जामताड़ा। जामताड़ा पुलिस ने अपराध नियंत्रण और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। हत्या, लूट और ठगी जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक Shambhu Kumar Singh ने कार्रवाई की जानकारी दी। पेट्रोल पंप लूट और हत्या मामले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार एसपी ने बताया कि 22 मार्च 2025 को फतेहपुर थाना क्षेत्र स्थित नायरा पेट्रोल पंप में लूट और हत्या की बड़ी वारदात हुई थी। इस मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुस्तकीम अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से कानून से बचता फिर रहा था और कई जिलों में सक्रिय था। कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुस्तकीम अंसारी पर लूट, डकैती, अपहरण और हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं। जामताड़ा, देवघर और गिरिडीह सहित कई जिलों में वह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। नाला एसडीपीओ मनोज कुमार महतो और जामताड़ा एसडीपीओ विकास आनंद लागोरी के नेतृत्व में पुलिस ने लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की, जिसके बाद उसे दबोच लिया गया। ठगी मामले में भी मिली सफलता पुलिस ने वर्ष 2023 के एक ठगी मामले में भी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद असमुद्दीन अंसारी उर्फ समीर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी देने के आरोप हैं। पुलिस का कहना है कि जिले में अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अपराधियों में मचा हड़कंप एसपी ने कहा कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। लगातार हो रही कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने 4 मई को लोगों को फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्या को लेकर सतर्क किया है। मंत्रालय के अनुसार, जरूरत से ज्यादा चीनी और मीठी ड्रिंक्स का सेवन सीधे लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान की खराब आदतें लिवर से जुड़ी बीमारियों को तेजी से बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैटी लिवर से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन बेहद जरूरी उपाय बताए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खाना पचाने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने, ऊर्जा बनाने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब शरीर में ज्यादा मात्रा में चीनी पहुंचती है, तो उसका असर सीधे लिवर पर पड़ता है। कैसे नुकसान पहुंचाती है ज्यादा चीनी? शोध के अनुसार, चीनी शरीर में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के रूप में लिवर तक पहुंचती है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा मीठा खाता है, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे लिवर अतिरिक्त ग्लूकोज और फ्रुक्टोज को फैट के रूप में जमा करने लगता है। लगातार ऐसा होने पर लिवर में चर्बी जमा होती जाती है और फैटी लिवर की समस्या विकसित हो जाती है। मीठी ड्रिंक्स ज्यादा खतरनाक क्यों? विशेषज्ञ बताते हैं कि मीठी ड्रिंक्स में मौजूद फ्रुक्टोज और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स बहुत तेजी से लिवर तक पहुंचते हैं। इसके अलावा सोडा, केमिकल्स और आर्टिफिशियल कलर लिवर को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और शुगर ड्रिंक्स का अधिक सेवन फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ा सकता है। फैटी लिवर से बचने के 3 आसान उपाय MoHFW ने फैटी लिवर से बचाव के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं— • संतुलित और पौष्टिक आहार लें • ताजे फलों का नियमित सेवन करें • शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित डाइट और फलों में मौजूद फाइबर व एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। वहीं पर्याप्त पानी शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को शराब से दूरी बनाने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और तनाव कम रखने की भी सलाह दी है, ताकि लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सके।
चेन्नई, एजेंसियां। दक्षिण भारतीय सुपरस्टार विजय ने मनोरंजन जगत से राजनीति में कदम रखकर नया इतिहास रच दिया है। फरवरी 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) की घोषणा करने वाले विजय अब तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 27 महीनों के भीतर उन्होंने राजनीति में ऐसी पकड़ बनाई कि पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती मिल गई। लोकसभा चुनाव से पहले किया था पार्टी का एलान विजय ने 2 फरवरी 2024 को सोशल मीडिया के जरिए अपनी पार्टी लॉन्च की थी। हालांकि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव नहीं लड़े और न ही किसी पार्टी का समर्थन किया। उनका पूरा फोकस 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर था। राजनीति में आने के साथ ही विजय ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला भी किया। फैन क्लब बना राजनीतिक ताकत विजय लंबे समय से अपने फैन क्लब “विजय मक्कल इयक्कम” के जरिए सामाजिक और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे। बाढ़ पीड़ितों की मदद से लेकर सामाजिक अभियानों तक उनकी सक्रियता ने जनता के बीच मजबूत आधार तैयार किया। अक्टूबर 2024 में विक्रवंडी में हुई टीवीके की पहली बड़ी रैली में भारी भीड़ उमड़ी, जिसने विजय की लोकप्रियता का संकेत दे दिया था। विवादों और चुनौतियों का भी किया सामना राजनीतिक सफर के दौरान विजय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2025 में करूर रैली के दौरान भगदड़ की घटना ने बड़ा विवाद खड़ा किया। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद विजय ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी। मामले की जांच सीबीआई तक पहुंची और विजय से भी पूछताछ हुई। आखिरी फिल्म के बाद पूरी तरह राजनीति पर फोकस फिल्म Jana Nayagan को विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। अब उन्होंने पूरी तरह राजनीति को अपना भविष्य बना लिया है। शानदार चुनावी जीत के बाद विजय आज तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना के तहत बिजनौर जिले के नजीबाबाद की प्रसिद्ध सोन पापड़ी को विशेष पहचान मिली है। योगी सरकार इस पारंपरिक मिठाई को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इस फैसले से स्थानीय व्यापारियों और मिठाई कारोबारियों में उत्साह का माहौल है। करीब 75 साल पुरानी इस मिठाई की शुरुआत चतुर्वेदी मिष्ठान भंडार ने की थी, जिसने इसकी पारंपरिक रेसिपी और स्वाद को पीढ़ियों तक संभालकर रखा। महीन परतों और खास स्वाद की वजह से मशहूर नजीबाबाद की सोन पापड़ी अपनी मुलायम बनावट, महीन परतों और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के लिए जानी जाती है। बेसन, मेवा और इलायची के संतुलित मिश्रण से तैयार होने वाली यह मिठाई लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। समय के साथ इसकी पैकेजिंग और डिजाइन में बदलाव किए गए, लेकिन इसके असली स्वाद को बरकरार रखा गया है। 15 फ्लेवर में उपलब्ध, चार महीने तक रहती है सुरक्षित आज बाजार में सोन पापड़ी करीब 15 अलग-अलग वैरायटी में उपलब्ध है। इसमें चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स और कई अन्य फ्लेवर शामिल हैं। पहले यह मिठाई केवल गोल आकार में बनती थी, लेकिन अब चौकोर और डिजाइनर कटिंग में भी बिक रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चार महीने तक खराब नहीं होती, जिससे इसे दूर-दराज और विदेशी बाजारों में भेजना आसान हो गया है। रोजगार और एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार, आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के जरिए सोन पापड़ी को ग्लोबल एक्सपोर्ट के लिए तैयार किया जा रहा है। इस पहल से करीब 500 परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि नजीबाबाद की यह पारंपरिक मिठाई अब बिजनौर की नई पहचान बनकर उभरेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में BPSC TRE-4 भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर गुरुवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब अभ्यर्थियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। घटना जेपी गोलंबर के पास हुई, जहां पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। कुछ अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया गया है। वहीं छात्र नेता दिलीप की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है। TRE-4 विज्ञापन जारी नहीं होने से नाराज हैं अभ्यर्थी अभ्यर्थियों का कहना है कि BPSC TRE-4 के तहत करीब 46,595 पदों पर भर्ती होनी है, लेकिन अब तक इसका विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि सरकार और आयोग लगातार केवल आश्वासन दे रहे हैं। छात्र नेता दिलीप ने कहा कि बीपीएससी परीक्षा नियंत्रक ने 16 अप्रैल को एक पॉडकास्ट में कहा था कि TRE-4 का विज्ञापन तीन से चार दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अब मई का दूसरा सप्ताह शुरू हो गया है और अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई। नए शिक्षा मंत्री के सामने पहली बड़ी चुनौती बिहार में नए शिक्षा मंत्री के रूप में मिथिलेश तिवारी ने हाल ही में शपथ ली है। ऐसे में TRE-4 अभ्यर्थियों का आंदोलन उनके लिए पहली बड़ी चुनौती माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 32 मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसके साथ ही बिहार कैबिनेट में कुल 35 पद भर चुके हैं और केवल एक पद खाली बचा है। नए मंत्रिमंडल में सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। EBC को सबसे ज्यादा तवज्जो कैबिनेट में सबसे अधिक ध्यान अति पिछड़ा वर्ग (EBC) पर दिया गया है। EBC कोटे से कुल 9 मंत्री बनाए गए हैं। इनमें रमा निषाद, प्रमोद चंद्रवंशी, रामचंद्र प्रसाद, मदन सहनी, दामोदर रावत, बुलो मंडल और शीला मंडल जैसे नेता शामिल हैं। वहीं OBC और दलित समुदाय से 7-7 नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। यादव समाज से रामकृपाल यादव को शामिल किया गया, जबकि दलित चेहरों में लखेंद्र पासवान, नंद किशोर राम, सुनील कुमार, रत्नेश सदा, अशोक चौधरी, संजय पासवान और संतोष कुमार सुमन प्रमुख हैं। सवर्ण समुदाय से कितने मंत्री? सम्राट कैबिनेट में सवर्ण समुदाय से कुल 11 मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 4 मंत्री राजपूत समाज से हैं-संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह और संजय सिंह। इसके अलावा भूमिहार और ब्राह्मण समाज को भी प्रतिनिधित्व मिला है। ब्राह्मण समाज से मिथलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा को जगह मिली, जबकि भूमिहार समाज से विजय कुमार सिन्हा और इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं। महिलाओं और सहयोगी दलों को भी महत्व नई कैबिनेट में कुल 5 महिला मंत्री बनाई गई हैं। जेडीयू से लेसी सिंह, श्वेता गुप्ता और शीला कुमारी, जबकि भाजपा से रमा निषाद और श्रेयसी सिंह को मौका मिला। एलजेपी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
पटना, एजेंसियां। सम्राट चौधरी के CM बनने के 22 दिन बाद आज गुरुवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया। मेगा इवेंट में नीतीश के बेटे निशांत कुमार समेत 32 मंत्री सम्राट कैबिनेट में शामिल हुए। नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, LJP(R)-2, HAM और RLM से एक-एक मंत्री हैं। 