hadassah Medical Center के डॉक्टरों और मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया। युद्ध के बीच स्वास्थ्य पर उठे थे सवाल यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष लगातार जारी है। ऐसे में नेतन्याहू की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही थी। शुरुआती पहचान से संभव है सफल इलाज प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले आम कैंसरों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इसका इलाज बेहद प्रभावी साबित होता है। नेतन्याहू का मामला भी इसी का उदाहरण है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर एक व्यक्ति ने लाल रंग का तरल पदार्थ फेंक दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टमाटर केचप था। घटना उस समय हुई जब पहलवी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अपने समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैसे हुआ हमला? वीडियो में देखा जा सकता है कि रेजा पहलवी समर्थकों की ओर हाथ हिला रहे थे। तभी पीछे से एक व्यक्ति अचानक आया और उन पर लाल तरल फेंक दिया। लाल पदार्थ उनके कोट और गर्दन पर गिरा सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया पुलिस ने मौके पर ही उसे हिरासत में ले लिया हालांकि, पहलवी इस घटना में पूरी तरह सुरक्षित रहे। हमले के बाद भी नहीं रुके पहलवी हमले के बावजूद रेजा पहलवी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने समर्थकों का अभिवादन जारी रखा और बाद में अपनी कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। यह घटना उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच मौजूद गहरे राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाती है। सीजफायर पर की थी तीखी आलोचना घटना से कुछ देर पहले पहलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि तेहरान के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा करना एक बड़ी भूल होगी और पश्चिमी देशों को ईरान के साथ केवल "यथास्थिति" बनाए रखने की नीति छोड़नी चाहिए। कौन हैं रेजा पहलवी? रेजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1967 में उन्हें क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उनका परिवार निर्वासन में चला गया। वे लंबे समय से ईरान की मौजूदा इस्लामिक सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। हाल के महीनों में वे ईरान में राजनीतिक बदलाव की मांग को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं।
14 साल की लड़की की हत्या केस में नए गंभीर आरोप अमेरिका में इंडी पॉप सिंगर D4vd (असली नाम डेविड बर्क) से जुड़े हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में नया मोड़ सामने आया है। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि आरोपी के iCloud अकाउंट और फोन से बड़ी मात्रा में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) मिला है। 21 वर्षीय सिंगर पर 14 साल की लड़की सेलिस्टे रिवास हर्नांडेज़ की हत्या का आरोप है, जिनके शरीर के टुकड़े सितंबर 2025 में उनकी टेस्ला कार से बरामद हुए थे। अदालत में खुलासा: iCloud में 8 टेराबाइट डेटा लॉस एंजिल्स कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजकों ने बताया कि आरोपी के डिजिटल डिवाइसेज़ से “अत्यंत विशाल मात्रा” में डेटा मिला है। iCloud अकाउंट में लगभग 8 टेराबाइट डेटा पाया गया अभी तक केवल 1 टेराबाइट डेटा की जांच पूरी हुई है बाकी डेटा में क्या है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है अधिकारियों के अनुसार, डेटा की मात्रा इतनी अधिक है कि जांच में काफी समय लग रहा है। संवेदनशील डिजिटल सबूत, सुरक्षित सिस्टम पर जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सभी डिजिटल फाइलें सीधे वकीलों को नहीं दी जा सकतीं। इसके बजाय, बचाव पक्ष के वकीलों को विशेष सुरक्षित सिस्टम के जरिए न्यायिक सुविधा केंद्र में जाकर सबूत देखने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा वायरटैप रिकॉर्डिंग और ग्रैंड जूरी गवाही जैसे अन्य डिजिटल सबूत भी अभी सील (sealed) हैं और जल्द खुल सकते हैं। हत्या का आरोप और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासे प्रोसीक्यूटर्स के अनुसार, पीड़िता सेलिस्टे हर्नांडेज़ की मौत कई गंभीर चोटों के कारण हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि: शरीर पर तेज धार वाले हथियार से कई वार किए गए छाती, पेट और लिवर को गंभीर नुकसान हुआ शरीर के अंगों को क्षत-विक्षत किया गया सटीक मृत्यु