झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, 43 लाख से ज्यादा नाम बाहर; 4 सितंबर तक दावा-आपत्ति का मौका
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक साल बढ़ा
शेयर बाजार की क्लोजिंग: सेंसेक्स 152 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,650 के करीब; उतार-चढ़ाव के बीच बाजार हरे निशान में बंद
भारत में आज से BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भुवनेश्वर में जुटेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि
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शेयर बाजार की क्लोजिंग: सेंसेक्स 152 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,650 के करीब; उतार-चढ़ाव के बीच बाजार हरे निशान में बंद

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Dr. T.V. Somanathan, Govind Mohan
राष्ट्रीय

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक साल बढ़ा

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Jharkhand SIR
झारखंड

झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, 43 लाख से ज्यादा नाम बाहर; 4 सितंबर तक दावा-आपत्ति का मौका

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Ardee Industries IPO खुला, ₹426 करोड़ जुटाने की तैयारी; ₹50-53 तय हुआ प्राइस बैंड

Ardee Industries का IPO आज खुला, ₹426 करोड़ जुटाने की तैयारी; ₹50-53 तय हुआ प्राइस बैंड मुंबई, एजेंसियां। मेटल रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी क्षेत्र की कंपनी Ardee Industries का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) आज, 5 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब ₹425.87 करोड़ जुटाना चाहती है। IPO में शेयर का प्राइस बैंड ₹50 से ₹53 प्रति शेयर तय किया गया है।   7 अगस्त तक निवेश का मौका     Ardee Industries का IPO 5 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा। इश्यू में करीब ₹320 करोड़ का फ्रेश इश्यू और लगभग ₹105.87 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने IPO से पहले एंकर निवेशकों से करीब ₹127.75 करोड़ जुटाए हैं।     ₹53 प्रति शेयर है अपर प्राइस बैंड     IPO के लिए प्रति शेयर ₹50 का फ्लोर प्राइस और ₹53 का अपर प्राइस बैंड रखा गया है। कंपनी का इश्यू मुख्य रूप से नए शेयर जारी करने और प्रमोटरों की ओर से शेयरों की बिक्री के संयोजन पर आधारित है।     रकम का इस्तेमाल कहां होगा     फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से करीब ₹220 करोड़ कंपनी की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं। करीब ₹22 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे, जबकि बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल होगी।   Ardee Industries ऊर्जा भंडारण उत्पादों और नॉन-फेरस स्क्रैप के रिसाइक्लिंग एवं संसाधन रिकवरी कारोबार से जुड़ी है। कंपनी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में उसका परिचालन राजस्व करीब ₹1,167.65 करोड़ और शुद्ध लाभ करीब ₹84.68 करोड़ रहा। IPO की लिस्टिंग 12 अगस्त 2026 को होने की संभावित तारीख बताई गई है।

Yamaha R15 V4 और MT-15 MotoGP Edition भारत में फिर लॉन्च, नए ग्राफिक्स के साथ वापसी

Yamaha R15 V4 और MT-15 के MotoGP एडिशन की वापसी, नई कलर स्कीम के साथ फिर हुए लॉन्च नई दिल्ली, एजेंसियां। Yamaha Motorcycle India ने अपने लोकप्रिय स्पोर्ट्स बाइक मॉडल Yamaha R15 V4 और Yamaha MT-15 को एक बार फिर Monster Energy MotoGP Edition में भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। यह स्पेशल एडिशन पहले भी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। नई बाइक्स में Yamaha की फैक्ट्री MotoGP रेसिंग बाइक YZR-M1 से प्रेरित खास ग्राफिक्स और रेसिंग लिवरी दी गई है। हालांकि कंपनी ने इस बार केवल कॉस्मेटिक बदलाव किए हैं, जबकि इंजन और अन्य मैकेनिकल फीचर्स पहले जैसे ही रखे गए हैं।   कीमत और इंजन में नहीं हुआ बदलाव     नई Yamaha R15 V4 MotoGP Edition की एक्स-शोरूम कीमत 1.76 लाख रुपये रखी गई है, जो स्टैंडर्ड मॉडल से करीब 3,000 रुपये अधिक है। वहीं Yamaha MT-15 MotoGP Edition की कीमत 1.77 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जो कुछ स्टैंडर्ड वेरिएंट्स की तुलना में लगभग 13,000 रुपये महंगी है। दोनों बाइक्स में 155cc का लिक्विड-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन मिलता है, जो 18.4 हॉर्सपावर की पावर और 14.2Nm का टॉर्क जनरेट करता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नए MotoGP एडिशन में केवल डिजाइन और ग्राफिक्स अपडेट किए गए हैं, जबकि परफॉर्मेंस और मैकेनिकल सेटअप पहले जैसा ही रहेगा। इसके अलावा Yamaha ने FZ-S Fi Hybrid और FZ-S Fi में भी नए कलर ऑप्शन और अपडेटेड ग्राफिक्स पेश किए हैं, लेकिन उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  

मलाइका अरोड़ा ने खरीदी Mahindra Thar Roxx, नई गाड़ी की पूजा करते वीडियो वायरल

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने अपने कार कलेक्शन में नई Mahindra Thar Roxx शामिल की है। नई SUV की डिलीवरी के दौरान मलाइका ने पारंपरिक तरीके से गाड़ी की पूजा की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।   नई Thar Roxx का घर में हुआ स्वागत   वायरल वीडियो में नई Thar Roxx मलाइका के घर पहुंचती दिखाई दे रही है। इसके बाद अभिनेत्री गाड़ी की पूजा करती नजर आती हैं। उन्होंने नई कार के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। रिपोर्टों के मुताबिक मलाइका ने Thar Roxx Star Edition का पीले रंग वाला मॉडल खरीदा है।   SUV की कीमत और खासियत   Mahindra Thar Roxx कंपनी की लोकप्रिय थार का 5-डोर वर्जन है। इसे 2024 में भारतीय बाजार में उतारा गया था। इसमें पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन विकल्प मिलते हैं और चुनिंदा वेरिएंट में 4x4 ड्राइवट्रेन भी उपलब्ध है।   रिपोर्टों के अनुसार Thar Roxx की एक्स-शोरूम कीमत करीब ₹12.39 लाख से ₹23.53 लाख तक है, जबकि मलाइका के खरीदे गए विशेष वेरिएंट की कीमत अलग हो सकती है।   पूजा का वीडियो हुआ वायरल   नई गाड़ी की पूजा करते मलाइका का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। जहां कई प्रशंसकों ने उन्हें नई कार के लिए बधाई दी, वहीं कुछ यूजर्स ने पूजा के दौरान उनके पहनावे और जूते को लेकर टिप्पणी की।   मलाइका अरोड़ा के कार कलेक्शन में पहले से भी कई महंगी गाड़ियां शामिल हैं। अब Thar Roxx के जुड़ने के बाद उनका नया SUV लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

झारखंड में परीक्षा धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में आईं सोनाक्षी सिन्हा, पूछा- ‘यह सब कब रुकेगा?’

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट साझा करते हुए उनकी स्थिति पर चिंता जताई और सवाल किया कि ‘यह सब कब रुकेगा?’   छात्रों के समर्थन में सोनाक्षी की पोस्ट   सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया पर झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ी सामग्री साझा की। उन्होंने छात्रों की परेशानी और लगातार विरोध प्रदर्शन को लेकर दुख जताया। अभिनेत्री का यह पोस्ट सामने आने के बाद झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।   सोनाक्षी का समर्थन ऐसे समय आया है जब JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे आरोपों को लेकर छात्र निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।   29 जुलाई से धरने पर बैठे हैं छात्र   रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारी छात्र 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।   रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं और प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।   आंदोलन को मिल रहा सेलिब्रिटी समर्थन   सोनाक्षी सिन्हा के समर्थन के बाद छात्र आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ गई है। अभिनेत्री पहले भी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं।   हालांकि, सोनाक्षी ने किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे छात्रों की स्थिति और उनकी मांगों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके पोस्ट के बाद अब इस आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड कलेक्शन सेंटर
बिहार

बिहार के 276 प्रखंडों में खुलेंगे ब्लड कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
भरत तिवारी मामले में प्रशांत किशोर का मनोज तिवारी पर पलटवार, बोले- हिम्मत है तो खुली बहस करें

भरत तिवारी मामले में प्रशांत किशोर का मनोज तिवारी पर पलटवार, बोले- हिम्मत है तो खुली बहस करें पटना, एजेंसियां। बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें खुली बहस की चुनौती दी है। किशोर ने मनोज तिवारी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके दावों पर सवाल उठाए।   मनोज तिवारी ने क्या आरोप लगाया था?     दरअसल, मनोज तिवारी ने आरोप लगाया था कि प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी की मां आशा देवी से बांकीपुर उपचुनाव में उनके पक्ष में प्रचार करने को कहा था। मनोज तिवारी के मुताबिक, भरत तिवारी के एनकाउंटर मामले में न्याय दिलाने के नाम पर उनकी मां को भरोसा दिया गया और चुनाव प्रचार की बात कही गई थी।   हालांकि, इस दावे को भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि प्रशांत किशोर या उनकी ओर से किसी ने परिवार को चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाया और न ही ऐसा कोई फोन आया था।   प्रशांत किशोर ने दी खुली बहस की चुनौती     अब बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर ने मनोज तिवारी के आरोपों पर पलटवार किया है। किशोर ने उनके दावों को खारिज करते हुए खुली बहस की चुनौती दी और कहा कि यदि मनोज तिवारी के पास अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य हैं तो वे सार्वजनिक रूप से बहस करें।   प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के परिवार के मुद्दे को चुनावी राजनीति में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए और इसे गंभीर राजनीतिक विवाद बताया।   भरत तिवारी एनकाउंटर बना चुनावी मुद्दा     भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। प्रशांत किशोर इस मामले को लेकर पहले भी बिहार सरकार से जवाब मांग चुके हैं और जांच तथा जवाबदेही का मुद्दा उठाते रहे हैं।   बांकीपुर उपचुनाव के दौरान भी यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा। अब मनोज तिवारी और प्रशांत किशोर के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बाद विवाद और तेज हो गया है। फिलहाल, मनोज तिवारी के आरोपों को भरत तिवारी के पिता पहले ही खारिज कर चुके हैं, जबकि प्रशांत किशोर ने अब मनोज तिवारी को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। इस पूरे विवाद में दोनों नेताओं के आगे के बयान पर राजनीतिक नजर बनी हुई है।

तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है

तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल को लेकर NDA सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA राज्य में दो चुनाव हार चुकी है।   सम्राट चौधरी सरकार पर तेजस्वी का निशाना     तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद NDA को चुनावी मोर्चे पर झटके लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और उसके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में राजनीतिक दल आगामी चुनावी गतिविधियों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।     ‘150 दिनों में दो चुनाव हारे’ का दावा     तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि सम्राट चौधरी के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA दो चुनाव हार चुकी है। हालांकि, यह बयान तेजस्वी यादव का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।   विपक्ष लगातार NDA सरकार को उसके कामकाज और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब भी दिए जा रहे हैं।   बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज     सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। तेजस्वी यादव लगातार सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं।   दूसरी ओर, NDA नेता सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

नेपाल में भारी बारिश के बाद बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, कई जिलों में प्रशासन अलर्ट

नेपाल में भारी बारिश और पानी बढ़ने से बिहार में बाढ़ का अलर्ट, कई जिलों में बढ़ी चिंता पटना, एजेंसियां। नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश और वहां के जलग्रहण क्षेत्रों से बढ़े पानी का असर बिहार में दिखाई देने लगा है। उत्तर बिहार की कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और अररिया समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।   कोसी-गंडक समेत नदियों का बढ़ा जलस्तर     नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश बढ़ने के साथ बिहार की सीमा से जुड़ी नदियों में पानी बढ़ रहा है। खास तौर पर कोसी और गंडक नदी तंत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है। बिहार के जल संसाधन विभाग के केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के आंकड़ों में भी 5 अगस्त की सुबह कई महत्वपूर्ण नदियों के जलस्तर की निगरानी की जा रही है।     अररिया और रक्सौल में दिखने लगा असर     नेपाल से आने वाले पानी और लगातार बारिश के कारण अररिया में बाढ़ जैसे हालात की सूचना है। वहीं रक्सौल क्षेत्र में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से खतरा बढ़ा है। कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने की खबर सामने आई है। मौसम विभाग ने भी बिहार के कई हिस्सों में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश की संभावना जताई है। इससे नदियों के जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका बनी हुई है।     प्रशासन अलर्ट, तटबंधों पर निगरानी बढ़ी     बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन और जल संसाधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील तटबंधों और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।   फिलहाल स्थिति को देखते हुए उत्तर बिहार के लोगों से सावधानी बरतने और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। नेपाल में बारिश जारी रहने पर बिहार के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को मिल सकेगी फैमिली पेंशन

मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को मिलेगी फैमिली पेंशन, पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पटना, एजेंसियां। पटना हाईकोर्ट ने मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी के पारिवारिक पेंशन के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जब तक बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कोई कानून लागू नहीं है, तब तक वैध मुस्लिम विवाह से हुई दूसरी पत्नी को केवल इस आधार पर पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी थी।   दूसरी पत्नी ने पेंशन के लिए किया था दावा     मामला एक दिवंगत मुस्लिम सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी से जुड़ा था। पति की मृत्यु के बाद महिला ने पारिवारिक पेंशन का दावा किया, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने उसे दूसरी पत्नी होने के आधार पर पेंशन देने से इनकार कर दिया।   इसके बाद महिला ने अपने अधिकार के लिए पटना हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत वैध दूसरी शादी से हुई पत्नी को सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन का अधिकार मिल सकता है।   बहुविवाह पर रोक लगाने वाला कानून नहीं     हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत बहुविवाह पर वर्तमान में कोई सामान्य वैधानिक प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में वैध मुस्लिम विवाह से हुई दूसरी पत्नी को केवल इस आधार पर पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी है।   अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में समान नागरिक संहिता (UCC) या बहुविवाह को प्रतिबंधित करने वाला कोई कानून लागू होता है, तो कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।   मुस्लिम पर्सनल लॉ को माना महत्वपूर्ण     पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम व्यक्तिगत कानून की मौजूदा कानूनी स्थिति को महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, जब तक संसद या सक्षम विधायिका इस संबंध में कोई अलग कानून नहीं बनाती, तब तक वैध मुस्लिम विवाह को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह दूसरी शादी है।   इस फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनकी एक से अधिक पत्नियों के बीच पारिवारिक पेंशन को लेकर विवाद सामने आते हैं।   फैसला पेंशन के अधिकार पर, सभी मामलों पर स्वतः लागू नहीं     अदालत का फैसला पारिवारिक पेंशन के अधिकार से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में दूसरी पत्नी को स्वतः पेंशन मिल जाएगी। संबंधित विवाह की वैधता और सरकारी पेंशन नियमों के तहत पात्रता जैसे पहलुओं को भी देखा जाएगा।   फिलहाल पटना हाईकोर्ट का यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के पारिवारिक पेंशन अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।

झारखंड

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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KGBV भर्ती 2026: 261 पदों पर निकली वैकेंसी, बुलंदशहर और बरेली में होगी नियुक्ति लखनऊ, एजेंसियां। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। KGBV भर्ती 2026 के तहत कुल 261 संविदा पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई है। ये रिक्तियां उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और बरेली जिलों में हैं। भर्ती में शिक्षण के साथ-साथ गैर-शिक्षण पद भी शामिल बताए गए हैं।   किन पदों पर होगी भर्ती?     KGBV भर्ती के तहत अलग-अलग जिम्मेदारियों वाले पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इनमें प्रिंसिपल, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), लैब असिस्टेंट, ऑफिस सुपरिंटेंडेंट और केयरटेकर समेत अन्य पद शामिल हैं।   पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को संबंधित जिले की आधिकारिक भर्ती अधिसूचना में अपनी पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।   संविदा आधार पर होगी नियुक्ति     यह भर्ती संविदा आधार पर की जा रही है। KGBV के माध्यम से बालिकाओं को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं में इन कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।   भर्ती प्रक्रिया में पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया लागू होगी। उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों के अनुसार आवेदन करना होगा।   आवेदन से पहले जरूर जांचें नोटिफिकेशन     KGBV भर्ती में अलग-अलग पदों के लिए योग्यता और आवेदन की अंतिम तिथि अलग हो सकती है। ऐसे में उम्मीदवारों को बुलंदशहर और बरेली जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी मूल विज्ञापन देखकर ही आवेदन करना चाहिए।   उम्मीदवार आवेदन करने से पहले पदवार रिक्तियों, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, वेतन, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ध्यान से पढ़ें।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने UP PET 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक अभ्यर्थी 1 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने अभी परीक्षा तिथि घोषित नहीं की है, लेकिन आवेदन शुरू होने के साथ ही उम्मीदवारों के लिए तैयारी का समय शुरू हो गया है।   परीक्षा पैटर्न   UP PET 2026 परीक्षा ऑफलाइन (OMR शीट) मोड में आयोजित होगी। परीक्षा मोड: ऑफलाइन (OMR आधारित) कुल प्रश्न: 100 (बहुविकल्पीय प्रश्न) कुल अंक: 100 परीक्षा अवधि: 2 घंटे प्रत्येक सही उत्तर: 1 अंक नेगेटिव मार्किंग: प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.25 अंक कटेंगे UP PET 2026 का सिलेबस प्रश्नपत्र 15 प्रमुख विषयों पर आधारित होगा। इनमें शामिल हैं: भारतीय इतिहास भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भूगोल भारतीय अर्थव्यवस्था भारतीय संविधान एवं लोक प्रशासन सामान्य विज्ञान प्रारंभिक अंकगणित सामान्य हिंदी तर्क एवं तर्कशक्ति करेंट अफेयर्स जनरल अवेयरनेस अपठित हिंदी गद्यांश का विश्लेषण ग्राफ आधारित प्रश्न तालिका की व्याख्या एवं विश्लेषण इनमें अधिकांश विषयों से 5-5 अंक के प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि करेंट अफेयर्स, जनरल अवेयरनेस, अपठित गद्यांश, ग्राफ और टेबल विश्लेषण से 10-10 अंक के प्रश्न होंगे।   किन भर्तियों में मिलेगा फायदा?   UP PET केवल एक पात्रता परीक्षा है। इसका स्कोर सीधे नौकरी नहीं दिलाता, बल्कि UPSSSC की विभिन्न ग्रुप 'C' भर्तियों में आवेदन करने की पात्रता प्रदान करता है। UP PET स्कोर के आधार पर अभ्यर्थी इन भर्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं: लेखपाल ग्राम विकास अधिकारी (VDO) जूनियर असिस्टेंट क्लर्क / ऑफिस असिस्टेंट एक्साइज कांस्टेबल वन रक्षक पंचायत सहायक तकनीकी एवं लैब असिस्टेंट अन्य ग्रुप 'C' पद स्कोर की वैधता UP PET 2026 का स्कोर परिणाम घोषित होने की तारीख से तीन वर्ष तक मान्य रहेगा। इसी स्कोर के आधार पर आयोग विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करेगा। यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है, तो अंतिम परिणाम तैयार करने के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया लागू की जाएगी।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) प्रीलिम्स परीक्षा 2026 आज, 1 अगस्त से शुरू हो रही है। परीक्षा 1 और 2 अगस्त को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर चार शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को रिपोर्टिंग समय, जरूरी दस्तावेज और परीक्षा केंद्र के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।   चार शिफ्टों में होगी परीक्षा   एसबीआई पीओ प्रीलिम्स परीक्षा चार शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। पहली शिफ्ट सुबह 9:00 बजे, दूसरी 11:30 बजे, तीसरी दोपहर 2:00 बजे और चौथी शाम 4:30 बजे शुरू होगी। उम्मीदवारों को अपनी शिफ्ट के निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है।   शिफ्ट    रिपोर्टिंग समय    परीक्षा समय   शिफ्ट-1    सुबह 8:00 बजे    9:00 बजे से 10:00 बजे शिफ्ट-2    सुबह 10:30 बजे    11:30 बजे से 12:30 बजे शिफ्ट-3    दोपहर 1:00 बजे    2:00 बजे से 3:00 बजे शिफ्ट-4    दोपहर 3:30 बजे    4:30 बजे से 5:30 बजे   ये दस्तावेज साथ ले जाना जरूरी   अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रिंटेड एडमिट कार्ड, मूल वैध फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस), हालिया पासपोर्ट साइज फोटो और पहचान पत्र की एक फोटोकॉपी साथ ले जानी होगी। इन दस्तावेजों के बिना परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।   इन चीजों को ले जाने पर रहेगी रोक   परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा जांच के बाद ही उम्मीदवारों को परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जाएगा।   एग्जाम डे पर इन निर्देशों का रखें ध्यान   उम्मीदवार निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा कक्ष में अनुशासन बनाए रखना और पर्यवेक्षकों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। नकल या किसी भी अनुचित साधन का उपयोग करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।   ऐसा होगा परीक्षा पैटर्न   एसबीआई पीओ प्रीलिम्स परीक्षा में कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनके लिए 100 अंक निर्धारित हैं। परीक्षा की अवधि 60 मिनट होगी। प्रश्नपत्र में अंग्रेजी भाषा (30 प्रश्न), मात्रात्मक योग्यता (35 प्रश्न) और तर्क क्षमता (35 प्रश्न) से प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक सेक्शन के लिए 20 मिनट का अलग समय निर्धारित रहेगा।

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सावन में बिना प्याज-लहसुन भी मिलेगा रेस्टोरेंट जैसा स्वाद, ये 5 इंस्टेंट सात्विक रेसिपीज