25 मिनट चले इस कार्यक्रम में एक साथ 5-5 विधायकों ने शपथ ली है। निशांत पहली बार मंत्री बने पहली बार में निशांत कुमार, श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह, और दिलीप जायसवाल ने शपथ ली। निशांत कुमार पहली बार मंत्री बने हैं। समारोह में PM मोदी भी शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने नीतीश कुमार को अपने पास बुलाया। मंच पर उनसे हाथ मिलाया, इस दौरान नीतीश कुमार ने पीएम का कंधा पकड़कर हिला दिया। राष्ट्रगान पहले बजा कार्यक्रम की शुरुआत में सीधे राष्ट्रगान बजाया गया, जबकि प्रोटोकॉल के हिसाब से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम् बजाया जाना था। दो बार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, खबर है कि पार्टी में उन्हें बड़ी जगह दी जाएगी। मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़े हाईलाइट्स JDU से 3 नए चेहरे- निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता मंत्री बने हैं। बीजेपी से 5 नए चेहरे- मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र पासवान, अरूण शंकर प्रसाद, नंद किशोर राम और इंजीनियर शैलेंद्र मंत्री बने हैं। सम्राट सरकार का जातीय समीकरण EBC- 9, OBC-9, दलित-7, सवर्ण-9 और मुस्लिम-1। सम्राट कैबिनेट में 5 महिला मंत्री, इनमें सबसे ज्यादा जदयू से 3 मंत्री हैं। गांधी मैदान में 3 स्टेज बनाए गए। बीजेपी ऑफिस के बाहर हरे राम-हरे कृष्ण का भजन-कीर्तन। पटना में पोस्टर लगे- भगवामय, अंग, बंग और कलिंग। बीजेपी ने 3 चेहरों को ड्रॉप किया सम्राट कैबिनेट में बीजेपी कोटे से 15 मंत्रियों ने शपथ ली है। इनमें 5 नए चेहरे हैं, वहीं तीन पुराने लोगों को इस बार मौका नहीं मिला। इनमें बीजेपी के सीनियर लीडर मंगल पांडेय, बेगूसराय के बछवाड़ा से विधायक सुरेंद्र मेहता और प. चंपारण से नारायण प्रसाद का नाम शामिल है। मंत्री पद नहीं मिलने के बाद मंगल पांडे को भाजपा संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। पूर्व मंत्री नितिन नवीन की टीम में शामिल होंगे। खबर है कि मंगल पांडे को भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है। साथ ही यूपी चुनाव में प्रभारी भी बनाए जा सकते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद अहम है, जब मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। पटना के गांधी मैदान में दोपहर 12:10 बजे भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें कुल 27 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। बीजेपी कोटे से मंत्री पद के संभावित नाम • ई शैलेंद्र • संजय टाइगर • विजय सिन्हा • नीतीश मिश्रा • श्रेयसी सिंह • दिलीप जायसवाल • अरूण शंकर प्रसाद • प्रमोद चंद्रवंशी • लखेंद्र पासवान • मिथिलेश तिवारी मंत्रिमंडल विस्तार का समीकरण सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और जदयू के बीच मंत्री पद का बंटवारा लगभग बराबरी पर तय किया गया है। संभावित रूप से बीजेपी को 12, जदयू को 11, एलजेपी (आर) को 2, जबकि हम और आरएलएम को एक-एक मंत्री पद मिल सकता है। हालांकि कुछ सीटें फिलहाल खाली रखी जा सकती हैं। राज्य में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। पीएम मोदी का मेगा रोड शो शपथ ग्रहण समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक मेगा रोड शो करेंगे। उनके स्वागत के लिए पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। अमित शाह और अन्य नेताओं की मौजूदगी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार शाम पटना पहुंचे और उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह को बिहार की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Uttar Pradesh में 41 हजार से ज्यादा होमगार्ड भर्ती को लेकर युवाओं के बीच काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। लिखित परीक्षा पूरी हो चुकी है और अब अगले चरण की तैयारी चल रही है। ऐसे में कई उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि होमगार्ड की नौकरी में क्या काम करना होता है, कितनी सैलरी मिलती है और चयन प्रक्रिया कैसी होती है। होमगार्ड पुलिस और प्रशासन की सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण बल माना जाता है। हालांकि यह स्थायी सरकारी नौकरी नहीं होती, बल्कि स्वयंसेवक आधारित सेवा होती है। कौन बन सकता है होमगार्ड? Uttar Pradesh में होमगार्ड भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है। आयु सीमा न्यूनतम उम्र: 18 वर्ष अधिकतम उम्र: 30 वर्ष आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाती है इसके अलावा उम्मीदवार का चरित्र अच्छा होना चाहिए और वह शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए। क्या होता है होमगार्ड का काम? होमगार्ड राज्य में पुलिस और प्रशासन की मदद के लिए काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं। होमगार्ड की प्रमुख जिम्मेदारियां पुलिस बल के सहायक के रूप में कार्य करना कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना बाढ़, आग, महामारी और आपदा जैसी स्थितियों में राहत कार्य करना सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में सहयोग देना जिला प्रशासन के निर्देश पर अलग-अलग क्षेत्रों में ड्यूटी करना यूपी में होमगार्ड की सैलरी कितनी होती है? होमगार्ड को स्थायी मासिक वेतन नहीं मिलता। उन्हें ड्यूटी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। दैनिक भुगतान प्रतिदिन लगभग ₹600 दिए जाते हैं अगर किसी होमगार्ड को पूरे महीने यानी 30 दिन ड्यूटी मिलती है, तो उसे करीब ₹18,000 तक भुगतान हो सकता है। इसके अलावा राज्य सरकार समय-समय पर महंगाई भत्ता (DA) भी देती है। कैसे होता है चयन? होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है। 1. लिखित परीक्षा विषय सामान्य ज्ञान कुल प्रश्न 100 कुल अंक 100 समय 2 घंटे 25 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। 2. फिजिकल टेस्ट लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाता है। होमगार्ड भर्ती के लिए शारीरिक मानक पुरुष उम्मीदवार सामान्य/OBC/SC लंबाई: 168 सेमी ST लंबाई: 160 सेमी सीना सामान्य/OBC/SC: 79 सेमी (बिना फुलाए) ST: 77 सेमी (बिना फुलाए) महिला उम्मीदवार सामान्य/OBC/SC लंबाई: 152 सेमी ST लंबाई: 147 सेमी न्यूनतम वजन: 40 किलोग्राम दौड़ कितनी होती है? पुरुष उम्मीदवार 4.8 किमी दौड़ समय: 28 मिनट महिला उम्मीदवार 2.4 किमी दौड़ समय: 16 मिनट फिजिकल टेस्ट के बाद मेडिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाता है। सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को होमगार्ड के रूप में चयनित किया जाता है।
नई दिल्ली: मई 2026 सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बेहद अहम महीना साबित हो रहा है। Staff Selection Commission (SSC) से लेकर बैंक, पैरामिलिट्री और राज्य स्तरीय आयोगों तक–कुल मिलाकर 20,697 से ज्यादा पदों पर भर्तियां निकली हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से कई भर्तियों की अंतिम तारीख बेहद नजदीक है। ऐसे में अगर आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है, तो यह मौका हाथ से निकल सकता है। किन-किन भर्तियों में जल्द खत्म हो रही है तारीख? 1. Staff Selection Commission Selection Post Phase 14 कुल पद: 3003 अंतिम तारीख: 4 मई 2026 योग्यता: 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएट पद: MTS, DEO, जूनियर असिस्टेंट समेत कई पोस्ट 2. Staff Selection Commission Stenographer Grade C & D पद: 731 अंतिम तारीख: 15 मई 2026 योग्यता: 12वीं पास 3. Union Bank of India Apprentice Recruitment पद: 1865 अंतिम तारीख: 19 मई 2026 योग्यता: ग्रेजुएशन स्टाइपेंड: ₹15,000–₹20,000 4. Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission (UPSSSC) ASO भर्ती पद: 929 अंतिम तारीख: 11 मई 2026 योग्यता: संबंधित विषय में मास्टर्स 5. UPSSSC Assistant Boring Technician पद: 402 अंतिम तारीख: 5 मई 2026 योग्यता: 10वीं + ITI बड़ी संख्या में वैकेंसी वाली भर्तियां 6. Central Reserve Police Force (CRPF) Constable पद: 9096 अंतिम तारीख: 19 मई 2026 योग्यता: 10वीं + ट्रेड स्किल 7. Bihar Technical Service Commission (BTSC) Lab Assistant पद: 1091 अंतिम तारीख: 6 मई 2026 8. UPCISB Recruitment पद: 2085 अंतिम तारीख: 15 मई 2026 9. Sashastra Seema Bal (SSB) Constable पद: 827 अंतिम तारीख: 4 मई 2026 10. Power Grid Corporation of India Limited Recruitment पद: 668 अंतिम तारीख: 11 मई 2026 क्यों जरूरी है समय पर आवेदन? सरकारी नौकरी में सफलता का पहला और सबसे अहम स्टेप है–समय पर आवेदन। हर साल हजारों उम्मीदवार सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे आखिरी तारीख चूक जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल तैयारी ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही फॉर्म भरना भी उतना ही जरूरी है। एक्सपर्ट टिप पटना के कोचिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉर्म भरते समय जल्दबाजी न करें सभी डॉक्यूमेंट पहले से तैयार रखें योग्यता और आयु सीमा अच्छे से चेक करें
देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में शामिल Reserve Bank of India (RBI) में ग्रेड बी ऑफिसर बनने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ा अवसर सामने आया है। आरबीआई ने ग्रेड बी ऑफिसर भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके तहत कुल 60 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 20 मई 2026 तक चलेगी। कितने पदों पर होगी भर्ती? इस भर्ती अभियान के तहत कुल 60 पद भरे जाएंगे: ग्रेड बी ऑफिसर (जनरल): 40 पद DEPR (इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी रिसर्च): 10 पद DISM (स्टैटिस्टिक्स एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट): 10 पद जरूरी तारीखें आवेदन शुरू: 29 अप्रैल 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 20 मई 2026 (शाम 6 बजे तक) फेज-I परीक्षा: 13 जून 2026 DEPR/DISM परीक्षा: 14 जून 2026 फेज-II परीक्षा (जनरल): 25 जुलाई 2026 फेज-II (DEPR/DISM): 26 जुलाई 2026 क्या है योग्यता? जनरल पोस्ट: ग्रेजुएशन में कम से कम 60% अंक पोस्ट ग्रेजुएशन में 55% अंक DEPR: इकोनॉमिक्स/फाइनेंस में मास्टर्स (न्यूनतम 55%) DISM: स्टैटिस्टिक्स/मैथ/डेटा से संबंधित डिग्री या 4 साल का ग्रेजुएशन उम्र सीमा न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 30 वर्ष (आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट मिलेगी) चयन प्रक्रिया कैसे होगी? RBI ग्रेड बी ऑफिसर बनने के लिए तीन चरणों से गुजरना होगा: फेज-I (प्रीलिम्स) जनरल अवेयरनेस, क्वांट, इंग्लिश, रीजनिंग फेज-II (मेंस) इकोनॉमिक्स, सोशल साइंस इंग्लिश (डिस्क्रिप्टिव) फाइनेंस और मैनेजमेंट इंटरव्यू फाइनल मेरिट फेज-II और इंटरव्यू के आधार पर बनेगी आवेदन से पहले क्या तैयार रखें? उम्मीदवारों को आवेदन से पहले ये दस्तावेज तैयार रखने चाहिए: आधार कार्ड ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन मार्कशीट कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) विस्तृत नोटिफिकेशन जल्द ही RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा।
नई दिल्ली,एजेंसियां। चिकन और मटन का अचार आजकल खाने के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है। मसालेदार स्वाद और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुविधा के कारण लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है कि आखिर चिकन या मटन का अचार कितने दिनों तक सुरक्षित रहता है और कब तक इसे बिना किसी डर के खाया जा सकता है। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो अब आपका कंफ्यूजन दूर होने वाला है। फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार, चिकन और मटन का अचार सही तरीके से तैयार किया जाए और अच्छी तरह स्टोर किया जाए तो यह लगभग 15 दिनों से लेकर 3 महीने तक सुरक्षित रह सकता है। इसकी शेल्फ लाइफ इस बात पर निर्भर करती है कि अचार में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है और उसे किस तरह रखा गया है। अगर साफ-सफाई और स्टोरेज में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। तेल और मसालों की होती है अहम भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि मांसाहारी अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में तेल, नमक और मसालों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। सरसों का तेल, तिल का तेल, हल्दी, लाल मिर्च, लहसुन और अदरक जैसे मसाले प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का काम करते हैं। कई लोग इसमें सिरका, नींबू या इमली का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे अचार का स्वाद बढ़ने के साथ-साथ उसकी टिकाऊ क्षमता भी मजबूत होती है। नमी से जल्दी खराब हो सकता है अचार फूड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकन या मटन का अचार बनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि उसमें पानी बिल्कुल नहीं जाना चाहिए। थोड़ी सी नमी भी अचार को खराब कर सकती है। इसलिए मांस को मसालों के साथ अच्छी तरह पकाने के बाद पूरी तरह ठंडा करके ही सूखे कांच के जार में रखना चाहिए। अचार निकालते समय भी हमेशा साफ और सूखे चम्मच का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। गीले चम्मच के इस्तेमाल से अचार में फफूंदी लगने और बदबू आने का खतरा बढ़ जाता है। अगर इसे फ्रिज में रखा जाए या ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर किया जाए, तो इसकी शेल्फ लाइफ और बढ़ सकती है। खराब अचार की पहचान कैसे करें? अगर अचार से अजीब गंध आने लगे, उसका रंग बदल जाए या उस पर सफेद परत दिखाई देने लगे, तो उसे खाने से बचना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही तरीके से रखा गया चिकन या मटन का अचार लंबे समय तक स्वाद, खुशबू और गुणवत्ता बनाए रख सकता है।