समय अभी तक स्पष्ट नहीं है कैसे सामने आया मामला? रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता का शव सितंबर 2025 में एक टेस्ला कार से बरामद हुआ था, जो आरोपी सिंगर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। यह कार कई हफ्तों से एक इलाके में खड़ी थी। स्थानीय लोगों को बदबू आने पर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद जांच में यह भयावह मामला सामने आया। रिश्ते और अपहरण की जांच भी जारी जांच एजेंसियों ने यह भी दावा किया है कि आरोपी और पीड़िता के बीच कथित तौर पर संबंध थे। हालांकि यह पहलू अभी अदालत में जांच के अधीन है। पीड़िता पहले अप्रैल 2024 से लापता थी, और उसके लापता होने से लेकर घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी कड़ी अभी स्पष्ट नहीं है। आरोपी ने आरोपों से किया इनकार डेविड बर्क ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने हत्या, यौन अपराध और शव को क्षत-विक्षत करने जैसे सभी आरोपों से इनकार किया है। डिजिटल सबूतों से गहराता केस यह मामला अब केवल हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारी मात्रा में डिजिटल सबूतों और गंभीर आपराधिक आरोपों की वजह से और जटिल होता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब iCloud डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर केस को आगे बढ़ा रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के फैसले के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए AAP नेता Sanjay Singh ने शनिवार को कहा कि पार्टी जल्द ही राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखेगी और इन सभी बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी। संजय सिंह ने कहा संजय सिंह ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत संसद में किसी भी प्रकार के विभाजन या अलग गुट को मान्यता नहीं दी गई है, भले ही उसमें दो-तिहाई सदस्य शामिल क्यों न हों। ऐसे में इन सांसदों का भाजपा में शामिल होना पूरी तरह ‘अवैधानिक’ और ‘अवैध’ है। AAP का आरोप AAP का आरोप है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी। क्या है मामला? दरअसल, शुक्रवार को AAP के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया। इन सांसदों में Raghav Chadha, Sandeep Pathak और Ashok Mittal सहित अन्य नेता शामिल बताए जा रहे हैं। AAP का मानना है कि सांसदों का यह कदम न केवल पार्टी के खिलाफ है, बल्कि संविधान के प्रावधानों की भी अनदेखी करता है। अब निगाहें राज्यसभा के सभापति के फैसले पर टिकी हैं, जो इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में फ्रिज हर घर का जरूरी हिस्सा बन चुका है। लोग अक्सर समय बचाने के लिए खाना बनाकर स्टोर करते हैं या बचा हुआ भोजन फ्रिज में रख देते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि फ्रिज खाने को हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं रखता। हर खाद्य पदार्थ की एक निश्चित अवधि होती है, जिसके बाद उसे खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पका हुआ खाना और डेयरी उत्पाद घर का बना पका हुआ खाना फ्रिज में आमतौर पर 2 से 3 दिन तक ही सुरक्षित रहता है। इसके बाद उसमें बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा रहता है। उबला हुआ दूध भी 2–3 दिन के भीतर उपयोग करना चाहिए, जबकि पैकेट वाला दूध खोलने के बाद 2 दिन में खत्म करना बेहतर होता है। दही 4–5 दिन तक ठीक रहती है, लेकिन स्वाद या गंध बदलने पर उसे नहीं खाना चाहिए। सब्जियां और फल कितने दिन चलेंगे? हरी पत्तेदार सब्जियां 3–4 दिन तक सुरक्षित रहती हैं, जबकि गाजर, बीन्स और फूलगोभी 5–7 दिन तक चल सकती हैं। सेब और नाशपाती 1–2 हफ्ते तक सुरक्षित रहते हैं, लेकिन अंगूर और स्ट्रॉबेरी 3–5 दिन में खराब हो सकते हैं। कटे हुए फल 24 घंटे के भीतर खा लेने चाहिए। अंडे, मांस और ब्रेड की अवधि कच्चे अंडे 7–10 दिन तक सुरक्षित रहते हैं, जबकि उबले अंडे 2–3 दिन में खा लेने चाहिए। कच्चा चिकन या मांस 1–2 दिन और मछली 24 घंटे से ज्यादा नहीं रखनी चाहिए। ब्रेड 5–7 दिन तक ठीक रहती है, लेकिन ज्यादा समय रखने पर उसकी गुणवत्ता घट जाती है। चावल, रोटी और दाल में सावधानी चावल 1–2 दिन में, दाल 2 दिन में और रोटी 12–14 घंटे में खा लेना बेहतर होता है। ज्यादा समय रखने पर ये स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। स्टोरेज के दौरान जरूरी सावधानियां गरम खाना सीधे फ्रिज में न रखें, कच्चे और पके भोजन को अलग रखें, एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें और फ्रिज का तापमान 3–4°C बनाए रखें। यदि खाने में बदबू, फफूंदी या रंग बदल जाए, तो उसे तुरंत फेंक दें।
चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
1678 – फ्रांसीसी सेना ने वाइप्रेस शहर पर कब्जा किया। 1707 - आलमांसा की लड़ाई; फ्रांस और स्पेनिस ने ब्रिटिश और पुर्तगाली को हराया। 1846 - मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध: टेक्सास की सीमाओं के सीमा विवादों से खुला संघर्ष शुरू हुआ। 1859 – स्वेज़ नहर की खुदाई आरंभ हुई। दस वर्ष के निर्माण के बाद 17 नवम्बर , 1869 ईसवी को स्वेज़ नहर का उद्घाटन हुआ। 1867 – जापान की राजधानी टोक्यो में विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई। 1898 – यूएस ने स्पेन में युद्ध घोषित किया। 1891 - अमेरिकी राष्ट्रपति बेंजामिन हैरिसन सैन फ्रांसिस्को की यात्रा की। 1901 - न्यूयॉर्क ऑटोमोबाइल, लाइसेंस प्लेटों का पहला अमेरिकी राज्य बना। 1905 – दक्षिण अफ्रीका में श्वेतों को मताधिकार मिला। 1925 – पॉल वाेन हिंडनबर्ग जर्मनी के राष्ट्रपति चुने गये। 1936 - ओगडेन की लड़ाई में इटली की जीत हुई। 1945 – इटली को फ़ासीवादी सेना के वर्चस्व से स्वतंत्रता मिली। 1950 - कम्युनिस्ट जासूस जूडिथ कॉपल का परीक्षण न्यूयॉर्क शहर में शुरू हुआ। 1953 – कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों ने डीएनए की संरचना के बारे में व्याख्या दी। 1954 – बेल लैब्स ने न्यूयार्क में पहली बार सोलर बैटरी बनाने की घोषणा की। 1957 – सोडियम परमाणु रिएक्टर पहली बार प्रायोगिक तौर पर संचालित किया गया। 1970 - हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको , HUDCO) भारत सरकार स्वामित्व की स्थापना हुई। 1971 – वियतनाम में अमरीका की सैनिक कार्रवाई के विरोध में लगभग 2 लाख अमरिकीयों ने वाशिंगटन में प्रदर्शन किया। 1975 – तत्कालीन सोवियत रूस ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। 1980 – अमरीकी सेना का तेहरान में अमरीकी दूतावास में बंघकों को छुड़ाने की कोशिश नाकामयाब हुई। 1981 – जापान के सुरूग में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में मरम्मत कार्य के दौरान 100 से अधिक मजदूर परमाणु विकिरण का शिकार हो गये। 1982 – दिल्ली में टेलीविजन पर पहली बार रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई। 1983 – जर्मन पत्रिका स्टर्न ने हिटलर की विवादास्पद डायरी छापी लेकिन बाद में यह डायरी नकली पाई गई। 1999 - वेस्टइंडीज के आल राउंडर खिलाड़ी कार्ल हूपर द्वारा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्न्यास की घोषणा । 1999 - वाशिंगटन में तीन दिवसीय नाटो शिखर सम्मेलन समाप्त । 1999 - इस्रायल के राष्ट्रपति आईजर विजमैन चीन की सात दिवसीय राजकीय यात्रा पर बीजिंग पहुँचे। 2003 - फ़िलिस्तीन में नये मंत्रिमंडल के गठन पर सहमति होने के साथ ही अमेरिका समर्थित शांति योजना का रास्ता साफ। 2004 - जिम्बाव्वे में श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक दिवसीय मैचों में न्यूनतम 35 रनों का रिकार्ड बनाया। 2004 - यूनानी साइप्रस ने एकीकरण योजना ठुकराई। 2004 - चीन में सार्स की बीमारी एक बार फिर से फैलने की पुष्टि हुई। 2005 – जापान के अमागासाकी में एक रेल दुर्घटना में 107 लोग मारे गये। 2007 - विरला इंस्टीट्यूट आफ़ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज का नया परिसर पनामा (बहरीन) में खुला। 2008- बालीवुड के प्रसिद्ध कलाकार व निर्देशक आमीर ख़ान को सिनेमा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। 2010 – दक्षिण अमेरिकी राज्य मिसीसिपी में आए तूफान के कारण तीन बच्चों सहित दस लोगों की मौत हो गई। 2010 - भारतीय नौसेना ने पुराने हो चुके चेतक हेलीकाप्टरों की जगह नए लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर (एलयूएच) ख़रीदने की प्रक्रिया शुरू की। 2013 – ब्रिटेन ने सोमालिया में अपना दूतावास 22 वर्षां के अंतराल के बाद पुन: खोला। 2013 – रूस के रामेन्स्की में एक अस्पताल में लगी भीषण आग में 38 लोग मारे गए। 2015 - नेपाल में भीषण भूकंप - राजधानी काठमांडू के नजदीक आए भूकंप से जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ। 2018 - उन्नत भारत अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। 2019 - बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े वीडियो साझा करने पर आईटी मंत्रालय ने व्हाट्सएप को पत्र लिखा। 2019 - श्रीलंका आत्मघाती हमला : राष्ट्रपति सिरिसेना की मांग पर रक्षा सचिव ने इस्तीफा सौंपा । 