नई दिल्ली, एजेंसियां। सावन के महीने में बड़ी संख्या में लोग सात्विक भोजन अपनाते हैं और प्याज-लहसुन का सेवन पूरी तरह छोड़ देते हैं। ऐसे में रोजाना रात के खाने में क्या बनाया जाए, यह सबसे बड़ा सवाल बन जाता है। अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज-लहसुन के स्वादिष्ट खाना बनाना मुश्किल है, लेकिन सही मसालों और आसान कुकिंग तकनीक की मदद से घर पर भी रेस्टोरेंट जैसा स्वाद पाया जा सकता है। अगर आप भी सावन में स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखना चाहते हैं, तो ये इंस्टेंट सात्विक रेसिपीज आपके डिनर को खास बना सकती हैं।   1. बिना प्याज-लहसुन वाली पनीर मखनी पनीर मखनी सावन के दौरान प्रोटीन से भरपूर और स्वादिष्ट विकल्प है। इसे बनाने के लिए टमाटर, अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट तैयार करें। घी में जीरा, तेजपत्ता और हींग का तड़का लगाने के बाद इस पेस्ट को अच्छी तरह भूनें। फिर हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और काजू का पेस्ट मिलाकर ग्रेवी तैयार करें। आखिर में पनीर के टुकड़े और गरम मसाला डालकर कुछ मिनट पकाएं। तैयार पनीर मखनी को रोटी, पराठे या जीरा राइस के साथ परोसें।   2. दही वाले आलू की झटपट सब्जी अगर आपके पास समय कम है तो दही वाले आलू एक बेहतरीन विकल्प हैं। उबले आलू को हल्के मसालों के साथ भूनकर उसमें दही और बेसन का मिश्रण मिलाया जाता है। धीमी आंच पर पकाने से दही फटती नहीं और सब्जी का स्वाद बेहद लाजवाब बनता है। हरे धनिये की गार्निश इसे और भी स्वादिष्ट बना देती है।   3. मिक्स वेज पनीर भुर्जी गाजर, बीन्स, शिमला मिर्च, मटर जैसी सब्जियों को हल्के मसालों के साथ पकाकर उसमें कद्दूकस किया हुआ पनीर मिलाएं। अमचूर पाउडर और हरा धनिया इसका स्वाद बढ़ा देते हैं। यह डिश सिर्फ 15 मिनट में तैयार हो जाती है और रोटी, पराठे या ब्रेड के साथ खाई जा सकती है।   4. जीरा मटर पुलाव बासमती चावल, हरे मटर, जीरा, तेजपत्ता, लौंग और दालचीनी जैसे साबुत मसालों से तैयार जीरा मटर पुलाव सात्विक भोजन का बेहतरीन विकल्प है। इसमें घी की हल्की खुशबू और साबुत मसालों का स्वाद इसे खास बनाता है। इसे बूंदी रायता या दही के साथ परोस सकते हैं।   5. कढ़ी पकोड़ा (बिना प्याज) बेसन और दही से तैयार कढ़ी में बिना प्याज वाले बेसन के पकोड़े डालकर इसे आसानी से बनाया जा सकता है। जीरा, मेथी दाना, करी पत्ता, हींग और सूखी लाल मिर्च का तड़का इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देता है। इसे सादे चावल या जीरा राइस के साथ परोसकर स्वादिष्ट और संतुलित भोजन का आनंद लिया जा सकता।   सात्विक भोजन को स्वादिष्ट बनाने के आसान टिप्स   बिना प्याज-लहसुन के भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए हींग, अदरक, हरी मिर्च, टमाटर, काजू का पेस्ट, कसूरी मेथी और साबुत मसालों का संतुलित उपयोग करें। घी में तड़का लगाने से व्यंजन का स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाते हैं। इस तरह सावन के दौरान भी स्वाद और सेहत से भरपूर डिनर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

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Crispy Onion Pakoda Recipe: बिना डीप फ्राई किए बनाएं कुरकुरे प्याज के पकोड़े, शेफ संजीव कपूर की आसान Air Fryer रेसिपी

नई दिल्ली: बारिश का मौसम हो और गरमा-गरम चाय के साथ कुरकुरे प्याज के पकोड़े न हों, ऐसा कम ही होता है। लेकिन डीप फ्राई पकोड़ों में ज्यादा तेल और कैलोरी होने की वजह से कई लोग इन्हें खाने से बचते हैं। अगर आप भी स्वाद के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना चाहते हैं, तो सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर की यह Air Fryer Onion Pakoda Recipe आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इस आसान रेसिपी की मदद से आप बिना डीप फ्राई किए भी बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम प्याज के पकोड़े तैयार कर सकते हैं। सामग्री 2 मीडियम आकार के प्याज ¾ कप बेसन 1 छोटा चम्मच नमक 1 छोटा चम्मच कुटा हुआ साबुत धनिया 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर 1½ छोटा चम्मच अजवाइन ब्रश करने के लिए थोड़ा-सा तेल स्टेप 1: प्याज तैयार करें सबसे पहले प्याज को पतले और लंबे स्लाइस में काट लें। अब इन्हें एक बड़े बाउल में डालकर नमक मिलाएं और हाथों से अच्छी तरह मिक्स करें। इसके बाद प्याज को 10–15 मिनट के लिए छोड़ दें। इससे प्याज अपना प्राकृतिक पानी छोड़ देगा, जिससे बैटर बनाने के लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टेप 2: बेसन और मसाले मिलाएं अब उसी बाउल में बेसन, कुटा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, जीरा पाउडर और अजवाइन डालें। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं ताकि बेसन और मसाले प्याज पर समान रूप से चिपक जाएं। जरूरत पड़े तो बहुत थोड़ा पानी डाल सकते हैं, लेकिन मिश्रण ज्यादा पतला न करें। स्टेप 3: Air Fryer को Preheat करें Air Fryer को 200°C पर 2–3 मिनट के लिए प्रीहीट करें। इसके बाद बास्केट में पार्चमेंट पेपर बिछाएं और उस पर हल्का-सा तेल ब्रश कर दें, ताकि पकोड़े चिपकें नहीं। स्टेप 4: पकोड़े सेट करें तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे पकोड़े बनाकर Air Fryer बास्केट में रखें। ध्यान रखें कि सभी पकोड़े एक ही लेयर में हों और उनके बीच थोड़ी दूरी रहे, ताकि गर्म हवा चारों ओर समान रूप से पहुंच सके। ऊपर से हल्का-सा तेल ब्रश कर दें। स्टेप 5: पहली बार Air Fry करें Air Fryer को 200°C पर 6 मिनट के लिए चलाएं। इस दौरान पकोड़ों की बाहरी परत सुनहरी और हल्की कुरकुरी होने लगेगी। स्टेप 6: पलटकर दोबारा पकाएं 6 मिनट बाद पकोड़ों को सावधानी से पलट दें। दोबारा हल्का-सा तेल ब्रश करें और 8 मिनट के लिए फिर से Air Fry करें। जब पकोड़े सुनहरे और पूरी तरह कुरकुरे हो जाएं, तो उन्हें बाहर निकाल लें। ऐसे करें सर्व गरमा-गरम प्याज के पकोड़ों को हरी चटनी, टमाटर केचप और एक कप अदरक वाली चाय के साथ परोसें। बिना डीप फ्राई किए तैयार ये पकोड़े स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मेल हैं।  

surbhi अगस्त 2, 2026 0
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नई दिल्ली, एजेंसियां। दही भारतीय रसोई का ऐसा सुपरफूड है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल रायता, लस्सी और कढ़ी बनाने में किया जाता है, लेकिन इससे कई स्वादिष्ट स्नैक्स भी तैयार किए जा सकते हैं। अगर अचानक मेहमान आ जाएं या शाम की चाय के साथ कुछ अलग खाने का मन हो, तो दही से बनी रेसिपीज़ बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं।   दही ब्रेड रोल   दही में बारीक कटी सब्जियां, पनीर, काली मिर्च और चाट मसाला मिलाकर स्टफिंग तैयार करें। इसे ब्रेड में भरकर हल्का तेल लगाकर तवे या एयर फ्रायर में सेंक लें। यह स्नैक चाय के साथ और बच्चों के टिफिन के लिए शानदार विकल्प है।   दही सूजी टिक्की   सूजी, दही और बारीक कटी सब्जियों को मसालों के साथ मिलाकर गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर नॉन-स्टिक तवे पर हल्के तेल में सेंक लें। यह हल्का और पौष्टिक शाम का नाश्ता है।   दही सैंडविच   दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा, गाजर, शिमला मिर्च, नमक, काली मिर्च और हर्ब्स मिलाकर स्प्रेड तैयार करें। इसे ब्राउन ब्रेड पर लगाकर टोस्ट करें या बिना टोस्ट किए परोसें। यह हल्का और पौष्टिक स्नैक है।   दही आलू चाट   उबले हुए आलू पर फेंटा हुआ दही डालें और ऊपर से हरी चटनी, इमली की चटनी, भुना जीरा, लाल मिर्च, चाट मसाला, अनार के दाने और सेव डालकर परोसें। यह स्वाद और रंग दोनों में शानदार होती है।   दही ओट्स कटलेट   ओट्स, दही, उबली सब्जियां और मसालों को मिलाकर कटलेट तैयार करें। इन्हें कम तेल में तवे पर सेंकें या एयर फ्रायर में पकाएं। यह हेल्दी स्नैक फिटनेस पसंद लोगों और बच्चों दोनों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
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वजन कम करना हुआ आसान! लौकी की ये 4 हेल्दी रेसिपी करें ट्राई, स्वाद के साथ मिलेगी फिटनेस

Weight Loss Tips: वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन बेस्वाद डाइट की वजह से बार-बार हार मान जाते हैं? अगर हां, तो लौकी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। ज्यादातर लोग लौकी का नाम सुनते ही मुंह बना लेते हैं, लेकिन सही तरीके से बनाई गई लौकी की रेसिपीज न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि वजन घटाने में भी मददगार साबित हो सकती हैं। लौकी में लगभग 92 प्रतिशत पानी, कम कैलोरी और भरपूर फाइबर होता है। यही कारण है कि इसे वेट लॉस डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है। फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग की संभावना कम हो सकती है। क्यों फायदेमंद है लौकी? कम कैलोरी और हाई फाइबर लगभग 92% पानी, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद पाचन को बेहतर बनाने में सहायक हेल्दी वेट मैनेजमेंट में मददगार 1. लौकी का चीला तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी ½ कप बेसन ¼ चम्मच हल्दी ½ चम्मच अजवाइन 1 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार नमक थोड़ा पानी 1 चम्मच तेल बनाने की विधि कद्दूकस की हुई लौकी में बेसन, हल्दी, अजवाइन, हरी मिर्च और नमक मिलाएं। जरूरत अनुसार पानी डालकर गाढ़ा बैटर तैयार करें। तवे पर हल्का तेल लगाकर बैटर फैलाएं और दोनों तरफ सुनहरा व कुरकुरा होने तक सेंक लें। 2. लौकी का रायता तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 8 मिनट सामग्री 1 कप कद्दूकस की हुई लौकी 1 कप ताजा दही ½ चम्मच भुना जीरा पाउडर काला नमक हरा धनिया बनाने की विधि लौकी को हल्का उबालकर ठंडा करें। अब दही में उबली हुई लौकी मिलाएं। ऊपर से भुना जीरा, काला नमक और हरा धनिया डालकर सर्व करें। 3. लौकी का सूप तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 1 कप कटी हुई लौकी 1 टमाटर 1 छोटा टुकड़ा अदरक 2–3 लहसुन की कलियां काली मिर्च नींबू का रस बनाने की विधि लौकी, टमाटर, अदरक और लहसुन को कुकर में एक सीटी आने तक पकाएं। ठंडा होने पर पीस लें। मिश्रण को उबालें और ऊपर से काली मिर्च व नींबू का रस मिलाकर गर्मागर्म पिएं। 4. जीरा लौकी की सब्जी तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट सामग्री 2 कप कटी हुई लौकी 1 चम्मच जीरा चुटकीभर हींग 1 हरी मिर्च ½ चम्मच हल्दी स्वादानुसार नमक 1 चम्मच तेल या देसी घी बनाने की विधि पैन में तेल या घी गर्म करें। जीरा, हींग और हरी मिर्च का तड़का लगाएं। अब लौकी, हल्दी और नमक डालकर ढक दें। लौकी अपने ही पानी में पक जाएगी। कम मसालों वाली यह सब्जी वेट लॉस डाइट के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वजन घटाने के लिए रखें ये बातें ध्यान रोजाना संतुलित आहार लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित एक्सरसाइज या वॉक करें। जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों से बचें। पर्याप्त नींद लें। ध्यान दें: केवल लौकी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है या विशेष डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 25, 2026 0
Healthy high-protein chicken and paneer meals for muscle recovery after gym workout

जिम वर्कआउट के बाद खाएं ये 2 हाई-प्रोटीन Meals, मिलेगा 68g तक Protein और होगी बेहतर Muscle Recovery