मई 2026 के विधानसभा चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अमिट अध्याय की तरह दर्ज किए जाएंगे। इन नतीजों ने न केवल सत्ता के समीकरणों को बदला है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय मतदाता अब 'भावुकता' से अधिक 'अकाउंटेबिलिटी' (जवाबदेही) को प्राथमिकता दे रहा है। पांच राज्यों के इन नतीजों में सबसे अधिक धमक पश्चिम बंगाल की रही, जहां डेढ़ दशक से अजेय मानी जा रही ममता बनर्जी की सत्ता का किला ढह गया। यह केवल एक दल की जीत या हार नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक युग का अंत और नए नैरेटिव का उदय है। बंगाल: 'परिवर्तन' का चक्र पूरा हुआ पश्चिम बंगाल में भाजपा का शानदार प्रदर्शन और स्पष्ट बहुमत हासिल करना इस चुनाव की सबसे बड़ी हेडलाइन है। 2011 में जिस 'परिवर्तन' के नारे के साथ ममता बनर्जी ने वामपंथ के 34 साल के शासन को उखाड़ा था, 15 साल बाद जनता ने उसी नारे का इस्तेमाल उनके खिलाफ किया। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, संदेशखाली जैसी घटनाओं से उपजा जनाक्रोश और प्रशासनिक तंत्र में 'सिंडिकेट राज' की शिकायतों ने टीएमसी के 'मां, माटी, मानुष' के नारे को खोखला कर दिया। भाजपा के लिए यह जीत केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि उसके दशकों के वैचारिक संघर्ष की परिणति है। 'सोनार बांग्ला' का सपना और विकास के वादों ने बंगाल के ग्रामीण अंचलों में पैठ बनाई, जहां कभी वामपंथ का कब्ज़ा हुआ करता था। महिलाओं और युवाओं का जिस तरह से भाजपा की ओर झुकाव बढ़ा, उसने ममता बनर्जी के सबसे मजबूत 'वोट बैंक' में सेंध लगा दी। वामपंथ का सूर्यास्त और नए सितारों का उदय इन चुनावों ने भारतीय राजनीति के एक और बड़े सच को उजागर किया है—वामपंथ का पूर्ण अवसान। केरल, जो वामपंथी विचारधारा का आखिरी गढ़ था, वहां से भी उनकी विदाई ने 'लाल राजनीति' के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देश के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार का न होना यह दर्शाता है कि उनकी नीतियां आधुनिक भारत की आकांक्षाओं से मेल नहीं खा पा रही हैं। दूसरी ओर, तमिलनाडु में 'थलपति' विजय की पार्टी (TVK) का चौंकाने वाला प्रदर्शन यह संकेत है कि दक्षिण भारत अब परिवारवाद और पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के चक्रव्यूह से बाहर निकलना चाहता है। विजय ने जिस तरह से युवाओं को आकर्षित किया, उसने डीएमके और एआईएडीएमके जैसे दिग्गजों को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया है। विकास की हैट्रिक और क्षेत्रीय संदेश असम में भाजपा की लगातार तीसरी जीत (हैट्रिक) यह सिद्ध करती है कि सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का विकास चुनाव जीतने के सबसे ठोस हथियार हैं। वहीं, असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की बढ़ती सक्रियता और कुछ सीटों पर दूसरे नंबर पर रहना यह बताता है कि क्षेत्रीय दल अब अपनी सीमाओं को लांघकर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान तलाश रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव का ट्रेलर 2026 के ये नतीजे 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों का 'ट्रेलर' माने जा सकते हैं। बंगाल की जीत ने भाजपा को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है, जबकि विपक्ष के लिए यह अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन गई है। जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सत्ता किसी की जागीर नहीं है। चाहे वह बंगाल की 'दीदी' हों या केरल के कामरेड, अगर शासन में पारदर्शिता और जनता से जुड़ाव की कमी होगी, तो लोकतंत्र की सुनामी बड़े से बड़े दुर्ग को ढहाने में संकोच नहीं करेगी। आज का भारत परिणाम चाहता है और 2026 का यह महा-जनादेश उसी 'रिजल्ट ओरिएंटेड' राजनीति की एक बड़ी जीत है।
रांची। रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में हुई चोरी और गार्ड बिरसा मुंडा की निर्मम हत्या ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस घटना के बाद एक और चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी इस मुद्दे पर उस आक्रामकता के साथ नहीं उतरी, जिसके लिए वह जानी जाती है? बीजेपी की 'चुप्पी' के मायने राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में हाल ही में हुई डकैती और सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नया विमर्श छेड़ दिया है। विधानसभा से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित इस अति-सुरक्षित क्षेत्र में मंदिर के गर्भगृह की सुरक्षा में तैनात गार्ड को पत्थर से कुचलकर मार दिया गया और दान पेटी से करीब 3 लाख रुपये लूट लिए गए। इस घटना के बाद बड़ी संख्या लोग जुटे। हल्ला-हंगामा और प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस नेता अजय नाथ शाहदेव वहां पहुंचे और मृतक के परिजनों को सांत्वना दिया। साथ ही दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। लेकिन, इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी किसी बड़े बीजेपी नेता का घटना स्थल पर नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कांफ्रेस ने घटना का दोष सरकार पर मढ़ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी। पर भाजपा की सक्रियता नहीं दिखी। जनता के बीच एक बड़ा सवाल यह उठा कि "मंदिर" और "हिंदुत्व" के मुद्दों पर तुरंत सड़क पर उतरने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार वैसी सक्रिय क्यों नहीं दिखी? क्या बीजेपी ने इस मुद्दे पर 'वॉकओवर' दे दिया है या पर्दे के पीछे की राजनीति कुछ और है? क्या सच में बीजेपी 'गायब' रही? सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह बात उठी कि बीजेपी के बड़े नेता घटना के तुरंत बाद मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। लेकिन, हकीकत के पन्ने पलटें तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। घटना के 24-48 घंटों के भीतर बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली प्रतिनिधिमंडल का दौरा: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने मृतक बिरसा मुंडा के परिजनों से मुलाकात की। मुआवजे की मांग पार्टी ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। आर्थिक सहायता बीजेपी ने अपनी ओर से पीड़ित परिवार को ₹50,000 की तत्काल सहायता राशि प्रदान की। 'कूद कर' न आने के पीछे के संभावित कारण आमतौर पर मंदिरों में तोड़फोड़ या हमले की स्थिति में बीजेपी इसे 'सांप्रदायिक' रंग देकर आक्रामक हो जाती है। करीब दो साल पहले बरियातू के एक दिर में हुई चोरी के बाद कई बीजेपी नेता सड़क पर उतर आये थे। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, तत्कालीन विधायक समरीलाल भी प्रदर्शन में शामिल रहे थे। लेकिन, इस मामले में बीजेपी की आक्रामकता थोड़ी संतुलित दिखी, इसके पीछे कुछ ठोस कारण हो सकते हैं: आरोपियों की पृष्ठभूमि पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि हत्या और लूट में शामिल तीनों आरोपी (देव कुमार, विकास महली और आयुष दत्ता) स्थानीय हैं और वे मंदिर के पास की ही बस्ती के रहने वाले हैं। जब अपराध "सांप्रदायिक" न होकर "आपराधिक" (लोकल गैंग द्वारा नशे के लिए की गई लूट) हो, तो राजनीतिक ध्रुवीकरण की गुंजाइश कम हो जाती है। पीड़ित की पहचान मृतक गार्ड बिरसा मुंडा आदिवासी समुदाय से थे। बीजेपी ने इसे "हिंदू मंदिर पर हमला" बनाने के बजाय "आदिवासी सुरक्षा" और "लॉ एंड ऑर्डर" का मुद्दा बनाया। पार्टी ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए कहा कि "स्वयं को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार में ही आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं।" पुलिस की त्वरित कार्रवाई रांची पुलिस ने 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस तत्परता दिखाती है, तो विपक्ष के पास सड़क पर लंबे समय तक बैठने का मुद्दा कमजोर पड़ जाता है। बीजेपी का नया वार: 'मंदिर का कांग्रेसीकरण'... बीजेपी ने इस मुद्दे पर सीधे सड़क पर दंगा करने के बजाय एक नया राजनीतिक मोर्चा खोला है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि जगन्नाथपुर मंदिर समिति का "कांग्रेसीकरण" कर दिया गया है। बीजेपी का आरोप है कि "स्थानीय लोगों को मंदिर प्रबंधन से बाहर रखा गया है और समिति में राजनीतिक नियुक्तियां की गई हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। मंदिर परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन गया है।" कानून-व्यवस्था पर सवाल भले ही बीजेपी ने इसे सांप्रदायिक मुद्दा नहीं बनाया, लेकिन पार्टी ने इसे "समानांतर सरकार" चलने का सबूत करार दिया है। विधानसभा के इतने करीब हत्या होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। बीजेपी ने मंदिर समिति और न्यास बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया है। क्योंकि, इतने बड़े मंदिर की दान पेटी की सुरक्षा के लिए केवल एक बुजुर्ग गार्ड के भरोसे पूरी व्यवस्था छोड़ दी गई थी, जबकि दान पेटी में तीन लाख रुपये होने की बात कही जा रही है। चुप्पी या रणनीति? यह कहना गलत होगा कि बीजेपी इस मामले में बिल्कुल नहीं पहुंची, लेकिन यह सच है कि विरोध का स्वर 'मंदिर के अपमान' से ज्यादा 'सरकार की विफलता' पर केंद्रित रहा। बीजेपी अब झारखंड में "आदिवासी बनाम सरकार" के नैरेटिव पर काम कर रही है। चूंकि पीड़ित आदिवासी था और आरोपी स्थानीय अपराधी, इसलिए बीजेपी ने इसे धर्म के बजाय सुशासन के चश्मे से जनता के सामने पेश किया है। जगन्नाथपुर मंदिर कांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के केंद्र भी अब सुरक्षित नहीं हैं। यदि सरकार और प्रशासन ने मंदिरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह मुद्दा और भी बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में थकान, ब्लोटिंग, लो एनर्जी और स्किन ब्रेकआउट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। कई बार ये शरीर में बढ़ती सूजन यानी inflammation के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें, जैसे पर्याप्त पानी पीना और सही ड्रिंक्स का चुनाव करना, शरीर को अंदर से सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर ऐसे पेय जिनमें अदरक, हल्दी, ग्रीन टी या चिया सीड्स जैसे तत्व हों, शरीर की प्राकृतिक anti-inflammatory प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इन ड्रिंक्स को बनाने के लिए महंगे इंग्रीडिएंट्स या जटिल रेसिपी की जरूरत नहीं होती। किचन में मौजूद साधारण चीजों से इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin को प्राकृतिक anti-inflammatory तत्व माना जाता है। वहीं काली मिर्च इसके अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है। सामग्री 1 कप पानी आधा चम्मच हल्दी पाउडर या ताजी हल्दी आधा चम्मच कद्दूकस किया अदरक एक चुटकी काली मिर्च 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) थोड़ा दूध (वैकल्पिक) बनाने का तरीका पानी उबालकर उसमें हल्दी, अदरक और काली मिर्च डालें। 5 से 7 मिनट तक पकने दें। छानकर कप में निकालें और चाहें तो शहद या दूध मिलाएं। इसे गर्मागर्म पिएं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को पाचन और सूजन कम करने में मददगार माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को तरोताजा महसूस कराता है। सामग्री डेढ़ कप पानी 1 इंच अदरक के टुकड़े आधे नींबू का रस 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) बनाने का तरीका अदरक को पानी में 5-10 मिनट तक उबालें। फिर गैस बंद करके उसमें नींबू रस और शहद मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. पुदीना वाली ग्रीन टी ग्रीन टी में antioxidants पाए जाते हैं, जबकि पुदीना इसे और ज्यादा refreshing बना देता है। सामग्री 1 ग्रीन टी बैग या 1 चम्मच ग्रीन टी 1 कप गर्म पानी 4-5 पुदीना पत्तियां 1 नींबू स्लाइस (वैकल्पिक) बनाने का तरीका ग्रीन टी और पुदीना को 2-3 मिनट तक गर्म पानी में डालकर रखें। फिर छान लें। चाहें तो नींबू मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 4. टार्ट चेरी स्प्रिट्जर टार्ट चेरी जूस को रिकवरी और शरीर की सूजन कम करने से जोड़कर देखा जाता है। सामग्री आधा कप बिना शक्कर वाला टार्ट चेरी जूस आधा कप स्पार्कलिंग वॉटर बर्फ थोड़ा नींबू रस बनाने का तरीका गिलास में बर्फ डालें, फिर चेरी जूस और स्पार्कलिंग वॉटर मिलाएं। ऊपर से नींबू रस डालकर हल्के से मिक्स करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया वॉटर यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकती है। सामग्री 2 कप पानी 5-6 खीरे के स्लाइस 5 पुदीना पत्तियां 1 चम्मच चिया सीड्स चौथाई नींबू का रस बनाने का तरीका पानी में खीरा, पुदीना और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट तक छोड़ दें ताकि चिया फूल जाए। फिर नींबू रस मिलाकर पिएं। क्यों जरूरी है consistency? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोई भी ड्रिंक जादुई इलाज नहीं होती। लेकिन रोजाना sugary drinks की जगह ज्यादा पौष्टिक और hydrating विकल्प चुनना लंबे समय में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। छोटे लेकिन लगातार किए गए बदलाव अक्सर बड़े wellness trends से ज्यादा असरदार साबित होते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में बढ़ता वजन लोगों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। कई लोग वजन कम करने के लिए जिम, एक्सरसाइज और डाइटिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पाता। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ वर्कआउट ही नहीं बल्कि सही खानपान भी वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है। खासकर सुबह का नाश्ता यानी ब्रेकफास्ट पूरे दिन की फिटनेस और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। ओट्स से करें दिन की शुरुआत वजन कम करने के लिए ओट्स को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से बचाता है। ओट्स को दूध, फलों या ड्राई फ्रूट्स के साथ खाने से शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है। डा देता है भरपूर प्रोटीन अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं तो ब्रेकफास्ट में अंडा जरूर शामिल करें। अंडे में मौजूद प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ लंबे समय तक भूख नियंत्रित रखने में मदद करता है। उबले अंडे या ऑमलेट दोनों ही हेल्दी विकल्प माने जाते हैं। दही और फल का हेल्दी कॉम्बिनेशन दही और फलों का मिश्रण वजन कम करने वालों के लिए बेहतरीन ब्रेकफास्ट माना जाता है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं, जबकि फल शरीर को विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं। पपीता, सेब, केला और बेरी जैसे फल दही के साथ खाने से फायदा मिल सकता है। स्प्राउट्स से मिलेगा भरपूर पोषण स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होते हैं। यह लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और शरीर को जरूरी न्यूट्रिशन भी देते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें प्याज, टमाटर और नींबू मिलाया जा सकता है। ग्रीन स्मूदी भी है असरदार पालक, खीरा, सेब और पुदीना से बनी ग्रीन स्मूदी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है। इसमें कैलोरी कम और पोषण ज्यादा होता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। नियमित रूप से हेल्दी ब्रेकफास्ट अपनाने से कुछ ही हफ्तों में शरीर में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रसोई में घी का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। आयुर्वेद में घी को शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सीमित मात्रा में घी का सेवन किया जाए तो यह शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है। रोजाना एक चम्मच घी खाने से पाचन, इम्यूनिटी, आंखों और हड्डियों की सेहत बेहतर हो सकती है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा घी खाने से नुकसान भी हो सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना जरूरी है। पेट की समस्याओं में मिल सकती है राहत घी को पाचन तंत्र के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कब्ज, गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। घी में मौजूद हेल्दी फैट्स आंतों को चिकनाई देते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है। इसके अलावा, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए भी घी लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में घी खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सकती है। दिमाग और शरीर दोनों को मिलते हैं फायदे घी का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी घी को लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही घी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है। जोड़ों में दर्द या कमजोरी महसूस करने वाले लोग भी डॉक्टर की सलाह के बाद घी का सेवन कर सकते हैं। घी शरीर को ऊर्जा देने का भी काम करता है और थकान कम करने में मददगार हो सकता है। आंखों और वजन नियंत्रण में भी सहायक घी में मौजूद पोषक तत्व आंखों की रोशनी के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। कई विशेषज्ञ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी या दूध के साथ एक चम्मच घी लेने की सलाह देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि सीमित मात्रा में घी का सेवन वजन घटाने की प्रक्रिया को भी सपोर्ट कर सकता है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। सावधानी भी जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि घी का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या हृदय संबंधी समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही घी का सेवन करना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आपने अक्सर देखा होगा कि जैसे ही सेब को काटा जाता है, कुछ ही मिनटों में उसका रंग बदलकर भूरा या काला हो जाता है। कई लोग इसे खराब समझकर फेंक देते हैं, लेकिन असल में यह एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कटे सेब का रंग बदलना सेहत के लिए खतरनाक नहीं होता, बल्कि यह एक प्राकृतिक रिएक्शन है। क्या है रंग बदलने की असली वजह? डॉक्टरों के मुताबिक, सेब के कटते ही उसका अंदरूनी हिस्सा हवा के संपर्क में आता है। इसके बाद एंजाइमेटिक ब्राउनिंग नामक प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें मौजूद एंजाइम और ऑक्सीजन मिलकर ऑक्सीडेशन करते हैं, जिससे ‘मेलानिन’ जैसा भूरा पिगमेंट बनता है। यही कारण है कि सेब 5–10 मिनट में रंग बदलना शुरू कर देता है और 30–60 मिनट में पूरी तरह भूरा हो सकता है। क्या काला पड़ा सेब खाना सुरक्षित है? विशेषज्ञों का कहना है कि हल्का भूरा पड़ा सेब खाना सुरक्षित होता है। हालांकि, इससे स्वाद, टेक्सचर और पोषण में थोड़ी कमी आ सकती है। बेहतर है कि सेब को काटने के 20–30 मिनट के अंदर खा लिया जाए, ताकि उसका पूरा पोषण मिल सके। कितने समय तक रहता है ताजा? कटे हुए सेब को अगर खुले में रखा जाए तो यह 6–12 घंटे में खराब हो सकता है। वहीं, फ्रिज में रखने पर यह 6–8 घंटे तक ठीक रहता है। दूसरी ओर, साबुत सेब कमरे के तापमान पर 7–14 दिन और फ्रिज में 3–5 हफ्ते तक सुरक्षित रह सकते हैं। भूरा होने से कैसे बचाएं? सेब के टुकड़ों पर नींबू का रस लगाने से ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, क्योंकि इसमें साइट्रिक एसिड होता है। इसके अलावा, सेब को नमक या चीनी मिले पानी में कुछ देर भिगोकर भी रखा जा सकता है। एयरटाइट कंटेनर में रखने से भी यह जल्दी काला नहीं पड़ता। बच्चों के टिफिन के लिए खास टिप अगर बच्चों के लंच बॉक्स में सेब पैक करना हो, तो उसे काटने के बाद तुरंत एयरटाइट डिब्बे में रखें और थोड़ा नींबू रस लगाएं। इससे सेब ज्यादा देर तक ताजा दिखेगा और बच्चे उसे आसानी से खा सकेंगे। ध्यान रखें ये बातें अगर सेब से बदबू आए, उसमें फफूंदी हो या वह ज्यादा नरम हो गया हो, तो उसे खाने से बचना चाहिए। सेब का काला पड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही तरीके से स्टोर करके और समय पर खाकर आप इसके स्वाद और पोषण दोनों का पूरा फायदा उठा सकते हैं।
Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies को लेकर लंबे समय से यह चिंता बनी हुई है कि क्या ये दवाएं मरीजों में गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ाती हैं। अब ब्रिटेन के बड़े रियल-वर्ल्ड डेटा रजिस्टर BADBIR पर आधारित एक नई स्टडी ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर systemic treatments के बीच गंभीर संक्रमण के खतरे में बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखा, हालांकि कुछ दवाओं के साथ संक्रमण का जोखिम थोड़ा अधिक पाया गया। क्या है BADBIR स्टडी? यह अध्ययन British Association of Dermatologists Biologic Interventions Register (BADBIR) के डेटा पर आधारित था। इसमें Psoriasis से पीड़ित 18,976 वयस्क मरीजों के 46,770 treatment episodes का विश्लेषण किया गया। मरीजों को इलाज शुरू होने से लेकर दवा बंद होने, मृत्यु या अंतिम फॉलो-अप तक ट्रैक किया गया। इस स्टडी में “serious infection” उन मामलों को माना गया, जिनमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, IV एंटीमाइक्रोबियल थेरेपी की जरूरत पड़ी या संक्रमण के कारण मृत्यु हुई। कितने मरीजों में दिखा गंभीर संक्रमण? अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत आयु 45.6 वर्ष थी और औसत BMI 31.6 kg/m² दर्ज किया गया। पूरे अध्ययन के दौरान गंभीर संक्रमण की दर 27.67 घटनाएं प्रति 1,000 person-years रही। हालांकि जिन मरीजों को पहले भी गंभीर संक्रमण हो चुका था, उनमें दोबारा संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा पाया गया। इस समूह में संक्रमण की दर 78.70 प्रति 1,000 person-years रही। किन दवाओं के साथ दिखा ज्यादा जोखिम? शोधकर्ताओं ने पाया कि Apremilast और Secukinumab के साथ गंभीर संक्रमण का खतरा Adalimumab की तुलना में थोड़ा अधिक दिखाई दिया। हालांकि sensitivity analyses में ये परिणाम पूरी तरह स्थिर नहीं रहे, इसलिए वैज्ञानिकों ने इन निष्कर्षों को सावधानी से देखने की सलाह दी है। किस दवा में दिखा कम संक्रमण जोखिम? अध्ययन में recurrent event analysis भी किया गया, जिसमें एक ही मरीज में बार-बार होने वाले संक्रमणों को शामिल किया गया। इस विश्लेषण में Risankizumab के साथ गंभीर संक्रमण का जोखिम कई अन्य therapies की तुलना में कम पाया गया। विशेष रूप से इसकी तुलना Brodalumab, Etanercept और standard systemic therapies से की गई। संक्रमण से मौत के मामले कितने गंभीर? स्टडी के मुताबिक गंभीर संक्रमण से जुड़ी मौतें बहुत कम दर्ज की गईं। इसकी दर केवल 1.81 प्रति 1,000 person-years रही। मरीजों और डॉक्टरों के लिए क्या है इसका मतलब? विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन Psoriasis के इलाज में इस्तेमाल होने वाली systemic therapies की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण real-world evidence देता है। रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर दवाओं के बीच संक्रमण जोखिम में कोई बड़ा अंतर नहीं है, लेकिन जिन मरीजों को पहले संक्रमण हो चुका हो या जिनकी immunity कमजोर हो, उनके लिए इलाज चुनते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए treatment selection हमेशा individual risk profile को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 9 मई को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से भगवान Krishna की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करने से शुभ फल मिलते हैं, जबकि छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करना शुभ माना जाता है और किन बातों से बचना चाहिए। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या करें? भगवान कृष्ण को पीले वस्त्र पहनाएं भगवान Krishna को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें और मुकुट में मोरपंख जरूर लगाएं। इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। भोग में तुलसी दल जरूर रखें धार्मिक मान्यता के अनुसार बिना तुलसी के भगवान कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए माखन-मिश्री, फल या अन्य प्रसाद में तुलसी दल अवश्य रखें। मंत्र जाप और भजन करें इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन और Bhagavad Gita का पाठ करने से मन को शांति मिलती है। दान-पुण्य करें जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। गौ सेवा करें भगवान कृष्ण को गोपाल कहा जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इसे विशेष पुण्यदायी कार्य माना गया है। मध्यरात्रि में करें पूजा भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए रात 12 बजे विशेष आरती और पूजा का महत्व माना जाता है। इस समय घंटी, शंख और भजन के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन क्या न करें? तामसिक भोजन से बचें इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर का वातावरण सात्विक और शांत रखना शुभ माना जाता है। अन्न और चावल का सेवन न करें यदि आप व्रत कर रहे हैं तो चावल और सामान्य अन्न से परहेज करें। फलाहार में साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ग्रहण किए जा सकते हैं। तुलसी के पत्ते न तोड़ें जन्माष्टमी के दिन तुलसी तोड़ना अशुभ माना जाता है। पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। काले कपड़े पहनने से बचें पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ नहीं माना जाता। पीले, सफेद या लाल रंग के कपड़े पहनना बेहतर माना गया है। क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन झूठ बोलने, किसी की निंदा करने और क्रोध करने से बचना चाहिए। दिन में ज्यादा न सोएं धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत वाले दिन आलस्य नहीं करना चाहिए। समय को भजन, ध्यान और धार्मिक पाठ में लगाना अधिक शुभ माना जाता है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने और श्रद्धा से पूजा करने से भगवान Krishna भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। दांपत्य जीवन में सुख, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। तिथि और मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026, दोपहर 3:24 बजे दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 41 दिनों की दीक्षा परंपरा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस दीक्षा की शुरुआत: 2 अप्रैल 2026 समापन: 12 मई 2026 (हनुमान जयंती) भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं। दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है। दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: कर्नाटक: हनुमंथा, आंजनेय आंध्र-तेलंगाना: हनुमंतुडु, आंजनेयुडु तमिलनाडु: आंजनेयार पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं हनुमान जी को सिंदूर, चोला, फूल, फल, पान, गुड़-चना अर्पित करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद बांटें विशेष महत्व तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।
हिंदू धर्म में Shiva की आराधना के लिए प्रदोष व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करते हैं। मई 2026 का महीना शिव भक्तों के लिए खास है, क्योंकि इस बार दोनों प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहे हैं, जिससे Guru Pradosh Vrat का शुभ संयोग बन रहा है। यह संयोग विशेष रूप से ज्ञान, सौभाग्य और सफलता देने वाला माना जाता है। मई 2026 प्रदोष व्रत की तिथियां पहला प्रदोष व्रत – 14 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:20 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08:31 बजे इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करना सबसे फलदायी रहेगा। दूसरा प्रदोष व्रत – 28 मई 2026 (गुरु प्रदोष) पक्ष: ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 मई, सुबह 07:56 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई, सुबह 09:50 बजे इस दिन भी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन Shiva कैलाश पर्वत पर आनंदित होकर नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा और उपासना कई गुना अधिक फल देती है। गुरु प्रदोष व्रत के लाभ: शत्रुओं पर विजय जीवन में सुख-शांति ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करियर और कार्यों में सफलता पूजा विधि (सरल तरीके से) अगर आप प्रदोष व्रत रख रहे हैं, तो इस विधि से पूजा कर सकते हैं: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें दिनभर फलाहार या व्रत रखें शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें अंत में आरती करें