2019 - चीन के बीजिंग में चल रहे आईआईएसएफ विश्व कप (राइफल/पिस्टल) में भारतीय स्टार शूटर सौरभ चौधरी और मनु भाकर ने गोल्ड मेडल जीता। 2020 - असम सरकार ने धनवंतरी योजना की शुरुआत की जिसमें बाजार में अनुपलब्ध दवाएं सीधे रोगियों को घर पर उपलब्ध होंगी। 2020 - उत्तर प्रदेश वर्चुअल कोर्ट के जरिए अदालतों में सुनवाई शुरू करने वाला बना। 2020 - पाकिस्तान की नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में एंटी-शिप मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। 2021 - भारत व फ्रांस की नौसेनाओं के द्विपक्षीय अभ्यास 'वरुण-2021' के 19वें संस्करण का अरब सागर में आयोजन शुरू हुआ ( 25 - 27 अप्रैल, 2021)। 2021 - इराक के बगदाद में इब्न अल-खतीब अस्पताल में (24 से 25 अप्रैल की रात को) आग लगने से लगभग 82 लोग मारे गए और 110 लोग घायल हुए। 2022 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मामलों पर भारत के प्रमुख सम्मेलन रायसीना डायलॉग के 7वें संस्करण का उद्घाटन किया। 2022 - डॉ. मनसुख मंडाविया ने फार्मा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र 2022 विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के 7वें संस्करण का उद्घाटन किया। 2023 - प्रधानमंत्री ने दमन में नमो पथ, देवका सीफ्रंट राष्ट्र को समर्पित किया , केरल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई , देश के पहले वाटर मेट्रो सर्विस का उद्घाटन किया व पहले डिजिटल साइंस पार्क की नींव भी रखी। 2023 - भारत-मोजाम्बिक संयुक्त रक्षा कार्य समूह की चौथी बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। 2023 - युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर इंफाल में संपन्न हुआ। 2024 - अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण लैंड स्लाइड, NH-313 का बड़ा हिस्सा ढहा। 2024 - वायु सेना का टोही विमान जैसलमेर में क्रैश हुआ। 2024 - पटना के एक होटल में आग लगने 6 की मौत व 20 घायल हुए। 25 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 1900 - ग्लेडविन जेब - संयुक्त राष्ट्र के प्रथम महासचिव के चुनाव तक कार्यवाहक महासचिव थे। 1904 - चन्द्रबली पाण्डेय, साहित्यकार। 1919 - हेमवती नंदन बहुगुणा - उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहने वाले जानेमाने राजनीतिज्ञ और राजनेता थे। 1969 - आई. एम. विजयन - भारत के प्रसिद्ध फ़ुटबॉल खिलाड़ी हैं। 1977 – दक्षिण अफ्रीका के टेनिस खिलाड़ी जैफ कोएत्ज़ी का जन्म हुआ। 25 अप्रॅल को हुए निधन 1960 – अफ़ग़ानिस्तान के नरेश अमानुल्लाह ख़ान का देहान्त हुआ। उन्होंने वर्ष 1923 में अफ़ग़ानिस्तान को पहला संविधान दिया। वर्ष 1926 में उन्होंने अमीर के बजाए शाह की उपाधि चुनी। 1968 - बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ - शास्त्रीय गायक। 1992 - उज्ज्वला मजूमदार - भारत की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारियों में से एक थीं। 2000 - पण्डित मुखराम शर्मा - भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के सुप्रसिद्ध कथा, पटकथा और कहानी लेखक। 2005 - टांगुटूरी सूर्यकुमारी - तेलुगू सिनेमा में एक भारतीय फिल्म गायिका, अभिनेत्री और नृत्यांगना थी। 2020 - बिहार और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल देवानंद कोंवर का निधन। 2021 - पद्म भूषण पंडित राजन मिश्रा ( शास्त्रीय गायक) का कोरोना के कारण 70 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। 2021 - मोहन मल्लिकार्जुनगौड़ा शांतनगौदर - एक भारतीय विधिवेत्ता और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे । 2021 - सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पूर्व प्रमुख अरुण चौधरी का कोविड-19 से निधन हुआ। 2021 - स्वास्थ्य मंत्रालय के मीडिया प्रमुख वरिष्ठ आईआईएस अधिकारी मणिकांत ठाकुर का कोरोना से निधन हुआ। 2023 - पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह (95) बादल का निधन हुआ। 2023 - रूसी एथलीट वेरा क्रेपकिना (90) का निधन हुआ। 2024 - इंग्लिश संगीतकार माइक पिंडर (82) का निधन हुआ। 25 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री भोजजी महाराज पुण्य तिथि यात्रा - अजनसुरा (वर्धा)। संत शिरोमणि सेन महाराज जयन्ती (725वीं , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। आचार्य श्री बाहुबली सागर जी समाधि (जैन , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। श्री मुनिसुव्रनाथ भगवान जन्मकल्याणक (जैन , वैशाख कृष्ण द्वादशी)। श्री हेमवती नंदन बहुगुणा जयन्ती। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) 55वाँ स्थापना दिवस। विश्व मलेरिया दिवस। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में एन्जैक दिवस (Anzac Day)। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि दिवस (International Delegate's Day)। विश्व पेंगुइन दिवस (World Penguin Day)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया। उनके साथ स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता सहित कुल सात राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में जाने की तैयारी में हैं। AAP के लिए बड़ा झटका यह घटनाक्रम AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में पार्टी के कुल 10 सांसद हैं और इनमें से दो-तिहाई यानी 7 सांसदों का एक साथ जाना पार्टी के लिए लगभग ‘सफाए’ जैसा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से यह कदम एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत भी अहम है। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ दल बदलते हैं, तो इसे वैध माना जाता है और उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता। ऐसे में राघव चड्ढा और उनके साथियों का यह फैसला कानूनी रूप से भी सुरक्षित माना जा रहा है। राघव चड्ढा ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाया अपने फैसले को लेकर राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और देशहित के बजाय निजी हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मैंने इस पार्टी को 15 साल दिए, लेकिन अब महसूस होता है कि मैं गलत पार्टी में था।” इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। AAP की राज्यसभा में स्थिति कमजोर होती दिख रही है, वहीं BJP को ऊपरी सदन में मजबूती मिलने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बड़े राजनीतिक बदलाव का राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
नई दिल्ली में राजनीति का बड़ा उलटफेर देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal को गहरा राजनीतिक झटका दिया है। सूत्रों के अनुसार, AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने BJP के साथ जाने का फैसला किया है। यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है। 7 सांसदों का एक साथ पाला बदला राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि AAP के कई सांसद अब BJP के साथ जुड़ रहे हैं। इनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने कभी ईमानदार राजनीति का वादा किया था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, AAP में अब पारदर्शिता और नैतिकता की कमी देखी जा रही है। “AAP अब अपनी राह से भटक चुकी है” – चड्ढा का बयान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को कई साल दिए, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास राजनीति छोड़ने या सही रास्ता चुनने का विकल्प था, और उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। उनका कहना है कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों के साथ मिलकर BJP में शामिल होने का निर्णय लिया गया है। AAP का पलटवार, BJP पर गंभीर आरोप AAP ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “धोखा” करार देते हुए कहा कि जिन नेताओं को AAP ने पहचान दी, वही अब विरोधी खेमे में चले गए हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी दावा किया कि यह कदम राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया घटना के बाद Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर हमला बोला और इसे पंजाब के लोगों के साथ “विश्वासघात” बताया। राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में AAP और BJP की रणनीति क्या होगी और संसद में इसका क्या असर पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल: West Bengal विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी सरगर्मी चरम पर है। इस बीच Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) भी अपनी खास रणनीति के तहत मैदान में सक्रिय नजर आ रहा है। संघ ने राज्य के 250 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख छोटी-छोटी बैठकें कर मतदाताओं तक पहुंच बनाने का दावा किया है। ‘लोक मत परिष्कार’ के जरिए जनसंपर्क संघ सीधे चुनाव प्रचार नहीं करता, लेकिन ‘लोक मत परिष्कार’ अभियान के तहत उसकी टीमें घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रही हैं। चार-पांच स्वयंसेवकों की छोटी टोलियां ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए लोगों से मिल रही हैं और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित कर रही हैं। क्या संदेश दे रहे स्वयंसेवक? RSS से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जनसंपर्क के दौरान लोगों से: बिना डर और दबाव के वोट डालने की अपील NOTA पर वोट न देने की सलाह 100% मतदान सुनिश्चित करने का आग्रह साथ ही पर्चों के जरिए राज्य के मुद्दों पर जानकारी दी जा रही है। किन मुद्दों पर फोकस? जनसंपर्क अभियान में कुछ प्रमुख मुद्दों को खास तौर पर उठाया जा रहा है: महिला सुरक्षा भ्रष्टाचार और घोटाले (जैसे शिक्षक भर्ती विवाद) घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन सरकारी नीतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल BJP को अप्रत्यक्ष समर्थन? हालांकि RSS खुद को गैर-राजनीतिक संगठन बताता है, लेकिन उसकी यह गतिविधि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। राज्य में मुख्य मुकाबला Bharatiya Janata Party (BJP) और All India Trinamool Congress (TMC) के बीच है। प्रचार थमने से पहले आखिरी जोर 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले आज शाम प्रचार थम जाएगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने मतदाताओं तक आखिरी समय में अधिकतम पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Nitin Nabin ने अपने पहले टीवी इंटरव्यू में विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। एबीपी न्यूज को दिए इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को निशाने पर लिया। उनके बयानों ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अखिलेश यादव पर ‘टोपी’ वाला तंज इंटरव्यू के दौरान जब उनसे उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल पूछा गया, तो नितिन नवीन ने सीधे तौर पर अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा: “आजकल अखिलेश यादव ने टोपी पहनना थोड़ा कम कर दिया है” “पहले ये लोग हर जगह टोपी पहनकर जाते थे” यह बयान केवल एक प्रतीकात्मक टिप्पणी नहीं, बल्कि विपक्ष की कथित “पहचान आधारित राजनीति” पर निशाना माना जा रहा है। उन्होंने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) जैसे नारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे उनकी सोच और राजनीति का अंदाजा लगाया जा सकता है। ‘टोपी’ और वोट बैंक की राजनीति पर जवाब जब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या बीजेपी “टोपी पहनने वालों” को पसंद नहीं करती, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा: “हमें टोपी से कोई दिक्कत नहीं है, हमें ढोंग से दिक्कत है” “जो लोग केवल दिखावे के लिए पहचान का इस्तेमाल करते हैं, उनसे समस्या है” उन्होंने आगे यह भी कहा कि: तीन तलाक कानून के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को समर्थन दिया इससे यह साबित होता है कि बीजेपी का समर्थन किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है राहुल गांधी पर भी साधा निशाना नितिन नवीन ने Rahul Gandhi और अखिलेश यादव के पुराने राजनीतिक समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा कि: दोनों नेताओं ने पहले कई संयुक्त रैलियां और अभियान चलाए लेकिन इन अभियानों का जनता पर कोई ठोस असर नहीं पड़ा उन्होंने कहा कि केवल रैलियां और जुलूस निकालने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बोलते हुए नितिन नवीन ने Mamata Banerjee सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि: राज्य में अवैध घुसपैठ एक बड़ी समस्या बन चुकी है “बांग्लादेशी घुसपैठिए” भारत में आकर बस गए हैं इन लोगों को चिन्हित कर वापस भेजने (डिपोर्ट) की जरूरत है यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में चुनावी माहौल अपने चरम पर है और सुरक्षा तथा पहचान के मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। चुनावी रणनीति या राजनीतिक हमला? विश्लेषकों का मानना है कि नितिन नवीन के ये बयान: सीधे तौर पर विपक्ष की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति पर हमला हैं चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश भी माने जा सकते हैं “टोपी” जैसे प्रतीकों पर टिप्पणी अक्सर संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि यह पहचान और समुदाय से जुड़े मुद्दों को छूती है। क्या हो सकता है राजनीतिक असर? इस बयान के बाद: समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल पलटवार कर सकते हैं मुद्दा चुनावी सभाओं और मीडिया बहस का केंद्र बन सकता है