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ओपिनीयन

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CBSE Digital India
CBSE विवाद ने खोली डिजिटल भारत की पोल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं की परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर एक बहुत बड़े राष्ट्रीय विवाद के घेरे में है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ यह विवाद केवल छात्रों और अभिभावकों के गुस्से तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें तकनीकी हैकिंग, डेटा लीक के आरोप, विपक्षी दलों का राजनीतिक हमला और अंततः न्यायालय का हस्तक्षेप व बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरने तक की घटनाएं शामिल हो चुकी हैं। दरअसल यह पूरा मामला ऑन स्क्रीन मार्किंग से जुड़ा है। इसमें दिखी खामियों को लेकर पूरे देश में छात्र नाराज हैं। इस विवाद के कारण बोर्ड के चेयरमैन और सेक्रेट्ररी तक को बदल दिया गया है। इस पूरे मामले में हैकर्स और हैकिंग को मुख्य वजह बताया जा रहा है।  विवाद की मुख्य वजह इस पूरे विवाद की जड़ में सीबीएसई द्वारा पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लागू की गई एक नई तकनीक है, जिसे On-Screen Marking (OSM) यानी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली कहा जाता है। क्या है OSM प्रणाली?  इस व्यवस्था के तहत छात्रों की फिजिकल उत्तर पुस्तिकाओं (हार्डकॉपी) को स्कैन करके एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद देश भर के शिक्षक कंप्यूटर या टैबलेट की स्क्रीन पर ही कॉपियों को जांचते हैं और वहीं नंबर देते हैं। सीबीएसई का उद्देश्य बोर्ड का दावा था कि इस प्रणाली से कॉपियों को जांचने में समय कम लगेगा, टोटल करने की गलतियां (Totalling Errors) खत्म होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और परिणाम जल्दी जारी किए जा सकेंगे। इस कार्य का टेंडर हैदराबाद की एक निजी कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक' (Coempt EduTeck) को दिया गया था। 12वीं के रिजल्ट के साथ विवाद शुरू मई 2026 के मध्य में जब सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित किए, तो देशभर के लगभग 17 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को बड़ा झटका लगा। राष्ट्रीय स्तर पर पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत गिरकर 85.20% पर आ गया, जो पिछले 7 वर्षों में सबसे कम था। अपेक्षा से बहुत कम अंक सालभर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को भी बेहद कम और अप्रत्याशित अंक मिले। इसके बाद छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इजहार करना शुरू कर दिया। क्या-क्या गड़बड़ियां आईं सामने? जब छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के लिए आवेदन किया और अपनी जांची हुई कॉपियों की स्कैन कॉपी देखी, तो हैरान कर देने वाली कमियां सामने आईं। धुंधली (Blurred) स्कैन कॉपियां हजारों छात्रों ने शिकायत की कि जो डिजिटल कॉपियां उन्हें या परीक्षकों को दिखाई गईं, वे इतनी धुंधली और अस्पष्ट थीं कि एक भी शब्द पढ़ना नामुमकिन था। इसके बावजूद परीक्षकों ने उन पर लाल पेन के टिक लगाकर मनमाने नंबर दे दिए थे। मिसिंग पेजेस (गायब पन्ने) कई उत्तर पुस्तिकाओं के बीच के पन्ने या सप्लीमेंट्री शीट स्कैन होने से छूट गए थे, जिससे उन प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं हो सका। कॉपियों की अदला-बदली (Mix-up) विवाद तब और भड़क गया जब वेदांत श्रीवास्तव नामक छात्र ने सोशल मीडिया पर सबूत साझा करते हुए बताया कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर जो भौतिकी (Physics) की कॉपी अपलोड की गई थी, वह उसकी थी ही नहीं। वह किसी अन्य छात्र की लिखावट थी और उसमें उन सवालों के जवाब थे जो उसने हल ही नहीं किए थे। बाद में सीबीएसई ने इसे 'तकनीकी त्रुटि' मानकर छात्र को सही कॉपी भेजी। सुरक्षा में चूक: हैकिंग का दावा और 'डेटा ब्रीच'.. यह मामला तब और गंभीर हो गया जब इसमें तकनीकी सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़े बड़े खुलासे हुए।  मास्टर पासवर्ड से बाईपास (हैकिंग) निसर्ग अधिकारी नामक एक एथिकल हैकर ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि सीबीएसई के ओएसएम पोर्टल के फ्रंटएंड कोड में एक गंभीर खामी (Vulnerability) थी। एक 'मास्टर पासवर्ड' के जरिए ओटीपी (OTP) सुरक्षा को बाईपास करके सीधे पेपर-चेकिंग डैशबोर्ड में दाखिल हुआ जा सकता था और नंबरों के साथ छेड़छाड़ संभव थी। डेटा लीक का आरोप मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि करीब 20 लाख छात्रों की कॉपियों का डेटा सार्वजनिक डोमेन में असुरक्षित (AWS क्लाउड बकेट के गलत कॉन्फ़िगरेशन के कारण) उपलब्ध था, जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता था। यह देश का एक बहुत बड़ा डेटा ब्रीच था। सीबीएसई का बचाव सीबीएसई ने शुरुआत में इन दावों को खारिज किया और कहा कि जिस पोर्टल में खामी की बात कही जा रही है वह केवल सैंपल टेस्टिंग के लिए था, मुख्य डेटाबेस सुरक्षित है। हालांकि, बाद में बोर्ड ने माना कि कमजोरियों को ठीक कर लिया गया है और आईआईटी व सरकारी साइबर सुरक्षा टीमों को तैनात किया गया है। अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?  इस विवाद के राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने के बाद सरकार और न्यायिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया। अब तक इस मामले में कई बड़े कदम उठाए जा चुके हैं। शीर्ष अधिकारियों पर गिरी गाज विवाद की गंभीरता और छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया। मई के आखिरी दिनों में सीबीएसई के तत्कालीन चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया और उनका तबादला कर दिया गया। सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया है। मामला पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) और कई प्रभावित छात्रों ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में याचिकाएं दायर की हैं। कोर्ट से मांग की गई है कि इस पूरे डिजिटल मूल्यांकन घोटाले और अनियमितताओं की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि 12वीं के छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो। पुनर्मूल्यांकन पोर्टल का दोबारा खुलना विवाद के कारण सीबीएसई को अपनी पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) की तारीखों को आगे बढ़ाना पड़ा। नया शेड्यूल जारी कर 1 जून 2026 से 6 जून 2026 तक के लिए ऑनलाइन पोर्टल खोला गया है, जहां छात्र अपने आधार नंबर के जरिए लॉगिन करके उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं। कंपनी का भुगतान रोका गया सीबीएसई ने साफ किया है कि ओएसएम सिस्टम का संचालन करने वाली कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक' को अभी तक कोई भुगतान (Payment) नहीं जारी किया गया है। पुनर्मूल्यांकन और सप्लीमेंट्री परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी पर भारी जुर्माना (Penalty) लगाने पर विचार किया जा रहा है। बिना पूरी तैयारी मतलब हैकर्स को आमंत्रण सीबीएसई का यह विवाद यह दर्शाता है कि बिना पूरी तैयारी, पायलट प्रोजेक्ट और फुल-प्रूफ टेस्टिंग के इतने संवेदनशील और बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी को लागू करने के क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बिना तैयारी के उठाये गये कदम के कारण ही हैकर्स को मौका मिलता है। जहां एक तरफ देश की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की कोशिश की जा रही थी, वहीं तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर बरती गई लापरवाही ने लाखों छात्रों के करियर को अधर में लटका दिया है। फिलहाल छात्र अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और हाईकोर्ट के फैसले पर नजरें टिकाए हुए हैं। हैकिंग क्या है और हैकर्स कौन होते है हैकिंग (Hacking) और हैकर्स (Hackers) आज के डिजिटल युग के दो ऐसे शब्द हैं, जिन्हें सुनते ही अक्सर लोगों के दिमाग में किसी का बैंक अकाउंट खाली होना या किसी वेबसाइट का बंद होना आता है। लेकिन, विज्ञान और तकनीक की दुनिया में इसका दायरा बहुत बड़ा है। भारत में सीबीएसई की 12वीं की कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर उलझा विवाद इसका सबसे ताजा और सटीक उदाहरण है, जहां इससे देश के लाखों छात्र प्रभावित हैं।  इसे ऐसे भी समझा जा सकता है।  हैकिंग क्या है? (What is Hacking?) किसी कंप्यूटर, स्मार्टफोन, नेटवर्क या डिजिटल सिस्टम की कमियों (Vulnerabilities) का पता लगाकर, उसमें अनधिकृत रूप से (यानी बिना अनुमति के) प्रवेश करना या उस पर नियंत्रण पाना हैकिंग कहलाता है। सकारात्मक पहलू: यदि यह काम किसी सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाए, तो इसे 'एथिकल हैकिंग' (Ethical Hacking) कहते हैं।  नकारात्मक पहलू: यदि यह काम चोरी, जासूसी या किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया जाए, तो यह एक साइबर अपराध (Cyber Crime) है। हैकर्स कौन होते हैं? (Who are Hackers?) हैकर्स वे लोग होते हैं, जिन्हें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, कोडिंग, नेटवर्किंग और ऑपरेटिंग सिस्टम का बहुत गहरा और एडवांस ज्ञान होता है। ये ऐसे विशेषज्ञ होते हैं जो किसी सॉफ्टवेयर या सुरक्षा चक्र की सीमाओं को तोड़कर उसके अंदर का रास्ता खोज निकालते हैं।3. हैकर्स के प्रकार (Types of Hackers)काम करने के तरीके और इरादे (Intent) के आधार पर हैकर्स को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है: 1.    व्हाइट हैट हैकर (White Hat Hackers) इन्हें 'एथिकल हैकर' भी कहा जाता है। ये कानूनी रूप से और किसी कंपनी या सरकार की अनुमति लेकर उनके सिस्टम की सुरक्षा की जांच करते हैं। उद्देश्य: सिस्टम की कमियों को ढूंढकर उन्हें ठीक करना, ताकि कोई चोर (साइबर अपराधी) उसका फायदा न उठा सके। काम: ये सुरक्षा सलाहकार या साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के रूप में बड़ी कंपनियों में काम करते हैं। 2.    ब्लैक हैट हैकर (Black Hat Hackers) इन्हें आम भाषा में 'साइबर अपराधी' या 'क्रैकर्स' कहा जाता है। ये बिना किसी अनुमति के दूसरों के सिस्टम में जबरन घुसते हैं। उद्देश्य: व्यक्तिगत लाभ, पैसों की उगाही (रैंसमवेयर), डेटा चोरी करना, या किसी संस्था को नुकसान पहुंचाना। काम: क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, बैंक डकैती, और वायरस फैलाना। 3.    ग्रे हैट हैकर (Grey Hat Hackers) ये व्हाइट और ब्लैक हैट हैकर्स का मिश्रण होते हैं। ये किसी दुर्भावना से काम नहीं करते, लेकिन बिना अनुमति के किसी के सिस्टम को हैक कर लेते हैं। उद्देश्य: ये केवल अपनी कला दिखाने या मजे के लिए ऐसा करते हैं। अक्सर ये किसी सिस्टम को हैक करने के बाद उसके मालिक को उसकी कमी के बारे में बता देते हैं और कभी-कभी इसे ठीक करने के बदले पैसों की मांग भी करते हैं। 4.    हैकर्स हैकिंग क्यों करते हैं? (Motives behind Hacking) आर्थिक लाभ (Financial Gain): बैंक खातों से पैसे चुराना या कंपनियों का डेटा चुराकर उन्हें ब्लैकमेल करना। जासूसी (Espionage): एक देश द्वारा दूसरे देश की खुफिया सरकारी जानकारियों या मिलिट्री डेटा को चुराना। हैक्टिविज्म (Hacktivism): किसी राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक विचारधारा के विरोध में किसी सरकारी या बड़ी वेबसाइट को हैक करके अपना संदेश प्रदर्शित करना। मनोरंजन या चुनौती (Fun/Challenge): कुछ नौसिखिए हैकर्स केवल अपनी क्षमता को परखने या दूसरों को प्रभावित करने के लिए हैकिंग करते हैं। 5.    हैकिंग से बचने के बुनियादी नियम यदि आप अपने डिजिटल जीवन (मोबाइल और कंप्यूटर) को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: मजबूत पासवर्ड: हमेशा कठिन पासवर्ड (जैसे: $P@ssw0rd!23$) का उपयोग करें और समय-समय पर बदलते रहें। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने सोशल मीडिया और बैंक अकाउंट्स में 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' हमेशा चालू रखें। संदिग्ध लिंक्स से बचें: ईमेल या व्हाट्सएप पर आए किसी भी अनजान या लॉटरी वाले लिंक पर क्लिक न करें। सॉफ्टवेयर अपडेट: अपने फोन और कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) और ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें, क्योंकि अपडेट्स में सुरक्षा की कमियों को सुधारा जाता है। भारत के पास अपना सर्वर नहीं, डाटा विदेश मे यह माना जाता है कि भारत के पास अपना कोई सर्वर ही नहीं है, लेकिन तकनीकी सच्चाई थोड़ी अलग और गहरी है। वास्तव में भारत के पास सर्वर और डेटा सेंटर्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन हमारी असली निर्भरता विदेशी कंपनियों जैसे अमेज़न, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। भारत का डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) संकट यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि भारत के पास अपने सर्वर नहीं हैं। भारत सरकार का राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) देश के भीतर कई बड़े डेटा सेंटर्स संचालित करता है, जहां सरकारी विभागों, आधार (UIDAI), और डिजिटल इंडिया का महत्वपूर्ण डेटा स्टोर किया जाता है। इसके अलावा, भारत में निजी डेटा सेंटर्स का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। असली समस्या सर्वर के न होने की नहीं, बल्कि विदेशी क्लाउड सर्वर पर अत्यधिक निर्भरता की है। भारत का अधिकांश कमर्शियल, सोशल मीडिया और निजी कंपनियों का डेटा अमेरिकी या अन्य विदेशी कंपनियों के सर्वर (जो अक्सर विदेशों में स्थित होते हैं) पर होस्ट किया जाता है। डेटा विदेश में रखने के मुख्य कारण क्लाउड कंप्यूटिंग का एकाधिकार: अमेज़न (AWS), माइक्रोसॉफ्ट (Azure), और गूगल (Google Cloud) जैसी कंपनियों के पास दुनिया का सबसे उन्नत और किफायती इंफ्रास्ट्रक्चर है। भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए अपने निजी सर्वर लगाने के बजाय इन विदेशी कंपनियों की सेवाएं लेना बहुत सस्ता और आसान पड़ता है। सॉफ्टवेयर और ऐप्स का विदेशी होना भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऐप्स (जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स) अमेरिकी कंपनियों के हैं। इन ऐप्स का यूजर डेटा स्वाभाविक रूप से उनके अपने वैश्विक सर्वर्स पर ही जाता है। हार्डवेयर निर्माण में कमी सर्वर्स के लिए जरूरी अत्याधुनिक माइक्रोचिप्स, सेमीकंडक्टर्स और प्रोसेसर का निर्माण भारत में नहीं होता। हम आज भी इसके लिए ताइवान, चीन और अमेरिका पर निर्भर हैं। विदेशों में डेटा रखने से हैकिंग और सुरक्षा के खतरे जब भारत के नागरिकों का संवेदनशील डेटा (जैसे वित्तीय जानकारी, व्यक्तिगत विवरण और मेडिकल रिकॉर्ड) विदेशी धरती पर मौजूद सर्वर्स पर स्टोर होता है, तो कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियां खड़ी होती हैं: डेटा लीक और साइबर हमले (Data Breaches): विदेशी सर्वर्स पर लगातार बड़े साइबर हमले होते रहते हैं। यदि किसी विदेशी कंपनी का सर्वर हैक होता है, तो करोड़ों भारतीयों का डेटा डार्क वेब पर बिकने के लिए आ जाता है। भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk): यदि भविष्य में भारत का किसी देश के साथ कूटनीतिक विवाद या युद्ध होता है, तो वह देश भारतीय डेटा तक हमारी पहुंच को ब्लॉक कर सकता है या उस डेटा का इस्तेमाल भारत के खिलाफ जासूसी (Espionage) के लिए कर सकता है। कानूनी पेचीदगियां: यदि विदेश में स्थित किसी सर्वर से डेटा चोरी होता है, तो भारतीय कानून (जैसे आईटी एक्ट) वहां सीधे तौर पर लागू नहीं होते। अपराधियों को पकड़ना और कानूनी कार्रवाई करना बेहद जटिल हो जाता है। सरकार के कदम और आगे की राह भारत सरकार इस खतरे को समझ चुकी है और स्थिति को बदलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है: डेटा स्थानीयकरण (Data Localization): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार ने नियम बनाए हैं कि भारतीय नागरिकों का वित्तीय और बैंकिंग डेटा अनिवार्य रूप से भारत की भौगोलिक सीमा के भीतर ही स्टोर होना चाहिए। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act): इस कानून के जरिए सरकार ने नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और उसके विदेशी ट्रांसफर पर कड़े नियम लागू किए हैं। घरेलू डेटा सेंटर्स को बढ़ावा: भारत में मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों को बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि विदेशी कंपनियों को भी अपने सर्वर भारत में ही लगाने के लिए मजबूर किया जा सके। विदेशी टेक दग्गजों पर निर्भरता खत्म होना जरूरी भारत के पास सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन विदेशी टेक दिग्गजों पर निर्भरता रातों-रात खत्म नहीं की जा सकती।  भारतीय प्रतिभाएं जा रही विदेश और देश विदेश टेक दिग्गजों पर निर्भर 'ब्रेन ड्रेन' (Brain Drain) यानी भारतीय प्रतिभाओं का विदेशों में पलायन और भारत की विदेशी टेक दिग्गजों (जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न) पर अत्यधिक निर्भरता, एक ऐसा चक्र है, जो देश की आर्थिक और तकनीकी संप्रभुता के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक तरफ हमारे बेहतरीन इंजीनियर और वैज्ञानिक विदेशों को समृद्ध कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमारा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी कंपनियों के हाथों में है। यह एक गंभीर स्थिति है और इसका प्रभावो देश के आम नागरिक पर पड़ रहा है।  भारतीय प्रतिभाओं का पलायन: आंकड़े और हकीकत भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल्स पैदा करने वाले देशों में से एक है। आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और अन्य शीर्ष संस्थानों से निकलने वाले देश के सबसे शानदार दिमाग हर साल विदेशों का रुख करते हैं। ग्लोबल कंपनियों के शीर्ष पर भारतीय:  आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों की कमान भारतीय मूल के दिग्गजों के हाथों में है। सुंदर पिचई (Alphabet/Google), सत्या नडेला (Microsoft) और अरविंद कृष्णा (IBM) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। पलायन के मुख्य कारण:  बेहतर पैकेज और जीवन स्तर: विदेशों  में मिलने वाला आर्थिक पैकेज और 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' भारत के मुकाबले कहीं बेहतर है। रिसर्च के लिए संसाधनों की कमी: भारत में अत्याधुनिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) इंफ्रास्ट्रक्चर और फंडिंग की आज भी भारी कमी है, जो इनोवेटर्स को बाहर जाने पर मजबूर करती है। विदेशी टेक दिग्गजों पर भारत की निर्भरताः इस प्रतिभा पलायन का सीधा असर यह हुआ है कि भारत आज एक बहुत बड़ा उपभोक्ता (Consumer) तो बन गया है, लेकिन तकनीकी रूप से 'आत्मनिर्भर' नहीं हो पाया है। हमारी निर्भरता मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में है: क्लाउड और डेटा स्टोरेज: जैसा कि हमने पहले देखा, भारत की अधिकांश कंपनियों और स्टार्टअप्स का डेटा अमेज़न (AWS), गूगल क्लाउड या माइक्रोसॉफ्ट एज़्योर पर होस्ट होता है। ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर: भारत के 95% से अधिक स्मार्टफोन 'एंड्रॉयड' (गूगल) या 'आईओएस' (एप्पल) पर चलते हैं। कंप्यूटरों में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज का एकाधिकार है। हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर: सर्वर्स, राउटर्स, और कंप्यूटर चिप्स (Semiconductors) के लिए भारत पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर है। भारत के आम आदमी पर असर भारतीय प्रतिभाओं का बाहर जाना और विदेशी तकनीक पर निर्भर रहना देश के लिए कई तरह के जोखिम पैदा करता है: आर्थिक नुकसान (Capital Outflow):  भारतीय कंपनियां और सरकार हर साल अरबों डॉलर विदेशी टेक कंपनियों को उनकी सेवाओं (सॉफ्टवेयर लाइसेंस, क्लाउड स्टोरेज) के लिए चुकाती हैं। यह पैसा देश के विकास में लग सकता था, जिससे आम लोगों को लाभ होता, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा। साइबर सुरक्षा और संप्रभुता का खतरा: जब मुख्य तकनीकी ढांचा विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में होता है, तो देश का संवेदनशील डेटा सुरक्षित नहीं रहता। युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में ये कंपनियां अपनी सेवाएं रोक भी सकती हैं। इनोवेशन का नुकसान:  भारत के पास अपनी समस्याओं जैसे कृषि, स्थानीय स्वास्थ्य और ग्रामीण शिक्षा के समाधान के लिए स्वदेशी और कस्टमाइज्ड तकनीक विकसित करने की गति धीमी हो जाती है। क्या बदल रही है स्थिति?  पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और घरेलू उद्योगों ने इस कमी को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं: स्टार्टअप इकोसिस्टम का उदय: भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। फ्लिपकार्ट, जोमैटो, और यूपीआई (UPI) जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स ने देश में ही उच्च स्तर के रोजगार और इनोवेशन पैदा किए हैं, जिससे कई प्रोफेशनल्स अब भारत में रुक रहे हैं या वापस लौट रहे हैं। सेमीकंडक्टर मिशन:  भारत सरकार ने देश के भीतर ही माइक्रोचिप्स और सेमीकंडक्टर बनाने के लिए अरबों डॉलर के प्रोत्साहन (PLI Scheme)  की घोषणा की है, ताकि हार्डवेयर के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। स्वदेशी विकल्प: 'डेटा स्थानीयकरण' (Data Localization) और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (जैसे UPI, ONDC) के जरिए भारत विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती दे रहा है। देश को कैसे मिलेगा भारतीय प्रतिभाओं का लाभ भारतीय प्रतिभाओं का विदेशों में डंका बजना गर्व की बात है, लेकिन यह तब तक अधूरा है जब तक उस प्रतिभा का लाभ खुद भारत को न मिले। भारत को केवल 'सुपर-कंज्यूमर' बनने के बजाय 'सुपर-क्रिएटर' बनना होगा। इसके लिए देश के भीतर ही रिसर्च, बेहतर वेतन और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर देना अनिवार्य है, ताकि देश की प्रतिभा देश के ही काम आ सके।  डेटा ही इस सदी का 'नया तेल' (New Oil) है। जब तक भारत पूरी तरह से 'डेटा आत्मनिर्भर' नहीं बन जाता और अपने घरेलू क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करता, तब तक साइबर सुरक्षा और हैकिंग का यह अदृश्य खतरा देश पर मंडराता रहेगा।

Unknown जून 4, 2026 0
Rajya sabha election

राज्यसभा का रण – JMM का 'खेला' या कांग्रेस से 'मेल-मिलाप'?

Parimal Nathwani

नाथवाणी की चर्चा से गरमाई झारखंड की सियासत

Mamata Banerjee Exit

दीदी, स्टालिन व वाम की विदाई

Women reservation
महिला आरक्षण: सशक्तिकरण की राह या राजनीति का रण?

संवाददाता भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि दशकों पुरानी राजनीतिक रस्साकशी का केंद्र रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) के पारित होने के बाद भी, 2026 तक आते-आते यह विषय और अधिक जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है। पेश है राजनीति की परत खोलती ये रिपोर्टः भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 'महिला आरक्षण' एक ऐसा शब्द है जो संसद की दहलीज पर पिछले तीन दशकों से गूंज रहा है। सितंबर 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन) का पारित होना एक ऐतिहासिक घटना थी। लेकिन आज, 2026 में, इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और शर्तों ने इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़े राजनीतिक युद्ध के मैदान में धकेल दिया है। 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और वर्तमान गतिरोध कानूनः लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जा चुका है। परंतु अप्रैल 2026 में केंद्र की मोदी सरकार जो संशोधन प्रस्ताव लेकर आई, उसका विरोध शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, नारी शक्ति वंदन विधेयक संशोधन प्रस्ताव लोकसभा में पास भी नहीं हो सका।   संशोधन में  इस कानून के साथ दो प्रमुख शर्तें जुड़ी हैं:  अगली जनगणना (Census): आरक्षण लागू होने से पहले नई जनगणना का होना अनिवार्य है। परिसीमन (Delimitation): जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिसके बाद ही सीटें आरक्षित होंगी। राजनीतिक विवाद की जड़: विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार ने आरक्षण को "भविष्य की तारीख" (Post-2029) पर धकेल कर महिलाओं के साथ वादाखिलाफी की है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह एक पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया है, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए। हालिया घटनाक्रम-131वां संशोधन विधेयकः हाल ही में (अप्रैल 2026), केंद्र सरकार ने 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य जनगणना और परिसीमन की कड़ी को सरल बनाना था, ताकि आरक्षण को 2029 के चुनावों तक लागू किया जा सके।  सरकार का प्रस्ताव:  लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव दिया गया, ताकि किसी भी मौजूदा सांसद की सीट कम किए बिना महिलाओं को 33% कोटा दिया जा सके। विपक्ष का विरोध और हार:  विपक्षी दलों ने इस 'लिंकेज' (सीटों की संख्या बढ़ाना और परिसीमन) का कड़ा विरोध किया। परिणामस्वरुप, यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा, जिसे प्रधानमंत्री ने "लोकतंत्र के लिए दुखद" और विपक्ष की "महिला विरोधी मानसिकता" करार दिया। राजनीति के मुख्य केंद्र बिंदुः 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' (OBC कोटा) कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों की मुख्य मांग है कि 33% कोटे के भीतर OBC महिलाओं के लिए अलग से उप-कोटा (Sub-quota) सुनिश्चित किया जाए।"बिना ओबीसी आरक्षण के, यह बिल केवल सवर्ण महिलाओं तक सीमित रह जाएगा।" - यह विपक्ष का प्रमुख नैरेटिव बन चुका है, जिससे सरकार को पिछड़ा वर्ग की राजनीति के मोर्चे पर रक्षात्मक होना पड़ रहा है। दक्षिण बनाम उत्तर भारत का विवादः लोकसभा सीटों के विस्तार और परिसीमन ने क्षेत्रीय राजनीति को गर्मा दिया है। तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, इसलिए आबादी के आधार पर सीटें बढ़ने से उत्तर भारतीय राज्यों का वर्चस्व बढ़ेगा और दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक वजन कम होगा। जाति जनगणना (Caste Census) की मांगः विपक्ष ने महिला आरक्षण को जाति जनगणना से जोड़ दिया है। उनका तर्क है कि जब तक यह पता नहीं चलेगा कि किस जाति की कितनी आबादी है, तब तक आरक्षण का वास्तविक लाभ हाशिए पर खड़ी महिलाओं तक नहीं पहुंचेगा। सांख्यिकीय आईना की वर्तमान स्थितिः भले ही कानून बन गया हो, लेकिन विधायी संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति अभी भी चिंताजनक है: लोकसभा में 543    सांसद हैं, जिनमें 74 महिलाएं हैं। महिलाओं का प्रतिशत मात्र 13.6% है, जो चिंताजनक है। केंद्र की मोदी सरकार 33 प्रतिशत तक पहुंचाने की कोशिश का दावा कर रही है।   आगामी चुनाव और नैरेटिव की जंग 2029 के आम चुनाव अब दूर नहीं हैं। बीजेपी इसे 'नारी शक्ति' के सम्मान और विपक्ष द्वारा बाधा डालने के रूप में पेश कर रही है। दूसरी ओर, 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन इसे 'चुनावी जुमला' और 'परिसीमन का डर' दिखाकर मतदाताओं को गोलबंद कर रहा है। महिला आरक्षण आज केवल सशक्तिकरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह संघवाद (Federalism), सामाजिक न्याय (Social Justice) और क्षेत्रीय संतुलन की एक जटिल पहेली बन गया है। जब तक जनगणना और परिसीमन पर राजनीतिक सर्वसम्मति नहीं बनती, तब तक आधी आबादी का पूरा हक फाइलों और चुनावी रैलियों तक ही सीमित रहने की आशंका है। यदि जनगणना 2027 तक पूरी हो जाती है, तो परिसीमन आयोग को अपना काम खत्म करने में कम से कम 2 साल लगेंगे। ऐसे में 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण का लागू होना एक बड़ी चुनौती और राजनीतिक संभावना, दोनों है।

Unknown मई 1, 2026 0
Jharkhand Treasury scam

Jharkhand Treasury scam: झारखंड ट्रेजरी घोटाले का बढ़ता दायरा

Asha Bhosle tribute

गायकी के एक युग का अंत - आशा भोसले

Jagannathpur crime update

जगन्नाथपुर मंदिर में लूटपाट और हत्या के बाद उठ रहे कई सवाल

AAP crisis 2026
“आप” का क्या होगा?