आज की दुनिया इंटरनेट के बिना लगभग ठहर सी जाती है। ईमेल भेजना हो, वीडियो कॉल करनी हो या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो, हर काम कुछ सेकंड में पूरा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किलोमीटर दूर भेजा गया डेटा इतनी तेजी से कैसे पहुंच जाता है? ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सब अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए होता है, जबकि असल सच्चाई कुछ और है। दुनिया के करीब 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का आधार समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें हैं, जिन्हें सबमरीन कम्युनिकेशन केबल कहा जाता है। यही केबलें दुनिया के अलग-अलग देशों और महाद्वीपों को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। समुद्र के नीचे कैसे काम करता है इंटरनेट का नेटवर्क? समुद्र के नीचे बिछी ये केबलें बेहद पतले ऑप्टिकल फाइबर से बनी होती हैं, जिनके जरिए डेटा प्रकाश (light signals) के रूप में ट्रांसफर किया जाता है। इन केबलों का काम एक देश से दूसरे देश तक इंटरनेट डेटा पहुंचाना होता है। ईमेल, वीडियो कॉल, वेबसाइट, क्लाउड सर्विस और सोशल मीडिया जैसे लगभग सभी इंटरनेशनल ऑनलाइन कम्युनिकेशन इन्हीं के जरिए चलते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया में डेटा ट्रांसफर का 95% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं केबलों से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इन्हें ग्लोबल इंटरनेट की “रीढ़ की हड्डी” भी कहा जाता है। एक सेकंड में भेज सकती हैं कई फिल्में ये हाई-स्पीड फाइबर-ऑप्टिक केबल हर सेकंड कई टेराबिट डेटा ट्रांसमिट करने की क्षमता रखती हैं। एक टेराबिट प्रति सेकंड की स्पीड इतनी तेज होती है कि इसमें कुछ ही पलों में कई 4K HD फिल्में भेजी जा सकती हैं। यही कारण है कि लाखों लोग एक साथ वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वीडियो कॉलिंग कर पाते हैं। दुनिया भर में फैला है केबलों का विशाल जाल रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के महासागरों में लगभग 485 से ज्यादा सबमरीन केबलें बिछी हुई हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 9 लाख मील से ज्यादा बताई जाती है। ये केबलें अटलांटिक और प्रशांत महासागर के साथ-साथ स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरती हैं। कई केबलें बेहद गहरे और दूरदराज समुद्री इलाकों तक फैली हुई हैं। इतने मजबूत होने के बावजूद हर साल कट जाती हैं कई केबलें समुद्र के नीचे बिछी इन केबलों को कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है ताकि वे समुद्री दबाव, घर्षण और बाहरी नुकसान से बच सकें। इनमें स्टील कवच जैसी मजबूत लेयर भी शामिल होती हैं। फिर भी हर साल लगभग 100 से 150 केबलें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जहाजों के एंकर, मछली पकड़ने वाले उपकरण और समुद्री गतिविधियां होती हैं। अगर किसी बड़े रूट की केबल कट जाए तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कैसे सुरक्षित रखी जाती हैं ये केबलें? सबमरीन केबल बिछाने से पहले समुद्री रास्तों का गहराई से अध्ययन किया जाता है ताकि उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों से गुजारा जा सके। इसके अलावा कंपनियां मजबूत मटेरियल और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इन केबलों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को रोका जा सके। क्यों जरूरी हैं ये केबलें? आज पूरी दुनिया डिजिटल अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। बैंकिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन मीटिंग, AI सर्वर और वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं इन्हीं केबलों पर टिकी हैं। यानी अगली बार जब आप Google पर कुछ सर्च करें या Facebook खोलें, तो याद रखिए कि आपके फोन तक पहुंचने वाला डेटा समुद्र की गहराइयों से होकर आया है।
नई रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple इस बार अपने पारंपरिक iPhone लॉन्च प्लान में बड़ा बदलाव कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी इस साल रेगुलर iPhone 18 लॉन्च नहीं करेगी। इसके बजाय यूजर्स को बेस मॉडल के लिए 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max तय समय पर सितंबर में लॉन्च किए जा सकते हैं। टेक इंडस्ट्री में चर्चा है कि कंपनी अब चरणबद्ध लॉन्च रणनीति पर काम कर रही है, ताकि पुराने मॉडल्स की बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे और नए फोल्डेबल iPhone को भी बेहतर मार्केट स्पेस मिल सके। आखिर क्यों टल सकता है iPhone 18? रिपोर्ट्स के अनुसार रेगुलर iPhone 18 अब स्प्रिंग 2027 में लॉन्च हो सकता है। इसे कथित तौर पर iPhone 18e और iPhone Air 2 के साथ पेश किया जा सकता है। टिप्स्टर “Fixed Focus Digital” के मुताबिक यह Apple की नई मार्केट स्ट्रैटेजी का हिस्सा हो सकता है। कंपनी चाहती है कि iPhone 17 सीरीज ज्यादा समय तक बाजार में चर्चा में बनी रहे। इससे कंपनी को प्रोडक्शन कॉस्ट कंट्रोल करने और मार्केट शेयर मजबूत रखने में मदद मिल सकती है। फोल्डेबल iPhone लॉन्च भी बन सकता है कारण रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple इस साल अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर सकती है, जिसे फिलहाल iPhone Ultra नाम से जोड़ा जा रहा है। अगर कंपनी फोल्डेबल डिवाइस लॉन्च करती है, तो उसका फोकस उसी पर ज्यादा रह सकता है। ऐसे में Apple एक साथ बहुत ज्यादा मॉडल लॉन्च कर यूजर्स को कन्फ्यूज नहीं करना चाहती। माना जा रहा है कि इसी वजह से बेस iPhone 18 को बाद में लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है। सप्लाई चेन और प्रोडक्शन भी बड़ी वजह? कुछ रिपोर्ट्स में ग्लोबल सप्लाई चेन को भी इस फैसले की अहम वजह बताया गया है। कहा जा रहा है कि Apple iPhone 17 की प्रोडक्शन लाइफ बढ़ाना चाहती है ताकि मिड और प्रीमियम सेगमेंट में इसकी बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे। टेक वेबसाइट्स के मुताबिक कंपनी इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और मार्केट पकड़ मजबूत करने में कर सकती है। हालांकि कुछ लीक्स में यह भी कहा गया है कि बेस iPhone 18 में कुछ कम प्रीमियम कंपोनेंट्स देखने को मिल सकते हैं। iPhone 17 की जबरदस्त बिक्री का असर? रिसर्च फर्म्स की रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 17 2026 की पहली तिमाही में दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन्स में शामिल रहा। वहीं iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की बिक्री भी काफी मजबूत रही। ऐसे में माना जा रहा है कि Apple फिलहाल iPhone 17 सीरीज की लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाना चाहती है और नए बेस मॉडल को जल्दी लॉन्च करने के बजाय मौजूदा डिवाइसेज की बिक्री को और समय देना चाहती है। टेक इंडस्ट्री में क्या बदल सकता है? अगर ये रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो यह पहली बार होगा जब Apple अपने पारंपरिक सितंबर लॉन्च साइकल को तोड़ेगी। इससे पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। भविष्य में दूसरी कंपनियां भी फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को अलग-अलग चरणों में लॉन्च करने की रणनीति अपना सकती हैं। हालांकि फिलहाल Apple ने इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन लगातार सामने आ रही लीक्स और रिपोर्ट्स ने टेक जगत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Netflix ने अपने मोबाइल ऐप में बड़ा बदलाव करते हुए नया यूज़र इंटरफ़ेस पेश किया है। इस अपडेट का मकसद स्मार्टफोन पर कंटेंट खोजना और देखना पहले से ज्यादा आसान और तेज़ बनाना है। नया डिज़ाइन खास तौर पर मोबाइल यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें कंटेंट को सामने और केंद्र में रखा गया है ताकि यूज़र तुरंत अपनी पसंद का शो या फिल्म चुन सकें। ‘Clips’ फीचर: अब शॉर्ट वीडियो में मिलेगा कंटेंट का स्वाद इस अपडेट की सबसे खास बात ‘Clips’ नाम का नया वर्टिकल वीडियो फीचर है। यह एक पर्सनलाइज़्ड फीड है, जिसमें यूज़र्स को उनकी पसंद के अनुसार फिल्मों, वेब सीरीज़ और स्पेशल शो के छोटे-छोटे प्रीव्यू दिखाए जाते हैं। इसका अनुभव काफी हद तक सोशल मीडिया के शॉर्ट वीडियो जैसा है, जिससे यूज़र आसानी से नया कंटेंट खोज सकते हैं। एड, शेयर और एक्सप्लोर—तीन बड़े ऑप्शन ‘Clips’ फीचर के तहत यूज़र्स सीधे फीड से ही कंटेंट को “My List” में जोड़ सकते हैं, दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं और अपनी पसंद के अनुसार नए शो एक्सप्लोर कर सकते हैं। यह फीचर यूज़र्स को बिना ऐप में ज्यादा नेविगेट किए ही तेज़ी से कंटेंट चुनने में मदद करता है। कई देशों में शुरू, जल्द होगा ग्लोबल रोलआउट यह नया अपडेट अमेरिका, ब्रिटेन, भारत समेत कई देशों में जारी कर दिया गया है और आने वाले महीनों में इसे दुनिया भर में उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव मोबाइल एक्सपीरियंस को और ज्यादा पर्सनल और एंटरटेनिंग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भविष्य में और भी नए फीचर्स Netflix ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म पर पॉडकास्ट, लाइव प्रोग्रामिंग और जॉनर-आधारित कलेक्शन जैसे फीचर्स भी जोड़े जाएंगे, जिससे यूज़र्स को और ज्यादा वैरायटी और बेहतर अनुभव मिल सके।
कंपनियों के लिए AWS की बड़ी पेशकश दुनिया की दिग्गज क्लाउड कंपनी Amazon Web Services (AWS) ने व्यवसायों के लिए दो नए एजेंटिक AI टूल लॉन्च किए हैं। इन टूल्स का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना और सप्लाई चेन में आने वाली चुनौतियों से निपटना है। Amazon ने अपने विशाल रिटेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से मिले अनुभव का इस्तेमाल कर इन उत्पादों को तैयार किया है। AI लेगा नौकरी के इंटरव्यू AWS का नया टूल Connect Talent कंपनियों को उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेने में मदद करेगा। उम्मीदवार दिन या रात किसी भी समय इंटरव्यू शेड्यूल कर सकते हैं। यह AI आधारित सिस्टम वॉयस के जरिए सवाल पूछेगा और उम्मीदवार के जवाबों के आधार पर आगे के प्रश्न तय करेगा। सबसे खास बात यह है कि भर्ती करने वालों को उम्मीदवार का नाम, रिज्यूमे या अन्य पहचान संबंधी जानकारी नहीं दिखाई जाएगी। उन्हें केवल स्कोर, क्षमता का मूल्यांकन और इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट मिलेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह टूल खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती होती है। सप्लाई चेन की समस्याओं का AI समाधान AWS ने दूसरा टूल Connect Decisions पेश किया है, जो सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को पहचानने और उनका समाधान सुझाने में सक्षम है। यह प्लेटफॉर्म 25 से अधिक उन्नत सप्लाई चेन मॉडलों का उपयोग करता है। यदि किसी सप्लायर की डिलीवरी में देरी होती है या अचानक ऑर्डर बढ़ जाते हैं, तो यह AI तुरंत समस्या का विश्लेषण करेगा, प्राथमिकता तय करेगा और संभावित समाधान बताएगा। साथ ही, हर विकल्प की लागत और उसके प्रभाव का भी अनुमान देगा। AWS के अनुसार, Wells Vehicle Electronics और TVS Motors जैसी कंपनियां पहले से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। Amazon Connect परिवार का हिस्सा ये दोनों नए उत्पाद AWS के विस्तारित Amazon Connect प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं। कंपनी ने इसे चार प्रमुख बिजनेस एप्लिकेशन के रूप में पेश किया है। Amazon Connect का मूल संपर्क केंद्र प्लेटफॉर्म 2017 में लॉन्च किया गया था। आज इसका उपयोग State Farm, Air Canada और U.S. Bank जैसी बड़ी कंपनियां कर रही हैं। इसके अलावा, AWS ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए Amazon Connect Health भी पेश किया है। Amazon के अनुभव का फायदा Amazon का सप्लाई नेटवर्क 40 करोड़ से अधिक उत्पादों को संभालता है। वहीं, हालिया पीक सीजन में कंपनी ने 2.5 लाख मौसमी कर्मचारियों की भर्ती की थी। AWS का कहना है कि इन्हीं विशाल परिचालन अनुभवों के आधार पर इन AI टूल्स को विकसित किया गया है। भविष्य की दिशा AWS की वरिष्ठ उपाध्यक्ष Colleen Aubrey ने इस लॉन्च को "Day Zero" बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से कंपनी इस दिशा में काम कर रही थी। उनका मानना है कि किसी एक छोटे कार्य को ऑटोमेट करने के बजाय पूरे बिजनेस फंक्शन को AI से संचालित करने के लिए विशेष उत्पादों की जरूरत होती है। इन नए AI समाधानों के साथ AWS ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे व्यवसायों के संचालन का हिस्सा बन चुका है।