संवाददाता आम आदमी पार्टी (AAP) भारतीय राजनीति के इतिहास में एक ऐसी घटना की तरह उभरी, जिसने पारंपरिक राजनीति के व्याकरण को बदल दिया। 'भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन' की कोख से जन्मी यह पार्टी महज एक दशक में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने में सफल रही। हालांकि, वर्तमान में पार्टी अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। शीर्ष नेतृत्व की गिरफ्तारी, अंदरूनी कलह और 'टूट' ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम आदमी पार्टी का अंत निकट है? आइए इस रिपोर्ट में समझने की कोशिश करते हैं कि आम आदनी पार्टी की आज वास्तविक स्थिति क्या है?    वैचारिक संकट और नेतृत्व का अभाव आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी, दोनों ही अरविंद केजरीवाल का व्यक्तित्व रहा है। पार्टी 'कट्टर ईमानदारी' और 'दिल्ली मॉडल' के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। वर्तमान में जब मुख्यमंत्री समेत पार्टी के शीर्ष नेता (मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येंद्र जैन) कानूनी लड़ाइयों में उलझे हैं, तो पार्टी के सामने नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। राजनीति में जब किसी पार्टी का 'चेहरा' ही संकट में हो, तो कैडर के बीच भ्रम और टूटने का डर स्वाभाविक हो जाता है। इधर, बीते माह अप्रैल में राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने और भाजपा में शामिल होने से पार्टी पर बेहद गहरा सांगठनिक और संसदीय प्रभाव पड़ा है। इस घटनाक्रम को AAP के इतिहास का सबसे बड़ा 'विभाजन' माना जा रहा है। राज्यसभा में संख्या बल का भारी नुकसान इस टूट से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। राज्यसभा में 70% की गिरावट AAP के राज्यसभा सांसदों की संख्या 10 से घटकर केवल 3 रह गई है। अब सदन में केवल संजय सिंह, एन.डी. गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल ही पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। NDA की मजबूती इन सांसदों के भाजपा में विलय से राज्यसभा में भाजपा की अपनी संख्या 113 और NDA की कुल संख्या 148 हो गई है, जिससे केंद्र सरकार के लिए कानून पास कराना और आसान हो गया है। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का प्रभाव नही चूँकि राज्यसभा में पार्टी के कुल 10 में से दो-तिहाई (7 सांसद) एक साथ अलग हुए हैं, इसलिए तकनीकी रूप से उन पर 'दलबदल विरोधी कानून' लागू नहीं हुआ। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत भाजपा में अपनी इकाई का 'विलय' कर लिया, जिससे उनकी सदस्यता बरकरार रही। पार्टी के प्रमुख चेहरों का जाना पार्टी छोड़ने वाले सांसदों में केवल राघव चड्ढा ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रभावशाली नाम भी शामिल हैं।  संदीप पाठक: जो पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और चुनावी रणनीतियों के मुख्य सूत्रधार माने जाते थे। स्वाति मालिवाल और हरभजन सिंह: जैसे लोकप्रिय चेहरों के जाने से पार्टी की सार्वजनिक छवि और पहुंच पर असर पड़ा है। अन्य सांसद: अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी। सिद्धांतों पर सवाल इस्तीफा देते हुए राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से भटक गई है और अब केवल "व्यक्तिगत लाभ" के लिए काम कर रही है। नेतृत्व पर दबाव पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद इस टूट ने पार्टी को तोड़कर रख दिया है। पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व की पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संजय सिंह ने इसे भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' करार देते हुए जाने वाले सांसदों को "गद्दार" कहा है। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. पर असर AAP के सांसदों के जाने से राज्यसभा में विपक्षी ब्लॉक की ताकत 84 से घटकर 77 रह गई है। इससे संसद के भीतर सरकार को घेरने की विपक्ष की क्षमता कमजोर हुई है। यह टूट आम आदमी पार्टी के लिए एक अस्तित्वगत संकट (Existential Crisis) जैसा है, जिसने न केवल संसद में उसका कद छोटा किया है, बल्कि उसके सांगठनिक ढांचे को भी हिला कर रख दिया है। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी उभरती हुई पार्टी के नेतृत्व पर प्रहार होता है, तो विपक्षी दल उसके विधायकों और सांसदों को तोड़ने की कोशिश करते हैं। दिल्ली और पंजाब, दो ऐसे राज्य हैं जहाँ 'आप' की पूर्ण बहुमत की सरकारें हैं। दिल्ली में स्थिति दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पकड़ मजबूत है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार  ने प्रशासन और पार्टी संगठन के बीच एक खाई पैदा कर दी है। पंजाब का परिदृश्य आम आदमी पार्टी का ढांचा काफी हद तक 'कमांड स्ट्रक्चर' पर आधारित है। पार्टी के भीतर असहमति की आवाजों (जैसे योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण) को समय-समय पर बाहर का रास्ता दिखाया गया। इस प्रक्रिया ने पार्टी को अनुशासित तो बनाया, लेकिन 'सेकंड लाइन' लीडरशिप को पनपने का मौका कम मिला। आज जब मुख्य नेतृत्व कमजोर है, तो कोई ऐसा सर्वमान्य नेता नहीं दिखता जो पूरी पार्टी को एकजुट रख सके। आतिशी या सौरभ भारद्वाज जैसे नेता प्रभावी तो हैं, लेकिन उनकी स्वीकार्यता केजरीवाल के स्तर की नहीं है। जांच एजेंसियों का घेरा और साख का सवालः शराब नीति घोटाला और अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी की 'कट्टर ईमानदार' छवि पर गहरा आघात किया है। मध्यवर्ग, जो 'आप' का मुख्य आधार था, अब संदेह की नजर से देख रहा है। कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद जनता के बीच यह संदेश तो जा ही चुका है कि 'आप' भी अन्य पारंपरिक दलों जैसी ही है। साख का यह संकट पार्टी के विस्तार (राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा) की योजनाओं को पूरी तरह से प्रभावित किया है।  क्या 'आप' वापसी कर सकती है?  भले ही संकट गहरा है, लेकिन 'आप' को पूरी तरह खारिज करना जल्दबाजी होगी। इसके कुछ कारण हैं: मजबूत लाभार्थी वर्ग: बिजली, पानी और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों ने एक ऐसा वोट बैंक तैयार किया है जो आसानी से दूसरी तरफ नहीं मुड़ता। विकल्प का अभाव: दिल्ली में कांग्रेस अभी भी उस मजबूती से उभर नहीं पाई हैं जो केजरीवाल के विकल्प के रूप में दिखें। वहीं, बीजेपी ने दिल्ली में सरकार तो बना ली है, लेकिन आप से उसका मुकाबला आसान नहीं है।    सहानुभूति की लहर यदि पार्टी यह नैरेटिव सेट करने में सफल रही कि उसे जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, तो 'सहानुभूति कार्ड' उसे चुनावों में संजीवनी दे सकता है। आम आदमी पार्टी के लिए आने वाले दो साल निर्णायक होंगे। यदि पार्टी इस 'टूट' और कानूनी संकट से उभरकर एक नया नेतृत्व ढांचा तैयार कर लेती है, तो वह भारतीय राजनीति में एक स्थायी स्तंभ बनी रह सकती है। लेकिन, यदि अंदरूनी खींचतान बढ़ी और पंजाब व दिल्ली की इकाइयों में तालमेल की कमी रही, तो पार्टी का बिखरना तय है। विचारधारा कायम रखना बड़ी चुनौती किसी भी राजनीतिक दल का अंत उसकी हार से नहीं, बल्कि उसकी विचारधारा के मरने से होता है। 'आप' को यह साबित करना होगा कि वह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार है। यदि वह ऐसा नहीं कर पाती, तो 'टूट' के बाद उसका अस्तित्व बचाना लगभग असंभव होगा।

Unknown मई 1, 2026 0

स्वास्थ्य

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Viagra Benefit
क्या कैंसर के फैलाव को रोक सकती है वियाग्रा? नई स्टडी में सामने आए उम्मीद जगाने वाले संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile Dysfunction) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा वियाग्रा (Viagra) अब कैंसर रिसर्च में भी चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि वियाग्रा का सक्रिय तत्व सिल्डेनाफिल (Sildenafil) कैंसर कोशिकाओं के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने यानी मेटास्टेसिस (Metastasis) की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकता है। यह अध्ययन इजराइल के वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज के वैज्ञानिकों ने किया है। हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती शोध है और इसे कैंसर का नया इलाज नहीं माना जाना चाहिए।   कैसे काम कर सकता है सिल्डेनाफिल?   शोध के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं शरीर में फैलने के लिए काफी हद तक कोलेस्ट्रॉल पर निर्भर रहती हैं। सिल्डेनाफिल कोशिकाओं के भीतर कोलेस्ट्रॉल पहुंचाने वाले प्रोटीन की गतिविधि को बाधित करता है। इससे कैंसर कोशिकाओं को अपनी बाहरी झिल्ली (मेम्ब्रेन) बनाए रखने के लिए पर्याप्त कोलेस्ट्रॉल नहीं मिल पाता और उनका दूसरे अंगों तक फैलना कठिन हो सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि यदि सिल्डेनाफिल को स्टैटिन (कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा) के साथ दिया जाए तो इसका प्रभाव और बेहतर हो सकता है, क्योंकि यह संयोजन कैंसर कोशिकाओं को नया कोलेस्ट्रॉल बनाने और उपलब्ध कोलेस्ट्रॉल का उपयोग करने से भी रोक सकता है।   50 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण, लेकिन निष्कर्ष अभी अंतिम नहीं   शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में कैंसर कोशिकाओं और चूहों पर अध्ययन करने के अलावा करीब 50 लाख लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिसमें 40 हजार से अधिक कैंसर मरीज भी शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि जिन पुरुषों ने कैंसर का पता चलने से पहले सिल्डेनाफिल का इस्तेमाल किया था, उनमें जीवित रहने की दर अपेक्षाकृत बेहतर थी। जिन मरीजों ने सिल्डेनाफिल के साथ स्टैटिन भी ली थी, उनमें परिणाम और अधिक सकारात्मक दिखाई दिए। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि इस अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि बेहतर परिणाम केवल वियाग्रा की वजह से ही मिले।   विशेषज्ञों की सलाह- डॉक्टर की सलाह के बिना न लें वियाग्रा   स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस शोध के नतीजे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन इन्हें अभी कैंसर के उपचार के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। सिल्डेनाफिल को कैंसर के मानक इलाज का हिस्सा बनने से पहले बड़े स्तर पर क्लिनिकल ट्रायल और अतिरिक्त वैज्ञानिक प्रमाणों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि कैंसर की रोकथाम या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना वियाग्रा का सेवन बिल्कुल न करें। फिलहाल कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई गई मानक चिकित्सा ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
आंत के माइक्रोबायोम पर भारतीय वैज्ञानिकों का शोध

भारत के आदिवासी समुदायों में आंत के माइक्रोबायोम पर बड़ी खोज, 14 नई बैक्टीरिया प्रजातियां मिलीं

Persistent lumps may have various causes, but growing or hard lumps should be evaluated by a doctor

शरीर में हर गांठ कैंसर नहीं, लेकिन इन बदलावों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज; कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी?

भारत में अंग प्रत्यारोपण का नया रिकॉर्ड

भारत में पहली बार सालाना 20 हजार से ज्यादा अंग प्रत्यारोपण, 2025 में बने 20,138 ट्रांसप्लांट

वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2026 में स्तनपान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
World Breastfeeding Week 2026: स्तनपान कराने वाली हर मां को पता होनी चाहिए ये जरूरी बातें

नई दिल्ली, एजेंसियां। हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक का उद्देश्य माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों के अनुसार, मां का दूध शिशु के लिए सबसे संपूर्ण आहार है, जो पोषण के साथ-साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत करता है।   संतुलित आहार और पर्याप्त पानी है जरूरी     डॉक्टरों का कहना है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर भोजन करना चाहिए। दूध, दही, दाल, हरी सब्जियां, अंडे, मेवे और मौसमी फलों के साथ रोजाना 2.5 से 3 लीटर पानी पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।     आराम, तनाव से दूरी और दवाओं में बरतें सावधानी     विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त नींद और तनावमुक्त रहना स्तनपान की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। साथ ही धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसका असर शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।     स्वच्छता और परिवार का सहयोग निभाता है अहम भूमिका     बच्चे को दूध पिलाने से पहले हाथ धोना और स्तनों की सामान्य साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार को भी मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और भावनात्मक सहयोग देना चाहिए, ताकि वह बिना तनाव के शिशु की देखभाल कर सके।     मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है स्तनपान     डॉक्टरों के अनुसार, स्तनपान से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है और उसका मानसिक व शारीरिक विकास बेहतर होता है। वहीं मां के लिए यह प्रसव के बाद रिकवरी में मददगार साबित होता है और स्तन व अंडाशय के कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम भी कम कर सकता है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
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30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीने से क्या होगा? फायदे से ज्यादा जरूरी है ये सावधानी

एलोवेरा को आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। आजकल इसे लेकर सोशल मीडिया और हेल्थ कंटेंट में कई तरह के दावे किए जाते हैं। वजन घटाने से लेकर पाचन सुधारने, त्वचा में निखार लाने और इम्यूनिटी मजबूत करने तक, एलोवेरा जूस को कई फायदे से जोड़ा जाता है। लेकिन सवाल है कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक रोज एलोवेरा जूस पीता है, तो वास्तव में शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। एलोवेरा के कुछ मौखिक उपयोगों पर सीमित वैज्ञानिक शोध उपलब्ध है, लेकिन त्वचा चमकाने, शरीर से 'टॉक्सिन' निकालने या तेजी से फैट कम करने जैसे लोकप्रिय दावों के लिए पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए एलोवेरा जूस को किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का शॉर्टकट मानना सही नहीं होगा। एलोवेरा जूस में क्या पाया जाता है? एलोवेरा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग यौगिक पाए जाते हैं। इसके अंदरूनी जेल और पत्ते की बाहरी परत से मिलने वाला लेटेक्स एक जैसे नहीं होते। यही वजह है कि किसी एलोवेरा ड्रिंक की सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किस हिस्से से तैयार किया गया है और उसमें एलोइन जैसे एंथ्राक्विनोन यौगिक कितनी मात्रा में मौजूद हैं। NCCIH के अनुसार बाजार में मिलने वाले एलो उत्पादों में जेल, लेटेक्स या पूरे पत्ते के अर्क का इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए सिर्फ 'एलोवेरा जूस' लिखा होना उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 30 दिन पीने पर पाचन में क्या असर हो सकता है? कुछ लोगों को एलोवेरा जूस लेने के बाद पाचन बेहतर महसूस हो सकता है। लेकिन इसे कब्ज, गैस या IBS का पक्का इलाज मानने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके उलट, अगर किसी उत्पाद में एलो लेटेक्स मौजूद है, तो पेट में दर्द, ऐंठन और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए पेट साफ करने के लिए एलोवेरा जूस का ज्यादा सेवन करना उल्टा नुकसान पहुंचा सकता है। क्या एलोवेरा जूस से त्वचा चमक सकती है? एलोवेरा में मौजूद कुछ यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से एक महीने में त्वचा चमकने लगेगी या मुंहासे खत्म हो जाएंगे, ऐसा दावा करने के लिए पर्याप्त मजबूत मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। एलोवेरा के त्वचा संबंधी संभावित फायदे पर शोध मुख्य रूप से इसके बाहरी इस्तेमाल को लेकर भी हुआ है। इसलिए जूस को 'स्किन ग्लो' का निश्चित उपाय बताना सही नहीं होगा। क्या इम्यूनिटी मजबूत करता है? एलोवेरा में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों को लेकर रिसर्च जरूर हुई है, लेकिन रोज एलोवेरा जूस पीने से इम्यूनिटी में निश्चित और बड़ा सुधार होगा, यह साबित नहीं हुआ है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और आवश्यक टीकाकरण जैसी चीजों की भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। क्या वजन तेजी से कम होगा? एलोवेरा जूस को वजन घटाने वाले पेय के तौर पर काफी प्रचारित किया जाता है, लेकिन इसे फैट बर्नर या 'डिटॉक्स ड्रिंक' मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। कुछ सीमित शोध में खास एलो उत्पादों के सेवन के बाद वजन या फैट मास में मामूली बदलाव देखे गए हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य एलोवेरा जूस 30 दिनों में वजन तेजी से कम कर देगा। वजन घटाने के लिए कैलोरी संतुलन, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सबसे जरूरी बात: हर एलोवेरा जूस सुरक्षित नहीं एलोवेरा का सेवन करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी संरचना है। एलो लेटेक्स मुंह से लेने पर दस्त और पेट में ऐंठन पैदा कर सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक कुछ एलो लीफ एक्सट्रैक्ट के सेवन को लिवर की चोट के मामलों से भी जोड़ा गया है। Mayo Clinic भी एलोवेरा को उन हर्बल सप्लीमेंट्स में शामिल करता है जो कुछ परिस्थितियों में लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्भावस्था और दवाइयां लेने वालों को विशेष सावधानी गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान मुंह से एलोवेरा लेना सुरक्षित नहीं माना जाता है और ऐसे समय में डॉक्टर से सलाह जरूरी है। इसी तरह यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो एलोवेरा जूस या किसी हर्बल सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि हर्बल उत्पाद कुछ दवाओं के साथ इंटरैक्ट कर सकते हैं। तो क्या 30 दिन रोज एलोवेरा जूस पीना चाहिए? सिर्फ 30 दिन लगातार पीने से शरीर 'डिटॉक्स' हो जाएगा, खून साफ हो जाएगा या तेजी से वजन कम हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं है। कुछ लोगों को सीमित लाभ महसूस हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदे व्यक्ति, उत्पाद और उसकी मात्रा पर निर्भर करते हैं। अगर आप एलोवेरा जूस लेना चाहते हैं, तो लेबल पर सामग्री और एलोइन की जानकारी जरूर देखें और बिना सलाह के ज्यादा मात्रा में सेवन न करें। किसी बीमारी का इलाज चल रहा है, गर्भावस्था या स्तनपान की स्थिति है, या नियमित दवाएं चल रही हैं तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
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बार-बार सिरदर्द, याददाश्त कमजोर या चलने में लड़खड़ाहट? दिमाग के ये संकेत न करें नजरअंदाज, हो सकती है न्यूरोलॉजिकल बीमारी

दिमाग हमारे पूरे शरीर का कंट्रोल सेंटर है। खाना खाने, चलने, बोलने, देखने, सोचने और रोजमर्रा के सामान्य काम करने से लेकर भावनाओं और व्यवहार तक, शरीर की तमाम गतिविधियां मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि दिमाग से संबंधित किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है। कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियां शुरुआत में बेहद सामान्य नजर आने वाले लक्षणों के साथ सामने आती हैं। बार-बार सिरदर्द होना, हाल की बातें भूल जाना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, अचानक व्यवहार बदलना या चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर थकान, तनाव या बढ़ती उम्र से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर सिरदर्द या भूलने की समस्या गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन जब ये परेशानियां बार-बार होने लगें, अचानक शुरू हों या इनके साथ दूसरे न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो जाता है। बार-बार सिरदर्द हो तो कब रहें सतर्क? कभी-कभार सिरदर्द होना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार होने वाला या अचानक बहुत तेज सिरदर्द ध्यान देने की मांग करता है। खासकर अगर सिरदर्द के साथ उल्टी, कमजोरी या देखने में परेशानी भी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन संकेतों पर विशेष ध्यान दें: अचानक बहुत तेज सिरदर्द शुरू होना सुबह उठते ही सिरदर्द होना सिरदर्द के साथ उल्टी होना धुंधला दिखाई देना शरीर में कमजोरी महसूस होना ऐसे लक्षण कुछ मामलों में स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, इंफेक्शन या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए लगातार या असामान्य सिरदर्द होने पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। पढ़ी हुई बातें बार-बार भूल रहे हैं? भूलने की समस्या को हमेशा सामान्य मानकर टालना सही नहीं है। सामान रखकर भूल जाना या कभी-कभार किसी का नाम याद न आना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर हाल की घटनाएं याद रखने, जरूरी काम याद रखने या रोजमर्रा की गतिविधियों पर ध्यान देने में लगातार परेशानी होने लगे, तो इस पर ध्यान देना चाहिए। याददाश्त से जुड़े कुछ संकेत हैं: लोगों के नाम बार-बार भूलना परिचित रास्ते भूल जाना हाल की घटनाओं को याद न रख पाना जरूरी काम भूल जाना किसी बात को समझने में परेशानी होना काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई लगातार ऐसी समस्याएं डिमेंशिया, अल्जाइमर या अन्य मस्तिष्क संबंधी परेशानियों के शुरुआती संकेतों से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि, सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है। अचानक बदलने लगा है स्वभाव? दिमाग से जुड़ी परेशानी का असर केवल याददाश्त या सिरदर्द के रूप में ही नहीं दिखता। कई बार व्यक्ति के व्यवहार और मूड में अचानक बदलाव भी दिखाई दे सकता है। अगर कोई व्यक्ति पहले की तुलना में अचानक ज्यादा चिड़चिड़ा रहने लगे, बिना वजह गुस्सा करे, लगातार उदास रहे या निर्णय लेने और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस करे, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ध्यान देने वाले बदलाव: अचानक चिड़चिड़ापन बढ़ना बिना स्पष्ट कारण गुस्सा आना लगातार उदास रहना किसी काम में रुचि न रहना निर्णय लेने में परेशानी ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई ऐसे बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ भी जुड़े हो सकते हैं। बोलने, देखने या चलने में परेशानी को न करें नजरअंदाज न्यूरोलॉजिकल बीमारी के कुछ संकेत शरीर की सामान्य गतिविधियों में सीधे दिखाई दे सकते हैं। अचानक बोलने में दिक्कत होना, देखने में बदलाव आना या चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ना खास तौर पर महत्वपूर्ण संकेत हैं। इन लक्षणों पर नजर रखें: चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ना बोलने में परेशानी होना अचानक देखने में दिक्कत होना डबल विजन या धुंधला दिखाई देना ऐसे लक्षण स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ब्रेन ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। खासकर यदि ये लक्षण अचानक शुरू हुए हों, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें अगर इनमें से कोई गंभीर लक्षण अचानक दिखाई देता है, तो इसे सामान्य परेशानी समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए: बोलने या समझने में परेशानी अचानक बहुत तेज सिरदर्द बेहोशी या दौरा पड़ना शरीर में अचानक कमजोरी शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ना अचानक दिखाई देने में परेशानी शरीर का संतुलन बिगड़ना भ्रम की स्थिति व्यवहार में अचानक बदलाव असामान्य या अत्यधिक नींद आना हर लक्षण का मतलब गंभीर बीमारी नहीं सिरदर्द, भूलने की समस्या, मूड में बदलाव या चक्कर जैसी परेशानियां कई अलग-अलग कारणों से हो सकती हैं। इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। लेकिन अगर कोई लक्षण बार-बार हो रहा है, अचानक शुरू हुआ है, लगातार बढ़ रहा है या उसके साथ बोलने, देखने, चलने, समझने अथवा शरीर में कमजोरी जैसे दूसरे संकेत भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से समय पर सलाह लेना बेहद जरूरी है। दिमाग से जुड़े मामलों में समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी गंभीर या अचानक लक्षण की स्थिति में खुद से इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
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टैरो राशिफल 5 अगस्त 2026: वृषभ और वृश्चिक को मिल सकते हैं रिश्तों और बदलाव के शुभ संकेत, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

टैरो राशिफल 5 अगस्त 2026: हर अवसर तुरंत दस्तक देकर सामने नहीं आता और हर चुनौती नुकसान का संकेत नहीं होती। कई बार दिन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश किसी छोटी घटना, बातचीत या अनुभव के भीतर छिपा होता है। 5 अगस्त के टैरो कार्ड संकेत दे रहे हैं कि कुछ राशियों के रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं, कुछ लोगों को रिश्तों में नई स्पष्टता मिल सकती है, जबकि कुछ के लिए धैर्य और सही समय का इंतजार सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। करियर, धन, प्रेम, परिवार और व्यक्तिगत फैसलों के लिहाज से आज का दिन कई तरह के संकेत लेकर आया है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज कौन-से टैरो कार्ड क्या संदेश दे रहे हैं। मेष टैरो राशिफल: पुराने अनुभव से मिलेगा नया सबक टैरो कार्ड: Six of Cups, King of Swords (Reversed), Nine of Pentacles मेष राशि वालों के सामने आज कोई पुरानी याद, अधूरी बातचीत या पहले का अनुभव दोबारा आ सकता है। हालांकि इस बार परिस्थितियों को देखने का आपका नजरिया पहले जैसा नहीं रहेगा। पुराने अनुभव आपको बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में किसी की बात को बिना जांचे सच मानने के बजाय अपनी समझ और अनुभव पर भरोसा करें। आर्थिक या निजी उपलब्धि से जुड़ी कोई अच्छी खबर दिन के दूसरे हिस्से में मिल सकती है। आज की सलाह: पुराने अनुभवों को बोझ नहीं, बल्कि सीख बनाकर आगे बढ़ें। वृषभ टैरो राशिफल: धैर्य से बदलेगी तस्वीर टैरो कार्ड: Ace of Cups, Seven of Wands, Wheel of Fortune (Reversed) वृषभ राशि वालों के लिए आज नई शुरुआत की इच्छा मजबूत रह सकती है, लेकिन परिस्थितियां आपकी गति को थोड़ा धीमा कर सकती हैं। इसे रुकावट समझने की जरूरत नहीं है। कार्यक्षेत्र में आपको अपनी बात और मेहनत का मजबूती से बचाव करना पड़ सकता है। यदि आपके काम पर सवाल उठते हैं तो बहस करने के बजाय आपका प्रदर्शन जवाब देगा। परिवार या किसी करीबी के साथ बातचीत से शाम तक मन को सुकून मिल सकता है। कुछ काम तय समय से देर से पूरे होंगे, लेकिन उनका परिणाम आपकी उम्मीद से बेहतर हो सकता है। आज की सलाह: देरी को रुकावट न समझें, कई बार सही समय आने में थोड़ा वक्त लगता है। मिथुन टैरो राशिफल: अब पीछे नहीं, आगे देखिए टैरो कार्ड: Three of Swords (Reversed), Queen of Pentacles, The Magician पिछले दिनों की निराशा या किसी मनमुटाव से बाहर निकलने का आज अच्छा अवसर मिल सकता है। आप खुद को पहले से ज्यादा मजबूत और स्पष्ट महसूस करेंगे। करियर और आर्थिक मामलों में अपनी क्षमता दिखाने का समय है। अगर किसी नए काम की योजना बना रहे हैं तो पहल करने से पीछे न हटें। आपकी व्यावहारिक सोच और तैयारी अच्छे परिणाम दे सकती है। दिन के दूसरे हिस्से में कोई ऐसा अवसर सामने आ सकता है जो लंबे समय तक लाभ देगा। आज की सलाह: जो बीत गया, उसे पीछे छोड़कर नए भरोसे के साथ आगे बढ़ें। कर्क टैरो राशिफल: बदलाव को खुले मन से अपनाएं टैरो कार्ड: Knight of Wands, Four of Pentacles (Reversed), The Star कर्क राशि वालों के भीतर आज कुछ नया करने की इच्छा तेज हो सकती है। लंबे समय से जिस योजना को केवल सोच रहे थे, उस पर काम शुरू करने का समय आ सकता है। पुराने डर, संकोच या हर चीज को नियंत्रित रखने की आदत छोड़ेंगे तो नए अवसर दिखाई देने लगेंगे। दिन के दूसरे हिस्से में कोई अच्छी खबर या सकारात्मक संकेत आपका उत्साह बढ़ा सकता है। आज की सलाह: जहां उम्मीद दिखाई दे, वहां पहला कदम उठाने में देर न करें। सिंह टैरो राशिफल: जल्दबाजी से बचें, जवाब मिल जाएगा टैरो कार्ड: Ten of Wands, Page of Cups, Justice (Reversed) सिंह राशि वालों को आज जिम्मेदारियां कुछ अधिक महसूस हो सकती हैं। कई काम एक साथ ध्यान मांग सकते हैं, इसलिए हर काम खुद संभालने के बजाय प्राथमिकताएं तय करना जरूरी होगा। कार्यक्षेत्र में कोई नई जानकारी या प्रस्ताव सामने आ सकता है। हालांकि, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी स्थिति को समझना बेहतर रहेगा। दिन के दूसरे हिस्से में किसी पुराने मामले को लेकर चल रही उलझन कम हो सकती है। धैर्य बनाए रखेंगे तो दिन का अंत संतोषजनक रह सकता है। आज की सलाह: हर सवाल का जवाब उसी समय देना जरूरी नहीं होता। कन्या टैरो राशिफल: मेहनत से बनेगी अलग पहचान टैरो कार्ड: Eight of Pentacles, The Hanged Man, Queen of Wands आज कन्या राशि वालों का ध्यान अपने काम को बेहतर बनाने पर रहेगा। जिस लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, उसमें जल्दबाजी के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। अगर कोई काम उम्मीद से धीमा चल रहा है तो उसे असफलता न मानें। कभी-कभी रुककर परिस्थितियों को समझना सही दिशा चुनने में मदद करता है। दिन के दूसरे हिस्से में आपकी मेहनत और आत्मविश्वास लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। किसी नए विचार पर काम शुरू करने का मौका भी मिल सकता है। आज की सलाह: धैर्य और निरंतर मेहनत का साथ न छोड़ें। तुला टैरो राशिफल: निराशा से निकलकर आगे बढ़ें टैरो कार्ड: Five of Cups, Knight of Pentacles, The Sun किसी पुरानी निराशा या अधूरे काम को लेकर आज मन थोड़ा भारी रह सकता है। लेकिन जो नहीं हुआ, उसी पर अटके रहने के बजाय अपने हाथ में मौजूद अवसरों पर ध्यान देना बेहतर होगा। कार्यक्षेत्र में आपकी लगन और अनुशासन धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। दिन के दूसरे हिस्से में अच्छी खबर, सराहना या परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न होगा। आज की सलाह: जो नहीं मिला, उससे ज्यादा उस पर ध्यान दें जो आज आपके पास है। वृश्चिक टैरो राशिफल: नए रास्ते पर भरोसा रखें टैरो कार्ड: Two of Pentacles (Reversed), King of Cups, The Fool वृश्चिक राशि वालों के सामने आज कई जिम्मेदारियां एक साथ आ सकती हैं। इससे मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। हर काम एक साथ पूरा करने की कोशिश करने के बजाय प्राथमिकता तय करके आगे बढ़ें। कार्यक्षेत्र में आपका शांत स्वभाव और समझदारी किसी कठिन परिस्थिति को संभालने में मदद कर सकती है। दिन के दूसरे हिस्से में कोई नया अवसर या विचार सामने आ सकता है। अगर लंबे समय से किसी बदलाव के बारे में सोच रहे थे तो आज पहला कदम उठाने का साहस मिल सकता है। आज की सलाह: नई शुरुआत से पहले हर सवाल का जवाब मिलना जरूरी नहीं होता। धनु टैरो राशिफल: छोटी शुरुआत बड़ा रास्ता खोल सकती है टैरो कार्ड: Four of Swords, Ace of Pentacles, Nine of Wands (Reversed) पिछले कुछ दिनों की भागदौड़ के बाद आज मन को थोड़ा आराम चाहिए। खुद पर लगातार दबाव डालने के बजाय अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाएं। करियर या आर्थिक मामलों में कोई नया अवसर सामने आ सकता है। शुरुआत छोटी लग सकती है, लेकिन यही कदम भविष्य में बड़े लाभ का आधार बन सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में कोई रुका हुआ काम आगे बढ़ सकता है या किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से सकारात्मक बातचीत हो सकती है। आज की सलाह: खुद को आराम देने में संकोच न करें, क्योंकि थका हुआ मन सही निर्णय लेने में मुश्किल महसूस करता है। मकर टैरो राशिफल: अधूरी तस्वीर देखकर फैसला न लें टैरो कार्ड: Seven of Cups, Death (Reversed), Three of Pentacles मकर राशि वालों के सामने आज कई विकल्प आ सकते हैं। लेकिन हर अवसर आपके लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। किसी प्रस्ताव या नई योजना को लेकर असमंजस हो सकता है। कार्यक्षेत्र में टीम के साथ मिलकर काम करना बेहतर परिणाम दे सकता है। दूसरों की राय सुनें, लेकिन अंतिम निर्णय अपनी समझ और तथ्यों के आधार पर लें। शाम तक लंबे समय से चली आ रही किसी उलझन की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। आज की सलाह: बदलाव से डरने के बजाय उसमें छिपे अवसर को पहचानने की कोशिश करें। कुंभ टैरो राशिफल: अपनी दिशा खुद तय करनी होगी टैरो कार्ड: Six of Wands (Reversed), The Moon, Page of Swords कुंभ राशि वालों को आज दूसरों की राय या उनकी उपलब्धियां अपने फैसलों को प्रभावित करने से रोकना होगा। बार-बार खुद की तुलना करने से आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में कोई नई जानकारी या अप्रत्याशित बदलाव सामने आ सकता है। सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के बजाय तथ्यों की जांच करें। दिन के दूसरे हिस्से में किसी बातचीत, संदेश या मुलाकात से नई सोच मिल सकती है। छोटी-सी जानकारी भी भविष्य के किसी महत्वपूर्ण निर्णय में उपयोगी साबित हो सकती है। आज की सलाह: दूसरों की राह देखकर नहीं, अपनी मंजिल देखकर कदम बढ़ाएं। मीन टैरो राशिफल: धैर्य और समझदारी दिलाएंगे सफलता टैरो कार्ड: Ten of Pentacles, Strength, Five of Swords (Reversed) मीन राशि वालों के लिए आज परिवार, करियर और आर्थिक मामलों में स्थिरता का एहसास हो सकता है। पिछले दिनों की मेहनत अब धीरे-धीरे परिणाम देने लगेगी। अगर किसी रिश्ते या काम में मतभेद चल रहे थे तो उन्हें सुलझाने का अच्छा अवसर मिल सकता है। अपनी बात शांत तरीके से रखेंगे तो सामने वाला भी आपको बेहतर समझ सकेगा। दिन के दूसरे हिस्से में किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह या परिवार का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। आज असली जीत किसी बहस में नहीं, बल्कि रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाए रखने में है। आज की सलाह: जहां बातचीत से समाधान निकल सकता हो, वहां अहंकार को बीच में न आने दें। आज का टैरो संदेश 5 अगस्त का टैरो राशिफल संकेत देता है कि आज धैर्य, आत्मविश्वास, संवाद और बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। वृषभ के लिए धैर्य, वृश्चिक के लिए नई शुरुआत और कन्या के लिए मेहनत खास संदेश लेकर आई है। वहीं कुंभ राशि वालों को दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी दिशा पर भरोसा रखना होगा।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Hindu Panchang for August 5, 2026 showing Shravan Krishna Saptami, auspicious timings, Rahukaal and Choghadiya

आज का पंचांग 5 अगस्त 2026: सावन कृष्ण सप्तमी आज रात तक, पूजा के लिए जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल

Horoscope prediction for August 5, 2026, featuring all 12 zodiac signs and daily astrology guidance

आज का राशिफल 5 अगस्त 2026: सिंह राशि की आय में सुधार के संकेत, मेष-मिथुन जल्दबाजी से बचें; जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

Numerology prediction for August 5, 2026, covering Mulank 1 to 9 daily forecasts

आज का अंक ज्योतिष 5 अगस्त 2026: मूलांक 1 और 6 के लिए कार्यक्षेत्र में अपनी बात रखने का दिन, जन्मतिथि से जानें भविष्यफल

पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए यूनेस्को मान्यता की पहल
पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची की दौड़ में, नामांकन प्रक्रिया तेज

पुरी, एजेंसियां। ओडिशा की विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिश तेज हो गई है। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने रथ यात्रा के लिए यूनेस्को मान्यता की दिशा में नामांकन दस्तावेज जमा किए हैं। अब इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।   यूनेस्को मान्यता के लिए आगे बढ़ी प्रक्रिया     श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से रथ यात्रा को यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से आगे बढ़ाई जा रही है। वर्ष 2025 में नामांकन दस्तावेज जमा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। रथ यात्रा को इससे पहले केंद्र संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी की राष्ट्रीय विरासत सूची में भी शामिल किया जा चुका है।   ओडिशा सरकार अब इस अभियान में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और सहयोग की मांग कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रथ यात्रा की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया जा सके।   करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी है रथ यात्रा     पुरी की रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा से जुड़ा प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। 2026 की रथ यात्रा के दौरान पुरी रेलवे स्टेशन ने करीब 13 लाख श्रद्धालुओं की आवाजाही संभाली।   यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सदियों पुरानी परंपराएं, अनुष्ठान, संगीत, शिल्प और सामुदायिक भागीदारी भी शामिल हैं। इसी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।   मान्यता मिलने से पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा     यूनेस्को की मान्यता मिलने से पुरी रथ यात्रा को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे ओडिशा में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रथ यात्रा से जुड़ी पारंपरिक कला, शिल्प और रीति-रिवाजों के संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।   हालांकि, अभी रथ यात्रा को यूनेस्को की सूची में शामिल नहीं किया गया है। नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय होगा। इसलिए फिलहाल इसे यूनेस्को मान्यता की दौड़ में शामिल सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
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आज का अंक ज्योतिष 4 अगस्त 2026: मूलांक 4 और 9 वालों की मेहनत लाएगी रंग, जन्मतिथि से जानें आज का भविष्यफल