Union Public Service Commission ने Combined Defence Services Examination (CDS) 1, 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी जारी की है, जिसमें अगले चरण के लिए चयनित उम्मीदवारों के रोल नंबर शामिल हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 451 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। कैसे चेक करें UPSC CDS 1 Result 2026? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना रिजल्ट देख सकते हैं: UPSC Official Website पर जाएं होमपेज पर मौजूद “Examination” सेक्शन में क्लिक करें इसके बाद “Active Examinations” लिंक खोलें अब “CDS Result 2026” लिंक पर क्लिक करें स्क्रीन पर रिजल्ट PDF खुल जाएगी भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें 8,826 उम्मीदवार अगले चरण के लिए चयनित Union Public Service Commission ने CDS-I परीक्षा का आयोजन 12 अप्रैल 2026 को किया था। लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 8,826 उम्मीदवारों को अगले चरण यानी SSB इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। SSB इंटरव्यू का आयोजन Services Selection Board द्वारा किया जाएगा। कैसे होगा अंतिम चयन? मेरिट सूची में शामिल उम्मीदवार अब SSB इंटरव्यू में हिस्सा लेंगे। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में उम्मीदवारों के संयुक्त प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। SSB इंटरव्यू में उम्मीदवारों की पर्सनालिटी, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और कम्युनिकेशन स्किल्स का मूल्यांकन किया जाता है। आगे क्या होगी प्रक्रिया? SSB इंटरव्यू में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। सभी चरण पूरे होने के बाद अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी।
NEET परीक्षा पास करना मेडिकल करियर की दिशा में एक बड़ा कदम जरूर है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है–काउंसलिंग प्रक्रिया। हर साल हजारों छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद सिर्फ गलत निर्णय या अधूरी जानकारी के कारण अपनी पसंदीदा MBBS या BDS सीट से चूक जाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि काउंसलिंग का हर चरण कितना महत्वपूर्ण है और इसे रणनीतिक तरीके से कैसे पूरा किया जाए। काउंसलिंग क्या है और क्यों है इतनी अहम? NEET काउंसलिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उम्मीदवारों को उनकी रैंक, कैटेगरी, सीट उपलब्धता और भरी गई पसंद (choice filling) के आधार पर मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया दो स्तरों पर आयोजित होती है– All India Quota (AIQ): कुल सीटों का 15 प्रतिशत State Quota: कुल सीटों का 85 प्रतिशत दोनों ही स्तरों पर भाग लेना छात्रों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे विकल्प बढ़ते हैं। रजिस्ट्रेशन से लेकर चॉइस फिलिंग तक–हर स्टेप मायने रखता है काउंसलिंग की शुरुआत रजिस्ट्रेशन से होती है, जहां उम्मीदवार को अपनी बेसिक जानकारी भरनी होती है। इसके बाद आता है सबसे महत्वपूर्ण चरण–चॉइस फिलिंग। यहीं पर सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए: अधिक से अधिक कॉलेज विकल्प भरें केवल टॉप कॉलेज पर निर्भर न रहें, बैकअप जरूर रखें अपनी रैंक के अनुसार यथार्थवादी विकल्प चुनें एक छोटी सी गलती यहां आपकी सीट छीन सकती है। सीट अलॉटमेंट: कैसे होता है फैसला? सीट आवंटन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होता है, जो आपकी रैंक, कैटेगरी और चॉइस के आधार पर तय होता है। सीट मिलने के बाद आपके पास तीन विकल्प होते हैं: Accept and Freeze: सीट को फाइनल करना Float: बेहतर कॉलेज के लिए अगले राउंड का इंतजार Slide: उसी कॉलेज में बेहतर कोर्स के लिए इंतजार सही विकल्प चुनना आपकी आगे की दिशा तय करता है। इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी कई छात्र कुछ आम गलतियां करते हैं, जिनसे उनका नुकसान हो सकता है: सिर्फ एक काउंसलिंग में भाग लेना कम चॉइस भरना डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में देरी समयसीमा (deadline) को नजरअंदाज करना इनसे बचना ही सफलता की कुंजी है। डॉक्यूमेंट्स पहले से रखें तैयार काउंसलिंग के दौरान किसी भी देरी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें: NEET स्कोरकार्ड एडमिट कार्ड 10वीं और 12वीं की मार्कशीट कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) पासपोर्ट साइज फोटो
छत्तीसगढ़ के लाखों छात्रों का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) आज 29 अप्रैल 2026 को कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम जारी करेगा। रिजल्ट दोपहर 2:30 बजे घोषित किए जाएंगे। रिजल्ट की घोषणा महानदी भवन से की जाएगी, जहां राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आधिकारिक रूप से नतीजों का ऐलान करेंगे। 5.5 लाख से अधिक छात्रों को इंतजार इस वर्ष छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में करीब साढ़े पांच लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। अब सभी अपने प्रदर्शन का परिणाम जानने के लिए उत्सुक हैं। बोर्ड द्वारा रिजल्ट जारी होते ही छात्र आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपने अंक देख सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने दी थी जानकारी राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर रिजल्ट जारी होने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि यह परिणाम केवल अंक नहीं, बल्कि छात्रों की वर्षों की मेहनत और शिक्षकों- अभिभावकों के मार्गदर्शन का प्रतीक है। इन वेबसाइट्स पर देखें रिजल्ट रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र नीचे दी गई वेबसाइट्स पर जाकर अपना परिणाम चेक कर सकते हैं: cg.results.nic.in cgbse.nic.in results.cg.nic.in ऐसे करें रिजल्ट चेक सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं होमपेज पर “10th/12th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें अपना रोल नंबर दर्ज करें Submit करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा कब हुई थीं परीक्षाएं? CGBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक आयोजित की गई थीं, जबकि 10वीं की परीक्षाएं 21 फरवरी से 13 मार्च 2026 के बीच संपन्न हुईं। पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? छात्रों को पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट मिलाकर कम से कम 33% अंक लाना अनिवार्य है। 1-2 विषय में फेल होने पर कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा 2 से अधिक विषयों में असफल होने पर अगले वर्ष फिर से परीक्षा देनी होगी
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT BHU ने एक बार फिर अपने शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड से सुर्खियां बटोरी हैं। 2025-26 के प्लेसमेंट सीजन की शुरुआत ही इतनी दमदार रही कि पहले ही दिन 17 छात्रों को 1 करोड़ रुपये से अधिक के पैकेज ऑफर किए गए। यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान के लिए बल्कि पूरे देश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है। प्लेसमेंट में रिकॉर्डतोड़ शुरुआत इस साल के प्लेसमेंट ड्राइव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। Amazon, Adobe, Oracle, Deloitte, Flipkart, DRDO और TCS जैसी दिग्गज कंपनियों ने छात्रों को आकर्षक ऑफर दिए। संस्थान के अनुसार, इस सत्र में अब तक का सबसे बड़ा पैकेज 1.67 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो IIT BHU की मजबूत इंडस्ट्री कनेक्टिविटी और अकादमिक गुणवत्ता को दर्शाता है। क्यों खास है IIT BHU Banaras Hindu University का हिस्सा रहा IIT BHU देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिना जाता है। बेहतरीन फैकल्टी, रिसर्च सुविधाएं और कैंपस लाइफ इसे छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती हैं। NIRF रैंकिंग 2025 में इंजीनियरिंग कैटेगरी में IIT BHU को 10वां स्थान मिला है, जो इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। एडमिशन प्रोसेस और कोर्स IIT BHU में विभिन्न कोर्सेस के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती हैं: BTech: JEE Advanced BArch: JEE Advanced + AAT MTech: GATE MSc: IIT JAM MBA: CAT PhD: GATE / NET / JRF योग्यता और कटऑफ BTech में एडमिशन के लिए छात्रों को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के साथ कम से कम 75% अंक लाना जरूरी होता है। साथ ही JEE Advanced क्वालिफाई करना अनिवार्य है। कुछ प्रमुख ब्रांच की कटऑफ (जनरल कैटेगरी) इस प्रकार रही: CSE: 1350 ECE: 2500 Electrical: 3493 Mechanical: 6525 Chemical: 7435 Civil: 9145 Mining: 12572 क्या है इस सफलता का मतलब IIT BHU का यह प्रदर्शन बताता है कि भारत में तकनीकी शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। ग्लोबल कंपनियों का भरोसा बढ़ रहा है और भारतीय इंजीनियरिंग टैलेंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को अमेरिका द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सरकारी मीडिया ने अमेरिकी योजना को “ट्रंप के लालच के आगे ईरान के आत्मसमर्पण” जैसा बताया। ईरान ने अमेरिका पर लगाया दबाव की राजनीति का आरोप ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) ने कहा कि अमेरिका का प्रस्ताव पूरी तरह एकतरफा था और इसका उद्देश्य ईरान की संप्रभुता को कमजोर करना था। तेहरान ने साफ कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपने “मौलिक अधिकारों” से समझौता नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि “यहां कोई भी ट्रंप को खुश करने के लिए प्रस्ताव तैयार नहीं करता। ईरान की प्रमुख मांगें रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने जवाब में कई शर्तें रखीं। इनमें युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना, ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करना और तेल निर्यात की अनुमति शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करने, लेबनान में युद्धविराम और युद्ध के बाद 30 दिनों की वार्ता का प्रस्ताव भी दिया। ट्रंप ने बताया “पूरी तरह अस्वीकार्य” राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जवाब को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि ईरान का रुख अमेरिका के लिए “पूरी तरह अस्वीकार्य” है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और दुनिया को केवल “देरी की रणनीति” से गुमराह करता रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ईरान “और ज्यादा नहीं हंस पाएगा।”
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाने का दावा किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम सिर्फ समुद्री नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक संदेश छिपा है. सबसे बड़ा झटका अमेरिका को इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ईरान कथित तौर पर यह टोल अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन में लेना चाहता है. क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” नाम की एजेंसी बनाई है. यह एजेंसी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ट्रांजिट अनुमति देगी और उनसे शुल्क वसूलेगी. जहाजों को पहले से अपना रूट, बीमा, चालक दल और स्वामित्व की जानकारी देनी होगी. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां किसी भी तरह का शुल्क या नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. अमेरिका को क्यों लग सकता है झटका? सबसे बड़ा कारण “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था है. दशकों से वैश्विक तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है. इससे डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत रिजर्व मुद्रा बना रहा. लेकिन अगर ईरान युआन में टोल लेना शुरू करता है, तो: तेल व्यापार में डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है चीन की मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय बढ़त मिल सकती है अमेरिका के आर्थिक प्रभाव को चुनौती मिल सकती है प्रतिबंधों के बावजूद ईरान को नया वित्तीय रास्ता मिल सकता है ईरान पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है. ऐसे में डॉलर से हटकर युआन और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेने की रणनीति उसे प्रतिबंधों के असर से कुछ राहत दे सकती है. चीन को क्या फायदा? चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और ईरान के साथ उसके संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यदि व्यापार युआन में होता है, तो: चीन की मुद्रा का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा एशिया-केंद्रित ऊर्जा व्यापार मॉडल मजबूत होगा चीन को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा किन देशों पर असर पड़ सकता है? जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. यदि टोल बढ़ता है या भुगतान व्यवस्था बदलती है, तो: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं शिपिंग लागत महंगी हो सकती है आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है क्या सच में खत्म हो जाएगा डॉलर का दबदबा? विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी तुरंत ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि वैश्विक व्यापार और बैंकिंग सिस्टम अब भी बड़े पैमाने पर डॉलर पर आधारित है. लेकिन: BRICS देशों में डी-डॉलराइजेशन की चर्चा बढ़ रही है कई देश सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं चीन और कुछ अन्य देश वैकल्पिक भुगतान सिस्टम विकसित कर रहे हैं ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.