आज का अंक ज्योतिष, 4 अगस्त 2026: अंक ज्योतिष के अनुसार 4 अगस्त का दिन अनुशासन, योजना, धैर्य और जिम्मेदारी पर जोर देने वाला है। आज की ऊर्जा खासतौर पर उन लोगों के लिए सकारात्मक रह सकती है जो जल्दबाजी के बजाय व्यवस्थित तरीके से अपने काम पूरे करने पर भरोसा रखते हैं। मूलांक 4 के जातकों के लिए दिन मेहनत का परिणाम दिखाने वाला हो सकता है, जबकि मूलांक 9 वालों को धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है। आज का दिन केवल तेजी से काम पूरा करने का नहीं, बल्कि सही दिशा और बेहतर योजना के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है। अधूरे कामों को निपटाने, पुरानी योजनाओं को व्यवस्थित करने और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने के लिहाज से दिन उपयोगी रह सकता है। रिश्तों में भी अपनी बात मनवाने के बजाय समझदारी और संतुलन बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। मूलांक 1: पुराने काम पूरे करने पर दें ध्यान आज आपके लिए नए काम शुरू करने के बजाय पहले से अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करना अधिक बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में एकाग्र होकर काम करने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। काम के दबाव के बीच आराम और शरीर का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। रिश्तों में केवल अपनी बात पर अड़े रहने के बजाय थोड़ा समझौता करना आपके लिए बेहतर रहेगा। लकी नंबर: 1, 4 लकी रंग: गोल्ड, ग्रे क्या न करें: किसी काम को कठिन या उबाऊ समझकर उसे बीच में न छोड़ें। मूलांक 2: टीमवर्क से मिलेगा फायदा आज मिल-जुलकर काम करने से आपको लाभ मिल सकता है। किसी सहकर्मी या टीम के साथ मिलकर कागजी काम, योजना या किसी पुराने प्रोजेक्ट को व्यवस्थित करने में सफलता मिल सकती है। लगातार काम करने से मानसिक थकान हो सकती है, इसलिए बीच-बीच में आराम जरूर करें। रिश्तों में किसी पुरानी बात को लेकर परेशान होने के बजाय शांत बातचीत से समाधान खोजें। लकी नंबर: 2, 4 लकी रंग: व्हाइट, ग्रे क्या न करें: अपनी मेहनत का तुरंत परिणाम न मिलने पर निराश न हों। मूलांक 3: रुके प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय आज आपकी रचनात्मकता को सही दिशा देने की जरूरत है। कोई रुका हुआ प्रोजेक्ट पूरा करने या बिखरे हुए विचारों को व्यवस्थित योजना में बदलने के लिए दिन अनुकूल रह सकता है। काम और आराम के बीच संतुलन बनाकर चलें। रिश्तों में केवल हंसी-मजाक तक सीमित रहने के बजाय किसी जरूरी मुद्दे पर खुलकर और ईमानदारी से बातचीत करें। लकी नंबर: 3, 4 लकी रंग: येलो, ग्रे क्या न करें: किसी काम में देरी होने पर अपना धैर्य न खोएं। मूलांक 4: मेहनत से मिल सकते हैं अच्छे परिणाम आज का दिन मूलांक 4 वालों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। योजना बनाने, काम को व्यवस्थित करने, अधूरे कार्य पूरे करने और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने के लिए समय अच्छा है। आपकी मेहनत और अनुशासन का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है। हालांकि लगातार काम करते रहने से शारीरिक थकान हो सकती है। इसलिए काम के बीच छोटे ब्रेक लेते रहें। परिवार और करीबी लोगों के लिए भी समय निकालें। लकी नंबर: 4, 8 लकी रंग: ग्रे, ब्लू क्या न करें: काम में इतना न डूबें कि आराम और अपनों के लिए समय ही न बचे। मूलांक 5: योजना बनाकर आगे बढ़ें आज का अनुशासन आपको शुरुआत में थोड़ा बंधा हुआ महसूस करा सकता है, लेकिन यही ऊर्जा आपके बिखरे हुए कामों को व्यवस्थित करने में मदद करेगी। जल्दबाजी के बजाय योजना बनाकर आगे बढ़ें। बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करने से तनाव कम रहेगा। रिश्तों में भरोसा और निरंतरता बनाए रखना जरूरी होगा। लकी नंबर: 5, 4 लकी रंग: हरा, ग्रे क्या न करें: जल्दी आगे बढ़ने की कोशिश में जरूरी बातों और काम की बारीकियों को नजरअंदाज न करें। मूलांक 6: दूसरों के साथ खुद के लिए भी समय निकालें आज परिवार और लंबे समय से जुड़ी जिम्मेदारियां आपके लिए प्राथमिकता बन सकती हैं। घर की व्यवस्था सुधारने और योजनाबद्ध तरीके से काम करने में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि लगातार दूसरों की जिम्मेदारियां उठाने से मानसिक थकान हो सकती है। इसलिए अपने लिए भी कुछ समय निकालना जरूरी है। परिवार में किसी विवाद या समस्या को सुलझाते समय प्यार, धैर्य और अनुशासन का संतुलन बनाए रखें। लकी नंबर: 6, 4 लकी रंग: पिंक, ग्रे क्या न करें: सभी जिम्मेदारियां अकेले उठाकर खुद को पूरी तरह न थकाएं। मूलांक 7: तनाव और ज्यादा सोचने से बचें आज गहराई से सोचने, तकनीकी काम करने और शांत मन से अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ने के लिए दिन उपयोगी हो सकता है। आपकी गंभीर सोच और आज की अनुशासित ऊर्जा का अच्छा तालमेल बन सकता है। हालांकि जरूरत से ज्यादा सोचने से मानसिक थकान हो सकती है। स्क्रीन से कुछ समय दूर रहना और खुद को आराम देना फायदेमंद रहेगा। रिश्तों में किसी गलतफहमी को दूर करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं। लकी नंबर: 7, 4 लकी रंग: इंडिगो, ग्रे क्या न करें: किसी गलतफहमी के कारण खुद में सिमटने के बजाय जरूरी बातचीत जरूर करें। मूलांक 8: अनुशासन और मेहनत से लाभ करियर और आर्थिक योजनाओं के लिए आज का दिन उपयोगी रह सकता है। आपकी मेहनत और अनुशासन बड़े पेशेवर या वित्तीय फैसलों में मदद कर सकते हैं। हालांकि लगातार बैठकों और काम के दबाव से मानसिक तनाव हो सकता है। बीच में थोड़ा टहलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहतर रहेगा। काम के साथ-साथ परिवार और करीबी लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। लकी नंबर: 8, 4 लकी रंग: नेवी ब्लू, ग्रे क्या न करें: काम की उपलब्धियों में इतना व्यस्त न हों कि रिश्तों और भावनाओं को नजरअंदाज कर दें। मूलांक 9: मेहनत और धैर्य से मिलेगा परिणाम मूलांक 9 वालों के लिए आज का दिन जोश को नियंत्रित रखते हुए अधूरे या अटके हुए काम पूरे करने का संकेत देता है। किसी भी मामले में जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य और नियम के साथ आगे बढ़ना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा। काम की धीमी प्रगति आपको थोड़ी बेचैनी या झुंझलाहट दे सकती है, लेकिन इस स्थिति में धैर्य बनाए रखना जरूरी है। टहलना या शारीरिक गतिविधि मन को शांत करने में मदद कर सकती है। हर चीज को तुरंत ठीक करने की कोशिश या जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें। लकी नंबर: 9, 4 लकी रंग: लाल, ग्रे क्या न करें: हर समस्या का समाधान तुरंत निकालने की जिद न करें और जल्दबाजी से बचें। 4 अगस्त का संदेश 4 अगस्त का अंक ज्योतिष यही संकेत देता है कि आज सफलता की कुंजी अनुशासन, धैर्य, योजना और निरंतर मेहनत में छिपी है। खासकर मूलांक 4 और 9 वालों के लिए अपनी मेहनत को सही दिशा में लगाने का दिन है। हालांकि सभी मूलांक वालों को काम के साथ-साथ आराम, परिवार और रिश्तों के लिए भी संतुलित समय देना चाहिए।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
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Aaj Ka Ank Jyotish 3 August 2026: 3 अगस्त 2026 का दिन अंक ज्योतिष के लिहाज से बातचीत, मेलजोल, सहयोग और रिश्तों को मजबूत करने का संकेत दे रहा है। आज की ऊर्जा खास तौर पर यह संदेश देती है कि अपनी बात रखने के साथ-साथ दूसरों की बात सुनना भी उतना ही जरूरी है। धैर्य, समझदारी और सकारात्मक संवाद आज कई उलझनों को सुलझाने में मदद कर सकते हैं। मूलांक 3 की ऊर्जा आज विशेष रूप से प्रभावी मानी जा रही है। यही वजह है कि मूलांक 3 और 5 वालों के लिए दिन कई मामलों में अनुकूल रह सकता है। कामकाज से लेकर रिश्तों तक, बातचीत के जरिए नए अवसर और बेहतर तालमेल बनाने के संकेत हैं। हालांकि, जरूरत से ज्यादा बोलने, जल्दबाजी में वादे करने या हर बात को बहस में बदलने से बचना जरूरी होगा। आज का अंक ज्योतिष क्या कहता है? 3 अगस्त का दिन केवल तेजी से आगे बढ़ने के बजाय रिश्तों को समझने और सहेजने पर जोर देता है। आज लोगों की भावनाओं को समझकर उनके साथ कदम मिलाकर चलना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। कामकाज में टीमवर्क, संवाद और विचार साझा करना महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं निजी रिश्तों में खुलकर बातचीत करने से पुरानी गलतफहमियां दूर हो सकती हैं। आज अपनी बात पर अड़े रहने के बजाय सामने वाले के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करना बेहतर रहेगा। मूलांक 1: टीम के साथ मिलकर काम करने का दिन मूलांक 1 वालों के लिए आज का दिन अपने विचार और योजनाएं सामने रखने के लिहाज से अच्छा रह सकता है। टीम को प्रेरित करने और नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, लगातार बातचीत और सामाजिक गतिविधियों के कारण दिन के अंत तक थकान महसूस हो सकती है। इसलिए काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखें। बातचीत में केवल अपनी बात कहने के बजाय दूसरों को भी बोलने का पूरा अवसर दें। लकी नंबर: 1, 3 लकी रंग: गोल्ड, येलो आज क्या न करें: बातचीत में दूसरों की बात काटकर केवल अपनी बात पर जोर न दें। मूलांक 2: शांति के लिए कुछ समय निकालें मूलांक 2 वालों के लिए आज का दिन थोड़ा व्यस्त और सामाजिक हो सकता है। किसी साझेदारी या टीम से जुड़े मामले में अपने विचार सामने रखने के लिए समय अनुकूल रह सकता है। हालांकि, बहुत ज्यादा मेलजोल मानसिक थकान बढ़ा सकता है। इसलिए दिन में कुछ समय शांत वातावरण में बिताना आपके लिए बेहतर रहेगा। किसी रिश्ते में दूरी आई है तो सहज और सकारात्मक बातचीत उसे कम करने में मदद कर सकती है। लकी नंबर: 2, 3 लकी रंग: व्हाइट, येलो आज क्या न करें: केवल शांति बनाए रखने के लिए किसी जरूरी मुद्दे पर अपनी बात कहने से पीछे न हटें। मूलांक 3: विचारों को मिलेगी गति मूलांक 3 वालों के लिए आज का दिन खास माना जा सकता है। लेखन, शिक्षा, मीडिया, संचार और लोगों से बातचीत से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आपके विचारों को लोगों का समर्थन मिलने की संभावना है। पुराने रिश्तों में भी अपनापन और हल्की-फुल्की बातचीत नई गर्माहट ला सकती है। हालांकि, अत्यधिक सामाजिक और मानसिक गतिविधियों से थकान हो सकती है, इसलिए आराम को नजरअंदाज न करें। लकी नंबर: 3, 9 लकी रंग: येलो, ऑरेंज आज क्या न करें: उत्साह में इतना ज्यादा न बोलें कि सामने वाले की बात सुनना ही भूल जाएं। मूलांक 4: काम में नया तरीका अपनाएं मूलांक 4 वालों के लिए आज का दिन कुछ बदलाव लेकर आ सकता है। रोजमर्रा की तय दिनचर्या से बाहर निकलकर किसी काम में नया तरीका अपनाने से फायदा मिल सकता है। शुरुआत में बदलाव थोड़ा असहज लग सकता है, लेकिन इससे नए अवसर सामने आ सकते हैं। गंभीरता को थोड़ा कम करके हल्की-फुल्की बातचीत का आनंद लें और किसी अच्छे विचार को केवल इसलिए खारिज न करें क्योंकि वह आपकी मूल योजना का हिस्सा नहीं था। लकी नंबर: 4, 3 लकी रंग: ग्रे, येलो आज क्या न करें: अपनी योजना से अलग होने के कारण किसी उपयोगी विचार को तुरंत खारिज न करें। मूलांक 5: हंसमुख अंदाज से बनेंगे काम मूलांक 5 वालों के लिए 3 अगस्त का दिन अनुकूल रह सकता है। लोगों से जुड़ने, बिक्री, मीडिया और बातचीत से संबंधित कामों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। अचानक हुई कोई बातचीत भी नए रास्ते खोल सकती है। हालांकि, बहुत ज्यादा ऊर्जा और मेलजोल के कारण ध्यान भटकने की आशंका है। इसलिए जरूरी कामों को प्राथमिकता दें। खुलकर और सकारात्मक तरीके से बातचीत करना आपके पक्ष में रहेगा, लेकिन उत्साह में ऐसे वादे न करें जिन्हें बाद में पूरा करना मुश्किल हो। लकी नंबर: 5, 3 लकी रंग: हरा, येलो आज क्या न करें: जोश में आकर ऐसे वादे न करें जिन्हें आप निभा न सकें। मूलांक 6: खुद को ज्यादा न थकाएं मूलांक 6 वालों के लिए शिक्षा, आतिथ्य और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से जुड़े कामों में दिन अच्छा रह सकता है। अपने विचारों को खुलकर सामने रखने से सम्मान मिल सकता है। हालांकि, दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में खुद को पूरी तरह नजरअंदाज न करें। लगातार दूसरों के लिए काम करने से मानसिक और शारीरिक थकान हो सकती है। किसी करीबी के साथ प्यार और सहजता से बातचीत रिश्ते को और मजबूत कर सकती है। लकी नंबर: 6, 3 लकी रंग: पिंक, येलो आज क्या न करें: दूसरों की मदद करते-करते अपनी जरूरतों और महत्व को नजरअंदाज न करें। मूलांक 7: खुद के लिए भी समय निकालें मूलांक 7 वालों को आज अपनी शांत दुनिया से बाहर निकलकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से विचार साझा करने का लाभ मिल सकता है। मन की बात खुलकर कहने से भावनात्मक हल्कापन महसूस हो सकता है। हालांकि, लगातार लोगों के बीच रहना आपको थका सकता है। इसलिए सामाजिक गतिविधियों के साथ कुछ समय अकेले बिताना भी जरूरी रहेगा। लकी नंबर: 7, 3 लकी रंग: इंडिगो, येलो आज क्या न करें: बातचीत सही दिशा में जाने के बावजूद पूरी तरह चुप न रहें। मूलांक 8: करीबियों के साथ अच्छा समय मूलांक 8 वालों के लिए आज अपनी बात समझाने और दूसरों के साथ बेहतर तालमेल बनाने का दिन है। आपकी गंभीरता और आज की सकारात्मक ऊर्जा का मेल काम में मजबूती ला सकता है। हालांकि, लगातार बैठकों और मुलाकातों से थकान हो सकती है। बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें। परिवार और करीबी लोगों के साथ थोड़ा सहज और हंसमुख व्यवहार रिश्तों में गर्माहट ला सकता है। लकी नंबर: 8, 3 लकी रंग: नेवी ब्लू, येलो आज क्या न करें: हर बातचीत को जीतने या बहस में बदलने की कोशिश न करें। मूलांक 9: मन की बात साझा करना रहेगा फायदेमंद मूलांक 9 वालों के लिए आज अपने विचार और भावनाएं सही तरीके से व्यक्त करने का दिन हो सकता है। किसी जरूरी विषय पर साहस के साथ अपनी बात रखना सकारात्मक परिणाम दे सकता है। मन में चल रही भावनाओं को लिखना या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करना मानसिक रूप से राहत दे सकता है। दिल से और स्पष्ट बातचीत किसी खास रिश्ते को और गहरा करने में मदद कर सकती है। लकी नंबर: 9, 3 लकी रंग: उपलब्ध स्रोत में स्पष्ट नहीं आज क्या न करें: भावनाओं को मन में दबाकर रखने के बजाय सही व्यक्ति के सामने अपनी बात शांत तरीके से रखें। 3 अगस्त का अंक ज्योतिष: आज का खास संदेश आज की अंक ज्योतिषीय ऊर्जा का सबसे बड़ा संदेश है कि सिर्फ अपनी बात मनवाना ही सफलता नहीं है, बल्कि दूसरों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बातचीत में संयम, रिश्तों में नरमी और फैसलों में समझदारी आज आपके लिए बेहतर परिणाम ला सकती है। खास तौर पर मूलांक 3 और 5 वालों के लिए दिन बातचीत, संपर्क और नए अवसरों के लिहाज से अच्छा रह सकता है। वहीं बाकी मूलांकों के लिए भी आज का दिन अपने व्यवहार में संतुलन लाने और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश दे रहा है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
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नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपने आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन Pixel 11 Pro Fold का डिजाइन आधिकारिक टीज़र वीडियो के जरिए लॉन्च से पहले ही रिवील कर दिया है। कंपनी ने यह वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, जिसमें फोन का नया लुक साफ दिखाई दे रहा है। Google इस डिवाइस को 12 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित Pixel लॉन्च इवेंट में पेश करेगा। भारतीय समयानुसार यह इवेंट 13 अगस्त सुबह 3:30 बजे शुरू होगा। टीज़र में फोन पहले के मुकाबले ज्यादा पतला और प्रीमियम डिजाइन के साथ नजर आ रहा है। साथ ही ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप और नए Pixel Glow फीचर की भी झलक देखने को मिली है।   Tensor G6 चिपसेट और 4,800mAh बैटरी मिलने की उम्मीद, कीमत बढ़ने के संकेत   लीक्स के मुताबिक, Pixel 11 Pro Fold में Google का नया Tensor G6 प्रोसेसर और करीब 4,800mAh की बैटरी मिल सकती है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस बार Pixel 11 सीरीज की कीमत पिछले मॉडल के मुकाबले अधिक हो सकती है। इससे पहले OnLeaks और MySmartPrice की लीक रिपोर्ट्स में भी इसी तरह का डिजाइन सामने आया था। वहीं, टेक रिपोर्ट्स के अनुसार Google लॉन्च इवेंट में Pixel Watch 5 और एक नए ट्रैकिंग डिवाइस को भी पेश कर सकता है। हालांकि, इन सभी फीचर्स और डिवाइसों की आधिकारिक पुष्टि कंपनी लॉन्च इवेंट के दौरान ही करेगी।

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सड़क सुरक्षा के लिए गाड़ियों का ‘V2V कम्युनिकेशन’, वाहनों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने पर जोर   नई दिल्ली, एजेंसियां। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए वाहनों के बीच V2V (Vehicle-to-Vehicle) Communication तकनीक को महत्वपूर्ण समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। इस तकनीक के जरिए सड़क पर चल रही गाड़ियां एक-दूसरे के साथ गति, दिशा, स्थिति और संभावित खतरे से जुड़ी जानकारी साझा कर सकती हैं।   कैसे काम करता है V2V कम्युनिकेशन?     V2V तकनीक में आसपास के वाहन वायरलेस संचार के जरिए एक-दूसरे को जरूरी जानकारी भेजते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आगे चल रही कार अचानक ब्रेक लगाती है तो पीछे आ रहे वाहन को इसकी सूचना तेजी से मिल सकती है। इससे ड्राइवर को खतरे के बारे में समय रहते चेतावनी देने और दुर्घटना से बचने में मदद मिल सकती है।     दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद     V2V का इस्तेमाल खासतौर पर अचानक ब्रेक लगाने, टक्कर की आशंका, ब्लाइंड स्पॉट, लेन बदलने और चौराहों पर संभावित टक्कर जैसी परिस्थितियों में चेतावनी देने के लिए किया जा सकता है। भविष्य में इसे उन्नत ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और स्वचालित वाहनों के साथ जोड़कर सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने की संभावना है।     V2V के साथ V2I भी महत्वपूर्ण     V2V के अलावा V2I (Vehicle-to-Infrastructure) तकनीक पर भी काम किया जा रहा है। इसमें वाहन ट्रैफिक सिग्नल, सड़क किनारे लगे सेंसर और अन्य बुनियादी ढांचे से जानकारी हासिल कर सकते हैं।   V2V और V2I जैसी तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल होने पर वाहनों और सड़क के बीच रियल-टाइम संचार का नेटवर्क तैयार किया जा सकता है, जिससे यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा दोनों में सुधार की उम्मीद है।

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Google Pixel 11
Google Pixel 11 सीरीज की कीमत लॉन्च से पहले लीक! भारत में ₹69,999 से शुरू हो सकती है कीमत

नई दिल्ली, एजेंसियां। Google की बहुप्रतीक्षित Pixel 11 सीरीज लॉन्च से पहले ही अपनी संभावित कीमत को लेकर चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में Pixel 11 की शुरुआती कीमत ₹69,999 हो सकती है। हालांकि, Google ने अभी तक नई Pixel सीरीज की आधिकारिक कीमतों का खुलासा नहीं किया है, इसलिए लीक हुई कीमतों को फिलहाल संभावित माना जा रहा है।   Pixel 11 की कीमत हो सकती है ₹69,999   लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Pixel 11 के बेस मॉडल की कीमत भारत में करीब ₹69,999 रखी जा सकती है। वहीं, Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL की कीमत इससे काफी ज्यादा होने की उम्मीद है।   हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में कीमतों को लेकर अंतर देखने को मिल रहा है। ऐसे में लॉन्च से पहले सामने आई कीमतों को अंतिम कीमत मानना सही नहीं होगा। Google की ओर से आधिकारिक घोषणा के बाद ही सही जानकारी सामने आएगी।   Tensor G6 चिपसेट से होगा लैस   Pixel 11 सीरीज में Google का नया Tensor G6 चिपसेट मिलने की उम्मीद है। कंपनी इस बार भी AI और मशीन लर्निंग आधारित फीचर्स पर खास ध्यान दे सकती है। नए प्रोसेसर के साथ कैमरा प्रोसेसिंग, फोटो एडिटिंग, वॉयस फीचर्स और डिवाइस पर AI से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। Pixel सीरीज की पहचान रहे कैमरा और AI फीचर्स को भी इस बार और बेहतर किए जाने की उम्मीद है।   चार मॉडल लॉन्च कर सकती है Google   रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Pixel 11 सीरीज में Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold जैसे मॉडल पेश कर सकती है। इनमें अलग-अलग स्क्रीन साइज और हार्डवेयर के साथ प्रीमियम फीचर्स दिए जा सकते हैं। Pixel 11 Pro Fold कंपनी का फोल्डेबल मॉडल होगा, जिसकी कीमत सामान्य Pixel 11 मॉडल की तुलना में काफी ज्यादा होने की संभावना है।   अगस्त में हो सकती है लॉन्चिंग   Google Pixel 11 सीरीज को लेकर माना जा रहा है कि कंपनी इसे अगस्त 2026 में अपने हार्डवेयर इवेंट के दौरान पेश कर सकती है। लॉन्च के दौरान कंपनी कीमत, स्टोरेज वेरिएंट, कलर ऑप्शन और भारत में बिक्री से जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा करेगी।   फिलहाल Pixel 11 की ₹69,999 की संभावित शुरुआती कीमत को लेकर Google की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए खरीदारी का फैसला करने से पहले कंपनी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना बेहतर होगा।

abhishek singh अगस्त 4, 2026 0
WhatsApp Account

WhatsApp ने कई यूजर अकाउंट्स को 24 घंटे के लिए ‘Under Review’ में डाला, अचानक बंद हुई मैसेजिंग सेवा

Skullcandy Aviator 900 ANC वायरलेस हेडफोन

Skullcandy Aviator 900 ANC हेडफोन लॉन्च, 60 घंटे की बैटरी और THX Spatial Audio से लैस

Amazon और Flipkart सेल में इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान पर ऑफर

Amazon-Flipkart पर बड़ी सेल, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रोजमर्रा के सामान पर मिल रहे बंपर ऑफर

iPhone 18 Pro
iPhone 18 Price: आईफोन 18 प्रो हो सकता है महंगा, लॉन्च से पहले प्राइस बढ़ने का बड़ा दावा

नई दिल्ली, एजेंसियां। Apple की अगली फ्लैगशिप सीरीज iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च से पहले ही कीमत को लेकर चर्चा में आ गई है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इस बार प्रो मॉडल की कीमत मौजूदा पीढ़ी के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकती है। इसकी प्रमुख वजह मेमोरी चिप और नई 2nm चिप तकनीक की बढ़ती लागत बताई जा रही है। हालांकि, Apple ने अभी तक iPhone 18 Pro की कीमत की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।   $200 से $300 तक महंगा होने का दावा   हालिया अनुमान में GF Securities के विश्लेषक जेफ पु ने संकेत दिया है कि iPhone 18 Pro मॉडल की कीमत मौजूदा iPhone 17 Pro सीरीज की तुलना में करीब 250 से 300 डॉलर तक बढ़ सकती है। iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत 1,099 डॉलर रही है। ऐसे में यह अनुमान सही साबित हुआ तो नए Pro मॉडल की शुरुआती कीमत करीब 1,349 से 1,399 डॉलर तक पहुंच सकती है।   हालांकि, दूसरे विश्लेषकों के अनुमान इससे काफी कम हैं। J.P. Morgan के अनुमान के मुताबिक कीमत में लगभग 50 से 100 डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे साफ है कि अभी कीमत को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं।   मेमोरी चिप और 2nm प्रोसेसर की बढ़ी लागत   iPhone 18 Pro की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की बढ़ती लागत बताई जा रही है। AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा iPhone 18 Pro में नई 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर आधारित A20 Pro चिप मिलने की उम्मीद है, जिसकी निर्माण लागत मौजूदा 3nm चिप की तुलना में ज्यादा हो सकती है।   Apple पहले ही अपने कुछ दूसरे उत्पादों की कीमतों में मेमोरी और स्टोरेज लागत बढ़ने के कारण बदलाव कर चुका है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक iPhone 18 Pro की कीमत बढ़ाने की पुष्टि नहीं की है।   सितंबर में लॉन्च होने की उम्मीद   iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को सितंबर 2026 में पेश किए जाने की उम्मीद है। इस बार Apple की रणनीति में बदलाव की भी चर्चा है और कुछ रिपोर्टों के अनुसार पहले Pro मॉडल लॉन्च हो सकते हैं, जबकि सामान्य iPhone 18 मॉडल बाद में पेश किए जा सकते हैं।   नई सीरीज में बेहतर कैमरा, नई A20 सीरीज चिप, बेहतर बैटरी और डिजाइन में बदलाव जैसे अपग्रेड मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन फीचर्स और कीमत की अंतिम जानकारी Apple के आधिकारिक लॉन्च के दौरान ही सामने आएगी।   भारत में कितनी हो सकती है कीमत?   अगर अमेरिकी बाजार में iPhone 18 Pro की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी होती है तो इसका असर भारतीय कीमत पर भी पड़ सकता है। मौजूदा अनुमानों के आधार पर भारत में नया Pro मॉडल पिछली पीढ़ी से महंगा हो सकता है, लेकिन अभी किसी निश्चित भारतीय कीमत की पुष्टि नहीं हुई है।   इसलिए फिलहाल iPhone 18 Pro की संभावित कीमत को लेकर सामने आ रहे आंकड़ों को लीक और विश्लेषकों के अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही इसकी वास्तविक कीमत स्पष्ट होगी।

abhishek singh अगस्त 4, 2026 0
Sony Bravia 9 II 115 इंच True RGB Mini LED TV

Sony Bravia 9 II 115-इंच True RGB TV की एंट्री, शानदार पिक्चर क्वालिटी के साथ हुआ लॉन्च