United States में चीन को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने चीन को अमेरिका का “सबसे बड़ा रणनीतिक प्रतिद्वंदी” बताते हुए ट्रंप प्रशासन से भारत के साथ रिश्ते और मजबूत करने की अपील की है। अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि China के पास अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा, आर्थिक ताकत और रणनीतिक हितों को कमजोर करने की क्षमता और मंशा दोनों मौजूद हैं। प्रस्ताव में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और आर्थिक दबाव की रणनीति पर भी चिंता जताई गई है। दोनों पार्टियों के सांसदों ने पेश किया प्रस्ताव यह प्रस्ताव अमेरिकी सीनेटर Chris Coons समेत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के समूह ने पेश किया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि चीन: अपनी सैन्य ताकत तेजी से बढ़ा रहा है साइबर और स्पेस तकनीक में विस्तार कर रहा है हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दबाव की नीति अपना रहा है ताइवान के खिलाफ आक्रामक रवैया दिखा रहा है सांसदों ने कहा कि बीजिंग इंडो-पैसिफिक में “जबरदस्ती और आक्रामक रणनीति” के जरिए क्षेत्रीय संतुलन बदलने की कोशिश कर रहा है। भारत के साथ गहरे जुड़ाव की सलाह प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा भारत को लेकर माना जा रहा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका को भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करनी चाहिए। सीनेटरों ने खासतौर पर Quadrilateral Security Dialogue यानी QUAD को मजबूत करने की बात कही। इस समूह में: India United States Japan Australia शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में QUAD की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। चीन पर लगे गंभीर आरोप अमेरिकी सांसदों ने चीन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि: चीन अमेरिकी तकनीक और बौद्धिक संपदा चोरी करता है जबरन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कराता है वैश्विक बाजारों में अनुचित प्रतिस्पर्धा करता है सरकारी मदद से रणनीतिक उद्योगों पर कब्जा करने की कोशिश करता है इसके अलावा चीन पर रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों को सैन्य तकनीक और सामग्री उपलब्ध कराने का भी आरोप लगाया गया। AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता प्रस्ताव में कहा गया कि चीन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्वांटम कंप्यूटिंग एडवांस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सांसदों ने चेतावनी दी कि ये तकनीकें भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत तय करेंगी। उन्होंने अमेरिका से इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और चीन पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने की मांग की। ताइवान और साउथ चाइना सी पर भी फोकस प्रस्ताव में Taiwan Strait और South China Sea में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि इन क्षेत्रों में नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि चीन लगातार वहां सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। क्यों अहम माना जा रहा है यह प्रस्ताव? हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे वॉशिंगटन में चीन को लेकर बढ़ती चिंता का बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि: अमेरिका अब चीन को केवल आर्थिक प्रतिद्वंदी नहीं, बल्कि सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है भारत की रणनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ रही है इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है अमेरिका की यह नई रणनीति आने वाले समय में चीन-अमेरिका संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकती है, जबकि भारत की भूमिका वैश्विक शक्ति संतुलन में और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
मेष राशि - स्वयं को शांत बनाए रखें क्योंकि आज आपको ऐसी कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जिनके चलते आप काफ़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। ख़ास तौर पर अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखें, क्योंकि यह और कुछ नहीं बल्कि थोड़ी देर पागलपन है। लम्बे समय से अटके मुआवज़े और कर्ज़ आदि आख़िरकार आपको मिल जाएंगे। आपके आकर्षण और व्यक्तित्व के ज़रिए आपको कुछ नए दोस्त मिलेंगे। आज आप ख़ुद को अपने प्रिय के प्यार से सराबोर महसूस करेंगे। इस लिहाज़ से आज का दिन बहुत ख़ूबसूरत रहेगा। दफ़्तर में आपको पता लग सकता है कि जिसे आप अपना दुश्मन समझते थे, वह दरअस्ल आपका शुभचिंतक है। दूसरों को यह बताने के लिए ज़्यादा उतावले न हों कि आज आप कैसा महसूस कर रहे हैं। आपको अपने जीवनसाथी की ओर से ख़ास तोहफ़ा मिल सकता है। उपाय :- काला-सफेद कपड़ा किसी साधु को दान करने से स्वास्थ्य बेहतर होगा। वृषभ राशि - आपकी उम्मीद एक महक से भरे हुए ख़ूबसूरत फूल की तरह खिलेगी। भविष्य में अगर आपको आर्थिक रुप से मजबूत बनना है तो आज से ही धन की बचत करें। दोस्त मददगार और सहयोगी रहेंगे। सावधान रहें, क्योंकि प्यार में पड़ना आज के दिन आपके लिए दूसरी कठिनाइयाँ खड़ी कर सकता है। आप क़ामयाबी ज़रूर हासिल करेंगे – बस एक-एक करके महत्वपूर्ण क़दम उठाने की ज़रूरत है। मुमकिन है कि आपके अतीत से जुड़ा कोई शख़्स आज आपसे संपर्क करेगा और इस दिन को यादगार बना देगा। असजता की वजह से आप वैवाहिक जीवन में ख़ुद को फँसा हुआ अनुभव कर सकते हैं। आपको ज़रूरत है तो जीवनसाथी के साथ आत्मीय बातचीत की। उपाय :- प्रेमी/प्रेमिका को हरे रंग के कपड़े गिफ्ट में देने से प्रेम सम्बन्ध मजबूत रहेंगे। मिथुन राशि - आज आपकी सेहत पूरी तरह अच्छी रहेगी। व्यापार को मजबूती देने के लिए आज आप कोई अहम कदम उठा सकते हैं जिसके लिए आपका कोई करीबी आपकी आर्थिक मदद कर सकता है। आज आपमें धैर्य की कमी रहेगी। इसलिए संयम बरतें, क्योंकि आपकी तल्ख़ी आस-पास के लोगों को दुःखी कर सकती है। आपकी ऊर्जा का स्तर ऊँचा रहेगा- क्योंकि आपका प्रिय आपने लिए बहुत सारी ख़ुशी की वजह साबित होगा। संतोषजनक परिणाम पाने के लिए काम को योजनाबद्ध तरीक़े से करें, दफ़्तर की परेशानियों को हल करने में आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। आज जितना हो सके लोगों से दूर रहें। लोगों को वक्त देने से बेहतर है अपने आपको वक्त दें। आपका जीवनसाथी आज आपके लिए कुछ बहुत ख़ास करने वाला है। उपाय :- दादा की उम्र के किसी बुजुर्ग की सेवा-सहायता करने से नौकरी व बिज़नेस में उन्नति होगी। कर्क राशि - दोस्तों का रुख़ सहयोगी रहेगा और वे आपको ख़ुश रखेंगे। यह बात भली भांति समझ लें कि दुख की घड़ी में आपका संचित धन ही आपके काम आएगा इसलिए आज के दिन अपने धन का संचय करने का विचार बनाएं। शाम के समय सामाजिक गतिविधियाँ उससे कई बेहतर रहेंगी, जितनी आपने उम्मीद की थी। अपने रोमांटिक ख़यालों को हर किसी को बताने से बचें। कार्यक्षेत्र में आप ख़ुद को ख़ास महसूस करेंगे। दिन की शुरुआत भले ही थोड़ी थकाऊ रहे लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा आपको अच्छे फल मिलने लगेंगे। दिन के अंत में आपको अपने लिए समय मिल पाएगा और आप किसी करीबी से मुलाकात करके इस समय का सदुपयोग कर सकते हैं। अगर आप अपने जीवनसाथी की छोटी-छोटी बातों को नज़रअन्दाज़ करेंगे, तो उन्हें बुरा लग सकता है। उपाय :- फिटकरी से दाँत साफ़ करना आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। सिंह राशि - अपने डर का इलाज का वक़्त आ चुका है। आपको समझना चाहिए कि न सिर्फ़ यह शारीरिक ऊर्जा को चूस लेता है, बल्कि ज़िंदगी को भी कम करता है। आपके घर से जुड़ा निवेश फ़ायदेमंद रहेगा। पारिवारिक सदस्यों के साथ सुकून भरे और शांत दिन का लुत्फ़ लें। अगर लोग परेशानियों के साथ आपके पास आएँ तो उन्हें नज़रअंदाज़ करें और उन्हें अपनी मानसिक शांति भंग न करने दें। आपको उदार और स्नेह से भरे प्यार का तोहफ़ा मिल सकता है। आज के दिन आपका कठिन परिश्रम फलदायी सिद्ध होगा। अगर आप अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो उनके खोने या चोरी होने की संभावना है। क्या आपको पता है कि आपका जीवनसाथी वाक़ई आपके लिए फ़रिश्ता है। उनपर ग़ौर करें, यह बात आपको ख़ुद-ब-ख़ुद दिख जाएगी। उपाय :- करियर में सफल होने के लिए अपनें कार्य स्थान को साफ रखें। कन्या राशि - कुछ ऐसी घटनाएँ आपकी परेशानी का कारण बन सकती हैं, जिन्हें टालना मुमकिन न हो। लेकिन आप ख़ुद को शांत बनाए रखें और हालात से निपटने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया न करें। आज आपको भूमि, रिअल-एस्टेट या सांस्कृतिक परियोजनाओं पर ध्यान केन्द्रित करने की ज़रूरत है। दोस्त और जीवनसाथी आपके लिए सुकून और ख़ुशी लेकर आएंगे, नहीं तो आपका दिन बुझा-बुझा और दौड़-भाग से भरा रहेगा। प्रेम के दृष्टिकोण से उत्तम दिन है। व्यवसायियों के लिए अच्छा दिन है, क्योंकि उन्हें अचानक बड़ा फ़ायदा हो सकता है। अपने काम से आराम लेकर आज आप कुछ समय अपने जीवनसाथी के साथ बिता सकते हैं। वैवाहिक जीवन के उजले पहलू का अनुभव करने के लिए अच्छा दिन है। उपाय :- अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेने के लिए अपने घर का मध्य स्थान (ब्रह्म स्थान) साफ रखें। तुला राशि - ख़याली पुलाव पकाने में वक़्त ज़ाया न करें। सार्थक कामों में लगाने के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखें। बैंक से जुड़े लेन-देन में काफ़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है। विद्यालय का काम पूरा करने के लिए बच्चे आपसे मदद ले सकते हैं। हर रोज़ प्रेम में पड़ने की अपनी आदत को बदलिए। दूसरों को ऐसा काम करने के लिए बाध्य न करें, जो आप स्वयं न करना चाहें। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी आज आप अपने लिए समय निकालपाने में सक्षम होंगे। खाली वक्त में आज कुछ रचनात्मक कर सकते हैं। जीवनसाथी के साथ कुछ तनातनी मुमकिन है, लेकिन शाम के खाने के साथ चीज़ें भी सुलझ जाएंगी। उपाय :- धन लाभ के लिए उगते हुए सूर्य को देखते हुए 11 बार ॐ का उच्चारण करें। वृश्चिक राशि - आपको कामकाम के मोर्चे पर धक्का लग सकता है, क्योंकि आपकी सेहत आपके साथ नहीं है और इसके चलते आपको कोई ज़रूरी काम अधर में ही छोड़ना पड़ सकता है। ऐसे हालात में धैर्य और होशियारी से काम लें। धन आपके लिए जरुरी है लेकिन धन को लेकर इतने संजीदा न हो जाएं कि अपने रिश्तों को ही खराब कर दें। आज के दिन बिना कुछ ख़ास किए आप आसानी से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में क़ामयाब रहेंगे। प्यार का बुख़ार आपके सर पर चढ़ने के लिए तैयार है। इसका अनुभव कीजिए। यह उन उम्दा दिनों में से एक दिन है जब कार्यक्षेत्र में आप अच्छा महसूस करेंगे। आज आपके सहकर्मी आपके काम की तारीफ करेंगे और आपका बॉस भी आपके काम से खुश होगा। कारोबारी भी आज कारोबार में मुनाफा कमा सकते हैं। वह काम जो आज आप दूसरों के लिए स्वेच्छा से करेंगे, न सिर्फ़ औरों के लिए मददगार साबित होगा बल्कि आपके दिल में ख़ुद की छवि भी सकारात्मक होगी। आँखें दिल की बातें बयान कर देती हैं। यह दिन अपने जीवनसाथी के साथ इसी भाषा में बात करने के लिए है। उपाय :- खोटा सिक्का नदी में बहाने से स्वास्थ्य बेहतर होगा। धनु राशि - बहुत-कुछ आपके कंधों पर टिका हुआ है और फ़ैसले लेने के लिए स्पष्ट सोच ज़रूरी है। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को आज धन की बहुत आवश्यकता पड़ेगी लेकिन बीते दिनों में किये गये फिजुलखर्च के कारण उनके पास पर्याप्त धन नहीं होगा। यह परिवार में दबदबा बनाए रखने की अपनी आदतों को छोड़ने का वक़्त है। ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में उनके कंधे से कंधा मिलाकर साथ दें। आपका बदला हुआ बर्ताव उनके लिए ख़ुशी का सबब साबित होगा। आप महसूस करेंगे कि प्यार में बहुत गहराई है और आपका प्रिय आपको सदा बहुत प्यार करेगा। ऐसे लोगों से साथ जुड़ें जो स्थापित हैं और भविष्य के रुझानों को समझने में आपकी मदद कर सकते हैं। उन चीजों को दोहराना जिनका अब आपके जीवन में कोई महत्व नहीं है, आपके लिए ठीक नहीं है। ऐसा करके आप अपना वक्त ही बर्बाद करेंगे और कुछ नहीं। बढ़िया खाना, रोमानी पल और जीवनसाथी का साथ - यही ख़ास है आज। उपाय :- इत्र, खुशबू, अगरबत्ती, कपूर का दान करना और इन्हे खुद इस्तेमाल करने से आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मकर राशि - जैसे ही आप हालात पर पकड़ बनाने की कोशिश शुरू करेंगे, आपकी घबराहट ग़ायब हो जाएगी। जल्दी ही आप पाएंगे कि यह परेशानी साबुन के उस बुलबुले की तरह है, जो छूते ही फूट जाता है। व्यापारियों को आज व्यापार में घाटा हो सकता है और अपने व्यापार को बेहतर बनाने के लिए आपको पैसा खर्च करना पड़ सकता है। घरेलू काम थका देने वाला होगा और इसलिए मानसिक तनाव की वजह भी बन सकता है। आज आप कुछ अलग क़िस्म के रोमांस का अनुभव कर सकते हैं। पैसे बनाने के उन नए विचारों का उपयोग करें, जो आज आपके ज़ेहन में आएँ। इस राशि के बच्चे आज खेलकूद में दिन बिता सकते हैं, ऐसे में माता-पिता को उनपर ध्यान देना चाहिए क्योंकि चोट लगने की संभावना है। जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आपको अपने जीवनसाथी से पूरा सहयोग मिलेगा। उपाय :- चने की दाल गाय को खिलाने से आर्थिक स्थिति सुधरेगी। कुम्भ राशि - आज के मनोरंजन में बाहर की गतिविधियों और खेल-कूद को शामिल किया जाना चाहिए। अगर आप अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो वह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगी। बढ़िया दिन है जब आप सबके ध्यान को अपनी तरफ़ खींचेंगे- आपके सामने चुनने के लिए कई चीज़ें होंगी और आपके सामने समस्या यह होगी कि किसे पहले चुना जाए। अपने दोस्त से बहुत लम्बे समय बाद मिलने का ख़याल आपके दिल की धड़कन को बढ़ा सकता है। कुछ सहकर्मी कई अहम मुद्दों पर आपकी कार्यशैली से नाख़ुश होंगे, लेकिन यह वे आपको बताएंगे नहीं। अगर आपको लगता है कि परिणाम आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं आ रहे हैं, तो अपनी योजनाओं का फिर से विश्लेषण कर उनमें सुधार लाना बेहतर रहेगा। आज आपके पास लोगों से मिलने-जुलने का और अपने शौक़ पूरे करने का पर्याप्त खाली वक़्त है। वैवाहिक जीवन को अधिक सुखमय बनाने के आपके प्रयास उम्मीद से ज़्यादा रंग लाएंगे। उपाय :- कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिए प्रातःकाल उठते ही सूर्य के दर्शन करते हुए 11 बार गायत्री मन्त्र पढ़ें। मीन राशि - सबकी मदद करने की आपकी इच्छा आपको आज बुरी तरह थकाएगी। बिना विचार किये आपको किसी को भी अपना पैसा नहीं देना चाहिए नहीं तो आपको आने वाले वक्त में बड़ी परेशानी है सकती है। दोस्त शाम के लिए कोई बढ़िया योजना बनाकर आपका दिन ख़ुशनुमा कर देंगे। अपने प्रिय से दूर होने के बावजूद आप उसकी मौजूदगी महसूस करेंगे। प्रतिस्पर्धा के चलते काम-काज की अधिकता थकावट भरी हो सकती है। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है – जो काफ़ी दौड़-भाग भरा होगा – लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। आपको महसूस होगा कि आपका वैवाहिक जीवन बहुत ख़ूबसूरत है। उपाय :- दूध व दही का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ होगा। कृपया ध्यान दें यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए IDTV इन्द्रधनुष उत्तरदायी नहीं हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi का एक खास वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पीएम मोदी जनता की ओर दंडवत प्रणाम करते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान देखने को मिला।प्रधानमंत्री ने इस खास अंदाज में बंगाल की जनता के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी का यह कदम उनकी “प्रधान सेवक” वाली छवि को मजबूत करता है। उन्होंने संदेश देने की कोशिश की कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और सत्ता में रहने वालों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए। पीएम मोदी के इस भावुक और अनोखे अंदाज की सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक पल देखने को मिला। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता Makhanlal Sarkar के पैर छुए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और गले लगाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखते ही पूरे समारोह में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कौन हैं माखनलाल सरकार? माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा के शुरुआती दौर के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। आजादी के बाद उन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1952 में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान वे जनसंघ संस्थापक Syama Prasad Mukherjee के साथ मौजूद थे। उस समय उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। 1980 में भाजपा के गठन के बाद माखनलाल सरकार ने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एक साल के भीतर लगभग 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में उमड़ा जनसैलाब पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह में हजारों भाजपा समर्थक शामिल हुए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया। झारखंड समेत कई राज्यों और विदेशों से भी समर्थक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से हेलीकॉप्टर के जरिए रेसकोर्स मैदान और फिर सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। खुले वाहन में सवार होकर उन्होंने समर्थकों का अभिवादन भी किया। बंगाल की राजनीति में नए दौर का संकेत भाजपा नेताओं का मानना है कि यह सिर्फ सरकार बदलने का क्षण नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। वहीं माखनलाल सरकार का सम्मान भाजपा द्वारा अपने पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक विरासत को महत्व देने का संदेश भी माना जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर फिल्म धुरंधर की तारीफ करते हुए एक पोस्ट की। साथ ही एक यूजर को जवाब देते हुए कहा कि फिल्म में मुसलमानों को नहीं, बल्कि पाकिस्तानियों को नेगेटिव तरीके से दिखाया गया है। दरअसल, शमा ने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि उन्होंने हाल ही में फिल्म धुरंधर देखी और उन्हें इसका डायरेक्शन, स्क्रिप्ट और एक्टिंग काफी पसंद आई। उन्होंने एक्टर रणवीर सिंह की एक्टिंग की तारीफ की और डायरेक्टर आदित्य धर की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म में पुराने हिंदी गानों को सीन्स से जोड़ने का तरीका शानदार था। यूजर ने फिल्म को बताया प्रोपेगेंडा मूवी शमा की पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने कहा, ‘तुम यह कैसे पोस्ट कर सकती हो? इस प्रोपेगेंडा फिल्म में मुसलमानों को गलत तरीके से दिखाया गया है। तुम्हें शर्म आनी चाहिए।’ इस पर शमा ने जवाब देते हुए कहा, ‘इस फिल्म में मुसलमानों को गलत नहीं दिखाया गया, बल्कि पाकिस्तानियों को गलत दिखाया गया है। दोनों को एक जैसा बताना गलत है। तुम्हारे जैसे लोग भारत में मुसलमानों की इमेज खराब करते हैं। अगर तुम्हें भारत से इतनी दिक्कत है, तो तुम पाकिस्तान की नागरिकता ले सकते हो।’ धुरंधर ने 1,307 करोड़ रुपए कमाए थे धुरंधर 5 दिसंबर 2025 को ग्लोबली रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन नजर आए थे। फिल्म आदित्य धर ने डायरेक्ट की थी। सैकनिल्क के अनुसार, धुरंधर ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज हुआ था धुरंधर का दूसरा पार्ट ग्लोबली 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुआ था। फिल्म की अब तक की कुल दुनिया भर में कमाई 1,792 करोड़ रुपए हो चुकी है। भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 1,141 करोड़ रुपए और कुल ग्रॉस कलेक्शन 1,365 करोड़ रुपए तक हो गया है। फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अब तक 426 करोड़ रुपए की कमाई की है।
कोलकाता, एजेंसियां। सुवेंदु अधिकारी शनिवार को पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद सुवेंदु, पीएम के पास गए और उन्हें झुककर प्रणाम किया। बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने सुवेंदु के अलावा 5 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टूडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल रहे। दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं शपथ समारोह मे शपथ समारोह में PM मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री और मिथुन चक्रवर्ती मौजूद रहे। कार्यक्रम में सबसे पहले मोदी ने मंच पर रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी जयंती पर श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान पीएम ने भाजपा के 98 साल के कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर आते ही प्रधानमंत्री सीधे सरकार के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और फिर उनके पैर छुए। जानिए शपथ लेने वाले मंत्रियों को 1. दिलीप घोष: खड़गपुर सदर सीट से दूसरी बार विधायक बन हैं। मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। वे BJP के महासचिव और प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। 2. अग्निमित्रा पॉल: अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल की असनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे 2021 में पहली बार इस सीट से विधायक चुनी गई थीं। 2026 में दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने 2022 का आसनसोल लोकसभा उपचुनाव और 2024 का मेदिनीपुर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों चुनाव हार गईं। 3. अशोक कीर्तनिया: 52 साल के अशोक बनगांव उत्तर सीट से विधायक हैं। मतुआ समुदाय से आते हैं। राजनीतिज्ञ और व्यवसायी हैं। 4.खुदीराम टूडू: खुदीराम रानीबांध (ST) विधानसभा सीट से BJP विधायक हैं। वे पेशे से शिक्षक रहे हैं। 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने TMC उम्मीदवार तनुश्री हांसदा को हराकर जीत दर्ज की। खुदीराम टुडू ग्रेजुएट हैं और लंबे समय से आदिवासी इलाकों में संगठन के साथ सक्रिय रहे हैं। 5. निषिथ प्रमाणिक: निषिथ मथाभांगा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे 2026 में पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले 2019 में कूचबिहार लोकसभा सीट से सांसद रहे। केंद्र में गृह राज्य मंत्री व युवा मामलों और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.
Tamil Nadu Govt Formation : तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. एएमएमके (AMMK) ने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि टीवीके ने फर्जी समर्थन पत्र का इस्तेमाल कर यह दिखाने की कोशिश की कि एएमएमके उनकी सरकार को समर्थन दे रही है. इस विवाद ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है. पूरा मामला एएमएमके के इकलौते विधायक कामराज एस के समर्थन को लेकर खड़ा हुआ है. एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने आरोप लगाया कि टीवीके ने विधायक कामराज के समर्थन पत्र की “फर्जी कॉपी” राज्यपाल को सौंपी है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी थी. अब इस मामले में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा दी गई है. TVK ने वीडियो जारी कर दिया जवाब विवाद बढ़ने के बाद टीवीके ने 8 मई की शाम एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में कथित तौर पर विधायक कामराज खुद टीवीके के समर्थन में चिट्ठी लिखते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में वह यह कहते भी नजर आते हैं कि उन्होंने एएमएमके नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी के साथ टीवीके को समर्थन दिया है. टीवीके नेताओं ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर करते हुए दावा किया कि दिनाकरन के आरोप पूरी तरह निराधार हैं. पार्टी का कहना है कि समर्थन पत्र पूरी तरह वैध है और इसे लेकर फैलाए जा रहे आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं. सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मिले विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के अध्यक्ष चंद्रशेखर जोसफ विजय ने वामपंथी दलों के समर्थन के बाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की. विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए राज्यपाल से सरकार गठन का न्योता देने की मांग की. बताया जा रहा है कि यह राज्यपाल के साथ विजय की तीसरी मुलाकात थी. हालांकि बहुमत के आंकड़े को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है और हर विधायक का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है. समर्थन पत्र विवाद से बढ़ा राजनीतिक संकट समर्थन पत्र को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी और संवैधानिक मुद्दा बनता जा रहा है. एक ओर एएमएमके टीवीके पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा रही है, वहीं टीवीके वीडियो जारी कर खुद को सही साबित करने में जुटी है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस जांच में क्या सच सामने आता है और राज्यपाल किस दल को सरकार बनाने का मौका देते हैं. आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है.
Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है. TVK प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर बना सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है. राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों के समर्थन पत्र मांगे जाने के बाद विजय का प्रस्तावित शपथग्रहण फिलहाल टल गया है. TVK ने सौंपा 112 विधायकों का समर्थन पत्र सूत्रों के मुताबिक, TVK ने कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन सहित कुल 112 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है. हालांकि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है, इसलिए अभी भी TVK बहुमत के आंकड़े से पीछे है. विजय दो विधानसभा सीटों से चुनाव जीते हैं, जिसके कारण पार्टी की प्रभावी संख्या 107 मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि TVK फिलहाल VCK, PMK और वामपंथी दलों के साथ समर्थन को लेकर बातचीत कर रही है. राज्यपाल के रुख से बढ़ा राजनीतिक तनाव राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के अतिरिक्त समर्थन पत्र मांगने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है और विजय को अनावश्यक रूप से बहुमत साबित करने के लिए दबाव में डाला जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, TVK ने अब इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने का फैसला किया है. विजय की प्रोटोकॉल सुरक्षा वापस सरकार गठन में देरी के बीच राज्य सरकार ने विजय को दी गयी प्रोटोकॉल कॉन्वॉय सुरक्षा वापस ले ली है. हालांकि उनकी बेसिक पायलट सुरक्षा अभी जारी रहेगी. इस फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गयी हैं. AIADMK में टूट का खतरा, विधायक पहुंचे रिसॉर्ट इसी बीच AIADMK के भीतर भी हलचल तेज हो गयी है. पार्टी ने अपने कई विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि ये विधायक सीवी षणमुगम गुट से जुड़े हैं. अब तक 28 विधायक रिसॉर्ट पहुंच चुके हैं, जबकि कुल 32 विधायकों के वहां पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है. पार्टी को आशंका है कि सरकार गठन के दौरान विधायकों में टूट-फूट हो सकती है. 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK हालिया विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया. हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गयी. चुनाव परिणाम आने के बाद TVK विधायकों ने विजय को विधायक दल का नेता चुना था, जिसके बाद उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया. कांग्रेस पहले ही TVK को सशर्त समर्थन दे चुकी है, जबकि अन्य छोटे दलों और वामपंथी पार्टियों के भीतर अभी चर्चा जारी है. DMK की बैठक पर भी नजर आज DMK विधायक दल की बैठक भी होने जा रही है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के चयन और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.