POCO M8 Power

POCO M8 Power भारत में लॉन्च, 8,000mAh बैटरी और 120Hz AMOLED डिस्प्ले से लैस

Samsung Innovation Campus में AI प्रशिक्षण

भारत में AI करियर को बढ़ावा दे रहा Samsung Innovation Campus, युवा महिलाओं के लिए बढ़े अवसर

शिक्षा

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Prahlad Joshi
भारत में आज से BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भुवनेश्वर में जुटेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि

भुवनेश्वर, एजेंसियां। भारत की अध्यक्षता में 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक आज, 5 अगस्त से ओडिशा के भुवनेश्वर में शुरू हो गई है। तीन दिवसीय यह बैठक 7 अगस्त तक चलेगी। इसके साथ ही तीसरी BRICS वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी आयोजित की जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए BRICS देशों के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं।   शिक्षा सहयोग और कौशल विकास पर होगा जोर   बैठक में BRICS देशों के बीच शिक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। प्रमुख एजेंडे में प्रारंभिक शिक्षा, कौशल विकास, शोध एवं नवाचार, स्टार्टअप और शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता जैसे मुद्दे शामिल हैं।   भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान शिक्षा क्षेत्र में पूरे साल कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच शिक्षा और कौशल से जुड़े अनुभवों को साझा करना तथा छात्रों के लिए बेहतर अवसर तैयार करना है।   प्रह्लाद जोशी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व   बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी कर रहे हैं। उनके साथ शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे। BRICS देशों के बीच शिक्षा, कौशल और शोध के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।   7 अगस्त तक चलेगा कार्यक्रम   भुवनेश्वर में आयोजित BRICS शिक्षा ट्रैक की बैठकें 5 से 7 अगस्त तक चलेंगी। वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों के बाद शिक्षा मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।   भारत के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। शिक्षा क्षेत्र में होने वाले फैसलों से सदस्य देशों के बीच छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और कौशल विकास से जुड़े सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
Delhi Government Decision

दिल्ली सरकार की बड़ी पहल, 12वीं के छात्रों को मिलेगी मुफ्त JEE-NEET कोचिंग, रहने-खाने की सुविधा भी

NEET UG 2026 Counselling

NEET UG 2026 काउंसलिंग का पहला राउंड आज से शुरू, MCC ने जारी किया पूरा शेड्यूल

Odisha government announces monthly stipends for eligible PG and PhD agriculture students at OUAT

PG और PhD छात्रों के लिए बड़ी राहत, हर महीने मिलेगा 15 हजार रुपये तक स्टाइपेंड; जानें किसे मिलेगा लाभ

CAT 2026 रजिस्ट्रेशन और IIM MBA प्रवेश परीक्षा
CAT 2026 रजिस्ट्रेशन शुरू, IIM में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया हुई शुरू

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) में MBA और अन्य प्रबंधन पाठ्यक्रमों में दाखिले का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। Common Admission Test (CAT) 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। IIM इंदौर की ओर से आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए उम्मीदवार 3 अगस्त 2026 से 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।   29 नवंबर को होगी CAT 2026 परीक्षा     CAT 2026 परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को किया जाएगा। परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और तीन सत्रों में आयोजित की जाएगी। CAT स्कोर के आधार पर उम्मीदवार देश के विभिन्न IIM के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख बिजनेस स्कूलों में मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।   परीक्षा में तीन प्रमुख सेक्शन होंगे—Verbal Ability and Reading Comprehension (VARC), Data Interpretation and Logical Reasoning (DILR) और Quantitative Ability (QA)। प्रत्येक सेक्शन के लिए निर्धारित समय में उम्मीदवारों को प्रश्न हल करने होंगे।   15 सितंबर तक भर सकेंगे आवेदन फॉर्म     CAT 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए आधिकारिक CAT पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। फॉर्म भरते समय व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी सावधानी से दर्ज करनी होगी।   आवेदन की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आखिरी समय की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए समय रहते फॉर्म जमा करने की सलाह दी गई है।   IIM में MBA दाखिले का प्रमुख रास्ता है CAT     CAT भारत की सबसे प्रमुख मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसके स्कोर का इस्तेमाल IIM के विभिन्न MBA/PGP और अन्य प्रबंधन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। इसके अलावा देश के कई अन्य प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल भी CAT स्कोर स्वीकार करते हैं।   उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CAT में बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में दाखिले का अवसर मिल सकता है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अब आवेदन प्रक्रिया के साथ-साथ अपनी तैयारी को भी अंतिम चरण में पहुंचाने का समय है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
कांवड़ यात्रा के चलते यूपी में स्कूल कॉलेज बंद

यूपी के कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद, कांवड़ यात्रा के चलते 12 अगस्त तक रहेगी छुट्टी

NICL Assistant Recruitment 2026 offers 500 vacancies with application deadline and exam dates

NICL Assistant Recruitment 2026: 500 पदों पर भर्ती, 7 अगस्त तक करें आवेदन; जानें योग्यता, फीस और परीक्षा तारीख

IIT Jodhpur

IIT जोधपुर ने लॉन्च किया 4 साल का BS प्रोग्राम, JEE के बिना मिलेगा दाखिला

NEET UG 2026 Counselling
NEET UG 2026 काउंसलिंग का शेड्यूल जारी, 5 अगस्त से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG 2026 काउंसलिंग का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके तहत MBBS, BDS और BSc नर्सिंग में दाखिले के लिए राउंड-1 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होगा। काउंसलिंग 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) समेत MCC के दायरे में आने वाली सीटों के लिए आयोजित की जाएगी।   5 अगस्त से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन   NEET UG 2026 में सफल उम्मीदवार 5 अगस्त से MCC की ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। राउंड-1 के लिए रजिस्ट्रेशन और शुल्क भुगतान की अंतिम समय सीमा 12 अगस्त दोपहर 3 बजे तक निर्धारित की गई है। सीट मैट्रिक्स से जुड़ी जानकारी 4 अगस्त को जारी की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार उपलब्ध सीटों के अनुसार अपनी पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम चुन सकेंगे।   MBBS, BDS और BSc नर्सिंग में मिलेगा दाखिला   MCC की काउंसलिंग के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को MBBS, BDS और BSc नर्सिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले का अवसर मिलेगा। सीट आवंटन उम्मीदवार की NEET रैंक, पसंद, श्रेणी और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन के बाद कॉलेज और पाठ्यक्रम की पसंद सावधानी से भरनी होगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प लॉक करना भी जरूरी होगा।   राज्य कोटे की काउंसलिंग अलग से होगी   MCC की काउंसलिंग में मुख्य रूप से 15 प्रतिशत AIQ सीटों और MCC के अंतर्गत आने वाली अन्य सीटों को शामिल किया जाता है। वहीं राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए उम्मीदवारों को संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी के पोर्टल पर अलग से आवेदन करना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे रजिस्ट्रेशन से पहले MCC की ओर से जारी सूचना और पात्रता नियमों को ध्यान से पढ़ें तथा जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।   आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगा पूरा कार्यक्रम   NEET UG 2026 काउंसलिंग से संबंधित रजिस्ट्रेशन, सीट मैट्रिक्स, चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की जानकारी MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। उम्मीदवारों को अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय पर रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
राष्ट्रीय परीक्षा कानून

राष्ट्रीय परीक्षा संशोधन बिल अब बना कानून, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी मंजूरी

DU PhD नया नियम

DU का बड़ा निर्णय, 4 साल की ग्रेजुएशन के बाद सीधे PhD में दाखिला

IIT कानपुर डेटा साइंस कोर्स

IIT कानपुर ने लॉन्च किया 6-महीने का ऑनलाइन डेटा साइंस कोर्स, AI और मशीन लर्निंग की मिलेगी ट्रेनिंग

NEET UG 2026 काउंसलिंग नियम
NEET UG 2026 काउंसलिंग नियमों में MCC के बड़े बदलाव, सीट अपग्रेड और इस्तीफे की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET UG 2026 की काउंसलिंग से पहले मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने प्रवेश प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में सीट अपग्रेड के लिए उम्मीदवारों को हर बार कॉलेज जाकर शारीरिक रूप से रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं होगी। सीट छोड़ने यानी इस्तीफे की प्रक्रिया भी MCC पोर्टल के जरिए ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।   सीट अपग्रेड के लिए बार-बार कॉलेज जाने की जरूरत नहीं   नई व्यवस्था के तहत जिन उम्मीदवारों को काउंसलिंग के अगले चरण में बेहतर सीट मिलने की उम्मीद है, उन्हें सीट अपग्रेड की प्रक्रिया के लिए हर बार कॉलेज में जाकर शारीरिक रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। इससे विद्यार्थियों का समय और यात्रा खर्च दोनों बचेंगे और काउंसलिंग प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी।   अब ऑनलाइन सीट छोड़ सकेंगे उम्मीदवार   MCC ने सीट से इस्तीफा देने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन कर दिया है। उम्मीदवारों को सीट छोड़ने के लिए संबंधित कॉलेज में जाकर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय MCC पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया और अनावश्यक भागदौड़ कम होने की उम्मीद है।   NRI उम्मीदवारों के दस्तावेज भी ऑनलाइन   NEET UG काउंसलिंग में NRI कोटे से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी बदलाव किया गया है। अब NRI स्टेटस से जुड़े जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे। इसका उद्देश्य दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक आसान और व्यवस्थित बनाना है।   काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर   MCC के इन बदलावों का उद्देश्य मेडिकल दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और सुविधा बढ़ाना है। उम्मीदवारों को सीट उपलब्धता, फीस और प्रवेश से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। NEET UG 2026 के अभ्यर्थियों के लिए इन बदलावों को समझना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि सीट अपग्रेड और सीट छोड़ने के फैसले अब पहले की तुलना में अधिक डिजिटल तरीके से किए जा सकेंगे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
अगस्त 2026 स्कूल छुट्टियां

School Holiday August 2026: अगस्त में कब-कब बंद रहेंगे स्कूल? स्वतंत्रता दिवस, मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन समेत देखें छुट्टियों की पूरी सूची

MGM Medical College Jamshedpur campus for MBBS admission, fees, seats and NEET counselling information

MGM मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर में लेना चाहते हैं MBBS में एडमिशन? जानें फीस, सीट, कट-ऑफ और प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी

BPSC 70th rank holder Aastha Damele shares her five-year journey, study strategy and success story

BPSC Success Story: "मैं रोज रात को अगले दिन की पढ़ाई का प्लान बनाती थी", जानिए कैसे आस्था दमेले बनीं BPSC अफसर

दुनिया

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Indian cargo vessel MSV Faize Noore Oliya sinks in the Red Sea near Yemen after an attack, while all 13 Indian crew members are rescued safely.
यमन के पास लाल सागर में कैसे डूबा भारतीय जहाज? सभी 13 भारतीय सुरक्षित, जानिए पूरा घटनाक्रम

यमन के तट के पास लाल सागर (Red Sea) में भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हुए हमले के बाद जहाज डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार 13 भारतीय नागरिकों समेत सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद भारत सरकार ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। कैसे हुआ हमला? केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि भारतीय ध्वज वाला यह मालवाहक जहाज यमन के समुद्री क्षेत्र के पास एक प्रोजेक्टाइल (गोला या मिसाइल जैसे हथियार) की चपेट में आ गया, जिसके बाद जहाज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ और अंततः डूब गया। हालांकि, घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। यमन सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का कहना है कि जहाज पर पश्चिमी तट के पास विस्फोटकों से भरी एक नाव के जरिए हमला किया गया। फिलहाल हमले के सटीक तरीके की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 4 अगस्त 2026 को यमन तट के पास भारतीय व्यापारिक जहाज पर हुआ हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना तत्काल बंद होना चाहिए और समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे "निहत्थे व्यापारिक जहाज पर उकसावे वाला हमला" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित जहाज पर कुल 14 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें: 13 भारतीय नागरिक 1 यमन का नागरिक शामिल थे। यमन की नौसेना और तटरक्षक बल ने संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित निकाल लिया और उन्हें मोखा (Mocha) बंदरगाह पहुंचाया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास लगातार बचाए गए भारतीय नाविकों के संपर्क में है और हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ता समुद्री संकट भारत सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इन घटनाओं से वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने की अपील की है। अब तक 16 भारतीयों की हो चुकी है मौत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अब तक 16 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। इनमें: 10 भारतीय नाविक, जो क्षेत्र में हुए समुद्री हमलों में मारे गए। 5 अन्य भारतीय नाविक, जिनकी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान ब्लैक सी (काला सागर) में व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों में मौत हुई। अन्य एक भारतीय की भी संघर्ष से जुड़ी घटनाओं में मृत्यु हुई है। क्यों बढ़ा लाल सागर में खतरा? लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल हैं। इसी रास्ते से यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापार होता है। पिछले महीने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ "नौसैनिक नाकेबंदी" की घोषणा की थी, जिसमें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल है। इसके बाद से इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमलों का खतरा लगातार बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में सुरक्षा स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन, तेल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
A spent SpaceX Falcon 9 rocket stage is expected to collide with the Moon, creating a new crater for scientific study.

आज चांद से टकराएगा स्पेसएक्स का फाल्कन-9 रॉकेट, बनेगा नया क्रेटर; वैज्ञानिकों को मिलेगा बड़ा मौका

Huge flames and thick black smoke rise from a chemical plant in São Paulo, Brazil, after a massive fire and multiple explosions.

ब्राजील के साओ पाउलो में केमिकल प्लांट में भीषण आग, कई धमाकों से दहशत; 150 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

Baloch activists call for observing August 11 as Balochistan's Independence Day and seek international recognition.

बलूचिस्तान का बड़ा ऐलान, 11 अगस्त को मनाएगा 'स्वतंत्रता दिवस'; पाकिस्तान से अलग राष्ट्र की फिर उठी मांग

Former Bangladesh Prime Minister Sheikh Hasina is set to address the media during her first press conference in a year.
क्या बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना? एक साल बाद आज करेंगी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस, बड़े ऐलान के संकेत

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना आज (5 अगस्त 2026) एक साल बाद पहली बार मीडिया को संबोधित करने जा रही हैं। उनकी पार्टी बांग्लादेश आवामी लीग ने घोषणा की है कि वह शाम को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। माना जा रहा है कि इस दौरान वह अपनी संभावित बांग्लादेश वापसी, भविष्य की राजनीतिक रणनीति और मौजूदा हालात पर बड़ा बयान दे सकती हैं। पार्टी के मुताबिक यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बांग्लादेशी समयानुसार शाम 6:30 बजे और भारतीय समयानुसार शाम 6:00 बजे शुरू होगी। इसमें बांग्लादेश के साथ-साथ दुनिया भर के मीडिया संगठनों के पत्रकारों को शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। देश वापसी पर हो सकता है बड़ा ऐलान आवामी लीग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि शेख हसीना प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांग्लादेश लौटने को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती हैं। हालांकि, पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह वापसी की कोई निश्चित तारीख बताएंगी या केवल अपनी राजनीतिक योजना साझा करेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संबोधन बांग्लादेश की मौजूदा राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि शेख हसीना पिछले एक वर्ष से सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने नहीं आई हैं। क्यों अहम है यह प्रेस कॉन्फ्रेंस? यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा था। उसके बाद यह पहला अवसर होगा जब वह सीधे मीडिया और जनता को संबोधित करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि अपने संबोधन में वह: बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखेंगी। आवामी लीग की आगे की रणनीति बताएंगी। देश वापसी को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेंगी। समर्थकों के लिए राजनीतिक संदेश भी दे सकती हैं। भारत क्यों आई थीं शेख हसीना? शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय सरकारी नौकरियों में आरक्षण (कोटा) व्यवस्था के विरोध में शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे सरकार विरोधी व्यापक प्रदर्शन में बदल गया था। देशभर में हिंसा और राजनीतिक संकट बढ़ने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सैन्य हेलीकॉप्टर से ढाका छोड़कर भारत पहुंचीं। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की राजनीति पर रहेगी नजर शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनकी संभावित वापसी को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में आज का उनका संबोधन न केवल आवामी लीग, बल्कि पूरे बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या शेख हसीना वास्तव में अपनी देश वापसी की घोषणा करती हैं या फिर भविष्य की राजनीतिक रणनीति का केवल खाका पेश करती हैं।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Diplomatic efforts between the United States and Iran intensify as Qatar signals a draft agreement is under discussion.

US-ईरान तनाव कम होने के संकेत, समझौते का ड्राफ्ट तैयार; कतर बोला- अगले कुछ दिनों में हो सकती है डील

Indian-flagged cargo vessel MSV Faize Noore Oliya sinks off Yemen after an attack as rescue teams evacuate the crew.

यमन तट के पास हमले के बाद भारतीय मालवाहक जहाज डूबा, 13 भारतीय नाविक सुरक्षित बचाए गए

Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu addresses the nation, stating Israeli forces will remain in Gaza until Hamas lays down its weapons.

नेतन्याहू का बड़ा ऐलान: हमास के हथियार डालने तक गाजा से नहीं हटेगी इजरायली सेना

Debate over the proposed FCRA amendments as concerns grow over oversight of religious institutions and foreign-funded NGOs in India.
FCRA संशोधन पर नया विवाद: अमेरिकी सांसद ने जताई आपत्ति, चर्चों पर नियंत्रण को लेकर उठे सवाल

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act - FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर देश और विदेश दोनों जगह बहस तेज हो गई है। संसद में इस विधेयक पर चर्चा के बीच अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद रिले मूर ने भारत सरकार के प्रस्तावित बदलावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों से सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं के कामकाज तथा उनकी संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। मूर ने इसे ईसाई समुदाय के लिए चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यदि यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर रिले मूर ने क्या कहा? अमेरिकी सांसद रिले मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भारत में ईसाई समुदाय के लंबे इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि संत थॉमस के मालाबार तट पर आने के बाद से भारत में ईसाई धर्म की मजबूत मौजूदगी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि FCRA में प्रस्तावित संशोधन सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं से जुड़ी संपत्तियों और उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की शक्ति दे सकते हैं। मूर ने अपने बयान में कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ईसाई समुदाय के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कानून इसी स्वरूप में लागू होता है तो यह भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में भी चिंता का कारण बन सकता है। क्या है FCRA कानून? विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में उन संस्थाओं को नियंत्रित करता है जो विदेशों से आर्थिक सहायता या चंदा प्राप्त करती हैं। यह कानून गैर-सरकारी संगठनों (NGO), धार्मिक ट्रस्टों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और अन्य गैर-लाभकारी संस्थाओं पर लागू होता है। मौजूदा नियमों के अनुसार विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए किसी भी संस्था को केंद्रीय गृह मंत्रालय से FCRA पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए मान्य रहता है और इसके बाद नवीनीकरण कराना पड़ता है। प्रस्तावित संशोधनों में क्या बदलाव होंगे? सरकार ने FCRA में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं। सबसे अहम प्रस्ताव एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) के गठन का है। यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, उसकी अवधि समाप्त हो जाती है या संस्था स्वयं अपना पंजीकरण वापस लेती है, तो यह नामित प्राधिकरण विदेशी चंदे और उससे अर्जित संपत्तियों का प्रबंधन संभाल सकेगा। इसके अलावा प्रस्तावित संशोधनों में कई नई शर्तें भी जोड़ी गई हैं। प्रमुख प्रस्तावित बदलाव संस्था को पंजीकरण के समय अपने कार्य का स्पष्ट उद्देश्य बताना होगा। जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में संस्था कार्य करेगी, उनका उल्लेख अनिवार्य होगा। संस्था को निर्धारित श्रेणियों में से अपने कार्य क्षेत्र का चयन करना होगा। FCRA पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए पिछले दो वर्षों में कम-से-कम 10 लाख रुपये के विदेशी अंशदान के उपयोग का विवरण देना होगा। विदेशी धन किस परियोजना और किस गतिविधि पर खर्च किया गया, इसका पूरा ब्यौरा देना होगा। विदेशी अंशदान देने वाले वास्तविक (Ultimate Beneficial Donor) दाता की पहचान बताना अनिवार्य होगा। संस्था को अपनी वेबसाइट और सभी सोशल मीडिया खातों का विवरण भी वार्षिक रिपोर्ट में देना होगा। सबसे ज्यादा विवाद किस प्रावधान पर? विवाद का सबसे बड़ा कारण नामित प्राधिकरण को मिलने वाले अधिकार हैं। विपक्षी दलों, कई गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे केंद्र सरकार को विदेशी सहायता प्राप्त संस्थाओं पर अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण मिल जाएगा। धार्मिक संगठनों की चिंता है कि यदि किसी चर्च, ट्रस्ट या संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है या उसका नवीनीकरण नहीं होता, तो विदेशी सहायता से संचालित स्कूल, अस्पताल, अनाथालय, सामाजिक सेवा केंद्र और अन्य संपत्तियां सरकारी प्रबंधन में जा सकती हैं। सरकार का क्या कहना है? केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य किसी संस्था या धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। सरकार के अनुसार इन बदलावों का मकसद विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और धन के दुरुपयोग को रोकना है। सरकार का कहना है कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए हो, जिसके लिए उसे अनुमति दी गई है, इसलिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है। संसद में जारी है बहस FCRA संशोधन विधेयक पर संसद में चर्चा जारी है। एक ओर सरकार इसे विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने वाला सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष, कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि कुछ प्रावधानों की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि वैध संस्थाओं के कामकाज पर अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो। इसी बीच अमेरिकी सांसद रिले मूर की टिप्पणी ने इस बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
PoJK चुनावों पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

PoJK चुनावों को भारत ने बताया 'पूरी तरह छलावा', पाकिस्तान पर दमन के लगाए आरोप

शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से भारत सरकार ने बनाई दूरी, विदेश मंत्रालय ने जारी किया स्पष्टीकरण

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी

मोहसिन नकवी बनेंगे पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री? सियासी हलकों में चर्चा तेज

गाजा में मलबे से शव निकालते बचावकर्मी
गाजा में मलबे से 112 शव बरामद, एक ही परिवार के 78 लोगों के होने का दावा

गाजा में मलबे से निकाले गए 112 शव, एक ही परिवार के 78 लोगों के होने का दावा गाजा, एजेंसियां। गाजा पट्टी में लंबे समय से मलबे में दबे शवों को निकालने का अभियान जारी है। इसी दौरान 112 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें एक ही परिवार के करीब 78 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। घटना ने गाजा में युद्ध से हुई भारी तबाही और मानवीय संकट की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने ला दी है।   मलबे के नीचे दबे थे शव     स्थानीय अधिकारियों और बचावकर्मियों के अनुसार, लगातार हमलों के कारण ध्वस्त हुई इमारतों के मलबे के नीचे बड़ी संख्या में शव दबे हुए हैं। राहत और बचाव दल मलबा हटाकर इन शवों को बाहर निकालने का काम कर रहे हैं।   कई इलाकों में भारी तबाही के कारण शवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है। क्षतिग्रस्त इमारतों और बुनियादी ढांचे के बीच बचाव अभियान में भी लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।   एक परिवार के 78 लोगों की मौत का दावा     बरामद शवों में एक ही परिवार के 78 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। यदि यह आंकड़ा पुष्ट होता है, तो यह गाजा में युद्ध के दौरान परिवारों पर पड़े विनाशकारी प्रभाव का एक बेहद गंभीर उदाहरण होगा।   गाजा में कई परिवारों के कई-कई सदस्यों के मारे जाने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। लगातार जारी हिंसा ने बड़ी संख्या में परिवारों को बिखेर दिया है।   गाजा में मानवीय संकट गहराया     गाजा में बड़े पैमाने पर इमारतें नष्ट होने के कारण मलबे के नीचे दबे लोगों और शवों को निकालना बड़ी चुनौती बना हुआ है। राहत एजेंसियों के सामने भोजन, पानी, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित आश्रय की कमी जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं।   मलबे से शवों की बरामदगी यह बताती है कि संघर्ष के मानवीय नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल प्रभावित इलाकों में खोज एवं राहत अभियान जारी रखे हुए हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
सूडान के दारफुर में अदालत पर ड्रोन हमले के बाद का दृश्य

सूडान के दारफुर में अदालत पर ड्रोन हमला, कम से कम 35 लोगों की मौत, कई घायल

इंग्लिश चैनल में प्रवासी नाव बचाव अभियान

इंग्लिश चैनल में जलती प्रवासी नाव से 157 लोगों का रेस्क्यू, फ्रांस-ब्रिटेन की संयुक्त कार्रवाई

PoK में चुनावी हिंसा और विरोध प्रदर्शन

PoK में हिंसा और विरोध के बीच बढ़ा तनाव, पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई पर उठे सवाल

राष्ट्रीय

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Dr. T.V. Somanathan, Govind Mohan
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल एक साल बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने शीर्ष नौकरशाही में निरंतरता बनाए रखने के लिए कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के कार्यकाल को एक-एक साल के लिए बढ़ा दिया है। नियुक्ति संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (ACC) ने बुधवार को दोनों अधिकारियों के सेवा विस्तार को मंजूरी दी।   दोनों अधिकारियों को एक साल का सेवा विस्तार   सरकारी आदेश के अनुसार, टी.वी. सोमनाथन का कैबिनेट सचिव के रूप में कार्यकाल 30 अगस्त 2026 के बाद एक साल के लिए बढ़ाया गया है। अब वह 30 अगस्त 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे।   वहीं, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन का कार्यकाल 22 अगस्त 2026 के बाद एक साल के लिए बढ़ाया गया है। वह अब 22 अगस्त 2027 तक गृह सचिव के पद पर रहेंगे।   शीर्ष प्रशासन में बनी रहेगी निरंतरता   टी.वी. सोमनाथन 1987 बैच के तमिलनाडु कैडर के IAS अधिकारी हैं और अगस्त 2024 में कैबिनेट सचिव नियुक्त हुए थे। गोविंद मोहन 1989 बैच के सिक्किम कैडर के IAS अधिकारी हैं और अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह सचिव का पद संभाला था।   दोनों अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाए जाने से केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में फिलहाल निरंतरता बनी रहेगी।   नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी   दोनों अधिकारियों के सेवा विस्तार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली नियुक्ति संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (ACC) ने मंजूरी दी है। इसके बाद कार्मिक मंत्रालय की ओर से संबंधित आदेश जारी किए गए।   सरकार के इस फैसले से कैबिनेट सचिवालय और गृह मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व में तत्काल बदलाव की संभावना फिलहाल टल गई है।

abhishek singh अगस्त 5, 2026 0
NEET UG 2026

NEET UG 2026 OMR विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, छह उम्मीदवारों ने NTA पर उठाए सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास को नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास को आपराधिक अवमानना मामले में जारी किया नोटिस, चार सप्ताह में मांगा जवाब

पंजाब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में हाईटेक नकल का मामला

पंजाब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा विवाद: सरकार बोली- पेपर लीक नहीं, हाईटेक नकल का मामला

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर राजनीतिक गतिविधियां
अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे, जम्मू-कश्मीर में NC-PDP का विरोध और BJP के कार्यक्रम

अनुच्छेद 370 के सात साल पूरे, जम्मू-कश्मीर में सियासी टकराव; NC-PDP का विरोध, BJP का जश्न श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर बुधवार को केंद्रशासित प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने 5 अगस्त को विरोध और काले दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, जबकि BJP ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कार्यक्रम आयोजित किए।   NC-PDP का विरोध, काले दिवस के रूप में मनाया दिन     नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी नेताओं ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले का विरोध किया। दोनों दलों का कहना है कि 5 अगस्त 2019 को लिया गया फैसला जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और संवैधानिक स्थिति से जुड़ा बड़ा बदलाव था। विरोध कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन ने कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई।     BJP ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि     वहीं भाजपा ने 5 अगस्त को राष्ट्रीय एकता और एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कार्यक्रम आयोजित किए। पार्टी नेताओं ने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने के बाद जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों के साथ पूरी तरह जोड़ने की प्रक्रिया मजबूत हुई है। BJP कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम और सभाएं आयोजित कर केंद्र सरकार के 2019 के फैसले का समर्थन किया।     2019 में हुआ था बड़ा संवैधानिक बदलाव     5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष प्रावधानों को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया.   दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ।   राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी तेज     अनुच्छेद 370 की सातवीं वर्षगांठ पर राजनीतिक टकराव के बीच जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी फिर प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।   NC और PDP समेत कई क्षेत्रीय राजनीतिक दल केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। वहीं BJP अनुच्छेद 370 हटाने के बाद क्षेत्र में हुए बदलावों को अपनी सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। इस तरह 5 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर समर्थन और विरोध की राजनीति एक बार फिर आमने-सामने दिखाई दी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
E20 Petrol

20% से ज्यादा एथेनॉल वाले वाहनों पर फिलहाल नहीं बनेगी नई नीति, सरकार ने स्थिति की साफ की तस्वीर

संभल में तमन्ना मलिक को प्रशासन द्वारा जारी नोटिस

संभल में बुर्के में कांवड़ यात्रा के ऐलान पर विवाद, प्रशासन ने तमन्ना मलिक और अमन त्यागी को भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी

पश्चिम बंगाल सरकार ने DA में 20% बढ़ोतरी की, 1 अक्टूबर 2026 से कर्मचारियों को मिलेगा 38% महंगाई भत्ता

Pakistan's Interior Minister Mohsin Naqvi addresses the media, sparking political debate amid speculation over the country's political future.
पाकिस्तान में तख्तापलट की अटकलें तेज? गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर तख्तापलट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इसकी वजह बने हैं शहबाज शरीफ सरकार के गृह मंत्री मोहसिन नकवी, जिन्हें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है। नकवी ने सार्वजनिक रूप से देश की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की संस्थाओं में वर्षों से गहरे स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। 21 साल पुराने कथित घोटाले का किया दावा मीडिया से बातचीत में मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी इतना बड़ा घोटाला सामने आया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 21 वर्षों से अवैध वित्तीय लेन-देन का सिलसिला चलता रहा और इसमें कई प्रभावशाली लोग शामिल रहे। नकवी ने कहा कि इस कथित घोटाले में न्यायपालिका, नौकरशाही, राजनेता और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के इतिहास में कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर सभी शामिल रहे हों। 21 सालों तक अवैध लेन-देन चलता रहा और लोग इसका लाभ उठाते रहे। अब हर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कथित घोटाला किस मामले से जुड़ा है और इसमें किन लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। बयान के बाद क्यों बढ़ीं तख्तापलट की चर्चाएं? मोहसिन नकवी का बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और संस्थागत टकराव का सामना कर रहा है। चूंकि नकवी को सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है, इसलिए उनके इस बयान को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक पाकिस्तान में सेना की ओर से किसी तख्तापलट या सत्ता परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। इसलिए तख्तापलट की चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान में तख्तापलट का इतिहास पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में सेना कई बार सत्ता अपने हाथ में ले चुकी है। 1958: पहला सैन्य तख्तापलट राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने संविधान निलंबित कर मार्शल लॉ लागू किया। कुछ ही दिनों बाद जनरल अय्यूब खान ने इस्कंदर मिर्जा को सत्ता से हटाकर खुद देश की कमान संभाल ली। अय्यूब खान 1969 तक सत्ता में रहे। 1977: दूसरा तख्तापलट जनरल जिया-उल-हक ने प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया। बाद में भुट्टो को गिरफ्तार किया गया और 1979 में उन्हें फांसी दे दी गई। जिया-उल-हक 1988 तक शासन करते रहे। 1999: तीसरा तख्तापलट कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ के बीच टकराव बढ़ गया। सेना ने नवाज शरीफ की सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। जनरल परवेज मुशर्रफ 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। क्या फिर बदल सकती है पाकिस्तान की सियासत? मोहसिन नकवी के बयान ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि देश में सैन्य तख्तापलट की तैयारी चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई, जांच की दिशा और सेना का रुख यह तय करेगा कि पाकिस्तान की राजनीति किस ओर बढ़ती है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Heavy Rains North Bengal

उत्तर बंगाल में भारी बारिश का कहर, नदियां उफान पर; कई इलाके जलमग्न, प्रशासन अलर्ट

Opposition leaders, including Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi, march inside Parliament premises demanding Amit Shah's resignation during the Monsoon Session.

संसद परिसर में विपक्ष का मार्च, अमित शाह के इस्तीफे की मांग; कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

People stranded in flood-affected areas of Kerala and Assam as heavy monsoon rains trigger widespread flooding and relief operations.

केरल और असम में बारिश-बाढ़ का कहर, 25 लोगों की मौत, हजारों बेघर; कई जिलों में रेड अलर्ट

Punjab Police arrests nine accused after busting two alleged ISI-linked terror modules in Amritsar
ISI समर्थित दो आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार

पंजाब के अमृतसर में पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े दो कथित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इस कार्रवाई में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 नाबालिग और 5 वयस्क शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से अधिकांश का संबंध पेट्रोल बम मॉड्यूल से है और इनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं। जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ा कनेक्शन अमृतसर पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुए थे। जांच में सामने आया है कि वहां उन्हें कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया गया, जिसमें पेट्रोल बम बनाने के लिए जरूरी सामग्री भी शामिल थी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क और स्थानीय सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। रेलवे ट्रैक पर कैमरे लगाने की थी साजिश अमृतसर पुलिस आयुक्त गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि एक मॉड्यूल का काम रेलवे ट्रैक के ऊपर कैमरे लगाकर उसकी लाइव फीड पाकिस्तान भेजना था। शुरुआती जांच के मुताबिक, इन कैमरों के जरिए संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी की जानी थी। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए कैमरे बरामद कर लिए और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि कैमरे खरीदने और अन्य खर्चों के लिए हवाला नेटवर्क के जरिए धन उपलब्ध कराया गया था। पेट्रोल बम बनाने और हमला करने की ट्रेनिंग जांच एजेंसियों के अनुसार, दूसरे मॉड्यूल के सदस्यों को ISI हैंडलर्स की ओर से पेट्रोल बम तैयार करने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें पुलिस और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपी अपने कथित मंसूबों को अंजाम देने से पहले ही पकड़ लिए गए। पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स पर शक पुलिस का मानना है कि दोनों मॉड्यूल को पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर्स संचालित कर रहे थे। शुरुआती जांच में सीमा पार से निर्देश मिलने और स्थानीय नेटवर्क के जरिए सहायता उपलब्ध कराने के संकेत मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क, फंडिंग और संभावित सहयोगियों की विस्तृत जांच कर रही हैं। जांच जारी फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं पर जारी है, जिसमें जंतर-मंतर कनेक्शन, स्थानीय मदद, हवाला फंडिंग और सीमा पार मौजूद कथित संचालकों की भूमिका शामिल है। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई कर एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया गया।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Indian authorities intensify efforts to extradite fugitives from multiple countries using advanced technology

भारत ने भगोड़ों के खिलाफ तेज की कार्रवाई, 36 देशों से 274 आरोपी वापस लाए

President's 'At Home' Independence Day invitation featuring folk art and handicrafts from four Indian states

15 अगस्त के 'एट होम' समारोह का अनोखा निमंत्रण पत्र, चार राज्यों की लोक कला और हस्तशिल्प की दिखी खूबसूरत झलक

Six NEET UG 2026 candidates file a petition in the Supreme Court alleging discrepancies in their OMR answer sheets

NEET UG 2026: OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप, छह अभ्यर्थी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

राजनीति

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लोकसभा में मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव
अमित शाह के बयान की मांग पर मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव, संसद में विपक्ष का हंगामा जारी

अमित शाह के बयान की मांग को लेकर मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव नोटिस, संसद में विपक्ष का हंगामा नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर सरकार से छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की है।   छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल     विपक्षी सांसदों का आरोप है कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री सदन में इस पूरे मामले पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जानकारी दें। इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ विरोध भी जताया है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार इस मामले पर सदन में जवाब दे।     मणिकम टैगोर ने सरकार से जवाब मांगा     कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर की ओर से दिए गए स्थगन प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे पर सामान्य संसदीय कामकाज को रोककर तत्काल चर्चा कराने की मांग की गई है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में सरकार को चुप रहने के बजाय संसद के भीतर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दूसरी ओर, सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया जा रहा है और सदन की कार्यवाही चलाने पर जोर दिया जा रहा है।     संसद में लगातार बढ़ रहा टकराव     अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष पहले भी संसद में विरोध दर्ज करा चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मुद्दे के कारण लोकसभा की कार्यवाही में व्यवधान भी आया है। संसद में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में भी जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष जहां गृह मंत्री के बयान पर अड़ा है, वहीं सरकार की प्राथमिकता सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
लखनऊ में जनेश्वर मिश्र जयंती पर समाजवादी पार्टी का सम्मेलन

यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा का ब्राह्मण दांव, जनेश्वर मिश्र जयंती पर लखनऊ में बड़ा सम्मेलन

सुनील बंसल से मिले समिक भट्टाचार्य और सुवेंदु अधिकारी

समिक भट्टाचार्य और सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली में सुनील बंसल से मुलाकात, बंगाल के संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा

मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर MP हाईकोर्ट का नोटिस, BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों से मांगा जवाब

अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट
अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं, हाईकोर्ट ने SSKM अस्पताल में जांच के निर्देश दिए

अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर हाईकोर्ट का रुख, आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने से कलकत्ता हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल विदेश जाने की अनुमति देने के बजाय पहले कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में उनकी आंखों की स्थिति का विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराया जाए।   विदेश जाकर इलाज की मांगी थी अनुमति     अभिषेक बनर्जी ने अदालत से विदेश जाकर आंखों का विशेष उपचार कराने की अनुमति मांगी थी। यह मांग उस मामले में लगाई गई अंतरिम सुरक्षा की शर्तों में संशोधन के लिए की गई थी, जिसमें उनके खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान कथित आपत्तिजनक बयानों को लेकर जांच चल रही है। हाईकोर्ट ने पहले भी उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था और अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर रोक लगाई थी।     हाईकोर्ट ने पहले भारत में इलाज कराने को कहा     20 जुलाई को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार करते हुए अभिषेक बनर्जी को पहले एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, कोलकाता के विशेषज्ञों से परामर्श लेने को कहा था। अदालत ने कहा था कि कोलकाता में भी आंखों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।     सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का दिया निर्देश     हाईकोर्ट के इस रुख के बाद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से उनकी विदेश यात्रा की लंबित याचिका पर जल्द सुनवाई कर फैसला लेने का अनुरोध किया। शीर्ष अदालत ने मामले को एक सप्ताह के भीतर देखने को कहा था।   अब हाईकोर्ट के ताजा रुख के बाद अभिषेक बनर्जी के लिए विदेश जाकर आंखों का इलाज कराने का रास्ता फिलहाल साफ नहीं हुआ है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
Senior Congress leader Salman Khurshid speaking at a book launch event in New Delhi

बाबरी विध्वंस पर सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान, बोले- रणनीतिक संयम कई बार, बाद में गलत भी साबित हो सकता है

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर बयान देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का बयान, बोले- SIT जांच में साधु-संतों की संलिप्तता नहीं मिली

संसद परिसर में राहुल गांधी और किरण रिजिजू की मुलाकात

संसद में गतिरोध बरकरार, राहुल गांधी से मिले किरण रिजिजू फिर भी जारी रहा विपक्ष का हंगामा

Supreme Court
लोकसभा में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पास, सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज होंगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। विधेयक लोकसभा में बिना विस्तृत बहस के पारित हुआ।   सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे चार जज   नए प्रावधान के तहत सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश समेत कुल 38 न्यायाधीश हो सकेंगे। इससे शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और मामलों की सुनवाई में तेजी लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने इससे पहले मई में जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए संशोधन विधेयक संसद में लाया गया था।   लंबित मामलों के बोझ को कम करने पर जोर   सुप्रीम कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से अधिक पीठों का गठन किया जा सकेगा और मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक क्षमता बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाना है।   लोकसभा में बिना बहस के हुआ पारित   विधेयक उस समय पारित हुआ जब सदन में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी था। रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हुई और इसे लोकसभा ने मंजूरी दे दी। अब विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी और उसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नई स्वीकृत संख्या प्रभावी होगी।

abhishek singh अगस्त 4, 2026 0
उपचुनाव नतीजों पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

उपचुनाव नतीजों पर अखिलेश यादव बोले- बिहार और एमपी के परिणाम बदलाव की शुरुआत

प्रशांत किशोर और जन सुराज के उभार से बिहार की राजनीति में बदलाव

प्रशांत किशोर की चुनावी बढ़त से बिहार में विपक्षी रणनीति पर नए सिरे से मंथन

वडोदरा मंझलपुर उपचुनाव में बीजेपी ने सीट बरकरार रखी

वडोदरा के मंझलपुर उपचुनाव में बीजेपी ने सीट बरकरार रखी, जीत का अंतर पहले से घटा

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, 2028 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका

दतिया, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर भाजपा को बड़ा झटका दिया है। इस नतीजे को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत के लिए अहम माना जा रहा है। कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है, जबकि भाजपा के सामने अपने प्रदर्शन की समीक्षा की चुनौती खड़ी हो गई है।   कांग्रेस उम्मीदवार ने दर्ज की जीत     दतिया उपचुनाव के नतीजे में कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ते हुए सीट अपने नाम कर ली। मतगणना के दौरान शुरुआती दौर से ही दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला, लेकिन अंतिम परिणाम कांग्रेस के पक्ष में रहा।   इस जीत के साथ कांग्रेस ने दतिया में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का संदेश दिया है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जीत को जनता के समर्थन का परिणाम बताया।   भाजपा के लिए क्यों अहम है नतीजा     दतिया सीट पर भाजपा की हार को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखने की तैयारी में जुटी है। ऐसे में उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए स्थानीय संगठन, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का कारण बन सकता है।     कांग्रेस ने बढ़ाया राजनीतिक आत्मविश्वास     उपचुनाव में जीत से कांग्रेस को राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पार्टी अब इस परिणाम को प्रदेश की राजनीति में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। कांग्रेस नेताओं ने मतदाताओं का आभार जताते हुए इसे पार्टी की नीतियों और स्थानीय मुद्दों की जीत बताया है।     2028 के चुनाव पर टिकी नजर     दतिया उपचुनाव का परिणाम भले ही एक सीट तक सीमित हो, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 2028 में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहने की संभावना है।   अब दोनों दल इस नतीजे से मिले संकेतों के आधार पर अपनी रणनीति तैयार करेंगे। भाजपा के लिए चुनौती जहां संगठन को और मजबूत करने की होगी, वहीं कांग्रेस इस जीत की लय को प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश करेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक विवाद

उदयनिधि स्टालिन विवादित बयान मामले में गिरफ्तार, डीएमके ने कार्रवाई पर जताई नाराजगी

Prashant Kishor celebrates victory in the Bankipur Assembly by-election in Bihar

बांकीपुर में BJP की हार से बदलेगी रणनीति? प्रशांत किशोर की जीत ने बिहार की राजनीति को दिए नए संकेत

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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, CM मोहन यादव ने स्वीकारा जनादेश; बोले- और मजबूती से करेंगे वापसी